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ममता के दो ‘एम’ फैक्टर का दर्जा, मुस्लिमों और महिलाओं ने दिया दादी का किला, बंगाल में खेला कमल!

ममता के दो 'एम' फैक्टर का दर्जा, मुस्लिमों और महिलाओं ने दिया दादी का किला, बंगाल में खेला कमल!

बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार प्रोटोटाइप अनुपात पूरी तरह से नजर आया। लंबे समय से ओलंपिक कांग्रेस (टीएमसी) की ताकत माने जाने वाली महिला और मुस्लिम वोटर एआई ‘दो एम फैक्टर’ इस बार के ड्राअल डॉक्युमेंट्स, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर देखने को मिला।

महिला कारक पर बीजेपी का फोकस
महिला नटखट बिल के जाने को तोड़ दिया भाजपा गिर ने किया जोरदार प्रचार। यही नहीं, महिलाओं को केंद्र में रखने वाली पार्टी ने कई बड़े लॉन्च भी किए। इसका असर चुनाव में साफ दिख रहा है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई रेप और मार्केट जैसी घटना ने भी महिलाओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए, जिससे निवेशकों की पकड़ मजबूत होती नजर आई।

मुस्लिम बटाएव की स्थिति में
अब दूसरे ‘एम’ यानी मुस्लिम फैक्टर की बात करें तो इस बार यह कम्यूनिटी पहले की तरह एकजुट नहीं दिखती। ममता बनर्जी की राजनीति में मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इस बार यह आंकड़ा टूटता नजर आया। इनसाइडर के अंदर भी चर्चा है कि एसआईआर, वक्फ और मुस्लिम लिस्ट से मुस्लिम अमीरों को बाहर कर दिया जाए, जैसे कि मुस्लिम पर ममता बनर्जी प्रभावी तरीके से कम्यूनिटी का पक्ष नहीं रख पातीं। इसी वजह से मुस्लिम वोटर पहले की तरह के साथ एकजुट नहीं रहे।

हिंदू वोटरों का कट्टरपंथ बीजेपी की ओर
दूसरी ओर, हिंदू वोटरों के पहले गुट भाजपा के पक्ष में अधिकांश लामबंद दिखाई देते हैं, जिसका प्रभावशाली साक्षात् दृश्य है। मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिले में भाजपा को 8 वें स्थान पर जीत मिली, जो कि मजबूत गढ़ माना जा रहा है।

कई अनुपातों में परिवर्तन
मालदा में भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पश्चिम बर्धमान जैसे सजावटी में भी मुस्लिम समुदाय का बंटवारा देखने को मिला। बहस का मानना ​​है कि ये दो बड़े फैक्टर (महिला और मुस्लिम) के खिलाफ चले गए।

ये भी पढ़ें- बंगाल में ममता बनर्जी का किला कैसे टूटा, महिला वोट बैंक में सेंध से हिंदू उपदेश के ध्रुवीकरण तक सत्य गंवाने के 5 बड़े कारक


प्रमुख चतुर्थांश पर भाजपा की जीत

मुस्लिम बहुल बहरामपुर सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुब्रत मैत्रा ने जीत हासिल की। इसके अलावा खारग्राम, कांडी, नाबाग्राम, जंगीपुर, मुर्शिदाबाद, बेलडांगा और बुरवन में भी भाजपा ने जीत दर्ज की। मालदा की इंग्लिश मार्केट सीट से बीजेपी के अमलान भादुड़ी ने 93,784 सीट से बड़ी जीत हासिल की, जबकि हबीबपुर सीट से जोयेल मुर्मू विजयी रहे।

केंद्रीय नेतृत्व का सक्रिय प्रभाव
बीजेपी की जीत में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका भी अहम रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कई देशों को लुभाया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करीब 10 दिन से राज्य में डेट कर रहे हैं. चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब समेत कई नेताओं ने लगातार पार्टी को मजबूत किया. भाजपा की रणनीति सिर्फ विधानसभा स्तर तक ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक बेहद सक्रिय रही, जिसका फायदा चुनावी नतीजों में साफ तौर पर दिख रहा है।

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तस्वीर का विवरण

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9:21 pm

आवश्यक सामग्री: 1 ठंडा सोडा, 1 नींबू का रस, 1/2 छोटा चम्मच काला नमक, 1/4 छोटा चम्मच जीरा पाउडर, 1/4...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

ममता के दो ‘एम’ फैक्टर का दर्जा, मुस्लिमों और महिलाओं ने दिया दादी का किला, बंगाल में खेला कमल!

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बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार प्रोटोटाइप अनुपात पूरी तरह से नजर आया। लंबे समय से ओलंपिक कांग्रेस (टीएमसी) की ताकत माने जाने वाली महिला और मुस्लिम वोटर एआई ‘दो एम फैक्टर’ इस बार के ड्राअल डॉक्युमेंट्स, जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर देखने को मिला।

महिला कारक पर बीजेपी का फोकस
महिला नटखट बिल के जाने को तोड़ दिया भाजपा गिर ने किया जोरदार प्रचार। यही नहीं, महिलाओं को केंद्र में रखने वाली पार्टी ने कई बड़े लॉन्च भी किए। इसका असर चुनाव में साफ दिख रहा है. आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई रेप और मार्केट जैसी घटना ने भी महिलाओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए, जिससे निवेशकों की पकड़ मजबूत होती नजर आई।

मुस्लिम बटाएव की स्थिति में
अब दूसरे ‘एम’ यानी मुस्लिम फैक्टर की बात करें तो इस बार यह कम्यूनिटी पहले की तरह एकजुट नहीं दिखती। ममता बनर्जी की राजनीति में मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इस बार यह आंकड़ा टूटता नजर आया। इनसाइडर के अंदर भी चर्चा है कि एसआईआर, वक्फ और मुस्लिम लिस्ट से मुस्लिम अमीरों को बाहर कर दिया जाए, जैसे कि मुस्लिम पर ममता बनर्जी प्रभावी तरीके से कम्यूनिटी का पक्ष नहीं रख पातीं। इसी वजह से मुस्लिम वोटर पहले की तरह के साथ एकजुट नहीं रहे।

हिंदू वोटरों का कट्टरपंथ बीजेपी की ओर
दूसरी ओर, हिंदू वोटरों के पहले गुट भाजपा के पक्ष में अधिकांश लामबंद दिखाई देते हैं, जिसका प्रभावशाली साक्षात् दृश्य है। मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल जिले में भाजपा को 8 वें स्थान पर जीत मिली, जो कि मजबूत गढ़ माना जा रहा है।

कई अनुपातों में परिवर्तन
मालदा में भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पश्चिम बर्धमान जैसे सजावटी में भी मुस्लिम समुदाय का बंटवारा देखने को मिला। बहस का मानना ​​है कि ये दो बड़े फैक्टर (महिला और मुस्लिम) के खिलाफ चले गए।

ये भी पढ़ें- बंगाल में ममता बनर्जी का किला कैसे टूटा, महिला वोट बैंक में सेंध से हिंदू उपदेश के ध्रुवीकरण तक सत्य गंवाने के 5 बड़े कारक


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