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SBI Top Loser, Market Cap Down ₹44K Cr; Airtel, TCS Market Cap Also Fell

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मुंबई2 घंटे पहले

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मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 4 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान SBI की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है।

SBI की मार्केट वैल्यू ₹44,722 करोड़ घटकर ₹9.41 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा एयरटेल, TCS और लार्सन एंड टुब्रो की मार्केट वैल्यू भी घटी है।

वहीं रिलायंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक, बजाज फाइनेंस, HUL और LIC की मार्केट वैल्यू बढ़ी। बीते हफ्ते के कारोबार में इन सभी 6 कंपनियों का मार्केट कैप टोटल 46,685 करोड़ रुपए बढ़ा।

बीते हफ्ते सेंसेक्स 414 अंक चढ़ा था

पिछले हफ्ते सेंसेक्स 414.69 (0.53%) अंक और निफ्टी 178.6 (0.74%) अंक चढ़ा था। वहीं बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक की गिरावट के साथ 77,328 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 150 अंकों की गिरावट रही, ये 24,176 पर आ गया।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझें…

मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…

बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब
शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे
पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट
पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट
हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग

मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।

उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 4 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान SBI की मार्केट वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है।

SBI की मार्केट वैल्यू ₹44,722 करोड़ घटकर ₹9.41 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा एयरटेल, TCS और लार्सन एंड टुब्रो की मार्केट वैल्यू भी घटी है।

वहीं रिलायंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक, बजाज फाइनेंस, HUL और LIC की मार्केट वैल्यू बढ़ी। बीते हफ्ते के कारोबार में इन सभी 6 कंपनियों का मार्केट कैप टोटल 46,685 करोड़ रुपए बढ़ा।

बीते हफ्ते सेंसेक्स 414 अंक चढ़ा था

पिछले हफ्ते सेंसेक्स 414.69 (0.53%) अंक और निफ्टी 178.6 (0.74%) अंक चढ़ा था। वहीं बीते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक की गिरावट के साथ 77,328 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 150 अंकों की गिरावट रही, ये 24,176 पर आ गया।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझें…

मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…

बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब
शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे
पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट
पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट
हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग

मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।

उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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