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भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला:सऊदी-US पीछे छूटे; होर्मुज बंद होने के बाद भारतीय कंपनियों ने खरीद बढ़ाई

भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला:सऊदी-US पीछे छूटे; होर्मुज बंद होने के बाद भारतीय कंपनियों ने खरीद बढ़ाई

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। ऐसे वक्त में जब मिडिल ईस्ट के देशों के तेल सप्लाई पर असर पड़ा वेनेजुएला अचानक भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। एनर्जी ट्रैकिंग डेटा केप्लर के मुताबिक वेनेजुएला ने मई 2026 में सऊदी अरब और अमेरिका दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ही उससे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। 9 महीने बाद भारत ने तेल खरीदना शुरू किया केप्लर डेटा के मुताबिक, मई में अब तक भारत ने वेनेजुएला से करीब 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है। अप्रैल में यह आंकड़ा 2.83 लाख बैरल प्रतिदिन था, जबकि उससे पहले लगातार 9 महीने तक भारत ने वेनेजुएला से कोई तेल नहीं खरीदा था। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह दो हैं। पहली, मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है। दूसरी, वेनेजुएला का भारी और हाई-सल्फर वाला कच्चा तेल सस्ता पड़ रहा है। रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्होंने खरीद बढ़ा दी। केपलर के एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक भारतीय रिफाइनर लंबे समय से वेनेजुएला के तेल में दिलचस्पी दिखाते रहे हैं क्योंकि यह सस्ता है और भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के अनुकूल है। खास तौर पर गुजरात में रिलायंस की रिफाइनरी इस तेल के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। सऊदी अरब ने तेल की कीमत बढ़ाई भारत का कुल कच्चा तेल आयात मई में बढ़कर 49 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो अप्रैल से 8% ज्यादा है। लेकिन यह अभी भी फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से नीचे है। फरवरी के बाद ईरान युद्ध और होर्मुज संकट ने पश्चिम एशिया से तेल सप्लाई को प्रभावित किया। ईरान से भारत को अप्रैल में 7 साल बाद फिर तेल मिला था क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। लेकिन मई में अब तक ईरानी तेल नहीं पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान के बंदरगाहों से सप्लाई रुक गई। वहीं इराक से कुछ सप्लाई दोबारा शुरू हुई है, लेकिन वह भी फरवरी के मुकाबले बहुत कम है। सऊदी अरब की सप्लाई में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल में भारत को सऊदी अरब से 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला था, जो मई में घटकर करीब 3.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। केप्लर के मुताबिक इसकी वजह सऊदी तेल की बढ़ी कीमतें हैं, यानी भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला का तेल ज्यादा सस्ता पड़ रहा है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति जल्द भारत आएंगी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत आ सकती हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत होगी। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। हालांकि वर्षों तक अमेरिकी प्रतिबंधों और सरकारी कुप्रबंधन की वजह से वहां तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित रहा। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो जाए जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। वेनेजुएलाई तेल को बाजार में एंट्री दिलाने की कोशिश में अमेरिका अब जब पश्चिम एशिया युद्ध की चपेट में है और तेल बाजार में आपूर्ति संकट पैदा हो गया है, तो अमेरिका, वेनेजुएला के तेल को फिर से वैश्विक बाजार में लाने की कोशिश करता दिख रहा है। भारत पहले से ही रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा था। अमेरिका इससे नाराज रहा है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फरवरी में रूसी तेल खरीद कम करने और अमेरिका व वेनेजुएला से ज्यादा तेल लेने का वादा किया था। अब मार्को रुबियो जो खुद भी 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर आने वाले हैं, कह रहे हैं कि अमेरिका चाहता है कि भारत ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी और वेनेजुएलाई तेल खरीदे। रुबियो ने कहा, “हम भारत को जितनी ऊर्जा बेच सकते हैं, बेचना चाहते हैं। हमें लगता है कि वेनेजुएलाई तेल में भी बड़ा मौका है।” एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्को रुबियो और डेल्सी रोड्रिगेज की लगभग एक साथ भारत यात्रा यह दिखाती है कि अब तेल और ऊर्जा से जुड़ी राजनीति पर युद्ध और दुनिया की बड़ी ताकतों के टकराव का सीधा असर पड़ रहा है। भारत के 13 जहाज होर्मुज में अभी भी फंसे हैं आम तौर पर भारत का लगभग आधा कच्चा तेल खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में LNG और पेट्रोलियम गैस भी आती है। लेकिन ईरान के आसपास बढ़ते युद्ध और समुद्री संघर्ष की वजह से यह अहम समुद्री रास्ता लगभग बंद जैसा हो गया है। भारतीय अधिकारियों ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। इस समय 13 भारतीय जहाज वहां फंसे हुए हैं। भारत पहले उन्हें सुरक्षित निकालना चाहता है, उसके बाद ही नए जहाज ईंधन लेने भेजे जाएंगे। हाल के दिनों में भारत से जुड़े कई जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट और ओमान तट के पास हमले हुए हैं। एक भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज ओमान के समुद्री इलाके में आग लगने के बाद डूब गया। आशंका है कि उस पर ड्रोन या मिसाइल हमला हुआ था। इन हालात ने वैश्विक तेल सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है और अब दुनिया वैकल्पिक तेल स्रोत तलाश रही है। इसी वजह से वेनेजुएला जैसे देशों के लिए मौका पैदा हुआ है।

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भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला:सऊदी-US पीछे छूटे; होर्मुज बंद होने के बाद भारतीय कंपनियों ने खरीद बढ़ाई

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। ऐसे वक्त में जब मिडिल ईस्ट के देशों के तेल सप्लाई पर असर पड़ा वेनेजुएला अचानक भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। एनर्जी ट्रैकिंग डेटा केप्लर के मुताबिक वेनेजुएला ने मई 2026 में सऊदी अरब और अमेरिका दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ही उससे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। 9 महीने बाद भारत ने तेल खरीदना शुरू किया केप्लर डेटा के मुताबिक, मई में अब तक भारत ने वेनेजुएला से करीब 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है। अप्रैल में यह आंकड़ा 2.83 लाख बैरल प्रतिदिन था, जबकि उससे पहले लगातार 9 महीने तक भारत ने वेनेजुएला से कोई तेल नहीं खरीदा था। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह दो हैं। पहली, मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है। दूसरी, वेनेजुएला का भारी और हाई-सल्फर वाला कच्चा तेल सस्ता पड़ रहा है। रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्होंने खरीद बढ़ा दी। केपलर के एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक भारतीय रिफाइनर लंबे समय से वेनेजुएला के तेल में दिलचस्पी दिखाते रहे हैं क्योंकि यह सस्ता है और भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के अनुकूल है। खास तौर पर गुजरात में रिलायंस की रिफाइनरी इस तेल के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। सऊदी अरब ने तेल की कीमत बढ़ाई भारत का कुल कच्चा तेल आयात मई में बढ़कर 49 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो अप्रैल से 8% ज्यादा है। लेकिन यह अभी भी फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से नीचे है। फरवरी के बाद ईरान युद्ध और होर्मुज संकट ने पश्चिम एशिया से तेल सप्लाई को प्रभावित किया। ईरान से भारत को अप्रैल में 7 साल बाद फिर तेल मिला था क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। लेकिन मई में अब तक ईरानी तेल नहीं पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान के बंदरगाहों से सप्लाई रुक गई। वहीं इराक से कुछ सप्लाई दोबारा शुरू हुई है, लेकिन वह भी फरवरी के मुकाबले बहुत कम है। सऊदी अरब की सप्लाई में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल में भारत को सऊदी अरब से 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला था, जो मई में घटकर करीब 3.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। केप्लर के मुताबिक इसकी वजह सऊदी तेल की बढ़ी कीमतें हैं, यानी भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला का तेल ज्यादा सस्ता पड़ रहा है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति जल्द भारत आएंगी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत आ सकती हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत होगी। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। हालांकि वर्षों तक अमेरिकी प्रतिबंधों और सरकारी कुप्रबंधन की वजह से वहां तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित रहा। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो जाए जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। वेनेजुएलाई तेल को बाजार में एंट्री दिलाने की कोशिश में अमेरिका अब जब पश्चिम एशिया युद्ध की चपेट में है और तेल बाजार में आपूर्ति संकट पैदा हो गया है, तो अमेरिका, वेनेजुएला के तेल को फिर से वैश्विक बाजार में लाने की कोशिश करता दिख रहा है। भारत पहले से ही रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा था। अमेरिका इससे नाराज रहा है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फरवरी में रूसी तेल खरीद कम करने और अमेरिका व वेनेजुएला से ज्यादा तेल लेने का वादा किया था। अब मार्को रुबियो जो खुद भी 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर आने वाले हैं, कह रहे हैं कि अमेरिका चाहता है कि भारत ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी और वेनेजुएलाई तेल खरीदे। रुबियो ने कहा, “हम भारत को जितनी ऊर्जा बेच सकते हैं, बेचना चाहते हैं। हमें लगता है कि वेनेजुएलाई तेल में भी बड़ा मौका है।” एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्को रुबियो और डेल्सी रोड्रिगेज की लगभग एक साथ भारत यात्रा यह दिखाती है कि अब तेल और ऊर्जा से जुड़ी राजनीति पर युद्ध और दुनिया की बड़ी ताकतों के टकराव का सीधा असर पड़ रहा है। भारत के 13 जहाज होर्मुज में अभी भी फंसे हैं आम तौर पर भारत का लगभग आधा कच्चा तेल खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में LNG और पेट्रोलियम गैस भी आती है। लेकिन ईरान के आसपास बढ़ते युद्ध और समुद्री संघर्ष की वजह से यह अहम समुद्री रास्ता लगभग बंद जैसा हो गया है। भारतीय अधिकारियों ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। इस समय 13 भारतीय जहाज वहां फंसे हुए हैं। भारत पहले उन्हें सुरक्षित निकालना चाहता है, उसके बाद ही नए जहाज ईंधन लेने भेजे जाएंगे। हाल के दिनों में भारत से जुड़े कई जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट और ओमान तट के पास हमले हुए हैं। एक भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज ओमान के समुद्री इलाके में आग लगने के बाद डूब गया। आशंका है कि उस पर ड्रोन या मिसाइल हमला हुआ था। इन हालात ने वैश्विक तेल सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है और अब दुनिया वैकल्पिक तेल स्रोत तलाश रही है। इसी वजह से वेनेजुएला जैसे देशों के लिए मौका पैदा हुआ है।

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