16 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र
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आज नीतू कपूर अपना 68वां जन्मदिन मना रही हैं।
बचपन में पिता का साया उठ जाने के बाद जिम्मेदारियों ने मासूम उम्र में ही उनके हाथों में किताबों की जगह फिल्मी स्क्रिप्ट थमा दी। कैमरे के सामने मुस्कुराती उस बच्ची ने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाएगी।
लेकिन नीतू कपूर की जिंदगी सिर्फ स्टारडम की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, प्यार, त्याग और मजबूत इरादों का सफर है। ऋषि कपूर के साथ रिश्ते की खबर पर मां का थप्पड़, शादी के दिन दूल्हा-दुल्हन का बेहोश हो जाना, शादी के बाद ऋषि कपूर का यह कहना कि उनके करियर पर इसका असर पड़ा, और फिर परिवार के लिए नीतू का फिल्मों से दूरी बना लेना, उनकी जिंदगी के ये किस्से आज भी खूब चर्चा में रहते हैं।
26 साल बाद जब उन्होंने फिल्मों में वापसी की, तो अपनी दमदार एक्टिंग से एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया।
आज नीतू कपूर अपना 68वां जन्मदिन मना रही हैं। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी खास बातें।

बचपन में ही पिता का साया उठ गया
8 जुलाई 1958 को दिल्ली में जन्मीं नीतू कपूर का असली नाम हरमीत कौर था। वह पंजाबी सिख परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके जन्म के बाद परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया था। बचपन में ही पिता का साया उठ गया। इसके बाद परिवार की माली हालत बिगड़ गई और दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया।
ऐसे में राजी कौर ने फिल्मों में काम पाने की कोशिश की, लेकिन बार-बार रिजेक्शन मिला। उन्हें एहसास हुआ कि उनके लिए अब देर हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने अपना अधूरा सपना बेटी नीतू के जरिए पूरा करने का फैसला किया।
राजी नन्ही नीतू को लेकर फिल्म स्टूडियोज के चक्कर लगाने लगीं। शुरुआत में उन्हें फिर रिजेक्शन मिला, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
‘बेबी सोनिया’ के नाम से शुरू हुआ अभिनय का सफर
नीतू कपूर ने महज आठ साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा था। शुरुआती दौर में वह ‘बेबी सोनिया’ नाम से जानी जाती थीं। बाल कलाकार के रूप में उन्होंने फिल्म ‘सूरज’ (1966) से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद उन्होंने ‘दस लाख’, ‘दो कलियां’, ‘दो दूनी चार’ और ‘वारिस’ जैसी कई फिल्मों में काम किया और अपनी मासूमियत से दर्शकों का दिल जीत लिया।
हालांकि, उस समय उनकी मां बाल कलाकार के रूप में नीतू को मिल रही लोकप्रियता से खुश नहीं थीं। उस दौर में बाल कलाकारों के लिए अभिनय आसान नहीं माना जाता था, लेकिन नीतू कैमरे के सामने बिल्कुल सहज रहती थीं। निर्देशक उनकी संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से प्रभावित रहते थे। लगातार काम करते-करते उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीख लीं।

फिल्म ‘रिक्शावाला’ से बनीं मुख्य अभिनेत्री
बाल कलाकार के बाद नीतू कपूर ने मुख्य अभिनेत्री के रूप में फिल्म ‘रिक्शावाला’ (1973) से पहचान बनाई। उस समय उनकी उम्र 15 साल थी। के. शंकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने ऋषि कपूर के बड़े भाई रणधीर कपूर के अपोजिट काम किया था।
इसके बाद उन्हें लगातार बड़े बैनरों और लोकप्रिय अभिनेताओं के साथ काम करने का मौका मिला। उनकी मासूम मुस्कान और स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों का दिल जीता। कुछ ही वर्षों में वह बॉलीवुड की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। निर्माता-निर्देशक उन्हें रोमांटिक और पारिवारिक फिल्मों के लिए पहली पसंद मानने लगे।
इन फिल्मों ने बनाया सुपरस्टार
नीतू कपूर ने अपने करियर में ‘दीवार’, ‘खेल-खेल में’, ‘रफू चक्कर’, ‘कभी-कभी’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘धरम-वीर’, ‘झूठा कहीं का’, ‘याराना’ और ‘कस्मे वादे’ जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा ऋषि कपूर के साथ पसंद की गई।
दोनों ने कई सुपरहिट फिल्में दीं। नीतू का चुलबुला अंदाज और स्क्रीन पर उनकी ऊर्जा दर्शकों को बेहद पसंद आती थी। यही वजह रही कि वह अपने दौर की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।
ऋषि कपूर से पहली मुलाकात
नीतू कपूर और ऋषि कपूर की पहली मुलाकात फिल्म ‘जहरीला इंसान’ (1974) की शूटिंग के दौरान हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच छोटी-छोटी नोकझोंक होती थी। ऋषि कपूर का स्वभाव गंभीर था, जबकि नीतू बेहद हंसमुख थीं। साथ काम करते-करते दोनों अच्छे दोस्त बने और यह दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। इसके बाद दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंद बन गई।

दोस्ती कब प्यार में बदली
लगातार साथ काम करते हुए ऋषि कपूर और नीतू कपूर एक-दूसरे को बेहतर समझने लगे। शूटिंग के दौरान दोनों घंटों बातें करते थे। ऋषि कपूर नीतू का ख्याल रखते थे और उनके लिए चिट्ठियां व छोटे-छोटे गिफ्ट भेजते थे। धीरे-धीरे दोनों का रिश्ता गहरा हुआ।
उस दौर में उनकी प्रेम कहानी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे चर्चित कहानियों में शामिल हो गई। दोनों ने रिश्ते को गंभीरता से लिया और शादी का फैसला किया।
डेटिंग का पता चला तो मां ने मारा थप्पड़
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक इंटरव्यू में नीतू कपूर ने बताया था कि उनकी मां को उनके और ऋषि कपूर के रिश्ते की जानकारी मिली तो वह नाराज हो गई थीं। मां ने उन्हें थप्पड़ तक मार दिया था। उस समय परिवार को उनकी कम उम्र और करियर की चिंता थी।
बाद में दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया। समय के साथ मतभेद खत्म हुए और शादी की तैयारियां शुरू हो गईं।

शादी के दिन बेहोश हो गए थे दूल्हा-दुल्हन
22 जनवरी 1980 को ऋषि कपूर और नीतू कपूर शादी के बंधन में बंध गए। यह बॉलीवुड की सबसे चर्चित शादियों में से एक थी। शादी में बड़ी संख्या में फिल्मी सितारे शामिल हुए। बाद में दोनों ने बताया कि शादी की रस्मों और भीड़ की वजह से वे काफी थक गए थे।
नीतू का भारी लहंगा और लगातार चल रही रस्में उनके लिए मुश्किल साबित हुईं, जबकि ऋषि कपूर भी भीड़ और तनाव के कारण असहज हो गए थे। इसी वजह से दोनों कुछ समय के लिए बेहोश हो गए थे।
ऋषि कपूर शादी नहीं करना चाहते थे
ऋषि कपूर ने अपनी बायोग्राफी खुल्लम खुल्ला में लिखा था कि एक समय उन्हें शादी से डर लगता था। उन्हें लगता था कि शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी और आजादी कम हो जाएगी। हालांकि नीतू कपूर के साथ उनका रिश्ता इतना मजबूत था कि आखिरकार उन्होंने शादी करने का फैसला किया।
दोनों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी चुना और चार दशक तक साथ निभाया। उनका रिश्ता बॉलीवुड के सबसे मजबूत रिश्तों में गिना जाता है।
क्यों लगा कि शादी के बाद करियर प्रभावित हुआ
ऋषि कपूर ने अपनी बायोग्राफी खुल्लम खुल्ला में स्वीकार किया था कि शादी के बाद उन्हें लगा कि उनकी रोमांटिक हीरो की छवि पर असर पड़ा। उनका मानना था कि उस दौर में दर्शक शादीशुदा अभिनेता को पहले जैसी रोमांटिक छवि में स्वीकार नहीं करते थे।
उन्हें लगा कि इसका असर उनके करियर पर पड़ा। हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने चरित्र भूमिकाओं में शानदार वापसी की और नई पहचान बनाई।
परिवार के लिए फिल्मों से बनाई दूरी
शादी के बाद नीतू कपूर ने अभिनय से लगभग दूरी बना ली। वह परिवार और बच्चों की परवरिश को प्राथमिकता देना चाहती थीं। उन्होंने फिल्मों की चमक-दमक छोड़कर घर संभालने का फैसला किया। उस दौर में उन्होंने बहुत कम फिल्में कीं।
नीतू का मानना था कि बच्चों को समय देना उनकी सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। यही वजह रही कि उन्होंने कई बड़े फिल्मी प्रस्ताव भी ठुकरा दिए।
रणबीर और रिद्धिमा की परवरिश में दिया पूरा समय
नीतू कपूर ने बेटे रणबीर कपूर और बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी की परवरिश पर पूरा ध्यान दिया। उन्होंने हमेशा कोशिश की कि बच्चों को सामान्य माहौल मिले। परिवार उनके जीवन का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। ऋषि कपूर भी व्यस्त करियर के बावजूद परिवार को समय देने की कोशिश करते थे। नीतू ने कई बार कहा कि मां की भूमिका उनके जीवन का सबसे संतोष देने वाला अनुभव रही है।
लंबे अंतराल के बाद फिल्मों में वापसी
करीब ढाई दशक बाद नीतू कपूर ने फिल्मों में वापसी की। 2009 में ‘लव आज कल’ में छोटी भूमिका निभाने के बाद उन्होंने 2010 में ऋषि कपूर के साथ ‘दो दूनी चार’ में अभिनय किया। इस फिल्म में उनके काम की सराहना हुई। इसके बाद उन्होंने ‘बेशरम’, ‘जुग जुग जियो’ और ‘दादी की शादी’ सहित कई फिल्मों में काम किया। दर्शकों ने उनकी वापसी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इससे साबित हुआ कि उनका अभिनय आज भी उतना ही प्रभावशाली है।
ऋषि कपूर के निधन के बाद संभाली नई जिम्मेदारियां
30 अप्रैल 2020 को ऋषि कपूर के निधन के बाद नीतू कपूर के जीवन में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने खुद को संभाला और परिवार की ताकत बनकर सामने आईं। काम पर दोबारा ध्यान दिया, रियलिटी शो में जज की भूमिका निभाई और फिल्मों में सक्रिय रहीं. मुश्किल दौर के बावजूद उन्होंने सकारात्मक सोच बनाए रखी और जीवन को नए सिरे से आगे बढ़ाने का संदेश दिया। नीतू कपूर कहती हैं, “काम पर लौटना ऐसा था जैसे किसी ने मेरे जख्म पर मरहम लगा दिया हो। कुछ समय के लिए मैं अपना दुख भूल गई थी।”

आज भी दर्शकों की पसंदीदा अभिनेत्री
68वें जन्मदिन पर भी नीतू कपूर की लोकप्रियता बरकरार है। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और परिवार की झलकियां साझा करती रहती हैं। अभिनय, सादगी और सकारात्मक व्यक्तित्व ने उन्हें कई पीढ़ियों के दर्शकों का पसंदीदा बनाया है। बाल कलाकार से सफल अभिनेत्री, पत्नी, मां और दमदार वापसी करने वाली कलाकार तक का उनका सफर प्रेरणादायक माना जाता है। यही वजह है कि वह आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में शुमार हैं।
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