Tuesday, 27 Oct 2026 | 02:18 PM

Trending :

सिंगर नील यंग ने ट्रम्प की टीम पर किया केस:बिना अनुमति गाना बजाने पर मांगे ₹95 करोड़; 2020 में भी किया था मुकदमा RBI Inauguration Ahmedabad | World Weightlifting Championship 2029 Update शाहरुख की फिल्म ‘किंग’ का नया पोस्टर रिलीज:होंठों पर गुलाब, आंखों में गुस्सा दिखा, एक्टर ने लिखा- कातिल नहीं, आशिक हूं शाहरुख की फिल्म ‘किंग’ का नया पोस्टर रिलीज:होंठों पर गुलाब, आंखों में गुस्सा दिखा, एक्टर ने लिखा- कातिल नहीं, आशिक हूं टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस:इमरान हाशमी के घर की रेकी करने पहुंचे थे शूटर, स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद भी नहीं ढूंढ पाए घर सारा अली खान-2 दिन से केदारनाथ में कर रहीं आरती:दोस्तों के साथ बनाई रील; लोगों के साथ पी चाय, बोलीं- बाबा का धाम मेरा घर
EXCLUSIVE

Petrol Diesel Price Hike India

Petrol Diesel Price Hike India
  • Hindi News
  • Business
  • Petrol Diesel Price Hike India | Fuel Costs Rise Rs 7.5; Food Prices To Increase

नई दिल्ली2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में तेल कंपनियां पेट्रोल डीजल की कीमत में 2.5 रुपए तक का इजाफा कर सकती हैं। अभी देश में 15 मई से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब ₹7.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार (2 जून) को अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि, अगर ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो तेल कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए आने वाले दिनों में कुल बढ़ोतरी को ₹10 प्रति लीटर तक ले जा सकती हैं।

फ्यूल महंगा होने से खुदरा महंगाई भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूल की कीमतों में ₹7.5 प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर खुदरा महंगाई में करीब 36 बेसिस पॉइंट्स (0.36%) जोड़ सकती है। वहीं, अगर यह बढ़ोतरी ₹10 प्रति लीटर तक पहुंचती है, तो महंगाई पर इसका असर बढ़कर लगभग 48 बेसिस पॉइंट्स (0.48%) हो जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के कंज्यूमर गुड्स पर दिखाई देगा।

मालभाड़ा बढ़ने से बिगड़ेगा रसोई का बजट

भारत में माल ढुलाई का करीब 71% हिस्सा सड़क परिवहन के जरिए होता है और ट्रांसपोर्टर्स के कुल ऑपरेटिंग खर्च में ईंधन (डीजल) की हिस्सेदारी लगभग 42% होती है। रिटेल फ्यूल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी जो पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित करेगी। क्रिसिल के मुताबिक, परिवहन पर निर्भर रहने वाली खाद्य श्रेणियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।

इन चीजों के दाम बढ़ने की सबसे ज्यादा आशंका

  • डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, दही, पनीर)
  • चाय और कॉफी
  • ताजे फल और दालें
  • मसाले, अंडे, मीट और मछली

सीमेंट, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स भी महंगे हो सकते हैं

फ्यूल के दाम बढ़ने से सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि कोर इन्फ्लेशन (गैर-खाद्य और गैर-ऊर्जा महंगाई) भी बढ़ेगी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पहले से ही कच्चे तेल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और नेचुरल गैस की ऊंची कीमतों से जूझ रहा है।

क्रिसिल ने बताया कि कपड़ा, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी के उत्पाद और सीमेंट और सिरेमिक जैसी कंस्ट्रक्शन सामग्रियां सबसे ज्यादा ट्रांसपोर्ट-इंटेन्सिव (परिवहन पर निर्भर) उद्योग हैं। मांग स्थिर होने से कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल सकती हैं या फिर कीमत वही रखकर पैकेट का साइज छोटा करने का रास्ता अपना सकती हैं। इसके अलावा केमिकल्स, कोयला और मेटल से जुड़े प्रोडक्ट्स की इनपुट कॉस्ट भी बढ़ेगी।

GST कटौती से थोड़ी राहत, लेकिन क्रूड $112 के पार

रिपोर्ट में नोट किया गया है कि सितंबर 2025 में सरकार की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, कपड़े और FMCG जैसे मास-कंजम्पशन आइटम्स पर की गई GST कटौती से ग्राहकों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह राहत महंगे तेल के झटके को पूरी तरह से बेअसर नहीं कर पाएगी।

मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY27) के शुरुआती दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत $112 प्रति बैरल रही है, जो क्रिसिल के पूरे साल के अनुमान ($95 प्रति बैरल) से काफी ज्यादा है। हालांकि, मौजूदा हेडलाइन इन्फ्लेशन RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे है, लेकिन क्रिसिल का अनुमान है कि यह ऊपर की ओर ट्रेंड करेगी।

फिर भी, यह RBI के 2-6% के टॉलरेंस बैंड (संतोषजनक दायरे) के भीतर ही रहेगी। केंद्रीय बैंक इस सप्लाई-साइड प्रेशर के साथ-साथ खराब मानसून और अल नीनो के खतरों पर भी कड़ी नजर रखेगा।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

बेस प्राइस से तीन-चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं:

  • 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।
  • 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।
  • 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।
  • 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर डीलर्स को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।
  • 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती है।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी

सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी।

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह ₹11.90 रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गई थी।

सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें…

पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था।

पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमारे पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं। हमें आज ये संकल्प लेना होगा कि अगले 1 साल तक कोई भी कार्यक्रम हो, सोना न खरीदें। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
10 पेटी अंग्रेजी शराब के साथ दो आरोपी गिरफ्तार:रायसेन-विदिशा से सस्ती शराब लाकर भोपाल में होम डिलीवरी कर रहे थे

April 7, 2026/
11:15 pm

शहर में अवैध शराब तस्करी पर कार्रवाई करते हुए अयोध्यानगर पुलिस ने दो तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से...

सोमवार को गिरावट के साथ खुल सकता है भारतीय बाजार:गिफ्टी निफ्टी में 150 अंकों की कमजोरी; 8% टूटा दक्षिण कोरिया का कोस्पी

June 26, 2026/
11:28 am

मुहर्रम की छुट्टी के कारण आज 26 जून को भारतीय शेयर बाजार बंद हैं। लेकिन वैश्विक बाजारों में मंदी के...

‘एसवी एल्वरसबर्ग’ पहली बार ‘बुंदेसलीगा’ के लिए क्वालिफाई:1907 में बना एल्वरसबर्ग जर्मन लीग में खेलने वाला सबसे छोटा और कुल 59वां क्लब बनेगा

May 21, 2026/
1:40 pm

जर्मनी के एक बेहद छोटे से कस्बे एल्वरसबर्ग ने फुटबॉल की दुनिया में एक बड़ा चमत्कार कर दिखाया है। महज...

राजगढ़ में विहिप-बजरंग दल का प्रदर्शन:लव जिहाद के खिलाफ कानून की मांग; राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा

April 18, 2026/
7:46 pm

राजगढ़ में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शनिवार को शिवाजी चौराहे पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं...

Dehradun Secretariat Super League 2026 Inauguration

April 3, 2026/
6:15 pm

राजधानी के रायपुर स्थित महाराणा प्रताप क्रिकेट ग्राउंड में बहुप्रतीक्षित ‘सचिवालय सुपर लीग 2026’ का शानदार आगाज हो गया है।...

गुरुवार भस्म आरती दर्शन:रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला, भांग, चंदन अर्पित कर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

February 26, 2026/
7:27 am

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के भस्म आरती चार बजे शुरू हुई। मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारी...

वर्ल्ड अपडेट्स:पोलैंड की नेता ने 'हिटलर' जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंकी

July 14, 2026/
10:55 am

पोलैंड की राजनेता और क्राकोव की मेयर पद की उम्मीदवार मरिआना श्राइबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर...

उमा बोलीं-आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता:राष्ट्रपति-पीएम के परिवार के लोग सरकारी स्कूल नहीं जाएंगे, तब तक रहेगा; यही शिवराज भी कह चुके

April 28, 2026/
11:29 am

भोपाल के जम्बूरी मैदान में पूर्व सीएम उमा भारती ने आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने मंगलवार को राजा...

राजनीति

Petrol Diesel Price Hike India

Petrol Diesel Price Hike India
  • Hindi News
  • Business
  • Petrol Diesel Price Hike India | Fuel Costs Rise Rs 7.5; Food Prices To Increase

नई दिल्ली2 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत में तेल कंपनियां पेट्रोल डीजल की कीमत में 2.5 रुपए तक का इजाफा कर सकती हैं। अभी देश में 15 मई से अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब ₹7.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार (2 जून) को अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि, अगर ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो तेल कंपनियां अपना घाटा कम करने के लिए आने वाले दिनों में कुल बढ़ोतरी को ₹10 प्रति लीटर तक ले जा सकती हैं।

फ्यूल महंगा होने से खुदरा महंगाई भी बढ़ेगी

रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूल की कीमतों में ₹7.5 प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर खुदरा महंगाई में करीब 36 बेसिस पॉइंट्स (0.36%) जोड़ सकती है। वहीं, अगर यह बढ़ोतरी ₹10 प्रति लीटर तक पहुंचती है, तो महंगाई पर इसका असर बढ़कर लगभग 48 बेसिस पॉइंट्स (0.48%) हो जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसका सीधा असर आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के कंज्यूमर गुड्स पर दिखाई देगा।

मालभाड़ा बढ़ने से बिगड़ेगा रसोई का बजट

भारत में माल ढुलाई का करीब 71% हिस्सा सड़क परिवहन के जरिए होता है और ट्रांसपोर्टर्स के कुल ऑपरेटिंग खर्च में ईंधन (डीजल) की हिस्सेदारी लगभग 42% होती है। रिटेल फ्यूल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी जो पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित करेगी। क्रिसिल के मुताबिक, परिवहन पर निर्भर रहने वाली खाद्य श्रेणियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।

इन चीजों के दाम बढ़ने की सबसे ज्यादा आशंका

  • डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, दही, पनीर)
  • चाय और कॉफी
  • ताजे फल और दालें
  • मसाले, अंडे, मीट और मछली

सीमेंट, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स भी महंगे हो सकते हैं

फ्यूल के दाम बढ़ने से सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि कोर इन्फ्लेशन (गैर-खाद्य और गैर-ऊर्जा महंगाई) भी बढ़ेगी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पहले से ही कच्चे तेल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और नेचुरल गैस की ऊंची कीमतों से जूझ रहा है।

क्रिसिल ने बताया कि कपड़ा, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी के उत्पाद और सीमेंट और सिरेमिक जैसी कंस्ट्रक्शन सामग्रियां सबसे ज्यादा ट्रांसपोर्ट-इंटेन्सिव (परिवहन पर निर्भर) उद्योग हैं। मांग स्थिर होने से कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल सकती हैं या फिर कीमत वही रखकर पैकेट का साइज छोटा करने का रास्ता अपना सकती हैं। इसके अलावा केमिकल्स, कोयला और मेटल से जुड़े प्रोडक्ट्स की इनपुट कॉस्ट भी बढ़ेगी।

GST कटौती से थोड़ी राहत, लेकिन क्रूड $112 के पार

रिपोर्ट में नोट किया गया है कि सितंबर 2025 में सरकार की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, कपड़े और FMCG जैसे मास-कंजम्पशन आइटम्स पर की गई GST कटौती से ग्राहकों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह राहत महंगे तेल के झटके को पूरी तरह से बेअसर नहीं कर पाएगी।

मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY27) के शुरुआती दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत $112 प्रति बैरल रही है, जो क्रिसिल के पूरे साल के अनुमान ($95 प्रति बैरल) से काफी ज्यादा है। हालांकि, मौजूदा हेडलाइन इन्फ्लेशन RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे है, लेकिन क्रिसिल का अनुमान है कि यह ऊपर की ओर ट्रेंड करेगी।

फिर भी, यह RBI के 2-6% के टॉलरेंस बैंड (संतोषजनक दायरे) के भीतर ही रहेगी। केंद्रीय बैंक इस सप्लाई-साइड प्रेशर के साथ-साथ खराब मानसून और अल नीनो के खतरों पर भी कड़ी नजर रखेगा।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

बेस प्राइस से तीन-चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं:

  • 1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।
  • 2. रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।
  • 3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।
  • 4. डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर डीलर्स को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।
  • 5. राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती है।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटाई थी

सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी।

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह ₹11.90 रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गई थी।

सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे। पूरी खबर पढ़ें…

पीएम मोदी ने कहा था- ईंधन का इस्तेमाल कम करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था।

पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमारे पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं। हमें आज ये संकल्प लेना होगा कि अगले 1 साल तक कोई भी कार्यक्रम हो, सोना न खरीदें। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.