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Vehicle Portal Online Verification For Old Cars

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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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पुरानी गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करना आसान होने वाला है। केंद्र सरकार दूसरे राज्य में गाड़ी ट्रांसफर करने के लिए लगने वाले ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) की अनिवार्यता खत्म कर सकती है।

इसके लिए नीति आयोग की एक हाई-लेवल कमेटी ने परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा, सरकार 15 साल पुरानी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नियम में भी बदलाव कर सकती है।

अभी राज्य बदलने पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जानें

मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के सेक्शन 47 के मुताबिक आप किसी भी राज्य में एक साल तक दूसरे राज्य के वाहन को चला सकते हैं। एक साल के भीतर आपको नए राज्य में अपने वाहन को रजिस्टर्ड कराना होता है।

इसके लिए पुराने RTO से NOC लाना जरूरी है। हर राज्य में ये प्रोसेस अलग-अलग है और डॉक्युमेंट भी अलग-अलग लगते हैं। इसमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट और टैक्स रसीद जैसे डॉक्युमेंट शामिल हैं।

इस सर्टिफिकेट से पता चलता है कि गाड़ी पर कोई टैक्स बकाया नहीं है या कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इसके बिना दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होता। ये सर्टिफिकेट खास तौर पर सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने-बेचने के काम आता है।

ऑटो-जेनरेटेड सिस्टम से ऑनलाइन वेरिफिकेशन होगा

कमेटी ने सुझाव दिया है कि NOC की जगह एक ‘ऑटो-जेनरेटेड क्लीयरेंस सिस्टम’ शुरू किया जाए।

  • कैसे काम करेगा: अब सभी वाहनों का डेटा ‘वाहन’ (VAHAN) के सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डेटाबेस में मौजूद है, इसलिए एक राज्य का RTO दूसरे राज्य की गाड़ी का रिकॉर्ड खुद ही चेक कर सकेगा।
  • डिजिटल वेरिफिकेशन: टैक्स, पेंडिंग चालान या अन्य किसी बकाया की जानकारी ऑटोमैटिक तरीके से वेरिफाई हो जाएगी। इससे वाहन मालिक को फिजिकली NOC लेने के लिए पुराने आरटीओ के चक्कर नहीं काटने होंगे।

उम्र नहीं, फिटनेस तय करेगी गाड़ी सड़क पर रहेगी या नहीं

कमेटी ने एक और बड़ा बदलाव सुझाया है। अब गाड़ियों को उनकी उम्र के आधार पर सड़क से हटाने के बजाय उनकी फिटनेस देखी जाएगी।

इंटरनेशनल प्रैक्टिस: कई देशों में गाड़ी कितनी पुरानी है, इससे फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते वह फिटनेस टेस्ट पास कर ले।

कमर्शियल वाहनों को फायदा: कमेटी का मानना है कि उम्र आधारित पाबंदियों के कारण कई बार अच्छी स्थिति वाली गाड़ियां भी कबाड़ घोषित कर दी जाती हैं। यदि सख्त फिटनेस निरीक्षण प्रणाली लागू हो, तो सेफ और फिट कमर्शियल गाड़ियां उम्र की सीमा पार करने के बाद भी चल सकेंगी।

—————————–

ये खबर भी पढ़ें…

पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट 10 गुना तक महंगा: 20 साल पुरानी कार की ₹15,000 और बाइक की ₹2,000 फीस लगेगी; देखें नई दरें

पुरानी गाड़ियों का फिटनेस टेस्ट अब 10 गुना तक महंगा हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज (MoRTH) ने देश में वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट टेस्ट की फीस बढ़ा दी है। ये बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (फिफ्थ अमेंडमेंट) के तहत लागू कर दिए गए हैं।

नए नियम के तहत अब 20 साल पुरानी कारों का फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 15,000 रुपए, बाइक के लिए 2,000 रुपए और हैवी कमर्शियल व्हीकल के लिए 25,000 रुपए देने पड़ेंगे। इसके अलावा, गाड़ियों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट 10 साल में लेना होगा, जो पहले 15 पुरानी गाड़ियों के लिए अनिवार्य था। पूरी खबर पढ़ें…

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इसके लिए नीति आयोग की एक हाई-लेवल कमेटी ने परिवहन मंत्रालय (MoRTH) को प्रस्ताव भेजा है। इसके अलावा, सरकार 15 साल पुरानी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नियम में भी बदलाव कर सकती है।

अभी राज्य बदलने पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जानें

मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के सेक्शन 47 के मुताबिक आप किसी भी राज्य में एक साल तक दूसरे राज्य के वाहन को चला सकते हैं। एक साल के भीतर आपको नए राज्य में अपने वाहन को रजिस्टर्ड कराना होता है।

इसके लिए पुराने RTO से NOC लाना जरूरी है। हर राज्य में ये प्रोसेस अलग-अलग है और डॉक्युमेंट भी अलग-अलग लगते हैं। इसमें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट और टैक्स रसीद जैसे डॉक्युमेंट शामिल हैं।

इस सर्टिफिकेट से पता चलता है कि गाड़ी पर कोई टैक्स बकाया नहीं है या कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इसके बिना दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होता। ये सर्टिफिकेट खास तौर पर सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदने-बेचने के काम आता है।

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  • कैसे काम करेगा: अब सभी वाहनों का डेटा ‘वाहन’ (VAHAN) के सेंट्रलाइज्ड डिजिटल डेटाबेस में मौजूद है, इसलिए एक राज्य का RTO दूसरे राज्य की गाड़ी का रिकॉर्ड खुद ही चेक कर सकेगा।
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उम्र नहीं, फिटनेस तय करेगी गाड़ी सड़क पर रहेगी या नहीं

कमेटी ने एक और बड़ा बदलाव सुझाया है। अब गाड़ियों को उनकी उम्र के आधार पर सड़क से हटाने के बजाय उनकी फिटनेस देखी जाएगी।

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कमर्शियल वाहनों को फायदा: कमेटी का मानना है कि उम्र आधारित पाबंदियों के कारण कई बार अच्छी स्थिति वाली गाड़ियां भी कबाड़ घोषित कर दी जाती हैं। यदि सख्त फिटनेस निरीक्षण प्रणाली लागू हो, तो सेफ और फिट कमर्शियल गाड़ियां उम्र की सीमा पार करने के बाद भी चल सकेंगी।

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नए नियम के तहत अब 20 साल पुरानी कारों का फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए 15,000 रुपए, बाइक के लिए 2,000 रुपए और हैवी कमर्शियल व्हीकल के लिए 25,000 रुपए देने पड़ेंगे। इसके अलावा, गाड़ियों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट 10 साल में लेना होगा, जो पहले 15 पुरानी गाड़ियों के लिए अनिवार्य था। पूरी खबर पढ़ें…

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