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क्या राहुल की तरह बिगाड़ी जा रही निशांत की इमेज:सोशल मीडिया ट्रोल पर JDU नेता चुप क्यों, बॉडी लैंग्वेज सुधारने के लिए क्या करेंगे

क्या राहुल की तरह बिगाड़ी जा रही निशांत की इमेज:सोशल मीडिया ट्रोल पर JDU नेता चुप क्यों, बॉडी लैंग्वेज सुधारने के लिए क्या करेंगे

सम्राट सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र बन गए हैं। खूब मीम्स बन रहे हैं। विपक्ष ‘मजबूर मंत्री’ वाला नैरेटिव गढ़ने में जुटा है। दिलचस्प है कि निशांत का बचाव उनकी पार्टी JDU के बड़े नेता भी करते नहीं दिख रहे हैं। क्या निशांत कुमार का बचाव नहीं कर JDU राहुल गांधी वाली गलती कर रही है। निशांत के सामने चुनौतियां क्या है। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। क्या निशांत के साथ राहुल गांधी वाली गलती हो रही बिल्कुल। अभी निशांत कुमार जिस तरह सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना कर रहे हैं, ठीक ऐसा ही राहुल गांधी के साथ भी हुआ था। निशांत कुमार का स्वभाव शांत और अंतर्मुखी है। उनके मंत्री बनने पर विपक्षी ट्रोलर्स उन्हें ‘मजबूर मंत्री’ या अनुभवहीन बता रहे हैं। अगर JDU ने इस नैरेटिव को शुरुआत में ही तथ्यों के साथ नहीं काटा तो यह छवि स्थायी हो सकती है। जिसका नुकसान पार्टी को लंबे समय तक उठाना होगा। ट्रोलर्स को JDU नेता जवाब क्यों नहीं दे रहे? JDU नेताओं की चुप्पी या कम प्रतिक्रिया के पीछे 3 कारण… 1. परिवारवाद के आरोप से बचाव: नीतीश कुमार ने हमेशा परिवारवाद का विरोध किया है। अब जब उनके बेटे मंत्री बने हैं, तो पार्टी नेता बहुत ज्यादा बचाव करके इस मुद्दे को और हवा नहीं देना चाहते। वे इसे लो-प्रोफाइल रखना चाहते हैं। यही स्थिति कांग्रेस के साथ थी। वे राहुल का बचाव करते थे तो वंशवाद की बहस छिड़ जाती थी। JDU भी इसी दुविधा में है कि अगर वे निशांत को युवा आइकन प्रोजेक्ट करेगी तो नीतीश कुमार का पुराना स्टैंड कमजोर पड़ जाएगा। 2. काम से जवाब दें: सियासी गलियारे में चर्चा है कि पार्टी का एक बड़ा हिस्सा चाहता है कि निशांत खुद अपनी क्षमता और काम से ट्रोलर्स को जवाब दें। अगर बड़े नेता उनके हर छोटे ट्रोल पर बोलेंगे, तो इससे निशांत की छवि सॉफ्ट लीडर की बनेगी। 3. पावर के साथ बैठा रहे समीकरण: अभी राज्य में सरकार का चेहरा सम्राट चौधरी हैं। अंदरखाने चर्चा है कि JDU के कई नेता अब नए सत्ता केंद्र के साथ तालमेल बिठाने में लगे हैं, जिससे निशांत के प्रति वैसी आक्रामकता नहीं दिख रही जो पहले नीतीश कुमार के लिए दिखती थी। निशांत के सामने 4 बड़ी चुनौतियां… 1. नीतीश के बेटे को ठीक करनी होगी बॉडी लैंग्वेज निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री और मंत्री पद मिलने के बाद उनकी बॉडी लैंग्वेज और पर्सनालिटी चर्चा का केंद्र है। राजनीति में इमेज सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और कॉन्फिडेंस का पैमाना है। 2. स्वास्थ्य विभाग में छोड़नी होगी अपनी छाप निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग दिया गया है। यह ऐसा विभाग है, जिसका आम जनता से सीधा कनेक्शन है। बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था हमेशा से एक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण मुद्दा रही है। नवंबर 2024 की CAG रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं बुनियादी ढांचे और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रही हैं। 53% डॉक्टरों की कमी है। 3. पांच साल तक सभी 85 विधायकों को एकजुट रखना हाल की राजनीतिक परिस्थिति में गठबंधन और आंतरिक राजनीति के दौर में विधायकों को सहेज कर रखना किसी भी नेता के लिए सबसे कठिन परीक्षा है। निशांत कुमार को अपने पार्टी के सभी 85 विधायकों और 12 सांसदों को 5 साल तक एकजुट रखना होगा। 4. नीतीश कुमार से अलग अपना ‘ओरा’ बनाना

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