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अरिजीत सिंह गुरुद्वारे में कीर्तन गाया करते थे:सिंगर के पिता ने बताया कि लाहौर से उनका सिख परिवार बंगाल में कैसे बस गया?

अरिजीत सिंह गुरुद्वारे में कीर्तन गाया करते थे:सिंगर के पिता ने बताया कि लाहौर से उनका सिख परिवार बंगाल में कैसे बस गया?

सिंगर अरिजीत सिंह के पिता सुरिंदर सिंह ने हाल ही में बताया कि विभाजन के बाद उनका सिख परिवार लाहौर से पश्चिम बंगाल के जियागंज आकर बस गया। उन्होंने यह भी कहा कि अरिजीत बचपन में गुरुद्वारे में कीर्तन गाते थे। द टेलीग्राफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उनके पिता सुरिंदर सिंह ने परिवार की पुरानी कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनका पैतृक घर लाहौर के पास था। देश के बंटवारे के बाद उनके पिता और तीनों भाई पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के ललगोला आ गए थे। उन्होंने कहा, “हमारा पैतृक घर लाहौर के पास था। बंटवारे के बाद मेरे पिता और उनके तीन भाई ललगोला आ गए।” बंटवारे के समय कई परिवारों की तरह उन्हें भी सब कुछ छोड़कर नई जगह से शुरुआत करनी पड़ी। वे कपड़े का कारोबार करते थे। बाद में परिवार मुर्शिदाबाद जिले के छोटे से शहर जियागंज आकर बस गया। सुरिंदर सिंह ने कहा, “वे कपड़े के व्यापारी थे और किसी तरह जियागंज पहुंच गए और नदी के किनारे अपना घर बना लिया।” ललगोला से परिवार धीरे-धीरे जियागंज में बस गया। उनके कुछ रिश्तेदार पंजाबीपाड़ा इलाके में रहने लगे। वहां सिख समुदाय ने एक गुरुद्वारा बनाया।
समय के साथ जियागंज सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा, बल्कि घर बन गया। अरिजीत सिंह बचपन में घर और मोहल्ले में शोनू नाम से जाने जाते थे। साल 2013 में बड़ी पहचान मिलने के बाद भी उनका रिश्ता इस शहर से जुड़ा रहा। संगीत बचपन से ही उनकी जिंदगी का हिस्सा था। अरिजीत मां के साथ गुरुद्वारे जाया करते थे उनके पिता ने बताया कि वे खास मौकों पर अपनी मां के साथ गुरुद्वारे जाते थे और कीर्तन गाते थे। सुरिंदर सिंह ने बेटे की सफलता पर अपनी भावना भी बताई। उन्होंने कहा, “मजा आता है। मुझे अच्छा लगता है। लोग मुझसे पूछते हैं कि आपका बेटा क्या कर रहा है और उसका अगला प्रोजेक्ट क्या है।” मुंबई में काम करने के बावजूद अरिजीत का मन जियागंज से जुड़ा रहा। उनके पिता ने कहा, “यह बहुत शांत जगह है। मेरा बेटा मुंबई में नहीं रह पाया और वापस आ गया। इस मिट्टी में ऐसा खिंचाव है।” आज भी वे जियागंज से जुड़े हुए हैं। उनके बच्चे यहीं पढ़ाई कर रहे हैं। वे शहर के स्कूल और दूसरी सुविधाओं के लिए कई चैरिटी प्रोजेक्ट भी चला रहे हैं। 27 जनवरी को अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट का ऐलान किया। इस खबर से उनके फैंस हैरान रह गए। म्यूजिक इंडस्ट्री में भी इस फैसले पर चर्चा शुरू हो गई। इस बीच उनका नया गाना ‘रैना’ रिलीज हुआ है। इस गाने को शेखर रवजियानी ने कंपोज किया है और इसके बोल प्रिया सरैया ने लिखे हैं।

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समय के साथ जियागंज सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा, बल्कि घर बन गया। अरिजीत सिंह बचपन में घर और मोहल्ले में शोनू नाम से जाने जाते थे। साल 2013 में बड़ी पहचान मिलने के बाद भी उनका रिश्ता इस शहर से जुड़ा रहा। संगीत बचपन से ही उनकी जिंदगी का हिस्सा था। अरिजीत मां के साथ गुरुद्वारे जाया करते थे उनके पिता ने बताया कि वे खास मौकों पर अपनी मां के साथ गुरुद्वारे जाते थे और कीर्तन गाते थे। सुरिंदर सिंह ने बेटे की सफलता पर अपनी भावना भी बताई। उन्होंने कहा, “मजा आता है। मुझे अच्छा लगता है। लोग मुझसे पूछते हैं कि आपका बेटा क्या कर रहा है और उसका अगला प्रोजेक्ट क्या है।” मुंबई में काम करने के बावजूद अरिजीत का मन जियागंज से जुड़ा रहा। उनके पिता ने कहा, “यह बहुत शांत जगह है। मेरा बेटा मुंबई में नहीं रह पाया और वापस आ गया। इस मिट्टी में ऐसा खिंचाव है।” आज भी वे जियागंज से जुड़े हुए हैं। उनके बच्चे यहीं पढ़ाई कर रहे हैं। वे शहर के स्कूल और दूसरी सुविधाओं के लिए कई चैरिटी प्रोजेक्ट भी चला रहे हैं। 27 जनवरी को अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट का ऐलान किया। इस खबर से उनके फैंस हैरान रह गए। म्यूजिक इंडस्ट्री में भी इस फैसले पर चर्चा शुरू हो गई। इस बीच उनका नया गाना ‘रैना’ रिलीज हुआ है। इस गाने को शेखर रवजियानी ने कंपोज किया है और इसके बोल प्रिया सरैया ने लिखे हैं।

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