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Winds of change, youth busy in changing the atmosphere of the area

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श्रीनगर16 मिनट पहले

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दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है।

वुलर झील के किनारे बसे बांदीपोरा के नायदखाई गांव में एक छोटे-से घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है। गांव वाले, रिश्तेदार और परिचित बधाई देने आ रहे हैं। ये घर इरफान अहमद लोन का है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इरफान के पिता बशीर अहमद को लॉन में एक बड़ा टेंट लगवाना पड़ा।

सिंचाई विभाग में दिहाड़ी मजदूर बशीर कहते हैं, हम कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इरफान की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी जमीन भी बेच दी। अब इरफान की सफलता ने उनके छोटे भाई और बहन के मन में भी आईएएस अधिकारी बनने का सपना मजबूत कर दिया है।

यूपीएससी में 257 वीं रैंक हासिल करने वाले पुलवामा के तौसीफ अहमद गनी भी एक मजदूर के बेटे हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ है। ये बदलाव कश्मीर में शिक्षा, अवसर और नई आकांक्षाओं के उभरते माहौल की भी कहानी है। हर साल औसतन 10-15 उम्मीदवार यूपीएससी में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2010 से 2025 के बीच 150 से ज्यादा उम्मीदवार जम्मू-कश्मीर से यूपीएससी में चुने जा चुके हैं।

2025 यूपीएससी में रिकॉर्ड चयन

वर्ष सिलेक्शन 2021 9 2022 16 2023 11 2024 14 2025 17

टॉप 10 में भी आ रहे कश्मीरी नाम एआईआर रैंक शाह फैसल 2010 टॉपर अतहर आमिर 2015 सेकंड अनमोल राठौड़ 2024 सातवीं

प्रेरणा – शाह फैसल के टॉपर बनने के बाद कई युवा टॉप 10 में आए

दो दशक पहले यूपीएससी की चयन सूची में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के सिर्फ एक या दो ही युवा होते थे। 20 साल के आतंक के दौर में सिर्फ चार आईएएस और आईपीएस ही निकले। 2010 में शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले कश्मीर के पहले उम्मीदवार बने। उनसे प्रेरणा लेकर बड़ी संख्या में युवा यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2016 में अतहर आमिर ने यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल की। इसके बाद कई युवा टॉप 10 में अपना स्थान बनाने में सफल रहे।

विस्तार – पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी कर रहे मदद

पिछले कुछ वर्षों में, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी न केवल श्रीनगर बल्कि छोटे कस्बों में भी छात्रों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बन गई है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोचिंग सेंटरों का विस्तार हो रहा है। श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला और पुलवामा जैसे शहरों में लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर बढ़ रहे हैं। कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। पूर्व आईजीपी बसंत रथ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के सिविल सेवा उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग दे रहे हैं।

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वुलर झील के किनारे बसे बांदीपोरा के नायदखाई गांव में एक छोटे-से घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है। गांव वाले, रिश्तेदार और परिचित बधाई देने आ रहे हैं। ये घर इरफान अहमद लोन का है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इरफान के पिता बशीर अहमद को लॉन में एक बड़ा टेंट लगवाना पड़ा।

सिंचाई विभाग में दिहाड़ी मजदूर बशीर कहते हैं, हम कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इरफान की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी जमीन भी बेच दी। अब इरफान की सफलता ने उनके छोटे भाई और बहन के मन में भी आईएएस अधिकारी बनने का सपना मजबूत कर दिया है।

यूपीएससी में 257 वीं रैंक हासिल करने वाले पुलवामा के तौसीफ अहमद गनी भी एक मजदूर के बेटे हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ है। ये बदलाव कश्मीर में शिक्षा, अवसर और नई आकांक्षाओं के उभरते माहौल की भी कहानी है। हर साल औसतन 10-15 उम्मीदवार यूपीएससी में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2010 से 2025 के बीच 150 से ज्यादा उम्मीदवार जम्मू-कश्मीर से यूपीएससी में चुने जा चुके हैं।

2025 यूपीएससी में रिकॉर्ड चयन

वर्ष सिलेक्शन 2021 9 2022 16 2023 11 2024 14 2025 17

टॉप 10 में भी आ रहे कश्मीरी नाम एआईआर रैंक शाह फैसल 2010 टॉपर अतहर आमिर 2015 सेकंड अनमोल राठौड़ 2024 सातवीं

प्रेरणा – शाह फैसल के टॉपर बनने के बाद कई युवा टॉप 10 में आए

दो दशक पहले यूपीएससी की चयन सूची में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के सिर्फ एक या दो ही युवा होते थे। 20 साल के आतंक के दौर में सिर्फ चार आईएएस और आईपीएस ही निकले। 2010 में शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले कश्मीर के पहले उम्मीदवार बने। उनसे प्रेरणा लेकर बड़ी संख्या में युवा यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2016 में अतहर आमिर ने यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल की। इसके बाद कई युवा टॉप 10 में अपना स्थान बनाने में सफल रहे।

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