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Kedarnath Dham Glacier Path Opens

Kedarnath Dham Glacier Path Opens

केदारनाथ धाम के कपाट इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे।

उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसके तीन दिन बाद 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिससे वे बर्फ की ऊंची दीवारों के ब

.

श्रद्धालुओं के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले दिन हुए 42,405 रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़कर 15 अप्रैल तक 5,96,100 पहुंच गई है।

दैनिक भास्कर ने केदारनाथ धाम की तैयारियों, बर्फबारी की स्थिति और यात्रा प्रबंधन को लेकर रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। उनके मुताबिक, 100 से ज्यादा श्रमिकों ने दिन-रात काम कर बर्फ की मोटी परतों को काटते हुए श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार कर दिया है।

फिलहाल केदारनाथ धाम में बर्फ की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में अभी भी 2 से 3 फीट तक बर्फ जमी है। कुछ दिन पहले यह 4 से 5 फीट तक थी, जो अब धीरे-धीरे कम हो रही है। वहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर कई जगह ग्लेशियर टूटकर गिर गए थे, जहां 3 से 4 प्रमुख ग्लेशियर पॉइंट चिन्हित किए गए हैं।

थारू-चोराबारी ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया गया

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, थारू और चोराबारी जैसे ग्लेशियरों के टूटकर रास्ते में आने से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। यहां बर्फ की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच गई थी। मजदूरों ने इंसानी कद से भी ऊंची इन बर्फ की दीवारों को काटकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया है।

जब श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके दोनों तरफ 8-9 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें होंगी, जो एक अद्भुत अनुभव होगा।

बर्फ की परतों को इस तरह हटाते हुए रास्ता तैयार किया गया।

बर्फ की परतों को इस तरह हटाते हुए रास्ता तैयार किया गया।

कपाट खुलने से पहले पूरी होंगी तैयारियां

डीएम ने बताया कि यात्रा की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू (लाइन को व्यवस्थित तरीके से संभालना) मैनेजमेंट के साथ ही सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ का मुख्य पहुंच मार्ग अब पूरी तरह से साफ करा दिया गया है। इस भारी बर्फ को हटाने और मार्ग को सुचारू करने के लिए 100 से अधिक अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है।

अब सिर्फ मंदिर परिसर के पास जमी बर्फ को हटाने का काम अंतिम चरण में है। बाबा केदार की पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने से पहले मंदिर, परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह बर्फ से साफ हो जाएगा।

केदारनाथ में यात्रा प्रबंधन का जायजा लेती प्रशासन की टीम।

केदारनाथ में यात्रा प्रबंधन का जायजा लेती प्रशासन की टीम।

श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं

अक्सर भारी बर्फबारी के बाद यह अफवाहें उड़ने लगती हैं कि शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या सीमित की जाएगी, लेकिन प्रशासन ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की गई है।

बर्फबारी के कारण क्षतिग्रस्त हुई बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। धाम में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई है।

यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते जिलाधिकारी।

यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते जिलाधिकारी।

हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ

हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अच्छी खबर है। केदारनाथ स्थित हवाई पट्टी (हेलीपैड) से पूरी बर्फ साफ कर दी गई है। अब हेलीकॉप्टर की लैंडिंग में कोई बाधा नहीं है।

धार्मिक परंपराओं और शेड्यूल में बदलाव नहीं

भारी बर्फबारी के बावजूद मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर के सफाई अभियान से लेकर कपाट खुलने के तय मुहूर्त और शेड्यूल में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही यात्रा

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

2023 के बाद फिर दिखेगा ऐसा अद्भुत नजारा

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर अप्रैल के अंत तक केदारनाथ में बर्फ काफी हद तक पिघल जाती है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज अलग है। कपाट खुलने के समय इतनी भारी बर्फबारी का नजारा 2023 के बाद फिर देखने को मिल रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके हिमालय के बीच बाबा केदार के दर्शन का खास अनुभव मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पिछले साल 2025 में करीब 17.68 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।

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ये खबर भी पढ़ें…

चारधाम यात्रा- केदारनाथ में अब ‘नो रूम’ की टेंशन खत्म: 25 हजार यात्रियों के लिए नाइट स्टे का इंतजाम, कॉटेज और टेंट में मिलेगी सुविधा

चारधाम यात्रा से पहले केदारनाथ में इस बार ‘नो रूम’ की टेंशन खत्म होती दिख रही है। प्रशासन ने करीब 25 हजार तीर्थयात्रियों के नाइट स्टे की मजबूत प्लानिंग तैयार कर ली है। पैदल मार्ग से लेकर धाम तक कॉटेज और टेंट की व्यवस्था की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को नाइट स्टे के लिए भटकना न पड़े। पढ़ें पूरी खबर…

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उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसके तीन दिन बाद 22 अप्रैल को बर्फ की चादर के बीच केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए ग्लेशियर काटकर स्नो कॉरिडोर तैयार किया गया है, जिससे वे बर्फ की ऊंची दीवारों के ब

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श्रद्धालुओं के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले दिन हुए 42,405 रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़कर 15 अप्रैल तक 5,96,100 पहुंच गई है।

दैनिक भास्कर ने केदारनाथ धाम की तैयारियों, बर्फबारी की स्थिति और यात्रा प्रबंधन को लेकर रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। उनके मुताबिक, 100 से ज्यादा श्रमिकों ने दिन-रात काम कर बर्फ की मोटी परतों को काटते हुए श्रद्धालुओं के लिए रास्ता तैयार कर दिया है।

फिलहाल केदारनाथ धाम में बर्फ की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में अभी भी 2 से 3 फीट तक बर्फ जमी है। कुछ दिन पहले यह 4 से 5 फीट तक थी, जो अब धीरे-धीरे कम हो रही है। वहीं, गौरीकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर कई जगह ग्लेशियर टूटकर गिर गए थे, जहां 3 से 4 प्रमुख ग्लेशियर पॉइंट चिन्हित किए गए हैं।

थारू-चोराबारी ग्लेशियर काटकर रास्ता बनाया गया

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, थारू और चोराबारी जैसे ग्लेशियरों के टूटकर रास्ते में आने से बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। यहां बर्फ की ऊंचाई 8 से 10 फीट तक पहुंच गई थी। मजदूरों ने इंसानी कद से भी ऊंची इन बर्फ की दीवारों को काटकर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार किया है।

जब श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके दोनों तरफ 8-9 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें होंगी, जो एक अद्भुत अनुभव होगा।

बर्फ की परतों को इस तरह हटाते हुए रास्ता तैयार किया गया।

बर्फ की परतों को इस तरह हटाते हुए रास्ता तैयार किया गया।

कपाट खुलने से पहले पूरी होंगी तैयारियां

डीएम ने बताया कि यात्रा की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू (लाइन को व्यवस्थित तरीके से संभालना) मैनेजमेंट के साथ ही सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ का मुख्य पहुंच मार्ग अब पूरी तरह से साफ करा दिया गया है। इस भारी बर्फ को हटाने और मार्ग को सुचारू करने के लिए 100 से अधिक अनुभवी मजदूरों को लगाया गया है।

अब सिर्फ मंदिर परिसर के पास जमी बर्फ को हटाने का काम अंतिम चरण में है। बाबा केदार की पंचमुखी डोली के धाम पहुंचने से पहले मंदिर, परिक्रमा स्थल भी पूरी तरह बर्फ से साफ हो जाएगा।

केदारनाथ में यात्रा प्रबंधन का जायजा लेती प्रशासन की टीम।

केदारनाथ में यात्रा प्रबंधन का जायजा लेती प्रशासन की टीम।

श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई पाबंदी नहीं

अक्सर भारी बर्फबारी के बाद यह अफवाहें उड़ने लगती हैं कि शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या सीमित की जाएगी, लेकिन प्रशासन ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पर कोई सीमा तय नहीं की गई है।

बर्फबारी के कारण क्षतिग्रस्त हुई बिजली और पानी की लाइनों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। धाम में बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू हो गई है।

यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते जिलाधिकारी।

यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते जिलाधिकारी।

हेलीकॉप्टर सेवा के लिए हवाई पट्टी से बर्फ साफ

हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अच्छी खबर है। केदारनाथ स्थित हवाई पट्टी (हेलीपैड) से पूरी बर्फ साफ कर दी गई है। अब हेलीकॉप्टर की लैंडिंग में कोई बाधा नहीं है।

धार्मिक परंपराओं और शेड्यूल में बदलाव नहीं

भारी बर्फबारी के बावजूद मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर के सफाई अभियान से लेकर कपाट खुलने के तय मुहूर्त और शेड्यूल में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही यात्रा

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे।

2023 के बाद फिर दिखेगा ऐसा अद्भुत नजारा

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, आमतौर पर अप्रैल के अंत तक केदारनाथ में बर्फ काफी हद तक पिघल जाती है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज अलग है। कपाट खुलने के समय इतनी भारी बर्फबारी का नजारा 2023 के बाद फिर देखने को मिल रहा है। ऐसे में श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके हिमालय के बीच बाबा केदार के दर्शन का खास अनुभव मिलेगा। केदारनाथ यात्रा के लिए अब तक 5.96 लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पिछले साल 2025 में करीब 17.68 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।

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चारधाम यात्रा- केदारनाथ में अब ‘नो रूम’ की टेंशन खत्म: 25 हजार यात्रियों के लिए नाइट स्टे का इंतजाम, कॉटेज और टेंट में मिलेगी सुविधा

चारधाम यात्रा से पहले केदारनाथ में इस बार ‘नो रूम’ की टेंशन खत्म होती दिख रही है। प्रशासन ने करीब 25 हजार तीर्थयात्रियों के नाइट स्टे की मजबूत प्लानिंग तैयार कर ली है। पैदल मार्ग से लेकर धाम तक कॉटेज और टेंट की व्यवस्था की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को नाइट स्टे के लिए भटकना न पड़े। पढ़ें पूरी खबर…

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