Monday, 08 Jun 2026 | 01:32 AM

Trending :

EXCLUSIVE

SC: Hindu Sects Open Doors Or Face Loss

SC: Hindu Sects Open Doors Or Face Loss

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

  • कॉपी लिंक

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री को लेकर SC में सुनवाई चल रही है।

केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों में पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी दाउदी बोहरा समुदाय की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल की दलील के जवाब में की थी। कौल ने कहा था कि ज्ञान और समझ, चाहे वह किसी भी सोर्स से मिली हो, उसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है। कौल एक अखबार में कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के लिखे लेख का हवाला दे रहे थे, जिसमें धार्मिक मामलों में न्यायिक संयम बरतने की बात कही गई है।

CJI सूर्यकांत ने कहा, “हम सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों, विधिवेत्ताओं आदि का सम्मान करते हैं, लेकिन निजी राय निजी राय ही होती है।”

इसके पहले कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी धार्मिक प्रथा को जरूरी (एसेन्शियल) या गैर-जरूरी घोषित करना कोर्ट के लिए मुश्किल है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान बेंच ने कहा कि संविधान में ‘एसेन्शियल’ शब्द का जिक्र नहीं है।

7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

22 अप्रैल: सुनवाई के दौरान 5 मुख्य टिप्पणियां

  1. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि मंदिरों को अलग-अलग संप्रदाय के नाम पर बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि “हिंदू समाज को एक होना चाहिए” और अगर मंदिर दूसरों के लिए नहीं खुलेंगे तो खुद उस संप्रदाय को नुकसान होगा।
  2. सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि धार्मिक संप्रदाय एक “बंद और अनुशासित समूह” होता है, जिसे अपने नियम तय करने का अधिकार है। उन्होंने दलील दी कि पूजा कैसे, कब और किस तरह होगी। यह तय करने का हक श्रद्धालुओं और संप्रदाय के पास होना चाहिए।
  3. CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह तय करना बेहद कठिन है कि कौन-सी धार्मिक प्रथा जरूरी है और कौन-सी नहीं। उन्होंने माना कि हर प्रथा किसी न किसी रूप में धर्म से जुड़ी होती है, इसलिए कोर्ट के लिए इसकी सीमा तय करना आसान नहीं है।
  4. सीनियर वकील सीए सुंदरम ने कहा कि संविधान के तहत “क्लास” में जेंडर शामिल नहीं है। उन्होंने दलील दी कि पूजा स्थलों में महिलाओं की एंट्री का सवाल सीधे इस प्रावधान से नहीं जुड़ता, और इसे बराबरी के अधिकार के तहत अलग तरीके से देखना होगा।
  5. सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता पूरी तरह निरंकुश नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी शर्तों के अधीन है। यानी धार्मिक अधिकार भी कुछ संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही लागू होते हैं।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछले 7 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री विवाद की टाइम लाइन

सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच सुनवाई कर रही

लाइव अपडेट्स

8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

हर धार्मिक प्रथा को जरूरी नहीं माना जा सकता

कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हर धार्मिक प्रथा को जरूरी नहीं माना जा सकता। खासकर तब जब कोई प्रथा नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था या स्वास्थ्य के खिलाफ हों। जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए और अलग-अलग संप्रदायों के नाम पर विभाजन नहीं होना चाहिए।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा- हिंदू समाज को यह कहकर नहीं बांटा जा सकता कि हम एक अलग संप्रदाय हैं और वे दूसरे। ऐसा नहीं हो सकता कि वे हमारे मंदिर में न आएं और हम उनके मंदिर में न जाएं। अगर हिंदू संप्रदाय अपने दरवाजे दूसरों के लिए नहीं खोलेंगे, तो उन्हें ही नुकसान होगा।

यह टिप्पणी धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों, खासकर सबरीमाला मंदिर विवाद, और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा को लेकर सुनवाई के दौरान की गई।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
दिल्ली में डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के 7वें सीजन का आयोजन:केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मध्य प्रदेश के 45 दिग्गजों को सम्मानित किया

February 26, 2026/
10:18 pm

नई दिल्ली में गुरुवार को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के सातवें सीजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण...

झारखंड के चतरा में एयर एंबुलेंस क्रैश:रांची से दिल्ली जा रही थी, विमान में 7 लोग सवार थे

February 23, 2026/
10:47 pm

झारखंड से दिल्ली जा रहा एक चार्टेड प्लेन चतरा में क्रैश हो गया। यह एक एयर एंबुलेंस थी। प्लेन में...

तस्वीर का विवरण

May 13, 2026/
5:28 pm

सत्तू-पुदीना शरबत बनाने की सामग्री: 3 बड़े चम्मच सत्तू, 1 छोटा चम्मच ताजा पुदीना, 1-2 चम्मच चीनी या गुड़ पाउडर,...

Tamim Iqbal Calls WC Omission Injustice

May 12, 2026/
8:15 am

ढाका2 घंटे पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के अंतरिम अध्यक्ष और पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने टी-20 वर्ल्ड...

बंगाल में 2021 की तरह के चुनावी पोल गिरे तो बीजेपी की कितनी बड़ी हार? लाइन से नपेंगे ये नेता, 2027 के चुनाव पर भी असर

April 30, 2026/
5:22 pm

पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 में अगर दोहराव होता है, तो यह बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। 2021...

भारत-अफगानिस्तान में एकमात्र टेस्ट आज से:अफगान स्पिनर्स के सामने भारतीय बैटर्स का स्किल टेस्ट, अफ्रीका-न्यूजीलैंड ने क्लीन स्वीप किया था

June 6, 2026/
4:30 am

भारतीय क्रिकेट टीम करीब 8 महीने बाद कोई टेस्ट मैच खेलेगी। टीम का मुकाबला शनिवार को अफगानिस्तान से होगा। यह...

राजनीति

SC: Hindu Sects Open Doors Or Face Loss

SC: Hindu Sects Open Doors Or Face Loss

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

  • कॉपी लिंक

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री को लेकर SC में सुनवाई चल रही है।

केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों में पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी दाउदी बोहरा समुदाय की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल की दलील के जवाब में की थी। कौल ने कहा था कि ज्ञान और समझ, चाहे वह किसी भी सोर्स से मिली हो, उसे स्वीकार करने में कोई बुराई नहीं है। कौल एक अखबार में कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर के लिखे लेख का हवाला दे रहे थे, जिसमें धार्मिक मामलों में न्यायिक संयम बरतने की बात कही गई है।

CJI सूर्यकांत ने कहा, “हम सभी प्रतिष्ठित व्यक्तियों, विधिवेत्ताओं आदि का सम्मान करते हैं, लेकिन निजी राय निजी राय ही होती है।”

इसके पहले कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी धार्मिक प्रथा को जरूरी (एसेन्शियल) या गैर-जरूरी घोषित करना कोर्ट के लिए मुश्किल है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान बेंच ने कहा कि संविधान में ‘एसेन्शियल’ शब्द का जिक्र नहीं है।

7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही

22 अप्रैल: सुनवाई के दौरान 5 मुख्य टिप्पणियां

  1. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि मंदिरों को अलग-अलग संप्रदाय के नाम पर बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि “हिंदू समाज को एक होना चाहिए” और अगर मंदिर दूसरों के लिए नहीं खुलेंगे तो खुद उस संप्रदाय को नुकसान होगा।
  2. सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि धार्मिक संप्रदाय एक “बंद और अनुशासित समूह” होता है, जिसे अपने नियम तय करने का अधिकार है। उन्होंने दलील दी कि पूजा कैसे, कब और किस तरह होगी। यह तय करने का हक श्रद्धालुओं और संप्रदाय के पास होना चाहिए।
  3. CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह तय करना बेहद कठिन है कि कौन-सी धार्मिक प्रथा जरूरी है और कौन-सी नहीं। उन्होंने माना कि हर प्रथा किसी न किसी रूप में धर्म से जुड़ी होती है, इसलिए कोर्ट के लिए इसकी सीमा तय करना आसान नहीं है।
  4. सीनियर वकील सीए सुंदरम ने कहा कि संविधान के तहत “क्लास” में जेंडर शामिल नहीं है। उन्होंने दलील दी कि पूजा स्थलों में महिलाओं की एंट्री का सवाल सीधे इस प्रावधान से नहीं जुड़ता, और इसे बराबरी के अधिकार के तहत अलग तरीके से देखना होगा।
  5. सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता पूरी तरह निरंकुश नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी शर्तों के अधीन है। यानी धार्मिक अधिकार भी कुछ संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही लागू होते हैं।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछले 7 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री विवाद की टाइम लाइन

सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच सुनवाई कर रही

लाइव अपडेट्स

8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

हर धार्मिक प्रथा को जरूरी नहीं माना जा सकता

कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हर धार्मिक प्रथा को जरूरी नहीं माना जा सकता। खासकर तब जब कोई प्रथा नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था या स्वास्थ्य के खिलाफ हों। जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए और अलग-अलग संप्रदायों के नाम पर विभाजन नहीं होना चाहिए।

जस्टिस नागरत्ना ने कहा- हिंदू समाज को यह कहकर नहीं बांटा जा सकता कि हम एक अलग संप्रदाय हैं और वे दूसरे। ऐसा नहीं हो सकता कि वे हमारे मंदिर में न आएं और हम उनके मंदिर में न जाएं। अगर हिंदू संप्रदाय अपने दरवाजे दूसरों के लिए नहीं खोलेंगे, तो उन्हें ही नुकसान होगा।

यह टिप्पणी धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों, खासकर सबरीमाला मंदिर विवाद, और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा को लेकर सुनवाई के दौरान की गई।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.