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'टी-सीरीज का राइवल हूं', फिर भी खुशहाली को किया कास्ट:डायरेक्टर आकाशादित्य लामा बोले- मैंने सिर्फ टैलेंटेड एक्ट्रेस देखा

'टी-सीरीज का राइवल हूं', फिर भी खुशहाली को किया कास्ट:डायरेक्टर आकाशादित्य लामा बोले- मैंने सिर्फ टैलेंटेड एक्ट्रेस देखा

फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ को लेकर अभिनेत्री खुशहाली कुमार और निर्देशक-निर्माता आकाशादित्य लामा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इंटरव्यू में लामा ने मजाकिया अंदाज में खुद को टी-सीरीज का ‘राइवल’ बताते हुए खुशहाली की कास्टिंग की वजह बताई। दोनों ने शादी को लेकर युवाओं की बदलती सोच, रिश्तों में भरोसे की अहमियत और फिल्म के संदेश पर बात की। खुशहाली ने पीयूष मिश्रा और महेश मांजरेकर के साथ काम करने का अनुभव साझा किया। साथ ही पिता गुलशन कुमार की विरासत, अपनी अलग पहचान और समाजसेवा से जुड़े किस्से भी बताए। सवाल: आजकल युवाओं में शादी को लेकर डर बढ़ रहा है। ऐसे में ‘दुल्हनिया ले आएगी’ जैसी फिल्म लाने का विचार कैसे आया? जवाब/आकाशादित्य लामा: शादी के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है और शादी से ही बनता है। हमारी फिल्म कॉमेडी जरूर है, लेकिन इसके जरिए रिश्तों, प्यार और पिता-बेटी के रिश्ते की बात कही गई है। गंभीर बातों को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया है। खुशहाली कुमार: शादी तब करनी चाहिए, जब आप उसके लिए तैयार हों। सरकार ने शादी की न्यूनतम उम्र तय की है, लेकिन कोई एक्सपायरी डेट नहीं रखी। सही साथी मिले और आप मानसिक रूप से तैयार हों, तभी शादी का फैसला लेना चाहिए। यही बात फिल्म भी मजेदार अंदाज में कहती है। सवाल: खुशहाली कुमार को इस फिल्म के लिए कैसे चुना? जवाब/आकाशादित्य लामा: (हंसते हुए) लोग कहते हैं कि खुशहाली बड़ी म्यूजिक कंपनी की मालकिन हैं। मैं भी आजकल एक छोटी-सी म्यूजिक कंपनी चला रहा हूं, इसलिए फिलहाल हम दोनों राइवल हैं। ऐसे में मैं उनके पास क्यों जाता? लेकिन सच यह है कि मैंने उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री के तौर पर चुना। मैंने उनकी फिल्म ‘धोखा: राउंड द कॉर्नर’ देखी थी और ‘स्टारफिश’ के कुछ हिस्से भी। मेरी कहानी की ‘नव्या’ के लिए वही सबसे फिट लगीं। मैं ऐसी अभिनेत्री चाहता था, जिसकी कोई तय इमेज न हो। खुशहाली ने पहले कॉमेडी नहीं की थी, इसलिए लगा कि उनके साथ फिल्म में नई ताजगी आएगी। कहानी उन्हें पसंद आई और वहीं से हमारी यात्रा शुरू हुई। सवाल: फिल्म में पीयूष मिश्रा और महेश मांजरेकर जैसे बड़े कलाकार हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/आकाशादित्य लामा: कई लोगों ने पहले ही कहा था कि इतने बड़े कलाकारों को संभालना आसान नहीं होगा। लेकिन मेरा अनुभव बिल्कुल उल्टा रहा। अगर कलाकार को भरोसा हो जाए कि निर्देशक अपना काम जानता है और निर्माता उसका सम्मान करता है, तो कोई दिक्कत नहीं होती। दिलचस्प बात यह रही कि महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा और स्नेहिल दीक्षित खुद भी निर्देशक हैं। मैंने इस फिल्म से सीखा कि निर्देशक को डायरेक्ट करना सबसे आसान होता है। खुशहाली कुमार: पीयूष जी की एनर्जी कमाल की है। रात की शूटिंग हो या दिन की, वह हमेशा पूरे उत्साह के साथ सेट पर आते थे। महेश सर के साथ पिता-बेटी के भावनात्मक दृश्य करना मेरे लिए खास अनुभव रहा। वह इतने नैचुरल अभिनेता हैं कि उनके साथ अभिनय करना आसान हो जाता है। सवाल: अगर फिल्म की शूटिंग का बिहाइंड द सीन वीडियो रिलीज हो, तो सबसे यादगार पल कौन-सा होगा? जवाब/आकाशादित्य लामा: दो सीन मेरे सबसे करीब हैं। पहला, जब नव्या अपने पिता से कहना चाहती है कि वह शादी नहीं करना चाहती, लेकिन उनकी भावनाओं को देखकर चुप रह जाती है। दूसरा, फिल्म के आखिर में खुशहाली का लंबा मोनोलॉग। उन्होंने उसे बिना रीटेक के एक ही बार में पूरा किया। ट्रायल शो में लोग पहले हंस रहे थे, लेकिन यह सीन आते ही माहौल भावुक हो गया। खुशहाली कुमार: सेट पर सबसे ज्यादा मजा तब आता था, जब सर खुद एक्टिंग करके सीन समझाते थे। उनका थिएटर बैकग्राउंड है, इसलिए वह हर सीन निभाकर दिखाते थे। कई बार हमें हंसी रोकना मुश्किल हो जाता था। सवाल: आजकल शादी को लेकर युवाओं की सोच बदल रही है। कई लोग शादी से बचना चाहते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब/आकाशादित्य लामा: कुछ घटनाओं की वजह से लोगों के मन में डर बढ़ा है, लेकिन रिश्ते भरोसे से चलते हैं। सोशल मीडिया के दौर में हर घटना तुरंत वायरल हो जाती है। हमें सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि सामने वाले ने क्या कहा, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों कहा। रिश्तों में विश्वास और धैर्य सबसे जरूरी हैं। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है। खुशहाली कुमार: मैं भी मानती हूं कि शादी तभी करनी चाहिए, जब दोनों लोग उसके लिए तैयार हों। कई बार परिवार या समाज के दबाव में लोग शादी कर लेते हैं और बाद में परेशानियां शुरू हो जाती हैं। आज लड़कियां खुलकर अपनी बात कह रही हैं। अगर कोई पहले करियर बनाना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान होना चाहिए। हर इंसान को वही करना चाहिए, जो वह सच में चाहता है। सवाल: खुशहाली, लोग आपको अक्सर टी-सीरीज और गुलशन कुमार के परिवार से जोड़कर देखते हैं। क्या आपको लगता है कि अब आपकी अलग पहचान भी बन चुकी है? जवाब/खुशहाली कुमार: मुझे गर्व है कि मैं गुलशन कुमार जी की बेटी हूं। मैं हमेशा चाहूंगी कि लोग मुझे उनके नाम से भी याद रखें। लेकिन जब मुझे मेहनत की वजह से काम मिलता है, तो वह खुशी अलग होती है। ‘धोखा’ के बाद यह फिल्म मुझे मेरी एक्टिंग देखकर मिली। उससे पहले मैं फैशन डिजाइनर थी। पेरिस और न्यूयॉर्क में शो किए, हॉलीवुड कलाकारों के लिए डिजाइनिंग की। वहां मुझे कोई परिवार की वजह से नहीं जानता था। वहां जो पहचान मिली, वह मेरी मेहनत की वजह से मिली। सवाल: इस फिल्म से जुड़ी सबसे खास याद क्या रहेगी? जवाब/खुशहाली कुमार: यह मेरे प्रोडक्शन हाउस के बाहर साइन की गई पहली फिल्म और पहली कॉमेडी भी है। पहला साइनिंग अमाउंट मिलने पर मैंने उसे भगवान गणेश के चरणों में रखा। यही पल मेरे लिए सबसे खास रहेगा। मेरी कोशिश रहती है कि कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। कई लड़कियों की पढ़ाई का खर्च मैं उठाती हूं। पहले अपनी फैक्ट्री के पास बच्चों को रोज खाना भी खिलाती थी। मुझे लगता है कि ये संस्कार मुझे पापा से मिले हैं। अगर भगवान ने आपको कुछ दिया है, तो उसे दूसरों के साथ जरूर बांटना चाहिए।

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जवाब/आकाशादित्य लामा: (हंसते हुए) लोग कहते हैं कि खुशहाली बड़ी म्यूजिक कंपनी की मालकिन हैं। मैं भी आजकल एक छोटी-सी म्यूजिक कंपनी चला रहा हूं, इसलिए फिलहाल हम दोनों राइवल हैं। ऐसे में मैं उनके पास क्यों जाता? लेकिन सच यह है कि मैंने उन्हें सिर्फ एक अभिनेत्री के तौर पर चुना। मैंने उनकी फिल्म ‘धोखा: राउंड द कॉर्नर’ देखी थी और ‘स्टारफिश’ के कुछ हिस्से भी। मेरी कहानी की ‘नव्या’ के लिए वही सबसे फिट लगीं। मैं ऐसी अभिनेत्री चाहता था, जिसकी कोई तय इमेज न हो। खुशहाली ने पहले कॉमेडी नहीं की थी, इसलिए लगा कि उनके साथ फिल्म में नई ताजगी आएगी। कहानी उन्हें पसंद आई और वहीं से हमारी यात्रा शुरू हुई। सवाल: फिल्म में पीयूष मिश्रा और महेश मांजरेकर जैसे बड़े कलाकार हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/आकाशादित्य लामा: कई लोगों ने पहले ही कहा था कि इतने बड़े कलाकारों को संभालना आसान नहीं होगा। लेकिन मेरा अनुभव बिल्कुल उल्टा रहा। अगर कलाकार को भरोसा हो जाए कि निर्देशक अपना काम जानता है और निर्माता उसका सम्मान करता है, तो कोई दिक्कत नहीं होती। दिलचस्प बात यह रही कि महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा और स्नेहिल दीक्षित खुद भी निर्देशक हैं। मैंने इस फिल्म से सीखा कि निर्देशक को डायरेक्ट करना सबसे आसान होता है। खुशहाली कुमार: पीयूष जी की एनर्जी कमाल की है। रात की शूटिंग हो या दिन की, वह हमेशा पूरे उत्साह के साथ सेट पर आते थे। महेश सर के साथ पिता-बेटी के भावनात्मक दृश्य करना मेरे लिए खास अनुभव रहा। वह इतने नैचुरल अभिनेता हैं कि उनके साथ अभिनय करना आसान हो जाता है। सवाल: अगर फिल्म की शूटिंग का बिहाइंड द सीन वीडियो रिलीज हो, तो सबसे यादगार पल कौन-सा होगा? जवाब/आकाशादित्य लामा: दो सीन मेरे सबसे करीब हैं। पहला, जब नव्या अपने पिता से कहना चाहती है कि वह शादी नहीं करना चाहती, लेकिन उनकी भावनाओं को देखकर चुप रह जाती है। दूसरा, फिल्म के आखिर में खुशहाली का लंबा मोनोलॉग। उन्होंने उसे बिना रीटेक के एक ही बार में पूरा किया। ट्रायल शो में लोग पहले हंस रहे थे, लेकिन यह सीन आते ही माहौल भावुक हो गया। खुशहाली कुमार: सेट पर सबसे ज्यादा मजा तब आता था, जब सर खुद एक्टिंग करके सीन समझाते थे। उनका थिएटर बैकग्राउंड है, इसलिए वह हर सीन निभाकर दिखाते थे। कई बार हमें हंसी रोकना मुश्किल हो जाता था। सवाल: आजकल शादी को लेकर युवाओं की सोच बदल रही है। कई लोग शादी से बचना चाहते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब/आकाशादित्य लामा: कुछ घटनाओं की वजह से लोगों के मन में डर बढ़ा है, लेकिन रिश्ते भरोसे से चलते हैं। सोशल मीडिया के दौर में हर घटना तुरंत वायरल हो जाती है। हमें सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि सामने वाले ने क्या कहा, बल्कि यह भी समझना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों कहा। रिश्तों में विश्वास और धैर्य सबसे जरूरी हैं। परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने की जरूरत है। खुशहाली कुमार: मैं भी मानती हूं कि शादी तभी करनी चाहिए, जब दोनों लोग उसके लिए तैयार हों। कई बार परिवार या समाज के दबाव में लोग शादी कर लेते हैं और बाद में परेशानियां शुरू हो जाती हैं। आज लड़कियां खुलकर अपनी बात कह रही हैं। अगर कोई पहले करियर बनाना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान होना चाहिए। हर इंसान को वही करना चाहिए, जो वह सच में चाहता है। सवाल: खुशहाली, लोग आपको अक्सर टी-सीरीज और गुलशन कुमार के परिवार से जोड़कर देखते हैं। क्या आपको लगता है कि अब आपकी अलग पहचान भी बन चुकी है? जवाब/खुशहाली कुमार: मुझे गर्व है कि मैं गुलशन कुमार जी की बेटी हूं। मैं हमेशा चाहूंगी कि लोग मुझे उनके नाम से भी याद रखें। लेकिन जब मुझे मेहनत की वजह से काम मिलता है, तो वह खुशी अलग होती है। ‘धोखा’ के बाद यह फिल्म मुझे मेरी एक्टिंग देखकर मिली। उससे पहले मैं फैशन डिजाइनर थी। पेरिस और न्यूयॉर्क में शो किए, हॉलीवुड कलाकारों के लिए डिजाइनिंग की। वहां मुझे कोई परिवार की वजह से नहीं जानता था। वहां जो पहचान मिली, वह मेरी मेहनत की वजह से मिली। सवाल: इस फिल्म से जुड़ी सबसे खास याद क्या रहेगी? जवाब/खुशहाली कुमार: यह मेरे प्रोडक्शन हाउस के बाहर साइन की गई पहली फिल्म और पहली कॉमेडी भी है। पहला साइनिंग अमाउंट मिलने पर मैंने उसे भगवान गणेश के चरणों में रखा। यही पल मेरे लिए सबसे खास रहेगा। मेरी कोशिश रहती है कि कमाई का एक हिस्सा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। कई लड़कियों की पढ़ाई का खर्च मैं उठाती हूं। पहले अपनी फैक्ट्री के पास बच्चों को रोज खाना भी खिलाती थी। मुझे लगता है कि ये संस्कार मुझे पापा से मिले हैं। अगर भगवान ने आपको कुछ दिया है, तो उसे दूसरों के साथ जरूर बांटना चाहिए।

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