अडाणी ग्रुप भारत के एविएशन सेक्टर में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए खुद की एयरलाइन शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए ग्रुप ने सरकार से एक अनुकूल नीतिगत माहौल बनाने और मौजूदा पाबंदियों को हटाने की मांग की है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अडाणी ग्रुप के इस प्रस्ताव के बाद एयरलाइन और एयरपोर्ट बिजनेस के बीच क्रॉस-ओनरशिप के नियमों को आसान बनाने पर चर्चा और कानूनी सलाह शुरू कर दी है। सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि अडाणी ग्रुप का यह प्लान क्या है? सवाल 1. अडाणी ग्रुप की नई योजना क्या है? जवाब: अडाणी ग्रुप अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने पर विचार कर रहा है। अब तक यह ग्रुप एयरपोर्ट्स और उससे जुड़ी सेवाओं तक ही सीमित था और एयरलाइन बिजनेस से दूर रहता था, लेकिन अब उसने अपनी इस रणनीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अडाणी ग्रुप का एविएशन इकोसिस्टम सवाल 2. सरकार को इस नीति में बदलाव करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? जवाब: वर्तमान में भारतीय घरेलू एविएशन मार्केट में इंडिगो और एअर इंडिया का दबदबा है। दोनों कंपनियां मिलकर करीब 90% मार्केट शेयर कंट्रोल करती हैं। सरकार इस मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ाना चाहती है, ताकि यात्रियों को बेहतर सेवाएं और विकल्प मिल सकें। इसीलिए एयरपोर्ट ऑपरेटरों को भी एयरलाइन चलाने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। सवाल 3. मौजूदा नियम क्या हैं और अडाणी ग्रुप क्या बदलाव चाहता है? जवाब: दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स के मौजूदा नियमों के अनुसार, एयरपोर्ट ऑपरेटर किसी भी शेड्यूल्ड एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। अडाणी ग्रुप चाहता है कि इस 10% स्टेक वाली शर्त को पूरी तरह हटा दिया जाए। ग्रुप किसी एयरलाइन में माइनॉरिटी हिस्सेदार बनने के बजाय अपनी पूरी मालिकाना हक वाली एयरलाइन चलाना चाहता है। सवाल 4. यदि नियम बदलते हैं तो क्या एयरलाइंस भी एयरपोर्ट्स में हिस्सेदारी ले सकेंगी? जवाब: हां, अगर नागरिक उड्डयन मंत्रालय क्रॉस-ओनरशिप नियमों में ढील देता है, तो इससे दोतरफा रास्ता खुलेगा। जहां एक तरफ एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियां एयरलाइंस शुरू कर सकेंगी, वहीं दूसरी तरफ एयरलाइंस कंपनियां भी एयरपोर्ट्स में हिस्सेदारी खरीद सकेंगी। सवाल 5. पहले अडाणी ग्रुप एयरलाइन बिजनेस से दूर रहने की बात कर रहा था, अब यू-टर्न क्यों? जवाब: नवी मुंबई एयरपोर्ट लॉन्च से पहले जीत अडाणी ने कहा था कि एयरलाइन बिजनेस उनके हाई-मार्जिन एसेट मॉडल में फिट नहीं बैठता। लेकिन दो वजहों से यह सोच बदली है: सवाल 6. अडाणी ग्रुप का एविएशन सेक्टर में पहले से कितना दबदबा है? जवाब: अडाणी ग्रुप पहले से ही मुंबई समेत देश के 8 प्रमुख एयरपोर्ट्स का संचालन कर रहा है। इसके अलावा ग्राउंड हैंडलिंग, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) और पायलट ट्रेनिंग जैसे एविएशन सेगमेंट में भी अडाणी ग्रुप की मजबूत मौजूदगी है। सवाल 7. इस कदम का मौजूदा एयरलाइंस और इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: अगर अडाणी ग्रुप एयरलाइन शुरू करता है, तो हितों के टकराव का मुद्दा उठ सकता है। मौजूदा एयरलाइंस इसका विरोध कर सकती हैं। उन्हें डर हो सकता है कि अडाणी अपने एयरपोर्ट्स पर अपनी एयरलाइन को अच्छे फ्लाइट स्लॉट्स और पार्किंग में प्राथमिकता दे सकता हैं। सवाल 8. एक्सपर्ट्स का इस मामले पर क्या कहना है? जवाब: एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की इजाजत देती है, तो कड़े नियम बनाने होंगे ताकि एयरपोर्ट और एयरलाइन का ऑपरेशन स्वतंत्र रहे। साथ ही, ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याओं और विमानों की डिलीवरी में देरी के कारण एक नई एयरलाइन को मार्केट में पूरी तरह जमने में कई सालों का समय लग सकता है। नॉलेज बॉक्स: क्या है ‘क्रॉस-ओनरशिप’ नियम? यह नियम एयरपोर्ट ऑपरेटर को किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा शेयर रखने से रोकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि एयरपोर्ट मालिक किसी खास एयरलाइन को फायदा न पहुंचाए और सभी एयरलाइंस को बराबर मौके मिलें।















































