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ईरान बोला- जंग में पाकिस्तान का कोई रोल नहीं:ट्रम्प की धमकी पर कहा- 47 साल में कुछ नहीं कर पाए, अब भी नहीं कर पाएंगे

ईरान बोला- जंग में पाकिस्तान का कोई रोल नहीं:ट्रम्प की धमकी पर कहा- 47 साल में कुछ नहीं कर पाए, अब भी नहीं कर पाएंगे

ईरान ने जंग में पाकिस्तान के किसी भी रोल से इनकार किया है। भारत में मौजूद ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने रविवार को कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के जरिए बातचीत की खबरें पूरी तरह गलत हैं और इनका कोई सच नहीं है। इलाही ने कहा कि ऐसी खबरें सिर्फ तेल की कीमतों को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। उन्होंने साफ किया कि इस समय कोई गंभीर बातचीत नहीं चल रही है और कुछ देश सिर्फ दिखावे के लिए बातचीत की बात कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकी पर इलाही ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, अमेरिका पिछले 47 सालों में भी ईरान का कुछ नहीं कर पाया और आगे भी कुछ नहीं कर पाएगा। ट्रम्प के इस दावे पर कि अमेरिका जंग जीत चुका है, इलाही ने कहा कि इसका जवाब जंग के मैदान में दिया जाएगा। अमेरिका 3 दिन में सब खत्म करने की बात कर रहा था, लेकिन अब एक महीने से ज्यादा हो चुका है और जंग अभी भी जारी है। ट्रम्प ने ईरान को नरक जैसे हालात में पहुंचाने की धमकी दी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को बास्टर्ड कहते हुए होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलने पर बड़ा हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो वो उसे नरक बना देंगे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान में पावर प्लांट और पुलों पर हमला करने की बात कही। ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होगा यानी हमला होगा। ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोले दे, नहीं तो नरक जैसे हालात में पहुंच जाएगा। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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कनाडा में खालिस्तानियों ने 100-100 डॉलर देकर जुटाई भीड़:मंदिर के बाहर हिंदू-भारत विरोधी नारे लगाए; बोले- हरियाणा-दिल्ली, बीकानेर हमारे

कनाडा में खालिस्तानियों ने 100-100 डॉलर देकर जुटाई भीड़:मंदिर के बाहर हिंदू-भारत विरोधी नारे लगाए; बोले- हरियाणा-दिल्ली, बीकानेर हमारे

कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में खालिस्तानियों ने त्रिवेणी मंदिर के बाहर भारत के खिलाफ नारे लगाए। खालिस्तानियों के जुटने से शहर में 2 घंटे तक तनावपूर्ण माहौल रहा। हिंसक घटना को रोकने के लिए कनाडा पुलिस का भारी बल तैनात रहा। खालिस्तानियों ने नारे लगाते हुए हरियाणा-दिल्ली और बीकानेर पर अपना हक बताया। वहीं, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के लिए ये खालिस्तान समर्थक भाड़े पर लाए गए थे। एक्स पर एक यूजर दर्शन महाराजा ने लिखा कि खालिस्तानी आतंकियों ने लोगों को जुटाने के लिए 100-100 डॉलर का लालच दिया। इसके चलते 40 से 50 के करीब लोगों को नारे लगाने के लिए उकसाया गया। सरे में प्रदर्शन नहीं करने दिया 5 मार्च की दोपहर जब मंदिर में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए इकट्‌ठे हो रहे थे, तभी दोपहर लगभग 12 बजे से 2 बजे के बीच मंदिर के सामने वाली सड़क पर खालिस्तान समर्थक जमा होने शुरू हो गए। प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध दर्ज करवाया। इसी तरह का एक प्रदर्शन ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर भी प्रस्तावित था, लेकिन वहां खालिस्तानियों को प्रदर्शन नहीं करने दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया किया कि प्रदर्शन में लगभग 40 लोग मौजूद थे। ये लोग सड़क किनारे लगाए गए मेटल बैरिकेड्स के पीछे खड़े होकर पीले खालिस्तानी झंडे लहरा रहे थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में कुछ विवादित पोस्टर भी थे, जिन पर वांटेड लिखा हुआ था और कुछ व्यक्तियों की तस्वीरें भी थीं। दावा- प्रदर्शन में भीड़ जुटाने के लिए दिया था 100 डालर देने का लालच इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब घटनास्थल पर मौजूद विश्लेषक और फ्रीलांस पत्रकार दर्शन महाराजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खुलासा किया। महाराजा ने बताया कि वहां मौजूद एक व्यक्ति ने ऑफ-कैमरा उन्हें जानकारी दी कि इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को 100 कनाडाई डॉलर दिए जा रहे हैं। यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे इन प्रदर्शनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आलोचकों का कहना है कि कनाडा में खालिस्तानी आंदोलन को जीवित दिखाने के लिए अब भाड़े की भीड़ का सहारा लिया जा रहा है। दर्शन महाराजा ने कनाडाई राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों में वोट और डोनेशन के लालच में यहां के नेताओं ने ऐसे तत्वों को संरक्षण दिया है। उसी का नतीजा है कि आज ये लोग बेलगाम हो चुके हैं। झड़प रोकने के लिए मौके पर रही कड़ी सुरक्षा प्रदर्शन की संवेदनशीलता को देखते हुए पील रीजनल पुलिस मुस्तैद रही। मंदिर के आसपास की सड़कों पर पुलिस की सफेद SUV लगातार गश्त कर रही थीं। किसी भी संभावित झड़प को रोकने के लिए 100 मीटर का सेफ्टी जोन बनाया गया था। पुलिस की मुस्तैदी के कारण कोई हिंसा या शोर-शराबा नहीं हुआ। प्रदर्शन में एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि इतने संवेदनशील मुद्दे के बावजूद कनाडा मीडिया ने खालिस्तानियों को कवरेज नहीं दी। स्थानीय हिंदू समुदाय का आरोप है कि कनाडाई मीडिया अक्सर ऐसे मामलों को नजरअंदाज करता है। हिंदू समुदाय ने दी अपनी तीखी प्रतिक्रिया हिंदू कनाडियन फाउंडेशन (HCF) और त्रिवेणी मंदिर प्रशासन ने इस प्रदर्शन की निंदा की है। समुदाय के नेताओं का कहना है कि पूजा स्थलों के बाहर इस तरह के राजनीतिक प्रदर्शनों का एकमात्र उद्देश्य भक्तों को डराना और शांति भंग करना है। HCF ने एक बयान में कहा कि हम अपने पूजा करने के अधिकार की रक्षा करेंगे। किसी भी प्रकार की धमकी या उकसावे वाली कार्रवाई हमें हमारे विश्वास से पीछे नहीं हटा सकती। मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस बात पर नाराजगी जताई कि उन्हें अपने ही पूजा स्थल पर जाने के लिए पुलिस बैरिकेड्स और विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर छिड़ी पोस्ट वार भारतीय और हिंदू यूजर्स ने इसे ISI प्रायोजित ड्रामा करार दिया और 100 डॉलर वाले दावे पर तंज कसते हुए कहा कि अब इस आंदोलन की हकीकत सामने आ गई है। सिख समुदाय के एक बड़े वर्ग ने भी इन प्रदर्शनकारियों से खुद को अलग करते हुए कहा कि 20-25 लोग पूरी कम्युनिटी का प्रतिनिधित्व नहीं करते और वे मंदिर का पूरा सम्मान करते हैं। वहीं, दूसरी ओर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पैसे मिलने की बात को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपना वैचारिक संघर्ष बताया।

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ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैककार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैककार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। हालांकि, मिशन के दौरान एक बड़ी रुकावट भी आई। दो ट्रांसपोर्ट विमान, जो कमांडो और एयरमैन को निकालने वाले थे, ईरान के एक दूरदराज बेस पर खराब हो गए। इसके बाद तीन नए विमान भेजे गए। अमेरिकी फोर्स ने उन खराब विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए।

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ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रेवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैक्कार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैक्कार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। अमेरिका ने निकलने से पहले अपने दो विमान जलाए द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से एक बचाए गए अमेरिकी एयरमैन और कमांडो को निकालने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए थे। इसके बाद अमेरिका को तीन नए विमान भेजने पड़े, ताकि एयरमैन और सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अमेरिकी सेना ने उन फंसे हुए ट्रांसपोर्ट विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ईरान के अंदर से आई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ये विमान एक अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंस गए थे, जिसे अमेरिकी सेना ने देश के एक दूरदराज इलाके में बनाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस पूरे रेस्क्यू मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बचाए गए वेपन्स ऑफिसर को रेस्क्यू के बाद इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और

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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की भारत को धमकी:कहा- अगला युद्ध बॉर्डर तक नहीं रहेगा, कोलकाता तक पहुंचेंगे; उनके घरों में ही उन पर हमला करेंगे

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की भारत को धमकी:कहा- अगला युद्ध बॉर्डर तक नहीं रहेगा, कोलकाता तक पहुंचेंगे; उनके घरों में ही उन पर हमला करेंगे

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शनिवार को सियालकोट में पत्रकारों से बात करते हुए भारत को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर भारत कोई फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला) करता है, तो इस बार संघर्ष सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता तक पहुंच सकता है। ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भारत अपने लोगों या हिरासत में बंद पाकिस्तानियों का इस्तेमाल करके झूठा ड्रामा रचने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि शवों को कहीं रखकर आतंकवाद का आरोप पाकिस्तान पर लगाया जा सकता है। लेकिन उन्होंने इस दावे के लिए कोई सबूत नहीं दिया। ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भारत को और ज्यादा शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा। भारतीय रक्षा मंत्री बोले थे- पाकिस्तान ने गंदा खेल खेला तो जवाब देंगे ख्वाजा आसिफ के इस बयान पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केरलम में एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान फिर कोई गलत कदम उठाएगा तो भारतीय सेना निर्णायक जवाब देगी। राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर पाकिस्तान ने दोबारा गंदा खेल खेला तो भारतीय सैनिक ऐसा जवाब देंगे जो वे कभी नहीं भूलेंगे। भारत पर प्रॉक्सी वॉर चलाने का आरोप लगा चुके ख्वाजा आसिफ ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में कहा था कि भारत और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर हमलों को लेकर नई दिल्ली और काबुल की सोच एक जैसी है। आसिफ ने कहा जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान अफगानिस्तान में दोबारा कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर अफगानिस्तान की ओर से शांति की कोई ठोस गारंटी नहीं मिलती है, तो पाकिस्तान वहां नए हमले करने से पीछे नहीं हटेगा। आसिफ ने यह भी कहा कि भारत के साथ युद्ध की संभावना अभी भी खत्म नहीं हुई है। पूर्व पाक उच्चायुक्त मुंबई और दिल्ली पर हमले की बात कह चुके इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भी विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला कर दे, तो पाकिस्तान को बिना एक पल सोचे मुंबई और नई दिल्ली पर हमला कर देना चाहिए। बासित ने कहा, “अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है तो हम अमेरिका तक नहीं पहुंच सकते क्योंकि वह हमारे न्यूक्लियर रेंज में नहीं है। ऐसे में हमारा क्या विकल्प होगा? भारत। बाद में जो होगा देख लेंगे।” उन्होंने यह भी कहाकि यह सबसे खराब स्थिति है, जो संभव नहीं है, लेकिन अगर पाकिस्तान पर कोई खतरा मंडराए तो भारत पर हमला करना पाकिस्तान के पास विकल्प होगा। पहलगाम हमले से बढ़ा तनाव 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई में आर्टिलरी, ड्रोन और मिसाइल का इस्तेमाल किया। दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनाव रहा, जिसके बाद 10 मई 2025 को सीजफायर हुआ। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकाने तबाह किए थे भारत ने 7 मई को रात डेढ़ बजे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के 9 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। सेना ने कहा था कि इस स्ट्राइक में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। पाकिस्तान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, भारत ने कोटली, बहावलपुर, मुरीदके, बाग और मुजफ्फराबाद में अटैक किया था। इसमें आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वॉर्टर और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर का ठिकाना भी शामिल था। ————————— ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में डीजल 55% और पेट्रोल 43% महंगा: डीजल 184 महंगा होकर 520, पेट्रोल 137 बढ़कर 458 रुपया/लीटर हुआ; ईरान जंग का असर पाकिस्तान में डीजल-पेट्रोल सबसे ज्यादा महंगा हो गया है। एक लीटर पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) के पार पहुंच गया है। सरकार ने पेट्रोल में 43% और हाई-स्पीड डीजल (HSD) के दाम में 55% का इजाफा किया है। पूरी खबर पढ़ें…

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पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की भारत को धमकी:कहा- अगला युद्ध बॉर्डर तक नहीं रहेगा, कोलकाता तक पहुंचेंगे; उनके घरों में ही उन पर हमला करेंगे

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की भारत को धमकी:कहा- अगला युद्ध बॉर्डर तक नहीं रहेगा, कोलकाता तक पहुंचेंगे; उनके घरों में ही उन पर हमला करेंगे

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शनिवार को सियालकोट में पत्रकारों से बात करते हुए भारत को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर भारत कोई फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला) करता है, तो इस बार संघर्ष सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता तक पहुंच सकता है। ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भारत अपने लोगों या हिरासत में बंद पाकिस्तानियों का इस्तेमाल करके झूठा ड्रामा रचने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि शवों को कहीं रखकर आतंकवाद का आरोप पाकिस्तान पर लगाया जा सकता है। लेकिन उन्होंने इस दावे के लिए कोई सबूत नहीं दिया। ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भारत को और ज्यादा शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा। भारतीय रक्षा मंत्री बोले थे- पाकिस्तान ने गंदा खेल खेला तो जवाब देंगे ख्वाजा आसिफ के इस बयान पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केरलम में एक कार्यक्रम में पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान फिर कोई गलत कदम उठाएगा तो भारतीय सेना निर्णायक जवाब देगी। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर पाकिस्तान ने दोबारा गंदा खेल खेला तो भारतीय सैनिक ऐसा जवाब देंगे जो वे कभी नहीं भूलेंगे। भारत पर प्रॉक्सी वॉर चलाने का आरोप लगा चुके ख्वाजा आसिफ ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में कहा था कि भारत और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर हमलों को लेकर नई दिल्ली और काबुल की सोच एक जैसी है। आसिफ ने कहा जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान अफगानिस्तान में दोबारा कार्रवाई कर सकता है। अगर अफगानिस्तान की ओर से शांति की कोई ठोस गारंटी नहीं मिलती है, तो पाकिस्तान वहां नए हमले करने से पीछे नहीं हटेगा। आसिफ ने यह भी कहा कि भारत के साथ युद्ध की संभावना अभी भी खत्म नहीं हुई है। पूर्व पाक उच्चायुक्त मुंबई और दिल्ली पर हमले की बात कह चुके इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भी विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला कर दे, तो पाकिस्तान को बिना एक पल सोचे मुंबई और नई दिल्ली पर हमला कर देना चाहिए। बासित ने कहा, “अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है तो हम अमेरिका तक नहीं पहुंच सकते क्योंकि वह हमारे न्यूक्लियर रेंज में नहीं है। ऐसे में हमारा क्या विकल्प होगा? भारत। बाद में जो होगा देख लेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि यह सबसे खराब स्थिति है, जो संभव नहीं है, लेकिन अगर पाकिस्तान पर कोई खतरा मंडराए तो भारत पर हमला करना पाकिस्तान के पास विकल्प होगा। पहलगाम हमले से बढ़ा तनाव 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई में आर्टिलरी, ड्रोन और मिसाइल का इस्तेमाल किया। दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनाव रहा, जिसके बाद 10 मई 2025 को सीजफायर हुआ। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकाने तबाह किए थे भारत ने 7 मई को रात डेढ़ बजे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के 9 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। सेना ने कहा था कि इस स्ट्राइक में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। पाकिस्तान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, भारत ने कोटली, बहावलपुर, मुरीदके, बाग और मुजफ्फराबाद में अटैक किया था। इसमें आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हेडक्वॉर्टर और जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर का ठिकाना भी शामिल था। ————————— ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में डीजल 55% और पेट्रोल 43% महंगा: डीजल 184 महंगा होकर 520, पेट्रोल 137 बढ़कर 458 रुपया/लीटर हुआ; ईरान जंग का असर पाकिस्तान में डीजल-पेट्रोल सबसे ज्यादा महंगा हो गया है। एक लीटर पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) के पार पहुंच गया है। सरकार ने पेट्रोल में 43% और हाई-स्पीड डीजल (HSD) के दाम में 55% का इजाफा किया है। पूरी खबर पढ़ें…

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World News Updates; Trump Pakistan China

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12 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को धमकी दी। उन्होंने शनिवार को कहा कि अगला संघर्ष सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता तक पहुंच सकता है। सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला करना) का आरोप लगाया, लेकिन इसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। आसिफ ने कहा कि अगर भारत कोई कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान जवाबी हमला भारतीय क्षेत्र के अंदर तक करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार संघर्ष 200-250 किमी तक सीमित नहीं रहेगा, हम उनके घरों तक जाएंगे। इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का निर्णायक जवाब दिया जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बसित ने भी भारत के शहरों को निशाना बनाने की बात कही थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई का नाम लिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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World News Updates; Trump Pakistan China

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30 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को धमकी दी। उन्होंने शनिवार को कहा कि अगला संघर्ष सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता तक पहुंच सकता है। सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला करना) का आरोप लगाया, लेकिन इसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। आसिफ ने कहा कि अगर भारत कोई कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान जवाबी हमला भारतीय क्षेत्र के अंदर तक करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार संघर्ष 200-250 किमी तक सीमित नहीं रहेगा, हम उनके घरों तक जाएंगे। इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का निर्णायक जवाब दिया जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बसित ने भी भारत के शहरों को निशाना बनाने की बात कही थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई का नाम लिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने ट्रम्प का 48 घंटे का अल्टीमेटम ठुकराया:कहा- बेबस और घबराकर धमकी दे रहे, तुम्हारे लिए नरक के दरवाजे खोल देंगे

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 48 घंटे में होर्मुज खोलने के अल्टीमेटम को ठुकरा दिया है। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिका बेबस और घबराकर धमकियां दे रहा है। ईरान के केंद्रीय सैन्य मुख्यालय खातम अल-अनबिया के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने ट्रम्प की चेतावनी को मूर्खतापूर्ण कार्रवाई बताया और इसे सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की धमकियों का मतलब है कि “तुम्हारे लिए भी नरक के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।” इससे पहले ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने या समझौता करने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा था कि समय खत्म हो रहा है और ऐसा नहीं होने पर ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया जाएगा। ट्रम्प अब तक होर्मुज खोलने के लिए ईरान को तीन बार अल्टीमेटम दे चुके हैं, जिससे इस मुद्दे पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान बोला- बुशहर न्यूक्लियर साइट पर 4 बार हमला हुआ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल ने बुशहर न्यूक्लियर साइट पर चार बार हमला किया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों से न केवल ईरान बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि न्यूक्लियर साइट के पास हमले बेहद जोखिम भरे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के जापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो चिंता दिखाई जाती है, वैसी संवेदनशीलता बुशेहर के मामले में नहीं दिख रही है। अराघची ने यह भी कहा कि पेट्रोकेमिकल ठिकानों पर हमले इस बात का संकेत हैं कि रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमलों से पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। ईरान जंग से जुड़ी 4 तस्वीरें… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

Jeffrey Epstein Claimed White House Insider; Hundreds of Messages with Anil Ambani

न्यूयॉर्क6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने 2017 में उद्योगपति अनिल अंबानी के सामने खुद को डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के व्हाइट हाउस के ‘इनसाइडर’ की तरह पेश किया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच दो साल तक सैकड़ों मैसेज और ईमेल हुए। इनमें एपस्टीन ने ट्रम्प प्रशासन की नियुक्ति व विदेश नीति से जुड़ी जानकारियां साझा कीं, जो बाद में सही भी निकलीं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि एपस्टीन की व्हाइट हाउस तक सीधी पहुंच थी। मैसेज में अनिल अंबानी ने एपस्टीन को लिखा था- ‘भारत के रिश्ते और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से डील करने में आपकी गाइडेंस चाहिए।’ जवाब में एपस्टीन ने ‘इनसाइड’ जानकारी देने का वादा किया। सिग्नल-टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर होती थी बात न्यूयॉर्क टाइम्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी मैसेज के रिव्यू के आधार पर बताया कि अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच बातचीत सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर होती थी, जहां अंबानी ‘अरमानी ए’ नाम से सक्रिय थे। यह संपर्क उस दौर का है जब एपस्टीन नाबालिगों से जुड़े अपराधों में जेल काट चुका था। इनका परिचय दुबई की कंपनी डीपी वर्ल्ड के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने कराया था। एपस्टीन ने जब दीपक चोपड़ा से अंबानी के बारे में राय मांगी, तो चोपड़ा ने उन्हें ‘बेहद अमीर, चर्चा में रहने का शौकीन और सेलेब्स के प्रति सजग’ व्यक्ति बताया था। टाइपो से भरे इन संदेशों में एपस्टीन खुद को असरदार पावर ब्रोकर के रूप में पेश करता दिखा। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से पूर्व सीआईए डायरेक्टर डेविड पेट्रेयस के भारत में अमेरिकी राजदूत बनने की संभावना पूछी थी। एपस्टीन ने जवाब दिया था- वे प्राथमिकता में नहीं हैं। बाद में केनेथ जस्टर राजदूत बने। जुलाई 2017 में एपस्टीन ने यह ‘इनसाइड’ जानकारी भी दी कि जॉन बोल्टन नए सुरक्षा सलाहकार (NSA) होंगे। हालांकि, तब ट्रम्प ने मौजूदा NSA मैकमास्टर का बचाव किया था। हालांकि, 8 महीने बाद एपस्टीन की बात सच साबित हुई और बोल्टन ने ही पद संभाला। एपस्टीन ने अनिल अंबानी को ट्रम्प के बेहद करीबी लोगों, जैसे स्टीफन बैनन और थॉमस बैरक जूनियर से मिलवाने का प्रस्ताव दिया था। बैरक उस वक्त ट्रम्प की इनॉगरेशन कमेटी के अध्यक्ष थे। एपस्टीन ने दिग्गजों को यह भरोसा दिलाया कि अंबानी से जुड़ना उनके लिए फायदेमंद होगा। वहीं, अनिल अंबानी ने खुद को भारत में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बताते हुए मैसेज लिखा कि ‘लीडरशिप’ चाहती है कि एपस्टीन उनकी मुलाकात जेरेड कुश्नर और बैनन से कराने में मदद करे। अनिल अंबानी की अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी में दिलचस्पी की वजह यह भी बताई गई है कि 2016 में उन्हें राफेल के पार्ट्स से जुड़ी डील मिली थी। उस वक्त आलोचकों ने भारत सरकार पर अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे, जिन्हें सरकार ने खारिज किया था। अंबानी ने लिखा था कि भारत के लिए अमेरिकी राजदूत का चयन उनके लिए बेहद ‘अहम’ है। वे चाहते थे कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों से निपटने के लिए इस पद पर कोई ‘मजबूत’ व्यक्ति आए। रिपोर्ट के मुताबिक संदेशों से स्पष्ट है कि अनिल अंबानी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे। उन्होंने खुद को अटलांटिक काउंसिल के एडवाइजरी बोर्ड में ‘इकलौते भारतीय’ के रूप में पेश किया। वहीं, एपस्टीन ने उन्हें कार्नेगी एंडोमेंट के विलियम जे. बर्न्स और थॉमस जे. प्रिट्जकर जैसे प्रभावशाली वैश्विक दिग्गजों से मिलवाने का वादा किया। एपस्टीन ने अंबानी को अपने घर डिनर पर बुलाकर बड़े राजनेताओं से नेटवर्किंग का मौका भी दिया। 2019 में जब अनिल अंबानी की कंपनियों पर आर्थिक संकट गहराया और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए भाई मुकेश अंबानी की मदद लेनी पड़ी, तब एपस्टीन उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने की सलाह दे रहा था। हालांकि एपस्टीन ने संदेशों में लिखा कि उसे पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन एक ईमेल में ‘ट्रांजैक्शन डन’ का जिक्र मिला। रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2019 को भारत में चुनावी नतीजों के दिन अनिल अंबानी न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे। इसके कुछ ही हफ्तों बाद एपस्टीन को नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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