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why girls are disappearing from delhi : special ground report doctor maid 16 year old daughter love story delhi police – क्यों गायब हो रही हैं दिल्ली से लड़कियां, नौकरानी की 16 साल की बेटी की कहानी से आपको समझ में आ जाएगा

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नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर महीने में रात के तकरीबन 11.30 बज रहे थे. दिल्ली सरकार के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने न्यूज 18 हिंदी को फोन कर बताया, ‘उनकी नौकरानी की बेटी अचानक घर से गायब हो गई है. नौकरानी ने रोते कुछ देर पहले बताया कि सर देखिए न मेरी बेटी तीन-चार दिनों से लापता है. आनंद पर्वत थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन दिल्ली पुलिस कुछ कर नहीं रही है. कुछ लिंक है तो जरा बेटी का पता लगवा दीजिए. लड़की 4 दिनों से घर से गायब है. नाबालिग है सर डर लग रहा है. क्या दिल्ली पुलिस में कोई है, जो मेरी बेटी को खोजने में मदद करेगा?

यह घटना दिल्ली के सिर्फ गुलाबी बाग एरिया की नहीं बल्कि कमोबेश हर थाने और हर इलाके की है. हालांकि, तकरीबन दो महीने बाद वह नाबालिग लड़की खुद ही घर लौट आई. लड़की अपने खुद के सगे रिश्तेदार के साथ गायब होकर मथुरा में रह रही थी. फिर दो महीने के बाद मां के पास लौट आई. लेकिन मां की शिकायत रह गई कि दिल्ली पुलिस ने एक बार भी मेरी बेटी के बारे में मुझसे कोई जानकारी नहीं ली और न ही खोजने की कोशिश की. बेटी आ गई तो ठीक है वरना नहीं आती तो हम क्या करते?

दिल्ली से इस वजह से गायब हो रही लड़कियां

इस एक घटना से आप समझ गए होंगे कि दिल्ली से कम उम्र की लड़कियां क्यों गायब हो रही हैं? क्या मां-बाप का गाइडेंस और पुलिसिंग खराब हो गई है या फिर बच्चे समय से पहले जवान और समझदार हो गए हैं? या फिर मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने क्रांति ला दिया है? दिल्ली में बच्चों के गायब होने के हाल के आंकड़े इसे और गंभीर बना रहे हैं. फरवरी 2026 तक के हालिया डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही राजधानी से 807 लोग गायब हो गए, जिनमें 509 महिलाएं और बच्चियां शामिल थीं. इनमें 191 नाबालिग थे, जिनमें से ज्यादातर 146 लड़कियां थीं. 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 मिसिंग केस दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं करीब 14,870 और बच्चियां शामिल थीं. इनमें लड़कियों की उम्र 12-18 साल तक थी. ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का ह्यूमन ट्रैफिकिंग डिपार्टमेंट इसको कैसे देख रही है?

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवासस्तव कहते हैं, ‘दिल्ली में लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है. पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई तेजी नहीं आई है, जबकि, पिछले वर्षों की तुलना में जनवरी 2026 महीने में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में कमी दर्ज की गई है. क्योंकि, दिल्ली में निष्पक्ष एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग की नीति अपनाई जाती है. लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से तथा ERSS-112 के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है. निर्धारित SOP के द्वारा, दिल्ली पुलिस इन सभी मामलों में लापता व्यक्तियों का तुरन्त पता लगाने का प्रयास किया जाता है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. इस संबंध में सभी जिलों में dedicated Missing Persons Squads तथा क्राइम ब्रांच में Anti Human Trafficking Unit कार्यरत हैं, ताकि इस विषय में केंद्रित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने अथवा अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है.’

क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?

देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के एचओडी नवीन कुमार कहते हैं, ‘आज के दौर में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सबसे बड़े खतरे बन गए हैं. फेक आईडी के जरिए अनजान लोग बच्चियों से दोस्ती करते हैं, उन्हें प्यार के जाल में फंसाते हैं या ग्लैमरस दुनिया का लालच देकर घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं. पढ़ाई का बोझ या माता-पिता की टोक-टाक से तंग आकर 12-18 साल के बच्चे-बच्चियां बिना सोचे-समझे घर से निकल जाती हैं. कुछ बच्चे ड्रग्स और अन्य नशों की लत के कारण भी आपराधिक गिरोहों के हत्थे चढ़ रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं घर के अंदर गाइडेंस और बाहर का माहौल बदला है. माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरूत है. कोशिश करें कि मोबाइल और सोशल मिडिया से दूर रखकर खेलकूद में ध्यान दिलाएं.’

दिल्ली पुलिस क्या कर सकती है?

दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी कहते हैं, ‘देखिए यह बिल्कुल अलग मामला होता है. दिल्ली पुलिस का एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच इस समस्या से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है. दिल्ली पुलिस का यह विशेष अभियान गायब बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम करता है. दिल्ली पुलिस ने अबतक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया है. दिल्ली में अब किसी भी नाबालिग के गायब होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और पहले 48 घंटे में सघन तलाशी शुरू की जाती है. गायब बच्चे की जानकारी 24 घंटे के भीतर Zonal Integrated Police Network पर डाल दी जाती है ताकि देशभर की पुलिस अलर्ट हो जाए. इसके बाद भी अगर इस तरह की घटना लगातार हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों को दूर करने की जरूरत है. यह सिर्फ अकेले पुलिस की बस की बात नहीं है. पुलिस का काम है, मामला दर्ज होने के बाद जल्दी से जल्दी निपटाना.’

दिल्ली पुलिस हर दिन किसी न किसी को इस तरह के मामले को सुलझाती है. बीते माह जनवरी महीने में हीएक 14 साल की लड़की प्रिया की गायब होने की शिकायत मिली. प्रिया का इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात दोस्त से बात करने की आदत लग गई. उस दोस्त ने खुद को मुंबई का एक कास्टिंग डायरेक्टर बताया. प्रिया घर से 50 हजार रुपये और जेवर लेकर उसे मिलने चली गई. एएचटीयू की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रिया को आनंद विहार बस टर्मिनल से तब पकड़ा जब वह एक संदिग्ध व्यक्ति के साथ बस में चढ़ने वाली थी. जांच में पता चला कि वह व्यक्ति एक बड़े ट्रैफिकिंग गिरोह का हिस्सा था जो लड़कियों को खाड़ी देशों में भेजने का काम करता था. इसके बाद आप खुद ही समझिए कि दिल्ली में किस वजह से लड़कियां गायब हो रही हैं?

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नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर महीने में रात के तकरीबन 11.30 बज रहे थे. दिल्ली सरकार के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने न्यूज 18 हिंदी को फोन कर बताया, ‘उनकी नौकरानी की बेटी अचानक घर से गायब हो गई है. नौकरानी ने रोते कुछ देर पहले बताया कि सर देखिए न मेरी बेटी तीन-चार दिनों से लापता है. आनंद पर्वत थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन दिल्ली पुलिस कुछ कर नहीं रही है. कुछ लिंक है तो जरा बेटी का पता लगवा दीजिए. लड़की 4 दिनों से घर से गायब है. नाबालिग है सर डर लग रहा है. क्या दिल्ली पुलिस में कोई है, जो मेरी बेटी को खोजने में मदद करेगा?

यह घटना दिल्ली के सिर्फ गुलाबी बाग एरिया की नहीं बल्कि कमोबेश हर थाने और हर इलाके की है. हालांकि, तकरीबन दो महीने बाद वह नाबालिग लड़की खुद ही घर लौट आई. लड़की अपने खुद के सगे रिश्तेदार के साथ गायब होकर मथुरा में रह रही थी. फिर दो महीने के बाद मां के पास लौट आई. लेकिन मां की शिकायत रह गई कि दिल्ली पुलिस ने एक बार भी मेरी बेटी के बारे में मुझसे कोई जानकारी नहीं ली और न ही खोजने की कोशिश की. बेटी आ गई तो ठीक है वरना नहीं आती तो हम क्या करते?

दिल्ली से इस वजह से गायब हो रही लड़कियां

इस एक घटना से आप समझ गए होंगे कि दिल्ली से कम उम्र की लड़कियां क्यों गायब हो रही हैं? क्या मां-बाप का गाइडेंस और पुलिसिंग खराब हो गई है या फिर बच्चे समय से पहले जवान और समझदार हो गए हैं? या फिर मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने क्रांति ला दिया है? दिल्ली में बच्चों के गायब होने के हाल के आंकड़े इसे और गंभीर बना रहे हैं. फरवरी 2026 तक के हालिया डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही राजधानी से 807 लोग गायब हो गए, जिनमें 509 महिलाएं और बच्चियां शामिल थीं. इनमें 191 नाबालिग थे, जिनमें से ज्यादातर 146 लड़कियां थीं. 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 मिसिंग केस दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं करीब 14,870 और बच्चियां शामिल थीं. इनमें लड़कियों की उम्र 12-18 साल तक थी. ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का ह्यूमन ट्रैफिकिंग डिपार्टमेंट इसको कैसे देख रही है?

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क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक?

देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के एचओडी नवीन कुमार कहते हैं, ‘आज के दौर में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सबसे बड़े खतरे बन गए हैं. फेक आईडी के जरिए अनजान लोग बच्चियों से दोस्ती करते हैं, उन्हें प्यार के जाल में फंसाते हैं या ग्लैमरस दुनिया का लालच देकर घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं. पढ़ाई का बोझ या माता-पिता की टोक-टाक से तंग आकर 12-18 साल के बच्चे-बच्चियां बिना सोचे-समझे घर से निकल जाती हैं. कुछ बच्चे ड्रग्स और अन्य नशों की लत के कारण भी आपराधिक गिरोहों के हत्थे चढ़ रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं घर के अंदर गाइडेंस और बाहर का माहौल बदला है. माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरूत है. कोशिश करें कि मोबाइल और सोशल मिडिया से दूर रखकर खेलकूद में ध्यान दिलाएं.’

दिल्ली पुलिस क्या कर सकती है?

दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी कहते हैं, ‘देखिए यह बिल्कुल अलग मामला होता है. दिल्ली पुलिस का एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच इस समस्या से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है. दिल्ली पुलिस का यह विशेष अभियान गायब बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम करता है. दिल्ली पुलिस ने अबतक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया है. दिल्ली में अब किसी भी नाबालिग के गायब होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और पहले 48 घंटे में सघन तलाशी शुरू की जाती है. गायब बच्चे की जानकारी 24 घंटे के भीतर Zonal Integrated Police Network पर डाल दी जाती है ताकि देशभर की पुलिस अलर्ट हो जाए. इसके बाद भी अगर इस तरह की घटना लगातार हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों को दूर करने की जरूरत है. यह सिर्फ अकेले पुलिस की बस की बात नहीं है. पुलिस का काम है, मामला दर्ज होने के बाद जल्दी से जल्दी निपटाना.’

दिल्ली पुलिस हर दिन किसी न किसी को इस तरह के मामले को सुलझाती है. बीते माह जनवरी महीने में हीएक 14 साल की लड़की प्रिया की गायब होने की शिकायत मिली. प्रिया का इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात दोस्त से बात करने की आदत लग गई. उस दोस्त ने खुद को मुंबई का एक कास्टिंग डायरेक्टर बताया. प्रिया घर से 50 हजार रुपये और जेवर लेकर उसे मिलने चली गई. एएचटीयू की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रिया को आनंद विहार बस टर्मिनल से तब पकड़ा जब वह एक संदिग्ध व्यक्ति के साथ बस में चढ़ने वाली थी. जांच में पता चला कि वह व्यक्ति एक बड़े ट्रैफिकिंग गिरोह का हिस्सा था जो लड़कियों को खाड़ी देशों में भेजने का काम करता था. इसके बाद आप खुद ही समझिए कि दिल्ली में किस वजह से लड़कियां गायब हो रही हैं?

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