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DRDO Missile Targets Tanks, Drones & Helicopters; Indigenous Tech Ready

DRDO Missile Targets Tanks, Drones & Helicopters; Indigenous Tech Ready

13 मिनट पहले

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भारत की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने ड्रोन से दागी जाने वाली मिसाइल का ट्रायल पूरा कर लिया है। इस मिसाइल का नाम यूएलपीजीएम-वी3 है। यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के टारगेट पर सटीक हमला कर सकती है।

यह हवा में दुश्मन के हेलिकॉप्टर, ड्रोन और दूसरे हवाई टारगेट को मार गिरा सकती है। वहीं जमीन पर टैंक, सैन्य वाहन और बंकर को निशाना बना सकती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मिसाइल का परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित DRDO टेस्ट रेंज में किया गया। इसमें इंटीग्रेटेड ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, जो लॉन्च और कमांड सिस्टम को कंट्रोल करता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा इस मिसाइल का सफल विकास रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम है।

DRDO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रायल का ये वीडियो शेयर किया।

DRDO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रायल का ये वीडियो शेयर किया।

चलते-फिरते टारगेट को भी लॉक कर सकती है

यूएलपीजीएम-वी3 एक स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल है। इसमें सीकर तकनीक लगी है, जिससे यह टार्गेट को पहचानकर लॉक करती है और फिर सटीक हमला करती है। चलते हुए लक्ष्य को भी ट्रैक कर सकती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इसे एंटी-टैंक रोल के लिए भी तैयार किया गया है। साथ ही यह ड्रोन, हेलिकॉप्टर और दूसरे हवाई लक्ष्यों के खिलाफ भी इस्तेमाल की जा सकती है।

DRDO ने भारतीय कंपनियों के साथ तैयार किया

इस मिसाइल को DRDO के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) की अगुआई में डेवलप किया गया है। इसके साथ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) भी इस प्रोजेक्ट में शामिल रहीं।

प्रोडक्शन के लिए DRDO ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी की है। ट्रायल में इसे बेंगलुरु की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज के बनाए UAV के साथ टेस्ट किया गया।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ट्रायल के बाद साफ है कि इसकी घरेलू सप्लाई चेन बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार है। बड़ी संख्या में भारतीय MSME कंपनियां भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा रही हैं।

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DRDO और नौसेना ने बुधवार को बंगाल की खाड़ी में हेलिकॉप्टर से शॉर्ट रेंज नेवल एंटी-शिप मिसाइल को सफल लॉन्च किया। इस दौरान एक हेलिकॉप्टर से कुछ ही सेकेंड के अंतर पर दो मिसाइलें दागी गईं। दोनों ने समुद्री जहाज के निचले हिस्से पर सटीक निशाना लगाया। पूरी खबर पढ़ें…

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13 मिनट पहले

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भारत की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने ड्रोन से दागी जाने वाली मिसाइल का ट्रायल पूरा कर लिया है। इस मिसाइल का नाम यूएलपीजीएम-वी3 है। यह हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के टारगेट पर सटीक हमला कर सकती है।

यह हवा में दुश्मन के हेलिकॉप्टर, ड्रोन और दूसरे हवाई टारगेट को मार गिरा सकती है। वहीं जमीन पर टैंक, सैन्य वाहन और बंकर को निशाना बना सकती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मिसाइल का परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुर्नूल स्थित DRDO टेस्ट रेंज में किया गया। इसमें इंटीग्रेटेड ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, जो लॉन्च और कमांड सिस्टम को कंट्रोल करता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा इस मिसाइल का सफल विकास रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम है।

DRDO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रायल का ये वीडियो शेयर किया।

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चलते-फिरते टारगेट को भी लॉक कर सकती है

यूएलपीजीएम-वी3 एक स्मार्ट प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल है। इसमें सीकर तकनीक लगी है, जिससे यह टार्गेट को पहचानकर लॉक करती है और फिर सटीक हमला करती है। चलते हुए लक्ष्य को भी ट्रैक कर सकती है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इसे एंटी-टैंक रोल के लिए भी तैयार किया गया है। साथ ही यह ड्रोन, हेलिकॉप्टर और दूसरे हवाई लक्ष्यों के खिलाफ भी इस्तेमाल की जा सकती है।

DRDO ने भारतीय कंपनियों के साथ तैयार किया

इस मिसाइल को DRDO के हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) की अगुआई में डेवलप किया गया है। इसके साथ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL), टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) और हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) भी इस प्रोजेक्ट में शामिल रहीं।

प्रोडक्शन के लिए DRDO ने भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी की है। ट्रायल में इसे बेंगलुरु की न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज के बनाए UAV के साथ टेस्ट किया गया।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ट्रायल के बाद साफ है कि इसकी घरेलू सप्लाई चेन बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार है। बड़ी संख्या में भारतीय MSME कंपनियां भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा रही हैं।

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