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कुछ पेनिकलर दवाओं में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह भी मेडिसिन का तत्व, यहां समझ लीजिए

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Caffeine in Pain Relief Medicines: कई पेनकिलर दवाओं में कैफीन इसलिए मिलाया जाता है, क्योंकि यह दवा के असर को बढ़ाने और दर्द से जल्दी राहत दिलाने में मदद कर सकता है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन की दवाओं में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है. हालांकि ज्यादा कैफीन कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. ऐसे में सावधानी बरतनी चाहिए.

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पेनकिलर दवाओं में कैफीन मिलाने से उनका असर तेज और बेहतर तरीके से होता है.

Caffeine in Headache Medicines: कैफीन एक नेचुरल तत्व होता है, जो चाय-कॉफी और चॉकलेट से लेकर कई खाने-पीने की चीजों में पाया जाता है. कई एनर्जी ड्रिंक्स और शुगरी ड्रिंक्स में भी कैफीन मिलाया जाता है. यह एक स्टिम्युलेंट है, जो हमारे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिव कर सतर्कता और एनर्जी बढ़ाता है. जब भी लोग सिरदर्द, माइग्रेन या बदन दर्द की दवा लेते हैं, तो कई बार दवा के पैकेट पर कैफीन लिखा होता है. अक्सर सवाल उठता है कि दर्द की दवा में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह सिर्फ जागने या नींद भगाने के लिए होता है या फिर इसका दर्द कम करने में भी कोई रोल है?

US के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कैफीन सिर्फ चाय-कॉफी में पाया जाने वाला तत्व नहीं है, बल्कि कई पेनकिलर दवाओं में इसे एक एनाल्जेसिक एडजुवेंट यानी दवा का असर बढ़ाने वाले तत्व के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कैफीन खुद बहुत मजबूत पेनकिलर नहीं होता, लेकिन यह पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाओं के असर को बढ़ाने में मदद कर सकता है. कई रिसर्च में पाया गया है कि पेनकिलर के साथ कैफीन मिलाने से दर्द से राहत थोड़ी तेजी से और बेहतर मिल सकती है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन जैसी परेशानियों में कैफीन वाली दवाएं ज्यादा यूज की जाती हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि कैफीन शरीर में कुछ ऐसे रिसेप्टर्स को ब्लॉक करता है, जो दर्द महसूस कराने में भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा यह दवा के अवशोषण को तेज कर सकता है, जिससे दवा जल्दी असर दिखा सकती है. कुछ मामलों में कैफीन ब्रेन की ब्लड वेसल्स को संकरा करने में भी मदद करता है, जो माइग्रेन या सिरदर्द में राहत देने में उपयोगी माना जाता है. एक मेडिकल रिव्यू में पाया गया कि लगभग 100 मिलीग्राम या उससे अधिक कैफीन को सामान्य पेनकिलर के साथ मिलाने पर 5% से 10% ज्यादा लोगों को बेहतर दर्द से राहत मिली, जबकि सामान्य पेनिकलर वालों को कम राहत मिली.

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा कैफीन वाली दवाएं हमेशा बेहतर होती हैं, ऐसा नहीं है. कुछ लोगों को कैफीन से घबराहट, नींद न आना, दिल की धड़कन तेज होना या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जो लोग पहले से ज्यादा चाय-कॉफी पीते हैं या कैफीन के प्रति संवेदनशील हैं, उन्हें ऐसी दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर, एंजायटी या नींद की समस्या वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. किसी भी दवा का लगातार या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए बिना एक्सपर्ट की सलाह के लंबे समय तक दवा का सेवन नहीं करना चाहिए.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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पेनकिलर दवाओं में कैफीन मिलाने से उनका असर तेज और बेहतर तरीके से होता है.

Caffeine in Headache Medicines: कैफीन एक नेचुरल तत्व होता है, जो चाय-कॉफी और चॉकलेट से लेकर कई खाने-पीने की चीजों में पाया जाता है. कई एनर्जी ड्रिंक्स और शुगरी ड्रिंक्स में भी कैफीन मिलाया जाता है. यह एक स्टिम्युलेंट है, जो हमारे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिव कर सतर्कता और एनर्जी बढ़ाता है. जब भी लोग सिरदर्द, माइग्रेन या बदन दर्द की दवा लेते हैं, तो कई बार दवा के पैकेट पर कैफीन लिखा होता है. अक्सर सवाल उठता है कि दर्द की दवा में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह सिर्फ जागने या नींद भगाने के लिए होता है या फिर इसका दर्द कम करने में भी कोई रोल है?

US के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कैफीन सिर्फ चाय-कॉफी में पाया जाने वाला तत्व नहीं है, बल्कि कई पेनकिलर दवाओं में इसे एक एनाल्जेसिक एडजुवेंट यानी दवा का असर बढ़ाने वाले तत्व के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कैफीन खुद बहुत मजबूत पेनकिलर नहीं होता, लेकिन यह पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाओं के असर को बढ़ाने में मदद कर सकता है. कई रिसर्च में पाया गया है कि पेनकिलर के साथ कैफीन मिलाने से दर्द से राहत थोड़ी तेजी से और बेहतर मिल सकती है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन जैसी परेशानियों में कैफीन वाली दवाएं ज्यादा यूज की जाती हैं.

वैज्ञानिकों का मानना है कि कैफीन शरीर में कुछ ऐसे रिसेप्टर्स को ब्लॉक करता है, जो दर्द महसूस कराने में भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा यह दवा के अवशोषण को तेज कर सकता है, जिससे दवा जल्दी असर दिखा सकती है. कुछ मामलों में कैफीन ब्रेन की ब्लड वेसल्स को संकरा करने में भी मदद करता है, जो माइग्रेन या सिरदर्द में राहत देने में उपयोगी माना जाता है. एक मेडिकल रिव्यू में पाया गया कि लगभग 100 मिलीग्राम या उससे अधिक कैफीन को सामान्य पेनकिलर के साथ मिलाने पर 5% से 10% ज्यादा लोगों को बेहतर दर्द से राहत मिली, जबकि सामान्य पेनिकलर वालों को कम राहत मिली.

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा कैफीन वाली दवाएं हमेशा बेहतर होती हैं, ऐसा नहीं है. कुछ लोगों को कैफीन से घबराहट, नींद न आना, दिल की धड़कन तेज होना या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जो लोग पहले से ज्यादा चाय-कॉफी पीते हैं या कैफीन के प्रति संवेदनशील हैं, उन्हें ऐसी दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर, एंजायटी या नींद की समस्या वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. किसी भी दवा का लगातार या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए बिना एक्सपर्ट की सलाह के लंबे समय तक दवा का सेवन नहीं करना चाहिए.

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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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