Sunday, 11 Oct 2026 | 12:28 AM

Trending :

EXCLUSIVE

बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम सुवेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम सुवेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक पहले टाटा की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में वापसी को लेकर चर्चा तेज हो रही है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। अगर टाटा ग्रुप लौटने को तैयार होता है तो सरकार वहां किसी दूसरी कंपनी को नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, जिन किसानों ने 2006 में नैनो के लिए अपनी जमीन दी थी, उनके लिए यह अधूरा सपना है। टाटा के सिंगूर छोड़ने के बाद हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरते रहे। करीब 3,600 ऐसे परिवारों को आज भी सरकार हर महीने दो हजार रुपये और 16 किलो चावल देती है, लेकिन कई परिवार अब भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। टाटा को जमीन देने के लिए तैयार हैं लोग 75 साल की अंगूर दास बताती हैं कि उनके पति ने छह बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। टाटा के जाने के बाद वे गहरे सदमे में चले गए और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया। अंगूर दास कहती हैं कि यदि टाटा दोबारा लौटती है तो वे अपनी बची हुई जमीन भी देने को तैयार हैं। जब सिंगूर आंदोलन चल रहा था तब अनिद्य दास महज 12 साल के थे। आज 32 साल के अनिद्य को रोजगार के लिए कोलकाता जाना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री लग गई होती तो उन्हें रोज शहर जाकर नौकरी नहीं करनी पड़ती। उनके पिता ने भी जमीन दी थी, लेकिन आज वह जमीन भी खेती के योग्य नहीं बची है। खासेरभेड़ी गांव के स्वरूप दास ने भी दो बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। वे बताते हैं कि मुआवजा मिलने के बाद वे दुबई चले गए थे, जबकि उनके दोनों भाइयों का चयन टाटा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रशिक्षण के लिए किया था। उत्तराखंड में ट्रेनिंग शुरू हो चुकी थी और नौकरी की उम्मीद भी थी, लेकिन परियोजना बंद होने के साथ सारे सपने टूट गए। उनका कहना है कि यदि आज टाटा या कोई दूसरी बड़ी कंपनी आती है तो वे फिर जमीन देने के लिए तैयार हैं। 20 साल में 15 गुना बढ़ी जमीन की कीमत भूमि अधिग्रहण के समर्थन में बनी सिंगूर शिल्प विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. उदयन दास का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से जमीन की कीमतों में लगभग 15 गुना वृद्धि हो चुकी है। उनके मुताबिक सड़क किनारे की जमीन, जिसकी कीमत उस समय करीब तीन लाख रुपये प्रति बीघा थी, अब एक करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है। ऐसे में यदि टाटा दोबारा लौटती है तो केवल मुआवजे पर ही 1,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। यही वजह है कि उनकी नजर में टाटा की वापसी आसान नहीं होगी। 997 एकड़ जमीन बेकार हो रही वर्तमान में सिंगूर की वह 997 एकड़ जमीन, जहां कभी नैनो परियोजना शुरू हुई थी, बड़े हिस्से में झाड़ियों से ढकी पड़ी है। कभी यह इलाका पश्चिम बंगाल की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि माना जाता था, जहां धान, आलू और अन्य फसलें होती थीं। लेकिन परियोजना रुकने के बाद खेती भी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में किसान रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए। हालांकि, सिंगूर में सभी लोग टाटा की वापसी के पक्ष में नहीं हैं। सिंगूर कृषि रक्षा समिति के प्रमुख सदस्य प्रबीर पात्रा का कहना है कि उनका विरोध उद्योगों से नहीं था और न ही आज है। उनका कहना है कि उनका संघर्ष केवल तीन फसली उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए था और यदि फिर से ऐसी स्थिति बनती है तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ममता TMC के बैंक खातों से सीमित लेनदेन कर सकेंगी:हाईकोर्ट ने निगरानी के लिए विशेष अधिकारी तैनात किया, बड़े खर्च पर रोक कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन की इजाजत दे दी। हालांकि खातों से सिर्फ रोजमर्रा और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही किए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
JAC 10th Result 2026 LIVE: Jharkhand Board Matric Students can check results at jacresults.com.

April 23, 2026/
11:24 am

आखरी अपडेट:23 अप्रैल, 2026, 11:24 IST केरल चुनाव 9 अप्रैल, 2026 को आयोजित किए गए थे। वोटों की गिनती की...

ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

September 2, 2026/
7:48 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर...

एमजी रोड पर धंसी सड़क, फलों से भरा पिकअप फंसा:बड़वानी में घटिया सीवरेज कार्य से लगा जाम, रहवासी बोले-सही तरीके से नहीं हो रहा काम

April 28, 2026/
12:34 pm

बड़वानी जिला मुख्यालय के एमजी रोड पर मंगलवार सुबह एक फलों से भरा पिकअप वाहन सड़क में धंस गया। घटना...

ऋषिकेश में बनेगा दिव्यांगों के लिए हाईटेक इंडोर बैडमिंटन हॉल:62.67 लाख का फंड मंजूर; प्रतिभाओं को मिलेगा नेशनल-इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म

April 3, 2026/
6:07 pm

उत्तराखंड के मेधावी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य में पहली बार खास तौर...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम सुवेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम सुवेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक पहले टाटा की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में वापसी को लेकर चर्चा तेज हो रही है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। अगर टाटा ग्रुप लौटने को तैयार होता है तो सरकार वहां किसी दूसरी कंपनी को नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, जिन किसानों ने 2006 में नैनो के लिए अपनी जमीन दी थी, उनके लिए यह अधूरा सपना है। टाटा के सिंगूर छोड़ने के बाद हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरते रहे। करीब 3,600 ऐसे परिवारों को आज भी सरकार हर महीने दो हजार रुपये और 16 किलो चावल देती है, लेकिन कई परिवार अब भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। टाटा को जमीन देने के लिए तैयार हैं लोग 75 साल की अंगूर दास बताती हैं कि उनके पति ने छह बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। टाटा के जाने के बाद वे गहरे सदमे में चले गए और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया। अंगूर दास कहती हैं कि यदि टाटा दोबारा लौटती है तो वे अपनी बची हुई जमीन भी देने को तैयार हैं। जब सिंगूर आंदोलन चल रहा था तब अनिद्य दास महज 12 साल के थे। आज 32 साल के अनिद्य को रोजगार के लिए कोलकाता जाना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री लग गई होती तो उन्हें रोज शहर जाकर नौकरी नहीं करनी पड़ती। उनके पिता ने भी जमीन दी थी, लेकिन आज वह जमीन भी खेती के योग्य नहीं बची है। खासेरभेड़ी गांव के स्वरूप दास ने भी दो बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। वे बताते हैं कि मुआवजा मिलने के बाद वे दुबई चले गए थे, जबकि उनके दोनों भाइयों का चयन टाटा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रशिक्षण के लिए किया था। उत्तराखंड में ट्रेनिंग शुरू हो चुकी थी और नौकरी की उम्मीद भी थी, लेकिन परियोजना बंद होने के साथ सारे सपने टूट गए। उनका कहना है कि यदि आज टाटा या कोई दूसरी बड़ी कंपनी आती है तो वे फिर जमीन देने के लिए तैयार हैं। 20 साल में 15 गुना बढ़ी जमीन की कीमत भूमि अधिग्रहण के समर्थन में बनी सिंगूर शिल्प विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. उदयन दास का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से जमीन की कीमतों में लगभग 15 गुना वृद्धि हो चुकी है। उनके मुताबिक सड़क किनारे की जमीन, जिसकी कीमत उस समय करीब तीन लाख रुपये प्रति बीघा थी, अब एक करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है। ऐसे में यदि टाटा दोबारा लौटती है तो केवल मुआवजे पर ही 1,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। यही वजह है कि उनकी नजर में टाटा की वापसी आसान नहीं होगी। 997 एकड़ जमीन बेकार हो रही वर्तमान में सिंगूर की वह 997 एकड़ जमीन, जहां कभी नैनो परियोजना शुरू हुई थी, बड़े हिस्से में झाड़ियों से ढकी पड़ी है। कभी यह इलाका पश्चिम बंगाल की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि माना जाता था, जहां धान, आलू और अन्य फसलें होती थीं। लेकिन परियोजना रुकने के बाद खेती भी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में किसान रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए। हालांकि, सिंगूर में सभी लोग टाटा की वापसी के पक्ष में नहीं हैं। सिंगूर कृषि रक्षा समिति के प्रमुख सदस्य प्रबीर पात्रा का कहना है कि उनका विरोध उद्योगों से नहीं था और न ही आज है। उनका कहना है कि उनका संघर्ष केवल तीन फसली उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए था और यदि फिर से ऐसी स्थिति बनती है तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ममता TMC के बैंक खातों से सीमित लेनदेन कर सकेंगी:हाईकोर्ट ने निगरानी के लिए विशेष अधिकारी तैनात किया, बड़े खर्च पर रोक कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन की इजाजत दे दी। हालांकि खातों से सिर्फ रोजमर्रा और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही किए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.