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National CCTV Audit | Pakistan Spy Racket

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26 मिनट पहले

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दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पाकिस्तान से जुड़े जासूसी रैकेट के खुलासे के बाद CCTV सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। जांच में सामने आया कि संवेदनशील जगहों पर लगाए गए कैमरों की लाइव फुटेज सीमा पार पाकिस्तान भेजी जा रही थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने देशभर में CCTV नेटवर्क की जांच का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने आईबी और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर के CCTV नेटवर्क का ऑडिट शुरू करने की तैयारी में है।

वहीं 1 अप्रैल से सिर्फ वही कैमरे बिक सकेंगे, जो सरकारी सुरक्षा जांच (STQC सर्टिफिकेशन) पास करेंगे। इसका मतलब है कि कैमरे की जांच सरकारी लैब में होगी। अगर कैमरा हैक नहीं किया जा सकता, तभी उसे बेच सकेंगे।

भारत में भी 80% कैमरे चीन के हैं, जिनसे डेटा चोरी का खतरा बना रहता है। फिलहाल 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही ऐसे हैं, जिन्हें सर्टिफाइड और सुरक्षित माना गया है।

कई देशों में चीनी कैमरें बैन

अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा कारणों से चीनी CCTV कैमरों पर प्रतिबंध है।

भारत में नियम क्या कहते हैं

IT Act, 66E: निजी जगहों (बाथरूम/बेडरूम) की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग या शेयरिंग पर कार्रवाई हो सकती है।

IT Rules, 2011: कैमरा लगाने वाले की जिम्मेदारी है कि फुटेज सुरक्षित रखी जाए।

आर्टिकल 21: निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, किसी के घर के अंदर निगरानी नहीं की जा सकती।

सबसे बड़ी चुनौती- देश में CCTV की जांच के लिए सिर्फ 15 लैब हैं, जहां कई आवेदन लंबित हैं।

कौन से कैमरे सुरक्षित- फिलहाल 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही STQC सर्टिफाइड हैं।

लोगों की प्राइवेसी पर भी खतरा

CCTV सिस्टम से निजी डेटा लीक होने के मामले भी सामने आए हैं। इजरायल की ओर से ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर वीआईपी मूवमेंट ट्रैक करने का उदाहरण सामने आ चुका है।

वहीं, सोनीपत रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति ने निगरानी सिस्टम में घुसपैठ कर कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की और यात्रियों की फुटेज रिकॉर्ड कर उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। यह सीधे तौर पर निजता का उल्लंघन है। 2023 के डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत किसी व्यक्ति की पहचान उजागर करने वाली फुटेज का गलत इस्तेमाल गैरकानूनी है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ विराग गुप्ता के मुताबिक, सिर्फ सुरक्षित कैमरे बेचना काफी नहीं है। डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कानून और भारी जुर्माने की जरूरत होगी।

भारत से पाकिस्तान कैसे भेजा जा रहे थे फुटेज

दरअसल, हाल ही में यूपी के गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में एक बीट कांस्टेबल की सूचना के बाद जासूसी का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि सोलर पावर से चलने वाले छोटे कैमरे संवेदनशील इलाकों के आसपास लगाए गए थे।

ये कैमरे इंटरनेट के जरिए विदेशी सर्वर से जुड़े थे। उनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।

इस मामले में अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नेटवर्क में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे। कई कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

स्टैंटर्ड प्रोटोकॉल की कमी

जांच में यह भी सामने आया कि देशभर में CCTV अलग-अलग एजेंसियों द्वारा लगाए गए हैं, लेकिन कोई एकीकृत डेटाबेस या स्पष्ट नियंत्रण प्रणाली नहीं है। यही वजह है कि कई जगह निगरानी तंत्र में खामियां बनी हुई हैं, जो अब सुरक्षा जोखिम बन चुकी हैं।

ऑडिट रिपोर्ट के बाद सरकार यूनिक रजिस्ट्रेशन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और साइबर सुरक्षा मानकों के साथ एकीकृत नेटवर्क सिस्टम लागू कर सकती है।

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इसके बाद केंद्र सरकार ने देशभर में CCTV नेटवर्क की जांच का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने आईबी और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर के CCTV नेटवर्क का ऑडिट शुरू करने की तैयारी में है।

वहीं 1 अप्रैल से सिर्फ वही कैमरे बिक सकेंगे, जो सरकारी सुरक्षा जांच (STQC सर्टिफिकेशन) पास करेंगे। इसका मतलब है कि कैमरे की जांच सरकारी लैब में होगी। अगर कैमरा हैक नहीं किया जा सकता, तभी उसे बेच सकेंगे।

भारत में भी 80% कैमरे चीन के हैं, जिनसे डेटा चोरी का खतरा बना रहता है। फिलहाल 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही ऐसे हैं, जिन्हें सर्टिफाइड और सुरक्षित माना गया है।

कई देशों में चीनी कैमरें बैन

अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा कारणों से चीनी CCTV कैमरों पर प्रतिबंध है।

भारत में नियम क्या कहते हैं

IT Act, 66E: निजी जगहों (बाथरूम/बेडरूम) की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग या शेयरिंग पर कार्रवाई हो सकती है।

IT Rules, 2011: कैमरा लगाने वाले की जिम्मेदारी है कि फुटेज सुरक्षित रखी जाए।

आर्टिकल 21: निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है, किसी के घर के अंदर निगरानी नहीं की जा सकती।

सबसे बड़ी चुनौती- देश में CCTV की जांच के लिए सिर्फ 15 लैब हैं, जहां कई आवेदन लंबित हैं।

कौन से कैमरे सुरक्षित- फिलहाल 7 कंपनियों के 53 मॉडल ही STQC सर्टिफाइड हैं।

लोगों की प्राइवेसी पर भी खतरा

CCTV सिस्टम से निजी डेटा लीक होने के मामले भी सामने आए हैं। इजरायल की ओर से ईरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर वीआईपी मूवमेंट ट्रैक करने का उदाहरण सामने आ चुका है।

वहीं, सोनीपत रेलवे स्टेशन पर एक व्यक्ति ने निगरानी सिस्टम में घुसपैठ कर कैमरों की लाइव फीड एक्सेस की और यात्रियों की फुटेज रिकॉर्ड कर उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। यह सीधे तौर पर निजता का उल्लंघन है। 2023 के डेटा प्रोटेक्शन कानून के तहत किसी व्यक्ति की पहचान उजागर करने वाली फुटेज का गलत इस्तेमाल गैरकानूनी है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ विराग गुप्ता के मुताबिक, सिर्फ सुरक्षित कैमरे बेचना काफी नहीं है। डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कानून और भारी जुर्माने की जरूरत होगी।

भारत से पाकिस्तान कैसे भेजा जा रहे थे फुटेज

दरअसल, हाल ही में यूपी के गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में एक बीट कांस्टेबल की सूचना के बाद जासूसी का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि सोलर पावर से चलने वाले छोटे कैमरे संवेदनशील इलाकों के आसपास लगाए गए थे।

ये कैमरे इंटरनेट के जरिए विदेशी सर्वर से जुड़े थे। उनकी लाइव फीड सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।

इस मामले में अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नेटवर्क में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे। कई कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

स्टैंटर्ड प्रोटोकॉल की कमी

जांच में यह भी सामने आया कि देशभर में CCTV अलग-अलग एजेंसियों द्वारा लगाए गए हैं, लेकिन कोई एकीकृत डेटाबेस या स्पष्ट नियंत्रण प्रणाली नहीं है। यही वजह है कि कई जगह निगरानी तंत्र में खामियां बनी हुई हैं, जो अब सुरक्षा जोखिम बन चुकी हैं।

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