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Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy

Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy
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18 घंटे पहले

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सवाल– मेरी उम्र 32 साल है। मैं एक आईटी प्रोफेशनल हूं। मेरी प्रॉब्लम बहुत पर्सनल है। मुझे पोर्न की लत है। इसके बिना मैं रात में सो नहीं पाता। शुरू में तो ये कोई प्रॉब्लम नहीं लगती थी, लेकिन अब लगता है कि इस आदत का असर मेरी रिलेशनशिप्स पर पड़ रहा है। मैं जिस भी लड़की को डेट करता हूं, वो मुझे छोड़कर चली जाती है। उसका कहना है कि मैं रिश्ते में प्रेजेंट नहीं हूं। मैं भी ये बात जानता हूं कि मुझे किसी लड़की की कंपनी से ज्यादा अपनी कंपनी अच्छी लगती है। सच तो ये है कि सेक्शुअल प्लेजर के लिए भी मैं गर्लफ्रेंड की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं महसूस करता। मेरे एक करीबी दोस्त का कहना है कि ये नॉर्मल नहीं है और मुझे थेरेपिस्ट के पास जाना चाहिए। आप प्लीज मुझे गाइड करिए कि मैं क्या करूं?

एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। इस डिजिटल युग में पोर्नोग्राफी बहुत आसानी से उपलब्ध है। बहुत व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल भी होता है। इसलिए बहुत से इंडीविजुअल और कपल इसे लेकर थोड़ा चिंतित होते हैं कि कहीं ये मेंटल हेल्थ, इंटिमेसी और रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर न डाले।

पोर्न अपने आप में समस्या नहीं है

‘पोर्न एडिक्शन’ या ‘पोर्न की लत’ जैसे शब्दों का अक्सर प्रयोग किया जाता है। लेकिन एडिक्शन शब्द का इस्तेमाल कई बार एक ज्यादा कॉम्प्लेक्स रियलिटी को सरलीकृत कर सकता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिसर्च इस पर रोशनी डालती है, जिसके मुताबिक पोर्न देखना कुछ लोगों के लिए समस्या बन सकता है, लेकिन यह शायद ही कभी अपने आप में मूल समस्या या मुख्य समस्या होती है। इसके पीछे हमेशा कोई छिपा हुआ इमोशनल, रिलेशनल कारण या कोई इंटरनल कॉन्फ्लिक्ट होता है।

पोर्न कब हो सकता है प्रॉब्लमैटिक

इंटरनेशनल स्टडीज बताती हैं कि पूरी दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। समस्या तब पैदा होती है, जब पोर्न की लत लग जाए, जब यह एक कंपल्सिव और सीक्रेटिव बिहेवियर हो जाए और जब वास्तविक जिंदगी के रिश्तों पर इसका नेगेटिव असर पड़ने लगे। साथ ही यह सेक्शुअल खुशी, संतोष और इमोशनल हेल्थ को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करने लगे।

इसके अलावा इन संकेतों से पता चलता है कि पोर्न देखने की आदत समस्या बन रही है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

पोर्न का ब्रेन पर प्रभाव

हमारे ब्रेन में रिवॉर्ड सिस्टम इनबिल्ट होते हैं, जो हैप्पी हॉर्मोन्स रिलीज करते हैं। जब कोई बहुत ज्यादा समय तक और बहुत ज्यादा मात्रा में पोर्न देखता है तो इससे ब्रेन का रिवॉर्ड सिस्टम प्रभावित होता है। इसका नतीजा ये होता है कि वास्तविक जीवन में इंटिमेसी से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि कम हो जाती है। साथ ही सेक्स को लेकर अवास्तविक किस्म की अपेक्षाएं पैदा होती हैं।

इसलिए आगे बढ़ने से पहले मैं यही कहना चाहूंगा कि शर्मिंदगी या अपराध-बोध महसूस करने की बजाय आप समस्या को समझने और उसकी तह तक जाने की कोशिश करिए। कुछ सेल्फ असेसमेंट टूल्स और सेल्फ हेल्प टूल्स के जरिए मैं आपकी मदद करने की कोशिश करूंगा।

क्या आपको पोर्न एडिक्शन है?

करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 7 सवाल हैं। आप इन सवालों को ध्यान से पढ़ें और हां या ना में इसका जवाब देें। अंत में अपने जवाब की एनालिसिस करें। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया हुआ है।

जैसेेकि अगर दो या उससे कम सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो इसका मतलब है कि आपको पोर्न का एडिक्शन नहीं है। अगर तीन या चार सवालों का जवाब ‘हां’ है तो भी यह एडिक्शन नहीं है, सिर्फ पोर्न देखने को आप कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन अगर पांच से ज्यादा सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो यह पोर्न एडिक्शन है। ऐसे में प्रोफेशनल हेल्प की सलाह दी जाती है।

आप पोर्न क्यों देखते हैं?

करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

एडिक्शन से जुड़े सेल्फ असेसमेंट के बाद आपको एक और असेसमेंट करने की जरूरत है। अपने पोर्न देखने के वास्तविक कारणों को आइडेंटिफाई करना। ये बहुत साधारण सा असेसमेंट टेस्ट है। नीचे ग्राफिक में कुल 12 सवाल हैं, जिनमें 12 कारण बताए गए हैं। इन सवालों को आपको 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। अगर आपका जवाब 0 है तो इसका मतलब है कि वो कारण नहीं है। अगर जवाब 3 है तो वह एक बड़ा कारण है। इन सवालों से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके पोर्न देखने की मुख्य वजहें क्या हैं।

पोर्न और रिश्ते: असली नुकसान क्या है?

रिसर्च से पता चलता है कि पोर्नोग्राफी अपने आप में हानिकारक नहीं है। बहुत से कपल साथ में पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उनके रिश्ते को कोई नुकसान नहीं होता है। समस्या तब पैदा होती है, जब-

  • सीक्रेसी- व्यक्ति अपनी पोर्न देखने की इच्छा और आदत को दूसरे पार्टनर से छिपाए। उसे लेकर डर, शर्मिंदगी महसूस करे।
  • यौन इच्छा का मैच न होना- असमान यौन इच्छाओं के बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले।
  • सेक्शुल इंटरेस्ट के बारे में बात न होना- अपने सेक्शुअल इंटरेस्ट को लेकर गिल्ट या शर्मिंदगी हो। इस बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले।

इन कारणों से पोर्न का रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

लोग पोर्न क्यों देखते हैं?

पोर्न देखने के पीछे अकेलेपन से लेकर, स्ट्रेस और बोरडम तक कई कारण हो सकते हैं। पोर्न इन सारी समस्याओं से डील करने का एक कोपिंग मैकेनिज्म हो सकता है। यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है। ये समस्या तब बन जाती है, जब पोर्न ही एकमात्र कोपिंग मैकेनिज्म बन जाए। इसके अलावा अपने मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को एड्रेस करने का कोई और टूल हमारे पास न हो।

पोर्न एडिक्शन का इलाज क्या है?

इस समस्या की अंडरस्टैंडिंग और इसके ट्रीटमेंट के ये चरण होते हैं-

1. समस्या का असेसमेंट

  • पोर्न यूज के पैटर्न को समझना।
  • ट्रिगर्स को देखना।
  • उसके इमोशनल कारणों को आइडेंटिफाई करना।
  • रिलेशनशिप डायनेमिक्स को देखना।

2. साइकोएजूकेशन

यह समझना कि-

  • यह आदत कैसे बनती है।
  • कैसे शर्म और दबाव पोर्न देखने की इच्छा को बढ़ाता है।

3. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT)

CBT इन चीजों में मददगार होती है-

  • समस्या को आइडेंटिफाई करना।
  • अवास्तविक विचारों और अपेक्षाओं से डील करना।
  • अन्य कोपिंग मैकेनिज्म बनाने में मदद करना।

4. इरॉटिक कॉन्फ्लिक्ट से डील करना

  • सेक्शुअल फैंटेसीज को जज न करना।
  • उसके कारणों को आइडेंटिफाई करना।
  • उसे सुरक्षित और नैतिक बनाने में मदद करना।

5. बिहेवियरल रेगुलेशन (दबाना नहीं, रेगुलेट करना)

  • सीमाएं तय करना।
  • ट्रिगर से जुड़े टूल्स देना।

चार हफ्तों का सेल्फ रेगुलेशन प्लान

लक्ष्य: डर, शर्मिंदगी को दूर करना, ज्यादा सोचे-समझे फैसले लेना, आदत को रेगुलेट करना

नोट: ये आदत छुड़ाने या पोर्न देखना बंद करवाने का प्लान नहीं है। यह सिर्फ उसे रेगुलेट करने का प्लान है।

सप्ताह 1

अवेयरनेस और स्टेबलाइजेशन

फोकस: सिर्फ देखना, बदलने की कोशिश न करना।

डेली टास्क:

  • अपने पोर्न यूज को ट्रैक करें: कितनी देर, कब क्यों देखा। तब मूड कैसा था, ट्रिगर क्या था वगैरह।
  • टॉप 3 ट्रिगर को आइडेंटिफाई करें (जैसेकि अकेलापन, तनाव, सेक्शुअल फ्रस्ट्रेशन)।
  • सोने और जागने का एक समय फिक्स करें।
  • रोज कोई एक ग्राउंडिंग एक्टिविटी करें (वॉक करना, शॉवर लेना, ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना)।

नियम:

“मैं खुद को जज नहीं कर रहा। मैं सिर्फ देख-समझ रहा हूं।”

सप्ताह 2

बिहेवियरल लूप को तोड़ना

लक्ष्य: इच्छा को दबाना नहीं, सिर्फ थोड़ा टालना।

टूल्स:

  • जब भी इच्छा हो, उसे सिर्फ 10 मिनट के लिए डिले करना।
  • अगर 10 मिनट बाद भी इच्छा बनी रहे तो कॉन्शस चॉइज करना।
  • सिर्फ एक बार पोर्न देखने वाले वक्त में कोई और एक्टिविटी करना। जैसे-
  1. एक्सरसाइज
  2. किसी फ्रेंड को मैसेज या कॉल।

खुद से ये सवाल पूछना:

“मैं इस वक्त सचमुच क्या करना चाहता हूं?”

सप्ताह 3

असली कारणों को एड्रेस करना

लक्ष्य: जरूरतों को न कि व्यवहार को।

इन चीजों पर काम करना:

  • सेक्शुअल फ्रस्ट्रेशन- ईमानदारी से खुद से और पार्टनर से बात करना
  • इमोशनल रेगुलेशन- उन नॉन-सेक्शुअल कामों की लिस्ट बनाना, जिससे आपका मन अच्छा होता है, जिससे खुशी मिलती है।
  • शर्मिंदगी- खुद को एक कंपैशनेट खत लिखना। अपने शर्म और डर के बारे में कंपैशन के साथ बात करना।
  • पोर्न फ्री डे– सप्ताह में कम-से-कम दो दिन पोर्न फ्री रखने की कोशिश करना। फोर्स नहीं करना है, प्लान करना।
  • नॉन सेक्शुअल एक्टिविटी– कोई ऐसी नॉन सेक्शुअल एक्टिविटी करना, जिससे खुशी मिलती है।

सप्ताह 4

इंटीग्रेशन और फ्यूचर प्लानिंग

लक्ष्य: ऐसा संतुलन बनाना, जो लंबे समय तक बना रहे।

टास्क:

  • जो ट्रिगर्स अभी भी बने हुए हैं, उन्हें आइडेंटिफाई करना।
  • ये तय करना कि- “पोर्न का मेरे जीवन में क्या रोल है?”
  • वो कौन सी बाउंड्रीज हैं, जो मेरे वैल्यूज और रिश्तों को प्रोटेक्ट करती हैं।
  • अपने लिए एक रिलैप्स प्लान बनाना। अगर आदत रिलैप्स हुई तो आप क्या करेंगे। पैनिक नहीं करना है, प्लान बनाकर एक्शन लेना है। जैसेकि:
  1. अगर पोर्न की लत फिर से आई तो मैं पैनिक नहीं करूंगा।
  2. मैं इस बारे में सोचूंगा और फिर से पहले हफ्ते से इस पर काम करना शुरू करूंगा।
  3. मैं हार मानकर फिर से इस लूप में नहीं फंसूंगा।

प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी?

अगर आपको निम्नलिखित समस्याएं हों तो मदद लें:

  • आपको लगता है कि आप चाहकर भी खुद को किसी भी तरह कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं।
  • पोर्न ने पूरी तरह रियल इंटिमेसी की जगह ले ली है। आप वास्तविक रिश्ते बनाने में पूरी तरह अक्षम हैं।
  • डर, शर्मिंदगी और सीक्रेसी आपके आत्मसम्मान पर हावी हो गई है।
  • पोर्न कंटेंट या उससे होने वाली परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

अंतिम बात

पोर्नोग्राफी शायद ही कभी असली समस्या होती है। यह अक्सर अधूरी जरूरतों, अनसुलझे कॉन्फ्लिक्ट्स, शर्म या चुप्पी का रिफ्लेक्शन होती है। मैंने आपको ऊपर जो सुझाव दिए हैं, उसका मकसद आपको ‘शुद्ध’ या ‘पोर्न-फ्री’ बनाना नहीं है। मकसद सिर्फ इतना है कि आप अपने प्रति ज्यादा ईमानदार हो सकें, आपके फैसले ज्यादा संयमित और संतुलित हों। पोर्न एडिक्शन के पीछे छिपे असली कारणों को एड्रेस करने पर अमूमन पोर्नोग्राफी देखने की इच्छा स्वाभाविक रूप से खत्म हो जाती है।

……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ– मुझे मोबाइल की लत है: 5 मिनट भी फोकस नहीं कर पाती, कहीं ये ADHD तो नहीं, क्या दवा से मदद मिलेगी?

आपका अनुभव दरअसल DADS (डिजिटल इरा अटेंशन डेफिसिट सिंड्रोम) से मेल खाता है। यह समस्या फोकस की कमी और नींद न आने से जुड़ी हुई है। इसका संबंध बहुत ज्यादा डिजिटल कंजम्पशन से है। लगातार स्क्रीन देखते रहने और ऑनलाइन कंटेंट कंज्यूम करने के कारण नर्वस सिस्टम हमेशा उत्तेजित रहता है, जिसके कारण यह समस्या पैदा होती है। आगे पढ़िए…

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18 घंटे पहले

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एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। इस डिजिटल युग में पोर्नोग्राफी बहुत आसानी से उपलब्ध है। बहुत व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल भी होता है। इसलिए बहुत से इंडीविजुअल और कपल इसे लेकर थोड़ा चिंतित होते हैं कि कहीं ये मेंटल हेल्थ, इंटिमेसी और रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर न डाले।

पोर्न अपने आप में समस्या नहीं है

‘पोर्न एडिक्शन’ या ‘पोर्न की लत’ जैसे शब्दों का अक्सर प्रयोग किया जाता है। लेकिन एडिक्शन शब्द का इस्तेमाल कई बार एक ज्यादा कॉम्प्लेक्स रियलिटी को सरलीकृत कर सकता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिसर्च इस पर रोशनी डालती है, जिसके मुताबिक पोर्न देखना कुछ लोगों के लिए समस्या बन सकता है, लेकिन यह शायद ही कभी अपने आप में मूल समस्या या मुख्य समस्या होती है। इसके पीछे हमेशा कोई छिपा हुआ इमोशनल, रिलेशनल कारण या कोई इंटरनल कॉन्फ्लिक्ट होता है।

पोर्न कब हो सकता है प्रॉब्लमैटिक

इंटरनेशनल स्टडीज बताती हैं कि पूरी दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। समस्या तब पैदा होती है, जब पोर्न की लत लग जाए, जब यह एक कंपल्सिव और सीक्रेटिव बिहेवियर हो जाए और जब वास्तविक जिंदगी के रिश्तों पर इसका नेगेटिव असर पड़ने लगे। साथ ही यह सेक्शुअल खुशी, संतोष और इमोशनल हेल्थ को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करने लगे।

इसके अलावा इन संकेतों से पता चलता है कि पोर्न देखने की आदत समस्या बन रही है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

पोर्न का ब्रेन पर प्रभाव

हमारे ब्रेन में रिवॉर्ड सिस्टम इनबिल्ट होते हैं, जो हैप्पी हॉर्मोन्स रिलीज करते हैं। जब कोई बहुत ज्यादा समय तक और बहुत ज्यादा मात्रा में पोर्न देखता है तो इससे ब्रेन का रिवॉर्ड सिस्टम प्रभावित होता है। इसका नतीजा ये होता है कि वास्तविक जीवन में इंटिमेसी से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि कम हो जाती है। साथ ही सेक्स को लेकर अवास्तविक किस्म की अपेक्षाएं पैदा होती हैं।

इसलिए आगे बढ़ने से पहले मैं यही कहना चाहूंगा कि शर्मिंदगी या अपराध-बोध महसूस करने की बजाय आप समस्या को समझने और उसकी तह तक जाने की कोशिश करिए। कुछ सेल्फ असेसमेंट टूल्स और सेल्फ हेल्प टूल्स के जरिए मैं आपकी मदद करने की कोशिश करूंगा।

क्या आपको पोर्न एडिक्शन है?

करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 7 सवाल हैं। आप इन सवालों को ध्यान से पढ़ें और हां या ना में इसका जवाब देें। अंत में अपने जवाब की एनालिसिस करें। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया हुआ है।

जैसेेकि अगर दो या उससे कम सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो इसका मतलब है कि आपको पोर्न का एडिक्शन नहीं है। अगर तीन या चार सवालों का जवाब ‘हां’ है तो भी यह एडिक्शन नहीं है, सिर्फ पोर्न देखने को आप कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन अगर पांच से ज्यादा सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो यह पोर्न एडिक्शन है। ऐसे में प्रोफेशनल हेल्प की सलाह दी जाती है।

आप पोर्न क्यों देखते हैं?

करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

एडिक्शन से जुड़े सेल्फ असेसमेंट के बाद आपको एक और असेसमेंट करने की जरूरत है। अपने पोर्न देखने के वास्तविक कारणों को आइडेंटिफाई करना। ये बहुत साधारण सा असेसमेंट टेस्ट है। नीचे ग्राफिक में कुल 12 सवाल हैं, जिनमें 12 कारण बताए गए हैं। इन सवालों को आपको 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। अगर आपका जवाब 0 है तो इसका मतलब है कि वो कारण नहीं है। अगर जवाब 3 है तो वह एक बड़ा कारण है। इन सवालों से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके पोर्न देखने की मुख्य वजहें क्या हैं।

पोर्न और रिश्ते: असली नुकसान क्या है?

रिसर्च से पता चलता है कि पोर्नोग्राफी अपने आप में हानिकारक नहीं है। बहुत से कपल साथ में पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उनके रिश्ते को कोई नुकसान नहीं होता है। समस्या तब पैदा होती है, जब-

  • सीक्रेसी- व्यक्ति अपनी पोर्न देखने की इच्छा और आदत को दूसरे पार्टनर से छिपाए। उसे लेकर डर, शर्मिंदगी महसूस करे।
  • यौन इच्छा का मैच न होना- असमान यौन इच्छाओं के बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले।
  • सेक्शुल इंटरेस्ट के बारे में बात न होना- अपने सेक्शुअल इंटरेस्ट को लेकर गिल्ट या शर्मिंदगी हो। इस बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले।

इन कारणों से पोर्न का रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें–

लोग पोर्न क्यों देखते हैं?

पोर्न देखने के पीछे अकेलेपन से लेकर, स्ट्रेस और बोरडम तक कई कारण हो सकते हैं। पोर्न इन सारी समस्याओं से डील करने का एक कोपिंग मैकेनिज्म हो सकता है। यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है। ये समस्या तब बन जाती है, जब पोर्न ही एकमात्र कोपिंग मैकेनिज्म बन जाए। इसके अलावा अपने मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को एड्रेस करने का कोई और टूल हमारे पास न हो।

पोर्न एडिक्शन का इलाज क्या है?

इस समस्या की अंडरस्टैंडिंग और इसके ट्रीटमेंट के ये चरण होते हैं-

1. समस्या का असेसमेंट

  • पोर्न यूज के पैटर्न को समझना।
  • ट्रिगर्स को देखना।
  • उसके इमोशनल कारणों को आइडेंटिफाई करना।
  • रिलेशनशिप डायनेमिक्स को देखना।

2. साइकोएजूकेशन

यह समझना कि-

  • यह आदत कैसे बनती है।
  • कैसे शर्म और दबाव पोर्न देखने की इच्छा को बढ़ाता है।

3. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT)

CBT इन चीजों में मददगार होती है-

  • समस्या को आइडेंटिफाई करना।
  • अवास्तविक विचारों और अपेक्षाओं से डील करना।
  • अन्य कोपिंग मैकेनिज्म बनाने में मदद करना।

4. इरॉटिक कॉन्फ्लिक्ट से डील करना

  • सेक्शुअल फैंटेसीज को जज न करना।
  • उसके कारणों को आइडेंटिफाई करना।
  • उसे सुरक्षित और नैतिक बनाने में मदद करना।

5. बिहेवियरल रेगुलेशन (दबाना नहीं, रेगुलेट करना)

  • सीमाएं तय करना।
  • ट्रिगर से जुड़े टूल्स देना।

चार हफ्तों का सेल्फ रेगुलेशन प्लान

लक्ष्य: डर, शर्मिंदगी को दूर करना, ज्यादा सोचे-समझे फैसले लेना, आदत को रेगुलेट करना

नोट: ये आदत छुड़ाने या पोर्न देखना बंद करवाने का प्लान नहीं है। यह सिर्फ उसे रेगुलेट करने का प्लान है।

सप्ताह 1

अवेयरनेस और स्टेबलाइजेशन

फोकस: सिर्फ देखना, बदलने की कोशिश न करना।

डेली टास्क:

  • अपने पोर्न यूज को ट्रैक करें: कितनी देर, कब क्यों देखा। तब मूड कैसा था, ट्रिगर क्या था वगैरह।
  • टॉप 3 ट्रिगर को आइडेंटिफाई करें (जैसेकि अकेलापन, तनाव, सेक्शुअल फ्रस्ट्रेशन)।
  • सोने और जागने का एक समय फिक्स करें।
  • रोज कोई एक ग्राउंडिंग एक्टिविटी करें (वॉक करना, शॉवर लेना, ब्रीदिंग एक्सरसाइज करना)।

नियम:

“मैं खुद को जज नहीं कर रहा। मैं सिर्फ देख-समझ रहा हूं।”

सप्ताह 2

बिहेवियरल लूप को तोड़ना

लक्ष्य: इच्छा को दबाना नहीं, सिर्फ थोड़ा टालना।

टूल्स:

  • जब भी इच्छा हो, उसे सिर्फ 10 मिनट के लिए डिले करना।
  • अगर 10 मिनट बाद भी इच्छा बनी रहे तो कॉन्शस चॉइज करना।
  • सिर्फ एक बार पोर्न देखने वाले वक्त में कोई और एक्टिविटी करना। जैसे-
  1. एक्सरसाइज
  2. किसी फ्रेंड को मैसेज या कॉल।

खुद से ये सवाल पूछना:

“मैं इस वक्त सचमुच क्या करना चाहता हूं?”

सप्ताह 3

असली कारणों को एड्रेस करना

लक्ष्य: जरूरतों को न कि व्यवहार को।

इन चीजों पर काम करना:

  • सेक्शुअल फ्रस्ट्रेशन- ईमानदारी से खुद से और पार्टनर से बात करना
  • इमोशनल रेगुलेशन- उन नॉन-सेक्शुअल कामों की लिस्ट बनाना, जिससे आपका मन अच्छा होता है, जिससे खुशी मिलती है।
  • शर्मिंदगी- खुद को एक कंपैशनेट खत लिखना। अपने शर्म और डर के बारे में कंपैशन के साथ बात करना।
  • पोर्न फ्री डे– सप्ताह में कम-से-कम दो दिन पोर्न फ्री रखने की कोशिश करना। फोर्स नहीं करना है, प्लान करना।
  • नॉन सेक्शुअल एक्टिविटी– कोई ऐसी नॉन सेक्शुअल एक्टिविटी करना, जिससे खुशी मिलती है।

सप्ताह 4

इंटीग्रेशन और फ्यूचर प्लानिंग

लक्ष्य: ऐसा संतुलन बनाना, जो लंबे समय तक बना रहे।

टास्क:

  • जो ट्रिगर्स अभी भी बने हुए हैं, उन्हें आइडेंटिफाई करना।
  • ये तय करना कि- “पोर्न का मेरे जीवन में क्या रोल है?”
  • वो कौन सी बाउंड्रीज हैं, जो मेरे वैल्यूज और रिश्तों को प्रोटेक्ट करती हैं।
  • अपने लिए एक रिलैप्स प्लान बनाना। अगर आदत रिलैप्स हुई तो आप क्या करेंगे। पैनिक नहीं करना है, प्लान बनाकर एक्शन लेना है। जैसेकि:
  1. अगर पोर्न की लत फिर से आई तो मैं पैनिक नहीं करूंगा।
  2. मैं इस बारे में सोचूंगा और फिर से पहले हफ्ते से इस पर काम करना शुरू करूंगा।
  3. मैं हार मानकर फिर से इस लूप में नहीं फंसूंगा।

प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी?

अगर आपको निम्नलिखित समस्याएं हों तो मदद लें:

  • आपको लगता है कि आप चाहकर भी खुद को किसी भी तरह कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं।
  • पोर्न ने पूरी तरह रियल इंटिमेसी की जगह ले ली है। आप वास्तविक रिश्ते बनाने में पूरी तरह अक्षम हैं।
  • डर, शर्मिंदगी और सीक्रेसी आपके आत्मसम्मान पर हावी हो गई है।
  • पोर्न कंटेंट या उससे होने वाली परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

अंतिम बात

पोर्नोग्राफी शायद ही कभी असली समस्या होती है। यह अक्सर अधूरी जरूरतों, अनसुलझे कॉन्फ्लिक्ट्स, शर्म या चुप्पी का रिफ्लेक्शन होती है। मैंने आपको ऊपर जो सुझाव दिए हैं, उसका मकसद आपको ‘शुद्ध’ या ‘पोर्न-फ्री’ बनाना नहीं है। मकसद सिर्फ इतना है कि आप अपने प्रति ज्यादा ईमानदार हो सकें, आपके फैसले ज्यादा संयमित और संतुलित हों। पोर्न एडिक्शन के पीछे छिपे असली कारणों को एड्रेस करने पर अमूमन पोर्नोग्राफी देखने की इच्छा स्वाभाविक रूप से खत्म हो जाती है।

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आपका अनुभव दरअसल DADS (डिजिटल इरा अटेंशन डेफिसिट सिंड्रोम) से मेल खाता है। यह समस्या फोकस की कमी और नींद न आने से जुड़ी हुई है। इसका संबंध बहुत ज्यादा डिजिटल कंजम्पशन से है। लगातार स्क्रीन देखते रहने और ऑनलाइन कंटेंट कंज्यूम करने के कारण नर्वस सिस्टम हमेशा उत्तेजित रहता है, जिसके कारण यह समस्या पैदा होती है। आगे पढ़िए…

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