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देश में 60 करोड़ गेमर:कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे गेम्स की तरफ भारतीयों का रुझान; सालाना 14.5% बढ़ रहा बाजार

देश में 60 करोड़ गेमर:कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे गेम्स की तरफ भारतीयों का रुझान; सालाना 14.5% बढ़ रहा बाजार

मोबाइल गेमिंग मार्केट करवट ले रहा है। ‘मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गेमर अब कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे प्रतिस्पर्धी गेम्स खेल रहे हैं। इससे इन-एप खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। रियल मनी गेमिंग यानी सट्टा आधारित गेम्स पर सख्ती के बाद गेमर का रुख गैर-सट्टा गेमिंग की तरफ मुड़ गया है। नॉन-आरएमजी गेमिंग बाजार 2025 में 10,527 करोड़ का रहा, जो इस साल 14,350 करोड़ और 2029 तक 23,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। देश में 60 करोड़ सक्रिय गेमर हैं। मुफ्त गेम पसंद, पर पिछले 5 साल में इन-एप खरीदारी से कमाई दोगुनी से भी ज्यादा 7,656 करोड़ हुई सबसे तेज ग्रोथ – 2025 में देश में 795 करोड़ मोबाइल गेम डाउनलोड हुए, जो पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। गेमर भी सालभर में 9% बढ़कर 60 करोड़ हो गए। कीमत पर जोर- भारत मुनाफे के लिहाज से पीछे है। बीते साल इन-एप खरीदारी से 7,656 करोड़ कमाई हुई। इस मामले में हम एशिया में छठे स्थान पर रहे। दाम को लेकर संवेदनशीलता इसकी वजह बताई गई है। फ्री गेम्स पसंद – भारतीय गेमर ज्यादातर मुफ्त गेम्स पसंद करते हैं। विज्ञापन कमाई का बड़ा जरिया है। 2025 में इन-गेम विज्ञापन से कंपनियों को 2,871 करोड़ की कमाई हुई। खर्च बढ़ा रहे गेमर- पिछले पांच साल में मोबाइल गेमिंग आय सालाना 17 फीसदी से भी ज्यादा दर से बढ़ी है, जबकि इसी दौरान इन-एप खरीद से कमाई दोगुनी से ज्यादा हो गई। यानी गेमर अब धीरे-धीरे खर्च करना शुरू तो कर रहे हैं। तेज ग्रोथ – हर साल ढाई गुना तक बढ़ रही गेमिंग से कमाई
गेम कैटेगरी आय वृद्धि
एमओबीए 234%
कार्ड बैटलर 92%
4X स्ट्रैटजी 77%
(स्रोत: मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स) देश का पूरा गेमिंग मार्केट इस साल 48,000 करोड़ तक 2026 – 48,000 करोड़ का बाजार (RMG मिलाकर) 2031 – 94,000 करोड़ से ऊपर जाने का अनुमान सालाना बढ़ोतरी- 14.52%
गेमिंग स्टार्टअप्स -2,364 बड़ी कंपनियां गरेना/फ्री फायर, कृष्णा गेम्स/बीजीएमआई-क्राफ्टन, नजारा टेक्नोलॉजीज, ड्रीम11, गेम्सक्राफ्ट (स्रोत: मोरडोर इंटेलिजेंस, ट्रैक्सन) शूटर कैटेगरी से कमाई में 94% हिस्सेदारी 2 कंपनियों की – डाउनलोड में सिमुलेशन, आर्केड गेम्स आगे, आय में शूटर गेम्स अव्वल। – फ्री फायर मैक्स और बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया मिलकर भारती गेम मार्केट में शूटर कैटेगरी की कुल कमाई में 94% हिस्सेदारी रखते हैं। – हाई-एंड शूटर एक्सपीरियंस की मांग बढ़त रही है। यानी गेमर अब सिर्फ हल्के-फुल्के गेम्स नहीं, बल्कि ज्यादा ग्राफिक्स और गहराई वाले शूटर गेम्स भी पसंद कर रहे हैं। – स्नाइपर गेम्स भारत में सबसे तेजी से बढ़ती कैटेगरी बनकर उभरे हैं। अब स्थानीय भाषा, थीम वाले गेम का बोलबाला बढ़ रहा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गेमिंग अब भी कम कमाई वाला बाजार बना हुआ है। लेकिन बेहतर लोकलाइजेशन, भारत-केंद्रित टूर्नामेंट और बदलते उपभोक्ता व्यवहार से आगामी वर्षों में खर्च बढ़ने की उम्मीद है। लूडो किंग और क्रिकेट लीग जैसे स्थानीय गेम्स सांस्कृतिक जुड़ाव के दम पर कई ग्लोबल गेम्स को डाउनलोड में पीछे छोड़ रहे हैं। जो बताता है कि आगे स्थानीय भाषा और थीम वाले गेम्स भारतीय बाजार में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हर ऑनलाइन गेम सट्टा नहीं होता, इनमें फर्क समझें सामान्य गेम (जैसे शूटर, स्ट्रैटजी, आर्केड) में जीत या हार खिलाड़ी के कौशल और रणनीति पर निर्भर करती है। पैसा सिर्फ गेम के अंदर हथियार, कैरेक्टर या लेवल जैसी चीजें खरीदने में खर्च होता है। ‘रियल मनी’ जीतने का कोई दावा नहीं होता। वहीं रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) गेम्स में खिलाड़ी असली पैसा दांव पर लगाते हैं और नतीजे के आधार पर पैसे जीतते या हारते हैं। इस पर भारत में 2025 में सख्ती की गई है।

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देश में 60 करोड़ गेमर:कैजुअल, फ्री गेम्स छोड़कर शूटर, स्ट्रैटजी जैसे गेम्स की तरफ भारतीयों का रुझान; सालाना 14.5% बढ़ रहा बाजार

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गेम कैटेगरी आय वृद्धि
एमओबीए 234%
कार्ड बैटलर 92%
4X स्ट्रैटजी 77%
(स्रोत: मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स) देश का पूरा गेमिंग मार्केट इस साल 48,000 करोड़ तक 2026 – 48,000 करोड़ का बाजार (RMG मिलाकर) 2031 – 94,000 करोड़ से ऊपर जाने का अनुमान सालाना बढ़ोतरी- 14.52%
गेमिंग स्टार्टअप्स -2,364 बड़ी कंपनियां गरेना/फ्री फायर, कृष्णा गेम्स/बीजीएमआई-क्राफ्टन, नजारा टेक्नोलॉजीज, ड्रीम11, गेम्सक्राफ्ट (स्रोत: मोरडोर इंटेलिजेंस, ट्रैक्सन) शूटर कैटेगरी से कमाई में 94% हिस्सेदारी 2 कंपनियों की – डाउनलोड में सिमुलेशन, आर्केड गेम्स आगे, आय में शूटर गेम्स अव्वल। – फ्री फायर मैक्स और बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया मिलकर भारती गेम मार्केट में शूटर कैटेगरी की कुल कमाई में 94% हिस्सेदारी रखते हैं। – हाई-एंड शूटर एक्सपीरियंस की मांग बढ़त रही है। यानी गेमर अब सिर्फ हल्के-फुल्के गेम्स नहीं, बल्कि ज्यादा ग्राफिक्स और गहराई वाले शूटर गेम्स भी पसंद कर रहे हैं। – स्नाइपर गेम्स भारत में सबसे तेजी से बढ़ती कैटेगरी बनकर उभरे हैं। अब स्थानीय भाषा, थीम वाले गेम का बोलबाला बढ़ रहा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गेमिंग अब भी कम कमाई वाला बाजार बना हुआ है। लेकिन बेहतर लोकलाइजेशन, भारत-केंद्रित टूर्नामेंट और बदलते उपभोक्ता व्यवहार से आगामी वर्षों में खर्च बढ़ने की उम्मीद है। लूडो किंग और क्रिकेट लीग जैसे स्थानीय गेम्स सांस्कृतिक जुड़ाव के दम पर कई ग्लोबल गेम्स को डाउनलोड में पीछे छोड़ रहे हैं। जो बताता है कि आगे स्थानीय भाषा और थीम वाले गेम्स भारतीय बाजार में बड़ी भूमिका निभाएंगे। हर ऑनलाइन गेम सट्टा नहीं होता, इनमें फर्क समझें सामान्य गेम (जैसे शूटर, स्ट्रैटजी, आर्केड) में जीत या हार खिलाड़ी के कौशल और रणनीति पर निर्भर करती है। पैसा सिर्फ गेम के अंदर हथियार, कैरेक्टर या लेवल जैसी चीजें खरीदने में खर्च होता है। ‘रियल मनी’ जीतने का कोई दावा नहीं होता। वहीं रियल मनी गेमिंग (आरएमजी) गेम्स में खिलाड़ी असली पैसा दांव पर लगाते हैं और नतीजे के आधार पर पैसे जीतते या हारते हैं। इस पर भारत में 2025 में सख्ती की गई है।

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