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गलती से भी न खाएं ये मछली, शरीर में जाते बन जाएगी जहर, पेट दर्द, उल्टी, दस्त से होंगे परेशान, किडनी लिवर हो सकते हैं खराब!

गलती से भी न खाएं ये मछली, शरीर में जाते बन जाएगी जहर, पेट दर्द, उल्टी, दस्त से होंगे परेशान, किडनी लिवर हो सकते हैं खराब!

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What is Dried fish and its side effects: मछली खाने के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. जो लोग मछली खाना पसंद करते हैं, वे सप्ताह में दो बार जरूर इसे खाते होंगे. कई तरह की मछलियां मिलती हैं और सभी का स्वाद अलग होता है. प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली सेहत के लिए बेहद हेल्दी होती है. आमतौर पर लोग फ्राई फिश, ग्रेवी वाली मछली, मछली का भरता, यहां तक कि मछली का अचार भी खाते हैं. लेकिन क्या आप ड्राई फिश (Dried fish) भी खाना पसंद करते हैं या कभी खाएं हैं, तो खास सावधानी बरतें, क्योंकि कुछ लोगों को सूखी मछली खाकर भारी नुकसान हो सकता है. जानिए क्या है सूखी मछली, इसके फायदे-नुकसान, बनाने का तरीका, खाते समय किन बातों का रखें ध्यान…

मछली की कई वेरायटी होती है. कई तरह से इसे पकाया जाता है. अलग-अलग राज्यों में मछली को बेचने का भी तरीका डिफरेंट होता है. साउथ इंडिया की बात करें तो यहां मछली को सुखा कर भी बेचा जाता है. जिन लोगों को इस तरह की मछली खाने से कोई नुकसान नहीं होता, वे इसे चाव से खाते हैं, लेकिन जिन्हें पहले से ही एलर्जी, किडनी, हाई ब्लड प्रेशर आदि की समस्या हो, उन्हें इसे खाने से परहेज करना चाहिए. ड्राई फिश में बहुत अधिक नमक लगाकर इसे सुखाया जाता है और फिर बेचा जाता है. इसे तैयार करने की प्रक्रिया नॉर्मल मछली बेचने से अलग है.

क्या होती है सूखी मछली- सूखी मछली (Dried Fish) तैयार करने के लिए मछलियों पर ढेर सारा नमक लगाया जाता है. फिर इसे धूप में सुखाकर या मशीन से डिहाइड्रेट करके लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है. भारत के कई तटीय इलाकों जैसे केरला, गोवा, असाम, पश्चिम बंगाल में इसे चाव से लोग खाते हैं. सूखी मछली को बंगाली में शुटकी, असाम में नगन कहते हैं. वहीं, दक्षिण भारत में अलग-अलग स्थानीय नामों से इसे जाना जाता है. ताज़ी मछली को साफ करके इस पर नमक लगाते हैं. धूप और हवा में सुखाते हैं. जब ये सूख जाती है तो इसमें मौजूद नमी कम होती है और बैक्टीरिया बनने की वृद्धि भी धीमी हो जाती है. इस तरह से ये मछली लंबे समय तक खराब नहीं होती है.

सूखी मछली खाने के नुकसान- चूंकि, मछलियों पर नमक लगाकर सुखाया जाता है, जिससे सोडियम की मात्रा काफी बढ़ जाती है. इससे हाई ब्लड प्रेशर, वॉटर रिटेंशन, किडनी पर प्रेशर बनना, बैक्टीरिया और फफूंदी का रिस्क बढ़ सकता है. यदि सूखी मछली को सही तरीके से स्टोर ना किया जाए तो इसमें फंगस, कीड़े, बैक्टीरिया लग सकते हैं. इसे खा लेने पर शरीर में टॉक्सिन बढ़ सकता है. पाचन खराब हो सकता है. पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, लिवर, किडनी की समस्या हो सकती है. कुछ लोगों में एसिडिटी, अपच, फूड पॉइजनिंग, एलर्जी का कारण बन सकती है ड्राई फिश. कुछ जगहों पर इसमें केमिकल जैसे फॉर्मेलिन या कीटनाशक की मिलावट की जाती है, ताकि ये जल्दी खराब न हो. ये सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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ब्लड प्रेशर यूके और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सूखी मछली में नमक की अधिक मात्रा होने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो सकती है. ऐसे में जिन लोगों का ब्लड प्रेशर हाई रहता है, वे इसके सेवन से बचें. साथ ही किडनी प्रॉब्लम भी हो सकता है. कुछ जगहों पर मछली में रंग भी मिलाए जाते हैं. सुखाने के लिए हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे जी मिचलाना,पेट दर्द काफी तेज उठ सकता है.

हिस्टामाइन विषाक्तता क्या है- कई तरह की सूखी मछलियों में हिस्टामाइन विषाक्तता हो सकती है, जिसे Scombroid poisoning भी कहा जाता है. ऐसा तब होता है, जब मछली पकड़ने के बाद इसे सही टेम्परेचर में स्टोर करके न रखा जाए. मिनेसोटा स्वास्थ्य विभाग (विकिपीडिया) के अनुसार, समुद्री मछलियां जैसे टूना, मैकेरल, सार्डिन में हिस्टिडीन नामक अमीनो एसिड ज्यादा होता है. खराब स्टोरेज में बैक्टीरिया इसे हिस्टामाइन में बदल देते हैं. ऐसी मछली खाने से पेट दर्द, स्किन पर रेडनेस, डायरिया, त्वचा में खुजली, सिरदर्द, हार्ट बीट तेज होना, सांस लेने में परेशानी होना, मुंह में जलन आदि हो सकता है. उन लोगों को ये समस्याएं अधिक हो सकती हैं, जो समुद्री मछली नहीं खाते हैं. अक्सर ऐसा टॉक्सिन की वजह से होता है.

किन लोगों को सूखी मछली नहीं खानी चाहिए- हाई ब्लड प्रेशर, किडनी पेशेंट, हिस्टामाइन संवेदनशील लोग, जिन्हें माइग्रेन, स्किन रैशेज, एलर्जी होती है, अस्थमा के मरीज, प्रेग्नेंट महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इसे बिल्कुल न खाएं वरना फूड पॉइजनिंग का जोखिम गंभीर हो सकता है.

सुरक्षित तरीके से सूखी मछली कैसे खाएं- सही तरीके से तैयार और स्टोर की गई सूखी मछली सामान्यतः सुरक्षित होती है. हमेशा अच्छी क्वालिटी वाली, सही तरीके से स्टोर की गई सूखी मछली ही खरीदें. तेज सही हुई दुर्गंध आए तो बिल्कुल ना खरीदें. इसे पकाने से पहले अच्छी तरह से धोएं. पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें ताकि एक्स्ट्रा नमक निकल जाए. अच्छी तरह से पकाकर खाएं. नमी रहित बंद डिब्बे में रखें. आप इसे गर्म पानी में भी 20 मिनट के लिए डालकर छोड़ सकते हैं. इससे नमक और गंदगी निकल जाएगी. जिन लोगों को सी फूड से एलर्जी है, वे बिल्कुल न खाएं.

सूखी मछली खाने के फायदे- मछली में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होती है. जब इसमें पानी की मात्रा कम हो जाती है तो प्रोटीन की मात्रा और अधिक बढ़ जाती है. प्रोटीन मसल्स और शरीर की मरम्मत में मदद करता है. मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होने के कारण हार्ट, ब्रेन को हेल्दी रखने के साथ ही इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद कर सकता है. ड्राई फिश में कैल्शियम,फॉस्फोरस, आयरन भी होते हैं, जो हड्डियों को मजबूती देते हैं, शरीर में आयरन, खून की कमी नहीं होने देते.

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What is Dried fish and its side effects: मछली खाने के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. जो लोग मछली खाना पसंद करते हैं, वे सप्ताह में दो बार जरूर इसे खाते होंगे. कई तरह की मछलियां मिलती हैं और सभी का स्वाद अलग होता है. प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली सेहत के लिए बेहद हेल्दी होती है. आमतौर पर लोग फ्राई फिश, ग्रेवी वाली मछली, मछली का भरता, यहां तक कि मछली का अचार भी खाते हैं. लेकिन क्या आप ड्राई फिश (Dried fish) भी खाना पसंद करते हैं या कभी खाएं हैं, तो खास सावधानी बरतें, क्योंकि कुछ लोगों को सूखी मछली खाकर भारी नुकसान हो सकता है. जानिए क्या है सूखी मछली, इसके फायदे-नुकसान, बनाने का तरीका, खाते समय किन बातों का रखें ध्यान…

मछली की कई वेरायटी होती है. कई तरह से इसे पकाया जाता है. अलग-अलग राज्यों में मछली को बेचने का भी तरीका डिफरेंट होता है. साउथ इंडिया की बात करें तो यहां मछली को सुखा कर भी बेचा जाता है. जिन लोगों को इस तरह की मछली खाने से कोई नुकसान नहीं होता, वे इसे चाव से खाते हैं, लेकिन जिन्हें पहले से ही एलर्जी, किडनी, हाई ब्लड प्रेशर आदि की समस्या हो, उन्हें इसे खाने से परहेज करना चाहिए. ड्राई फिश में बहुत अधिक नमक लगाकर इसे सुखाया जाता है और फिर बेचा जाता है. इसे तैयार करने की प्रक्रिया नॉर्मल मछली बेचने से अलग है.

क्या होती है सूखी मछली- सूखी मछली (Dried Fish) तैयार करने के लिए मछलियों पर ढेर सारा नमक लगाया जाता है. फिर इसे धूप में सुखाकर या मशीन से डिहाइड्रेट करके लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है. भारत के कई तटीय इलाकों जैसे केरला, गोवा, असाम, पश्चिम बंगाल में इसे चाव से लोग खाते हैं. सूखी मछली को बंगाली में शुटकी, असाम में नगन कहते हैं. वहीं, दक्षिण भारत में अलग-अलग स्थानीय नामों से इसे जाना जाता है. ताज़ी मछली को साफ करके इस पर नमक लगाते हैं. धूप और हवा में सुखाते हैं. जब ये सूख जाती है तो इसमें मौजूद नमी कम होती है और बैक्टीरिया बनने की वृद्धि भी धीमी हो जाती है. इस तरह से ये मछली लंबे समय तक खराब नहीं होती है.

सूखी मछली खाने के नुकसान- चूंकि, मछलियों पर नमक लगाकर सुखाया जाता है, जिससे सोडियम की मात्रा काफी बढ़ जाती है. इससे हाई ब्लड प्रेशर, वॉटर रिटेंशन, किडनी पर प्रेशर बनना, बैक्टीरिया और फफूंदी का रिस्क बढ़ सकता है. यदि सूखी मछली को सही तरीके से स्टोर ना किया जाए तो इसमें फंगस, कीड़े, बैक्टीरिया लग सकते हैं. इसे खा लेने पर शरीर में टॉक्सिन बढ़ सकता है. पाचन खराब हो सकता है. पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, लिवर, किडनी की समस्या हो सकती है. कुछ लोगों में एसिडिटी, अपच, फूड पॉइजनिंग, एलर्जी का कारण बन सकती है ड्राई फिश. कुछ जगहों पर इसमें केमिकल जैसे फॉर्मेलिन या कीटनाशक की मिलावट की जाती है, ताकि ये जल्दी खराब न हो. ये सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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ब्लड प्रेशर यूके और डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सूखी मछली में नमक की अधिक मात्रा होने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो सकती है. ऐसे में जिन लोगों का ब्लड प्रेशर हाई रहता है, वे इसके सेवन से बचें. साथ ही किडनी प्रॉब्लम भी हो सकता है. कुछ जगहों पर मछली में रंग भी मिलाए जाते हैं. सुखाने के लिए हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है, जिससे जी मिचलाना,पेट दर्द काफी तेज उठ सकता है.

हिस्टामाइन विषाक्तता क्या है- कई तरह की सूखी मछलियों में हिस्टामाइन विषाक्तता हो सकती है, जिसे Scombroid poisoning भी कहा जाता है. ऐसा तब होता है, जब मछली पकड़ने के बाद इसे सही टेम्परेचर में स्टोर करके न रखा जाए. मिनेसोटा स्वास्थ्य विभाग (विकिपीडिया) के अनुसार, समुद्री मछलियां जैसे टूना, मैकेरल, सार्डिन में हिस्टिडीन नामक अमीनो एसिड ज्यादा होता है. खराब स्टोरेज में बैक्टीरिया इसे हिस्टामाइन में बदल देते हैं. ऐसी मछली खाने से पेट दर्द, स्किन पर रेडनेस, डायरिया, त्वचा में खुजली, सिरदर्द, हार्ट बीट तेज होना, सांस लेने में परेशानी होना, मुंह में जलन आदि हो सकता है. उन लोगों को ये समस्याएं अधिक हो सकती हैं, जो समुद्री मछली नहीं खाते हैं. अक्सर ऐसा टॉक्सिन की वजह से होता है.

किन लोगों को सूखी मछली नहीं खानी चाहिए- हाई ब्लड प्रेशर, किडनी पेशेंट, हिस्टामाइन संवेदनशील लोग, जिन्हें माइग्रेन, स्किन रैशेज, एलर्जी होती है, अस्थमा के मरीज, प्रेग्नेंट महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इसे बिल्कुल न खाएं वरना फूड पॉइजनिंग का जोखिम गंभीर हो सकता है.

सुरक्षित तरीके से सूखी मछली कैसे खाएं- सही तरीके से तैयार और स्टोर की गई सूखी मछली सामान्यतः सुरक्षित होती है. हमेशा अच्छी क्वालिटी वाली, सही तरीके से स्टोर की गई सूखी मछली ही खरीदें. तेज सही हुई दुर्गंध आए तो बिल्कुल ना खरीदें. इसे पकाने से पहले अच्छी तरह से धोएं. पानी में डालकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें ताकि एक्स्ट्रा नमक निकल जाए. अच्छी तरह से पकाकर खाएं. नमी रहित बंद डिब्बे में रखें. आप इसे गर्म पानी में भी 20 मिनट के लिए डालकर छोड़ सकते हैं. इससे नमक और गंदगी निकल जाएगी. जिन लोगों को सी फूड से एलर्जी है, वे बिल्कुल न खाएं.

सूखी मछली खाने के फायदे- मछली में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होती है. जब इसमें पानी की मात्रा कम हो जाती है तो प्रोटीन की मात्रा और अधिक बढ़ जाती है. प्रोटीन मसल्स और शरीर की मरम्मत में मदद करता है. मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होने के कारण हार्ट, ब्रेन को हेल्दी रखने के साथ ही इंफ्लेमेशन को कम करने में मदद कर सकता है. ड्राई फिश में कैल्शियम,फॉस्फोरस, आयरन भी होते हैं, जो हड्डियों को मजबूती देते हैं, शरीर में आयरन, खून की कमी नहीं होने देते.

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