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भारतीय शेयर बाजार को ताइवान ने पीछे छोड़ा:AI और चिप सेक्टर में तेजी से मार्केट कैप ₹415 लाख करोड़ पार, भारत की वैल्यू ₹413 लाख करोड़

भारतीय शेयर बाजार को ताइवान ने पीछे छोड़ा:AI और चिप सेक्टर में तेजी से मार्केट कैप ₹415 लाख करोड़ पार, भारत की वैल्यू ₹413 लाख करोड़

ताइवान ने शेयर बाजार की वैल्यू (मार्केट कैप) के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी ‘ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ (TSMC) के शेयरों में आई भारी तेजी ने ताइवान को यह बढ़त दिलाई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सोमवार तक ताइवान का मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन डॉलर (करीब 415 लाख करोड़ रुपए) पहुंच गया, जबकि भारत की वैल्यू गिरकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर (करीब 413 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों में अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद ताइवान का नाम शामिल हो गया है। ताइवान की जीत के पीछे चिप कंपनी का हाथ ताइवान के शेयर बाजार की इस छलांग की सबसे बड़ी वजह TSMC कंपनी है। ताइवान के मुख्य इंडेक्स में इस अकेले कंपनी की 42% हिस्सेदारी है। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में 49% की बढ़त दर्ज की गई है। पूरी दुनिया में AI तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर्स (चिप्स) की सप्लाई में इस कंपनी का दबदबा है, जिसका फायदा ताइवान के बाजार को मिल रहा है। विदेशी निवेशकों ने भारत से ₹2 लाख करोड़ निकाले भारतीय शेयर बाजार के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 24 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए) निकाले हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन और रुपए की कमजोरी रही है। इसके उलट, निवेशक ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे उन बाजारों में पैसा लगा रहे हैं जो सीधे तौर पर AI हार्डवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। इन 3 कारणों से पिछड़ा भारतीय बाजार नए नियमों ने ताइवान को दिया बूस्ट हाल ही में ताइवान के रेगुलेटर ने निवेश के नियमों में ढील दी है। अब घरेलू फंड किसी एक बड़ी कंपनी में अपनी नेट एसेट का 25% तक निवेश कर सकते हैं, पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी। वर्तमान में केवल TSMC ही इस मापदंड को पूरा करती है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, इस बदलाव से ताइवान के बाजार में 6 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपए) का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। अर्थव्यवस्था के मामले में अब भी भारत काफी आगे शेयर बाजार की वैल्यू में भले ही ताइवान आगे निकल गया हो, लेकिन अर्थव्यवस्था के कुल आकार (GDP) में भारत का दबदबा बरकरार है। IMF के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि ताइवान की GDP महज 977 बिलियन डॉलर है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।

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ताइवान ने शेयर बाजार की वैल्यू (मार्केट कैप) के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी ‘ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी’ (TSMC) के शेयरों में आई भारी तेजी ने ताइवान को यह बढ़त दिलाई है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सोमवार तक ताइवान का मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन डॉलर (करीब 415 लाख करोड़ रुपए) पहुंच गया, जबकि भारत की वैल्यू गिरकर 4.92 ट्रिलियन डॉलर (करीब 413 लाख करोड़ रुपए) रह गई है। अब दुनिया के टॉप-5 शेयर बाजारों में अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद ताइवान का नाम शामिल हो गया है। ताइवान की जीत के पीछे चिप कंपनी का हाथ ताइवान के शेयर बाजार की इस छलांग की सबसे बड़ी वजह TSMC कंपनी है। ताइवान के मुख्य इंडेक्स में इस अकेले कंपनी की 42% हिस्सेदारी है। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में 49% की बढ़त दर्ज की गई है। पूरी दुनिया में AI तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर्स (चिप्स) की सप्लाई में इस कंपनी का दबदबा है, जिसका फायदा ताइवान के बाजार को मिल रहा है। विदेशी निवेशकों ने भारत से ₹2 लाख करोड़ निकाले भारतीय शेयर बाजार के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 24 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपए) निकाले हैं। इसकी मुख्य वजह भारतीय शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन और रुपए की कमजोरी रही है। इसके उलट, निवेशक ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे उन बाजारों में पैसा लगा रहे हैं जो सीधे तौर पर AI हार्डवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। इन 3 कारणों से पिछड़ा भारतीय बाजार नए नियमों ने ताइवान को दिया बूस्ट हाल ही में ताइवान के रेगुलेटर ने निवेश के नियमों में ढील दी है। अब घरेलू फंड किसी एक बड़ी कंपनी में अपनी नेट एसेट का 25% तक निवेश कर सकते हैं, पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी। वर्तमान में केवल TSMC ही इस मापदंड को पूरा करती है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, इस बदलाव से ताइवान के बाजार में 6 अरब डॉलर (करीब 50 हजार करोड़ रुपए) का अतिरिक्त निवेश आ सकता है। अर्थव्यवस्था के मामले में अब भी भारत काफी आगे शेयर बाजार की वैल्यू में भले ही ताइवान आगे निकल गया हो, लेकिन अर्थव्यवस्था के कुल आकार (GDP) में भारत का दबदबा बरकरार है। IMF के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है, जबकि ताइवान की GDP महज 977 बिलियन डॉलर है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।

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