2 घंटे पहले
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1931
पृथ्वीराज कपूर की पत्नी राम सरणी मेहरा की डिलीवरी के दिन नजदीक आ रहे थे। इससे पहले 1924 में उन्होंने पहले बेटे राज कपूर को जन्म दिया था। डिलीवरी के लिए घर में ही दाई बुलाई गई थी। जब उन्होंने अगले साल दूसरे बच्चे बिंदी को जन्म दिया, तो जन्म के एक हफ्ते बाद उसका निधन हो गया। एक साल बाद तीसरे बच्चे देवी के जन्म पर भी यही हुआ। दो बच्चों की मौत के बाद जब चौथी डिलीवरी के दिन नजदीक आने लगे, तो पृथ्वीराज कपूर ने साफ कह दिया, अब डिलीवरी घर में नहीं अस्पताल में होगी।
21 अक्टूबर 1931 के रोज जब राम सरणी मेहरा को प्रसव पीड़ा हुई, तो पूरा परिवार अस्पताल पहुंचा। उन्होंने बेटे को जन्म दिया, जिसे नाम दिया गया शमशेर राज कपूर।
पिता पृथ्वीराज हिंदी सिनेमा में बड़ा मुकाम हासिल कर चुके थे, बड़े भाई राज कपूर ने भी हुनर से शोमैन की उपाधि हासिल कर ली, ऐसे में शमशेर यानी शम्मी कपूर के पास कुछ अलग कर दिखाने की बड़ी चुनौती थी। लेकिन जल्द ही हुनर से शम्मी कपूर ने ऐसा नाम बनाया कि उन्हें भारत का एल्विस प्रेस्दली कहा जाने लगा। परिवार से ऐसा लगाव था कि पिता के उसूल के आगे उन्होंने मुमताज से अपने प्यार तक की कुर्बानी दे दी। हालांकि मौत से कुछ महीनों पहले उन्होंने पत्नी के सामने मुमताज से मिलने की इच्छा जाहिर की और पत्नी ने ये मुलाकात करवाई भी।
आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे किस्से, जो उनकी शख्सियत समझने में मदद करते हैं-
किस्सा-1
स्कूल ने प्ले की इजाजत नहीं दी, तो प्रिंसिपल से लड़े पृथ्वीराज कपूर
बॉम्बे में जन्मे शम्मी कपूर चंद सालों के थे, जब पिता पृथ्वीराज कपूर पूरे परिवार के साथ कोलकाता में जाकर बस गए। कोलकाता में वह न्यू थिएटर स्टूडियो चलते और साथ ही फिल्मों में भी काम करते थे। कोलकाता से ही शम्मी कपूर की शुरुआती पढ़ाई हुई।

1944 में पृथ्वीराज कपूर ने बॉम्बे आकर पृथ्वी थिएटर की शुरुआत की। थिएटर के प्ले में राज कपूर और शम्मी कपूर भी हिस्सा लेते। थिएटर के प्ले शकुंतला में शम्मी कपूर भरत बने। पृथ्वीराज चाहते थे कि शम्मी इसकी अच्छी तरह रिहर्सल करें, लेकिन स्कूल से बार-बार छुट्टी लेने की इजाजत नहीं मिली। ऐसे में पृथ्वीराज कपूर खुद स्कूल गए और प्रिंसिपल के इनकार के बाद झगड़ा कर लिया। तब भी बात नहीं बनी तो शम्मी कपूर की स्कूल बदलवा दी गई।
किस्सा-2
भाई राज कपूर की प्रेमिका से सरेआम मांग ली किस
टीनएज के दिनों में शम्मी कपूर, पिता और बडे़ भाई राज कपूर की फिल्मों के सेट पर जाया करते थे। एक दिन वो फिल्म बरसात के सेट पर पहुंचे। इसी फिल्म के सेट पर राज कपूर और नरगिस की नजदीकियां बढ़ी थीं। तब शम्मी कपूर की उम्र करीब 15-16 साल की थी। वो नरगिस से मिलने उनके मेकअप रूम गए, तो वह वहां उदास बैठी थीं।
शम्मी कपूर ने वजह पूछी, तो जवाब मिला- ‘मैं चाहती हूं कि राज साहब की अगली फिल्म आवारा में मुझे हीरोइन बनाया जाए।’
शम्मी ने झट से कहा- ‘मैं जाकर भाई साहब से बात कर लेता हूं।’
नरगिस ने टोककर कहा- ‘नहीं, दिक्कत राज साहब की नहीं है। वो भी यही चाहते हैं, लेकिन मेरे घरवाले नहीं चाहते मैं राज साहब के साथ काम करूं।’
दरअसल, नरगिस और राज कपूर की नजदीकियों की चर्चा फैल रही थी, लेकिन नरगिस के परिवार को इससे ऐतराज था। राज कपूर की शादी पहले ही कृष्णा कपूर से हो चुकी थी और उनके बच्चे भी थे।

राज कपूर और नरगिस ने आग, अंदाज, बरसात जैसी कई हिट फिल्में साथ की थीं।
शम्मी कपूर फिर पूछ पड़े- ‘आपके घरवालों को क्या ऐतराज है।’
जवाब मिला- ‘महबूब साहब (डायरेक्टर, जिन्होंने राज कपूर-नरगिस के साथ अंदाज बनाई थी) मुझे बेटी मानते हैं, उन्होंने भी साफ कहा कि मैं आवारा न करूं। तुम दुआ करना कि फिल्म में मैं हीरोइन बनूं।’
शम्मी कपूर ने इस बार शरारती अंदाज में कहा- ‘और मुझे क्या मिलेगा?’
नरगिस ने हंसते हुए कहा- ‘अगर मैं हीरोइन बनी तो तुम्हें प्यारी सी किस दूंगी।’
फिल्म बरसात बनते-बनते कई महीने लग गए। और ये वादा समय के साथ नरगिस और शम्मी कपूर दोनों के जहन से उतर गया। 1949 में फिल्म बरसात रिलीज की गई और फिर कई महीनों बाद फिल्म आवारा शुरू हुई। इसे महबूब खान डायरेक्ट करने वाले थे, जो नरगिस को कास्ट नहीं करना चाहते थे। साथ ही वो चाहते थे कि इसके हीरो अशोक कुमार और दिलीप कुमार रहें। राज कपूर ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया और खुद हीरो बनने और फिल्म डायरेक्ट करने का फैसला किया। राज कपूर प्रोड्यूसर- डायरेक्टर बने तो नरगिस को ही आवारा में हीरोइन बनाया गया।

फिल्म आवारा का पोस्टर।
फिल्म की शूटिंग आरके स्टूडियो में शुरू हुई। शम्मी कपूर एक रोज सेट पर पहुंचे। अचानक उन्हें नरगिस का 4 साल पहले किया गया वादा याद आ गया।
शूटिंग ब्रेक में शम्मी कपूर ने सरेआम नरगिस को वादा याद दिलाया और कहा- ‘आपको याद है, आपने मुझसे क्या वादा किया था। आपने कहा था कि अगर आप आवारा की हीरोइन बनीं, तो मुझे किस देंगी।’
नरगिस शरमाते हुए हंस पड़ीं और कैमरे के पीछे छिप गईं। उन्होंने वादा 16 साल के बच्चे की तरह दिखने वाले शम्मी कपूर से किया था, लेकिन अब वो जवान हो चुके थे।
सभी हंस रहे थे, तो शम्मी कपूर ने फिर कहा- ‘इन्होंने वादा किया था, निभाना पड़ेगा।’
राज कपूर पास खड़े थे, उन्होंने कहा- ‘बात तो सही है।’
नरगिस ने इस पर शरमाते हुए कहा- ‘तब की बात अलग थी, तब यह बच्चा था।’
शम्मी कपूर ने इस पर कहा- ‘कुछ तो देना ही पड़ेगा।’
नरगिस ने फिर पूछा- ‘अच्छा बताओ क्या चाहिए?’
जवाब मिला- ‘मुझे ग्रामोफोन चाहिए।’
तब ग्रामोफोन होना बड़ी बात थी। देश में इसकी चंद दुकानें थीं और कुछ गिने-चुने रईसों के पास ही ये हुआ करता था।
नरगिस ने तुरंत ड्राइवर बुलाया और खुद साथ जाकर शम्मी कपूर को ग्रामोफोन और कई रिकॉर्डिंग दिलवाईं। तभी से शम्मी कपूर को वेस्टर्न म्यूजिक में रुचि जागी। ये किस्सा शम्मी कपूर के करीबी रहे रूमी जाफरी ने दैनिक भास्कर को बताया था।

नरगिस के साथ शम्मी कपूर की तस्वीर।
किस्सा-3
कॉलेज में मन नहीं लगा तो घर आकर पृथ्वीराज कपूर से कहा- कल से नहीं जाऊंगा
स्कूल खत्म होने के बाद शम्मी कपूर का दाखिला रामनारायण कॉलेज में करवाया गया, लेकिन शम्मी कपूर तब तक थिएटर में रुचि लेने लगे थे। चंद हफ्तों बाद ही एक दिन शम्मी कपूर बीच कॉलेज से घर लौटे और पिता से कहा- ‘मैंने कॉलेज छोड़ दिया, कल से नहीं जाऊंगा।’
पृथ्वीराज कपूर ने सुनते ही कहा- ‘कोई बात नहीं पुत्तर कल से कॉलेज आ जा।’
1948 में शम्मी कपूर ने थिएटर पर पूरा मन लगाया। उन्हें महीने के 50 रुपए मिलते थे। वो थिएटर की फिल्मों में जूनियर आर्टिस्ट का काम भी करने लगे। वह 4 सालों तक थिएटर से जुड़े रहे और उनकी तनख्वाह 300 रुपए महीने तक पहुंच गई।
उन्होंने 1953 की फिल्म जीवन ज्योति से फिल्मों में कदम रखा। बड़े भाई राज कपूर तब तक स्टार बन चुके थे। हर किसी ने शम्मी कपूर को राज कपूर के भाई और पृथ्वीराज कपूर के बेटे की तरह पहचाना।

पहली फिल्म से खास पहचान नहीं मिली, जिसके बाद शम्मी कपूर, बचपन की दोस्त नूतन के साथ फिल्म लैला मजनूं (1953) में नजर आए। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे, लेकिन नूतन की मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए स्विट्जरलैंड भेज दिया, जिससे दोनों का रिश्ता टूट गया।

नूतन के साथ ली गई शम्मी कपूर की तस्वीर।
किस्सा- 4
मधुबाला ने पतला कहा, तो पीने लगे शराब
शम्मी कपूर के करियर की दूसरी फिल्म रेल का डिब्बा रही, जिसमें उन्होंने मधुबाला के साथ काम किया। तब मधुबाला स्टार मानी जाती थीं और शम्मी कपूर फिल्मों में नए थे। एक दिन शूटिंग करते हुए मधुबाला ने शम्मी कपूर का छरहरा बदन देखकर कहा- ‘तुम इतने पतले हो कि मैं तुम्हारी हीरोइन ही नहीं लगती, कुछ और लगती हूं। थोड़ा वजन बढ़ाओ।’

मधुबाला के साथ फिल्म रेल का डिब्बा फिल्म से शम्मी कपूर की तस्वीर।
बीबीसी से बातचीत में शम्मी कपूर ने बताया कि मधुबाला की ये बात सुनकर उन्हें ठेस पहुंची। और जल्दी वजन बढ़ाने के लिए उन्होंने बीयर पीना शुरू कर दी। ये तरकीब काम कर गई और शम्मी कपूर का वजन अचानक ही बढ़ने लगा।
किस्सा- 5
23 की उम्र में एक साल बड़ी गीता बाली से हुआ प्यार, शादी करने देर रात मंदिर पहुंचे
शम्मी कपूर रानीखेत में फिल्म रंगीन रातें की शूटिंग कर रहे थे। फिल्म में उनके पिता पृथ्वीराज कपूर और भाई राज कपूर की को-स्टार रह चुकीं गीता बाली ने भी कैमियो किया। जब शम्मी कपूर ने गीता बाली के साथ शूटिंग की, तो साथ रहते हुए उन्हें प्यार हो गया। वो बार-बार गीता को प्रपोज करते, लेकिन उम्र में बड़ीं गीता हर बार इनकार कर देतीं। तब शम्मी कपूर महज 23 साल के थे।

23 अगस्त 1955 को फिर शम्मी ने प्रपोज किया, इस बार गीता ने पलटकर कहा- ‘ठीक है, चलो शादी करते हैं, लेकिन शादी आज ही होगी। अभी नहीं तो कभी नहीं।’
शम्मी कपूर सातवें आसमान पर थे। वो तुरंत दोस्त जॉनी वॉकर के पास गए, जिन्होंने कुछ समय पहले ही एक्ट्रेस शकीला से भागकर शादी की थी। जॉनी से तरीका पूछा तो जवाब मिला- ‘मैं मुस्लिम हूं, मस्जिद गया, निकाह कर लिया, तुम्हें तो मंदिर जाना होगा।’
शम्मी कपूर गीता के साथ मलाबार हिल्स स्थित बाणगंगा मंदिर पहुंचे, तो द्वार बंद हो चुके थे। पंडित जी ने कहा- ‘कल सुबह आना।’
शम्मी, गीता को लेकर मटुंगा स्थित घर पहुंचे और रात बेसब्री में जागकर काटी।
24 अगस्त 1955 को जैसे ही 4 बजे शम्मी, गीता को लेकर उसी मंदिर में पहुंच गए। मंदिर के गेट खुले और पंडित जी ने दोनों की शादी शुरू कर दी। पंडित जी ने जब कहा कि वर वधू की मांग में सिंदूर भरें, तो दोनों एक-दूसरे को देखने लगे। बिना तैयारी के पहुंचे वह सिंदूर नहीं ले गए थे। ऐसे में गीता ने अपने पर्स से लाल लिपस्टिक निकाली, जिससे शम्मी ने उनकी मांग भरी। शम्मी डरे हुए थे कि घरवाले इस आनन-फानन की शादी को स्वीकार करेंगे या नहीं, लेकिन पृथ्वीराज कपूर ने बिना नाराजगी दोनों का स्वागत किया।

शादी के बाद शम्मी कपूर ने तुमसा नहीं देखा (1957), दिल देके देखो (1959) और जंगली (1961) जैसी फिल्मों से स्टारडम हासिल किया। जंगली का गाना याहू…चाहे कोई मुझे जंगली करे काफी हिट रहा।
शादी से गीता बाली और शम्मी कपूर को 2 बच्चे हुए, लेकिन 1965 में गीता बाली का स्मॉलपॉक्स से निधन हो गया। वह महज 34 साल की थीं।

दूसरे बच्चे के जन्म के समय ली गई गीता बाली और शम्मी कपूर की तस्वीर।
किस्सा- 6
मुमताज ने ठुकराया प्रपोजल, आखिरी मुलाकात में कहा- मेरे पास चंद दिन ही बचे हैं
तीसरी मंजिल, कश्मीर की कली जैसी फिल्मों से शम्मी कपूर टॉप एक्टर बने। फिर आई 1968 की ब्रह्मचारी। इस फिल्म में उनके साथ 18 साल की मुमताज की कास्टिंग हुई। जिसके गाने आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे…, दिल के झरोके में…, चक्के पे चक्का, चक्के पे गाड़ी काफी हिट रहे।

साथ काम करते हुए शम्मी कपूर-मुमताज एक-दूसरे को पसंद करने लगे। शम्मी कपूर ने उन्हें शादी का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन साथ ही शर्त रखी कि कपूर खानदान से जुड़ने के बाद उन्हें फिल्मों में काम करना बंद करना होगा। मुमताज नई-नई फिल्मों में आई थीं और परिवार की जिम्मेदारी भी उन पर थी। ऐसे में मुमताज ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया।

कुछ सालों बाद 27 जनवरी 1969 को शम्मी कपूर ने बचपन की दोस्त और भावनगर राज्य के गोहिल साम्राज्य की प्रिंसेस नीला देवी से शादी की। नीला उनसे 10 साल छोटी थीं। इस शादी से उन्हें कोई संतान नहीं हुई।

नीला देवी के साथ शम्मी कपूर की तस्वीर।
साल बीते और मुमताज शादी कर विदेश चली गईं। सालों बाद जब वो भारत लौटीं, तो 2010 में एक शाम उनके पास नीला देवी का कॉल आया। उन्होंने कहा कि शम्मी कपूर चाहते हैं कि मुमताज उनकी बर्थडे पार्टी में आएं।
जवाब मिला- ‘मैं जरूर आऊंगी।’
जैसे ही वो पार्टी में पहुंची, तो देखा शम्मी कपूर शराब पी रहे हैं। इस बात की जानकारी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हर शख्स को थी कि शम्मी कपूर की तबीयत कई महीनों से बिगड़ी हुई है।
मुमताज पास पहुंचीं और कहा- ‘अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है तो आप शराब क्यों पी रहे हैं।’
शम्मी कपूर ने जवाब में कहा- ‘मैं ज्यादा दिनों तक नहीं जीने वाला।’
मुमताज को उस दिन ही पता चला कि शम्मी कपूर चंद महीनों के ही मेहमान हैं। वो भावुक हो गईं और कहा- ‘आप पी सकते हैं। एन्जॉय योरसेल्फ। ’
कुछ देर बाद मुमताज वहां से चली गईं। जाते हुए बस कहा- ‘अपना ख्याल रखना।’
कुछ महीनों बाद 14 अगस्त 2011 को शम्मी कपूर का निधन हो गया।
शम्मी कपूर से जुड़ी ये बातें भी पढ़िए-
- शम्मी कपूर ने 1953 से 2011 तक करीब 58 साल के अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
- 1953 में फिल्म जीवन ज्योति से डेब्यू किया, 1957 में तुमसा नहीं देखा से पहली बड़ी सफलता मिली।
- 1961 में जंगली से सुपरस्टार बने, ‘याहू…चाहे कोई मुझे जंगली कहे’ गाना उनकी पहचान बन गया।
- अपने एनर्जेटिक डांस, रोमांटिक अंदाज और स्टाइल के लिए सबसे ज्यादा मशहूर हुए। उन्हें भारत का एल्विस प्रेस्ली कहा जाता है।
- 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक हीरो में शामिल रहे। जंगली, प्रोफेसर, कश्मीर की कली, जानवर, तीसरी मंजिल, ब्रह्मचारी और एन इवनिंग इन पेरिस उनकी प्रमुख हिट फिल्में रहीं।
- 1969 में ब्रह्मचारी के लिए बेस्ट एक्टर का पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। 1983 में विधाता के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता। 1995 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित हुए।
- एक्टिंग के अलावा मनोरंजन (1974) और बंडलबाज (1976) जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया।
- 2011 में रिलीज हुई रॉकस्टार उनकी आखिरी फिल्म रही। इसमें उनके भतीजे रणबीर कपूर लीड हीरो थे।
- शम्मी कपूर भारत में इंटरनेट के शुरुआती समर्थकों में शामिल रहे और इंटरनेट यूजर्स कम्युनिटी ऑफ इंडिया के संस्थापक-अध्यक्ष बने।
















































