Saturday, 06 Jun 2026 | 09:14 PM

Trending :

भारत ने अंडर-18 हॉकी एशिया कप जीता, इटारसी में जश्न:शहर के दो खिलाड़ी टीम में खेले, जापान को 4-1 से हराया खाने का तेल अब 9 स्टैंडर्ड पैक-साइज में ही मिलेगा:कंपनियों को वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी, 3 महीने में लागू होंगे नए नियम खाने का तेल अब 9 स्टैंडर्ड पैक-साइज में ही मिलेगा:कंपनियों को वॉल्यूम के साथ वजन लिखना भी जरूरी, 3 महीने में लागू होंगे नए नियम जाह्नवी कपूर ने क्या विवादित शॉट्स पर जताई थी आपत्ति:एक्ट्रेस की कथित पर्सनल चैट लीक; दावा- पेड्डी में राम चरण ने डायरेक्टर को डांटा था जाह्नवी कपूर ने क्या विवादित शॉट्स पर जताई थी आपत्ति:एक्ट्रेस की कथित पर्सनल चैट लीक; दावा- पेड्डी में राम चरण ने डायरेक्टर को डांटा था पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट में पहुंचे बॉलीवुड सेलेब्स:हेमा मालिनी, अनिल कपूर और गोविंदा समेत कई कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि
EXCLUSIVE

Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs

Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs
  • Hindi News
  • National
  • Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs Ayyappan Temple

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मामले में बुधवार की सुनवाई शुरू हो चुकी है। इससे पहले छठे दिन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सामाजिक सुधार या जनहित के नाम पर किसी धार्मिक प्रथा या रिवाज पर रोक लगाता है, तो उसकी जांच कोर्ट कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही ज्यूडिशियल रिव्यू को लेकर उसकी कुछ सीमाएं हैं, लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि कोर्ट के पास कोई अधिकार ही नहीं है।

आज फैसला आने की संभावना

सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। फैसला आने की संभावना है, या फिर कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।

7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछले 5 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

सबरीमाला केस से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं…

लाइव अपडेट्स

8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- दो लोग एक ही धर्म को बिल्कुल एक ही तरीके से नहीं मान सकते

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- आर्टिकल 25(1) में इस्तेमाल किए गए शब्दों को व्यापक अर्थ दिया जाना चाहिए, क्योंकि इनमें व्यक्ति की अपनी मर्जी शामिल है। यहां तक कि धर्म चुनने और उसके आचरण की सीमा तय करने के मामलों में भी। कोई भी दो लोग एक ही धर्म को बिल्कुल एक ही तरीके से नहीं मान सकते, भले ही वे एक ही धर्म के हों; फिर भी, उन दोनों को अपनी मर्जी के मुताबिक धर्म का आचरण करने की पूरी आजादी है। यह आजादी आर्टिकल 25 के तहत सुरक्षित है।

14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- हर धर्म का अपना एक दर्शन और सिद्धांत होता है

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- इस लिहाज से, आर्टिकल 25(1) एक बुनियादी अधिकार है जिसका दायरा काफी बड़ा है। अंतरात्मा को धर्म के अधिकार से अलग करके देखना भी जरूरी है। अंतरात्मा को अलग और स्वतंत्र शक्ति के तौर पर देखा जा सकता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति धार्मिक दर्शन और सच्चाइयों को अपने अंदर उतारता है।

हर धर्म का अपना एक दर्शन, सिद्धांत, और तौर-तरीके होते हैं जिनके जरिए उन सिद्धांतों को अमल में लाया जाता है। विश्वास और आचरण की सीमा भी व्यक्ति पर ही छोड़ दी जाती है, जो उस धर्म के सिद्धांतों पर निर्भर करती है।

16 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- आर्टिकल 25 के तहत व्यक्तियों को आजादी मिली

एडवोकेट सुब्रमण्यम: आर्टिकल 25 के तहत व्यक्तियों को आज़ादी मिली हुई है। अब, जब हम “प्रोफ़ेस” (मानने) शब्द पर आते हैं, तो इसका मतलब निजी तौर पर मानना और सार्वजनिक तौर पर मानना ​​भी हो सकता है। यह धार्मिक आजादी का ही एक हिस्सा है। अगला शब्द है “प्रैक्टिस” (पालन करना)। प्रैक्टिस निजी तौर पर भी की जा सकती है, और इसे दूसरी जगहों पर भी किया जा सकता है। और फिर धर्म का “प्रचार” करने का अधिकार भी है। अगर किसी व्यक्ति के पास काफी ज्ञान और विद्वत्ता है और वह अपने विश्वास या धर्म के बारे में अपनी समझ दूसरों के साथ बांटना चाहता है, तो वह निश्चित रूप से उसका प्रचार कर सकता है। वह लेक्चर दे सकता है, वह बोल सकता है; आर्टिकल 25(1) के तहत उसे यह आजादी मिली हुई है। यह सब सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता में आता है; क्योंकि जब आप इन अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको बाकी लोगों के अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए, उनके पास भी इसी तरह की अधिकारों के इस्तेमाल की आजादी है।

32 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

7वें दिन की सुनवाई शुरू, गोपाल सुब्रण्यम ने दलीलें रखीं

एडवोकेट सुब्रमण्यम: आर्टिकल 25 धार्मिक स्वतंत्रता का विस्तार है, क्योंकि यह धार्मिक स्वतंत्रता के कई पहलुओं से संबंधित है। इसकी अवधारणा क्या है?

यह किसी व्यक्ति की वह निजी यात्रा है, जिसके तहत वह किसी दर्शन को धार्मिक दर्शन के रूप में स्वीकार करता है। इसमें किसी फैसले में दिखाई देने वाले पहलुओं से कहीं अधिक घटक शामिल हैं। इसके चार पहलू हैं, जो सभी अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता में शामिल हैं-

1. धर्म की दार्शनिक सामग्री 2. उस दर्शन की सहायता से जुड़ी प्रथाएं 3. पूजा का अधिकार 4. आस्था का विस्तार

ये सभी आर्टिकल 25 के तहत ‘धर्म’ शब्द के तहत संरक्षित हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हो सकता है कि आप उस सिद्धांत की प्रथाओं को न अपनाएं, या हो सकता है कि आप वास्तव में बाहरी पूजा-पाठ में भी शामिल न हों। लेकिन यह एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
बालाघाट पंचायतकर्मियों ने सीईओ के खिलाफ किया प्रदर्शन:कहा- तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा

February 27, 2026/
7:22 pm

बालाघाट में जिला पंचायत सीईओ और पंचायत कर्मचारियों के बीच का विवाद अब आंदोलन में बदल गया है। वित्तीय वर्ष...

Punjabi YouTuber Nancy Grewal Murder

March 6, 2026/
5:00 am

नैन्सी ग्रेवाल सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती थी। जहां वह हिंदी और पंजाबी गानों पर रील बनाकर पोस्ट करती...

कोहली IPL में 800 चौके लगाने वाले पहले बैटर:300 सिक्स भी पूरे; चिन्नास्वामी में बेंगलुरु की 50वीं जीत; मोमेंट्स-रिकार्ड्स

April 25, 2026/
4:58 am

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने IPL के 34वें मुकाबले में गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से हराया। इस जीत के हीरो...

Axar Patel; DC vs GT IPL 2026 LIVE Score Update

April 8, 2026/
5:10 am

स्पोर्ट्स डेस्क55 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL 2026 के 14वें मैच में आज दिल्ली कैपिटल्स का सामना गुजरात टाइटंस से...

Punjab Minister Officer Suicide FIR

March 22, 2026/
5:00 am

वेयरहाउस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा, थाने के बाहर इकट्‌ठे हुए लोग और लालजीत भुल्लर। पंजाब में वेयरहाउस के...

राजनीति

Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs

Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs
  • Hindi News
  • National
  • Sabarimala Women Entry Verdict LIVE Update; Supreme Court CJI | Kerala Hindu Beliefs Ayyappan Temple

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मामले में बुधवार की सुनवाई शुरू हो चुकी है। इससे पहले छठे दिन की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य सामाजिक सुधार या जनहित के नाम पर किसी धार्मिक प्रथा या रिवाज पर रोक लगाता है, तो उसकी जांच कोर्ट कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही ज्यूडिशियल रिव्यू को लेकर उसकी कुछ सीमाएं हैं, लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि कोर्ट के पास कोई अधिकार ही नहीं है।

आज फैसला आने की संभावना

सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इसके साथ धार्मिक आस्था के 66 मामले और जुड़े हैं। फैसला आने की संभावना है, या फिर कोर्ट इसे रिजर्व भी रख सकता है।

केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।

7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछले 5 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

सबरीमाला केस से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं…

लाइव अपडेट्स

8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- दो लोग एक ही धर्म को बिल्कुल एक ही तरीके से नहीं मान सकते

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- आर्टिकल 25(1) में इस्तेमाल किए गए शब्दों को व्यापक अर्थ दिया जाना चाहिए, क्योंकि इनमें व्यक्ति की अपनी मर्जी शामिल है। यहां तक कि धर्म चुनने और उसके आचरण की सीमा तय करने के मामलों में भी। कोई भी दो लोग एक ही धर्म को बिल्कुल एक ही तरीके से नहीं मान सकते, भले ही वे एक ही धर्म के हों; फिर भी, उन दोनों को अपनी मर्जी के मुताबिक धर्म का आचरण करने की पूरी आजादी है। यह आजादी आर्टिकल 25 के तहत सुरक्षित है।

14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- हर धर्म का अपना एक दर्शन और सिद्धांत होता है

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- इस लिहाज से, आर्टिकल 25(1) एक बुनियादी अधिकार है जिसका दायरा काफी बड़ा है। अंतरात्मा को धर्म के अधिकार से अलग करके देखना भी जरूरी है। अंतरात्मा को अलग और स्वतंत्र शक्ति के तौर पर देखा जा सकता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति धार्मिक दर्शन और सच्चाइयों को अपने अंदर उतारता है।

हर धर्म का अपना एक दर्शन, सिद्धांत, और तौर-तरीके होते हैं जिनके जरिए उन सिद्धांतों को अमल में लाया जाता है। विश्वास और आचरण की सीमा भी व्यक्ति पर ही छोड़ दी जाती है, जो उस धर्म के सिद्धांतों पर निर्भर करती है।

16 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

एडवोकेट सुब्रमण्यम ने कहा- आर्टिकल 25 के तहत व्यक्तियों को आजादी मिली

एडवोकेट सुब्रमण्यम: आर्टिकल 25 के तहत व्यक्तियों को आज़ादी मिली हुई है। अब, जब हम “प्रोफ़ेस” (मानने) शब्द पर आते हैं, तो इसका मतलब निजी तौर पर मानना और सार्वजनिक तौर पर मानना ​​भी हो सकता है। यह धार्मिक आजादी का ही एक हिस्सा है। अगला शब्द है “प्रैक्टिस” (पालन करना)। प्रैक्टिस निजी तौर पर भी की जा सकती है, और इसे दूसरी जगहों पर भी किया जा सकता है। और फिर धर्म का “प्रचार” करने का अधिकार भी है। अगर किसी व्यक्ति के पास काफी ज्ञान और विद्वत्ता है और वह अपने विश्वास या धर्म के बारे में अपनी समझ दूसरों के साथ बांटना चाहता है, तो वह निश्चित रूप से उसका प्रचार कर सकता है। वह लेक्चर दे सकता है, वह बोल सकता है; आर्टिकल 25(1) के तहत उसे यह आजादी मिली हुई है। यह सब सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता में आता है; क्योंकि जब आप इन अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको बाकी लोगों के अधिकारों का भी ध्यान रखना चाहिए, उनके पास भी इसी तरह की अधिकारों के इस्तेमाल की आजादी है।

32 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

7वें दिन की सुनवाई शुरू, गोपाल सुब्रण्यम ने दलीलें रखीं

एडवोकेट सुब्रमण्यम: आर्टिकल 25 धार्मिक स्वतंत्रता का विस्तार है, क्योंकि यह धार्मिक स्वतंत्रता के कई पहलुओं से संबंधित है। इसकी अवधारणा क्या है?

यह किसी व्यक्ति की वह निजी यात्रा है, जिसके तहत वह किसी दर्शन को धार्मिक दर्शन के रूप में स्वीकार करता है। इसमें किसी फैसले में दिखाई देने वाले पहलुओं से कहीं अधिक घटक शामिल हैं। इसके चार पहलू हैं, जो सभी अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता में शामिल हैं-

1. धर्म की दार्शनिक सामग्री 2. उस दर्शन की सहायता से जुड़ी प्रथाएं 3. पूजा का अधिकार 4. आस्था का विस्तार

ये सभी आर्टिकल 25 के तहत ‘धर्म’ शब्द के तहत संरक्षित हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हो सकता है कि आप उस सिद्धांत की प्रथाओं को न अपनाएं, या हो सकता है कि आप वास्तव में बाहरी पूजा-पाठ में भी शामिल न हों। लेकिन यह एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.