Wednesday, 07 Oct 2026 | 06:21 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Students are becoming weak in basic mathematics and intensive reading

Students are becoming weak in basic mathematics and intensive reading
  • Hindi News
  • Career
  • Students Are Becoming Weak In Basic Mathematics And Intensive Reading

न्यूयॉर्क14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

स्टडी के मुताबिक, हाई-स्कूल स्तर से भी कम गणितीय समझ वाले छात्रों की संख्या पांच साल में तीस गुना बढ़ गई है।- प्रतीकात्मक फोटो

दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटी के छात्र बुनियादी गणित और रीडिंग में भी पिछड़ रहे हैं, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के 1800 प्रोफेसर्स ने खुली चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी है कि नए अंडरग्रेजुएट छात्र मिडिल-स्कूल स्तर (कक्षा 6-8) का गणित भी नहीं जानते। उन्हें ये गणित दोबारा पढ़ाना पड़ रहा है।

वहीं, सैन डिएगो की स्टडी के मुताबिक, हाई-स्कूल स्तर से भी कम गणितीय समझ वाले छात्रों की संख्या पांच साल में तीस गुना बढ़ गई है। हार्वर्ड जैसे संस्थान को पाठ्यक्रम छोटा करना पड़ रहा है, क्योंकि छात्र जटिल वाक्यों पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। इस गिरावट की प्रमुख वजहें क्या हैं, जानिए…

सोशल मीडिया से घटा अटेंशन स्पैन

स्मार्टफोन व सोशल मीडिया ने अटेंशन स्पैन घटा दिया है। ओईसीडी के अनुसार, छात्र लंबे व जटिल टेक्स्ट नहीं पढ़ रहे। अमेरिका में 1990 के दशक में 60% बच्चे शौक से किताबें पढ़ते थे, अब 37% रह गए। छात्र सतही तौर पर स्कैन करते हैं, जिससे भाषा को गहराई से समझने की क्षमता कमजोर हुई।

अनिवार्य असेसमेंट– कोल्ड कॉलिंग से नियंत्रण संभव: बर्कले की प्रो. मीना अगानागिक कहती हैं,‘अनिवार्य असेसमेंट व क्लासरूम में अचानक छात्रों से सवाल पूछना, सरप्राइज पेन-पेपर टेस्ट लागू करके समस्या दूर कर सकते हैं। ग्रेड इन्फ्लेशन व एआई से नकल रोकने के लिए एडमिशन में योग्यता जांचना व क्लासरूम में गैजेट्स पर पाबंदी जरूरी है। कड़े मापदंड व सख्त ग्रेडिंग से ही बिना तैयारी के आने वाले छात्रों को रोक सकेंगे।

नींव कमजोर – कॉलेजों को यह समस्या स्कूलों से विरासत में मिली है। विशेषज्ञ जेसिका हूटन विल्सन के अनुसार, कोरोना में स्कूल बंद होने से छात्रों का नुकसान हुआ। कई छात्र कॉलेज तक पहुंच गए, पर उनकी बुनियादी समझ इतनी कमजोर है कि मानो वे कभी हाई स्कूल गए ही नहीं। PISA व NAEP के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा का स्तर महामारी से पहले ही गिरना शुरू हो गया था। शिक्षा सुधारों में ठोस तथ्य व बुनियादी सिलेबस हटाकर सॉफ्ट स्किल्स पर जोर देने से नींव कमजोर हो गई।

परखना चुनौतीपूर्ण – महामारी के बाद अमेरिका के 90% से अधिक कॉलेजों ने एसएटी जैसे मानक टेस्ट को वैकल्पिक या बंद कर दिया। स्कूलों में बच्चों को खुश करने के लिए आसानी से नंबर दिए जाते हैं। नतीजतन, हाई स्कूल में ‘परफेक्ट स्कोर’ पाने वाले भी कॉलेज पहुंचकर बुनियादी गणित और भाषा में विफल हो जाते हैं। यूनिवर्सिटी के पास यह परखने का तरीका नहीं बचा कि आने वाला छात्र योग्य है या नहीं।

शॉर्टकट कल्चर – ब्रिटेन के थिंक-टैंक एचईपीआई और बर्कले की स्टडी के अनुसार 94% छात्र एआई की मदद ले रहे हैं और पढ़े बिना पास हो रहे हैं। प्रोफेसर्स पर भी अच्छे नंबर देने का दबाव रहता है ताकि खराब फीडबैक से बच सकें। जब बिना मेहनत ही एआई से ‘ए’ ग्रेड मिल रहा है, तो छात्रों में सीखने की प्रेरणा लगभग खत्म हो चुकी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कुमारिया खास में मुख्यमंत्री कन्या विवाह सम्मेलन:15 अप्रैल को, अधिकतम 200 आवेदन, BPL कार्ड होना है जरूरी

March 18, 2026/
3:32 pm

शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जा...

RPSC AEN Mains Admit Card March 19

March 15, 2026/
12:13 pm

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से सहायक अभियंता संयुक्त प्रतियोगी (मुख्य) परीक्षा- 2024 (कार्मिक विभाग) का आयोजन 22...

राघव चड्ढा पर नवजोत कौर का दावा:प्रियंका चोपड़ा ने राघव को BJP जॉइन कराई; सीनियर लीडर्स से की थी सिफारिश

April 29, 2026/
5:37 pm

पंजाब की पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा को लेकर कहा कि...

लव मैरिज के बाद युवक के साथ मारपीट:युवती के परिजनों ने घर में घुसकर किया हमला, दोनों पक्षों की शिकायत पर केस दर्ज

April 26, 2026/
9:07 am

छतरपुर में लव मैरिज के बाद युवती के परिजनों ने युवक को पीट दिया। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का...

Rishabh Shetty Film Chhatrapati Shivaji Maharaj

March 21, 2026/
6:07 pm

15 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल इन दिनों चर्चा में हैं। उनकी हालिया फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स...

चंडीगढ़ में किन्नरों ने युवती को पीटा,VIDEO:क्लब के बाहर रोड पर गिरा जमकर लात-घूंसे मारे; भीड़ जमा थी लेकिन किसी ने नहीं बचाया

May 17, 2026/
10:56 am

चंडीगढ़ में क्लब के बाहर किन्नरों ने एक युवती की जमकर पिटाई कर दी। इसका VIDEO सामने आया है। इसमें...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Students are becoming weak in basic mathematics and intensive reading

Students are becoming weak in basic mathematics and intensive reading
  • Hindi News
  • Career
  • Students Are Becoming Weak In Basic Mathematics And Intensive Reading

न्यूयॉर्क14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

स्टडी के मुताबिक, हाई-स्कूल स्तर से भी कम गणितीय समझ वाले छात्रों की संख्या पांच साल में तीस गुना बढ़ गई है।- प्रतीकात्मक फोटो

दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सिटी के छात्र बुनियादी गणित और रीडिंग में भी पिछड़ रहे हैं, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के 1800 प्रोफेसर्स ने खुली चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी है कि नए अंडरग्रेजुएट छात्र मिडिल-स्कूल स्तर (कक्षा 6-8) का गणित भी नहीं जानते। उन्हें ये गणित दोबारा पढ़ाना पड़ रहा है।

वहीं, सैन डिएगो की स्टडी के मुताबिक, हाई-स्कूल स्तर से भी कम गणितीय समझ वाले छात्रों की संख्या पांच साल में तीस गुना बढ़ गई है। हार्वर्ड जैसे संस्थान को पाठ्यक्रम छोटा करना पड़ रहा है, क्योंकि छात्र जटिल वाक्यों पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। इस गिरावट की प्रमुख वजहें क्या हैं, जानिए…

सोशल मीडिया से घटा अटेंशन स्पैन

स्मार्टफोन व सोशल मीडिया ने अटेंशन स्पैन घटा दिया है। ओईसीडी के अनुसार, छात्र लंबे व जटिल टेक्स्ट नहीं पढ़ रहे। अमेरिका में 1990 के दशक में 60% बच्चे शौक से किताबें पढ़ते थे, अब 37% रह गए। छात्र सतही तौर पर स्कैन करते हैं, जिससे भाषा को गहराई से समझने की क्षमता कमजोर हुई।

अनिवार्य असेसमेंट– कोल्ड कॉलिंग से नियंत्रण संभव: बर्कले की प्रो. मीना अगानागिक कहती हैं,‘अनिवार्य असेसमेंट व क्लासरूम में अचानक छात्रों से सवाल पूछना, सरप्राइज पेन-पेपर टेस्ट लागू करके समस्या दूर कर सकते हैं। ग्रेड इन्फ्लेशन व एआई से नकल रोकने के लिए एडमिशन में योग्यता जांचना व क्लासरूम में गैजेट्स पर पाबंदी जरूरी है। कड़े मापदंड व सख्त ग्रेडिंग से ही बिना तैयारी के आने वाले छात्रों को रोक सकेंगे।

नींव कमजोर – कॉलेजों को यह समस्या स्कूलों से विरासत में मिली है। विशेषज्ञ जेसिका हूटन विल्सन के अनुसार, कोरोना में स्कूल बंद होने से छात्रों का नुकसान हुआ। कई छात्र कॉलेज तक पहुंच गए, पर उनकी बुनियादी समझ इतनी कमजोर है कि मानो वे कभी हाई स्कूल गए ही नहीं। PISA व NAEP के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा का स्तर महामारी से पहले ही गिरना शुरू हो गया था। शिक्षा सुधारों में ठोस तथ्य व बुनियादी सिलेबस हटाकर सॉफ्ट स्किल्स पर जोर देने से नींव कमजोर हो गई।

परखना चुनौतीपूर्ण – महामारी के बाद अमेरिका के 90% से अधिक कॉलेजों ने एसएटी जैसे मानक टेस्ट को वैकल्पिक या बंद कर दिया। स्कूलों में बच्चों को खुश करने के लिए आसानी से नंबर दिए जाते हैं। नतीजतन, हाई स्कूल में ‘परफेक्ट स्कोर’ पाने वाले भी कॉलेज पहुंचकर बुनियादी गणित और भाषा में विफल हो जाते हैं। यूनिवर्सिटी के पास यह परखने का तरीका नहीं बचा कि आने वाला छात्र योग्य है या नहीं।

शॉर्टकट कल्चर – ब्रिटेन के थिंक-टैंक एचईपीआई और बर्कले की स्टडी के अनुसार 94% छात्र एआई की मदद ले रहे हैं और पढ़े बिना पास हो रहे हैं। प्रोफेसर्स पर भी अच्छे नंबर देने का दबाव रहता है ताकि खराब फीडबैक से बच सकें। जब बिना मेहनत ही एआई से ‘ए’ ग्रेड मिल रहा है, तो छात्रों में सीखने की प्रेरणा लगभग खत्म हो चुकी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.