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ATF Up 6%, Rupee Fall & Geopolitical Tensions Hit Airlines

ATF Up 6%, Rupee Fall & Geopolitical Tensions Hit Airlines
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  • Indian Aviation Crisis 2026: ATF Up 6%, Rupee Fall & Geopolitical Tensions Hit Airlines

नई दिल्ली48 मिनट पहले

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एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।

भारतीय एविएशन इंडस्ट्री एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल, डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी यानी मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है।

हालांकि, ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आने से राहत मिली है, लेकिन इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने से एयरलाइंस का खर्च बढ़ गया है।

मार्च में 6% महंगा हुआ जेट फ्यूल, ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ी

एयरलाइंस के लिए फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% तक होती है। फरवरी 2026 तक 11 महीनों में ATF की एवरेज कीमत 91,173 रुपए प्रति किलोलीटर (KL) थी, लेकिन मार्च 2026 में यह 6% बढ़कर 96,638 रुपए प्रति KL पर पहुंच गई है।

अगर कोविड से पहले (वित्त वर्ष 2020) के स्तर से तुलना करें, तो तब कीमत 64,715 रुपए प्रति KL थी। यानी अब भी कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान-इजराइल जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जो एयरलाइंस के लिए बड़ा रिस्क है।

वित्त वर्ष 2026 में रुपया 9% कमजोर हुआ

वित्त वर्ष 2026 में भारतीय रुपया करीब 9% तक कमजोर हुआ है। वहीं भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। एयरलाइंस के कई बड़े खर्च डॉलर में होते हैं, जैसे…

  • विमानों का लीज पेमेंट
  • इंजन-एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस खर्च
  • स्पेयर पार्ट्स की खरीद
  • विदेशी क्रू मेंबर्स की सैलरी
  • कर्ज का भुगतान

रुपया गिरने से इन सभी खर्चों का बोझ बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि घाटे में चल रही एयरलाइंस के लिए कम मार्जिन के बीच यह दोहरी मार जैसा है।

मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है।

ईरान-इजराइल युद्ध और पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से खर्च बढ़ा

मिडिल ईस्ट में तनाव और पाकिस्तान एयरस्पेस के लगातार बंद रहने से भारतीय एयरलाइंस को अपने इंटरनेशनल रूट्स बदलने पड़ रहे हैं। एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूट बदलने से फ्लाइट टाइम बढ़ गया है और इससे फ्यूल की खपत भी ज्यादा हो रही है।

हालांकि एयरलाइंस इस बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा पैसेंजर्स से वसूलने की कोशिश करेंगी, लेकिन घरेलू बाजार में बढ़ते कॉम्पिटिशन की वजह से किराए में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करना मुश्किल होगा।

एअर इंडिया और इंडिगो की क्षमता पर असर

HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है…

  • एअर इंडिया: क्षमता का 40% से ज्यादा हिस्सा प्रभावित।
  • स्पाइसजेट: करीब 32% क्षमता पर असर।
  • इंडिगो: 20% तक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

यूरोप और मिडिल ईस्ट के कई रूट्स पर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे एयरलाइंस का रेवेन्यू घट रहा है।

ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आई

इंडस्ट्री के लिए एक अच्छी खबर यह है कि खड़े हुए यानी ग्राउंडेड विमानों की स्थिति सुधर रही है। ICRA की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह के मुताबिक, इंजन की खराबी और सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से सितंबर 2023 में 20-22% विमान खड़े थे।

फरवरी 2026 तक यह घटकर 13-15% रह गया है। फिलहाल देश में करीब 117 विमान ही ग्राउंडेड हैं। जैसे-जैसे नए विमान बेड़े में शामिल होंगे, सप्लाई और डिमांड के बीच तालमेल बेहतर होगा।

ये खबर भी पढ़ें…

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, पहली बार 92.05 पर आया: इजराइल-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत का असर, विदेशी सामान महंगे होंगे

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल के बढ़ते दाम के कारण भारतीय रुपया आज 4 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले जनवरी में रुपया 91.98 के निचले स्तर पर गया था।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक युद्ध शांत नहीं होता, रुपए पर दबाव बना रह सकता है। इस साल रुपए में अब तक 2% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इससे चलते यह 2026 में दुनिया के इमर्जिंग मार्केट्स की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में से एक बन गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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नई दिल्ली48 मिनट पहले

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एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।

भारतीय एविएशन इंडस्ट्री एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल, डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी यानी मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है।

हालांकि, ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आने से राहत मिली है, लेकिन इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने से एयरलाइंस का खर्च बढ़ गया है।

मार्च में 6% महंगा हुआ जेट फ्यूल, ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ी

एयरलाइंस के लिए फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% तक होती है। फरवरी 2026 तक 11 महीनों में ATF की एवरेज कीमत 91,173 रुपए प्रति किलोलीटर (KL) थी, लेकिन मार्च 2026 में यह 6% बढ़कर 96,638 रुपए प्रति KL पर पहुंच गई है।

अगर कोविड से पहले (वित्त वर्ष 2020) के स्तर से तुलना करें, तो तब कीमत 64,715 रुपए प्रति KL थी। यानी अब भी कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव और ईरान-इजराइल जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जो एयरलाइंस के लिए बड़ा रिस्क है।

वित्त वर्ष 2026 में रुपया 9% कमजोर हुआ

वित्त वर्ष 2026 में भारतीय रुपया करीब 9% तक कमजोर हुआ है। वहीं भारतीय रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। एयरलाइंस के कई बड़े खर्च डॉलर में होते हैं, जैसे…

  • विमानों का लीज पेमेंट
  • इंजन-एयरक्राफ्ट का मेंटेनेंस खर्च
  • स्पेयर पार्ट्स की खरीद
  • विदेशी क्रू मेंबर्स की सैलरी
  • कर्ज का भुगतान

रुपया गिरने से इन सभी खर्चों का बोझ बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि घाटे में चल रही एयरलाइंस के लिए कम मार्जिन के बीच यह दोहरी मार जैसा है।

मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है।

ईरान-इजराइल युद्ध और पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से खर्च बढ़ा

मिडिल ईस्ट में तनाव और पाकिस्तान एयरस्पेस के लगातार बंद रहने से भारतीय एयरलाइंस को अपने इंटरनेशनल रूट्स बदलने पड़ रहे हैं। एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूट बदलने से फ्लाइट टाइम बढ़ गया है और इससे फ्यूल की खपत भी ज्यादा हो रही है।

हालांकि एयरलाइंस इस बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा पैसेंजर्स से वसूलने की कोशिश करेंगी, लेकिन घरेलू बाजार में बढ़ते कॉम्पिटिशन की वजह से किराए में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी करना मुश्किल होगा।

एअर इंडिया और इंडिगो की क्षमता पर असर

HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट का सबसे ज्यादा असर एअर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो की इंटरनेशनल उड़ानों पर पड़ रहा है…

  • एअर इंडिया: क्षमता का 40% से ज्यादा हिस्सा प्रभावित।
  • स्पाइसजेट: करीब 32% क्षमता पर असर।
  • इंडिगो: 20% तक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

यूरोप और मिडिल ईस्ट के कई रूट्स पर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं, जिससे एयरलाइंस का रेवेन्यू घट रहा है।

ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आई

इंडस्ट्री के लिए एक अच्छी खबर यह है कि खड़े हुए यानी ग्राउंडेड विमानों की स्थिति सुधर रही है। ICRA की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट किंजल शाह के मुताबिक, इंजन की खराबी और सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से सितंबर 2023 में 20-22% विमान खड़े थे।

फरवरी 2026 तक यह घटकर 13-15% रह गया है। फिलहाल देश में करीब 117 विमान ही ग्राउंडेड हैं। जैसे-जैसे नए विमान बेड़े में शामिल होंगे, सप्लाई और डिमांड के बीच तालमेल बेहतर होगा।

ये खबर भी पढ़ें…

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, पहली बार 92.05 पर आया: इजराइल-ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत का असर, विदेशी सामान महंगे होंगे

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल के बढ़ते दाम के कारण भारतीय रुपया आज 4 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले जनवरी में रुपया 91.98 के निचले स्तर पर गया था।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक युद्ध शांत नहीं होता, रुपए पर दबाव बना रह सकता है। इस साल रुपए में अब तक 2% से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इससे चलते यह 2026 में दुनिया के इमर्जिंग मार्केट्स की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में से एक बन गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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