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स्कूली बच्चों के दांतों में डॉक्टरों को दिख रहीं ऐसी चीजें, पेरेंट्स की टेंशन हो जाएगी दोगुनी, अभी नहीं दिया ध्यान तो होगा नुकसान

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Dental problems in school children: दिल्ली के मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के प्रोजेक्ट नीव में खुलासा हुआ है क‍ि स्कूली बच्चों के दांतों में बीमारियां बढ़ रही हैं. मोबाइल डेंटल क्‍ली‍न‍िकों की जांच में सामने आया है क‍ि कुछ खराब आदतों की वजह से भी दांतों में समस्‍याएं हो रही हैं.

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द‍िल्‍ली के स्‍कूली बच्‍चों में दांतों की बीमार‍ियां तेजी से बढ़ रही हैं.

Dental problems in Students: दिल्ली के मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के प्रोजेक्ट नीव में ऐसी चीजें सामने आई हैं जो पेरेंट्स की चिंता बढ़ा सकती हैं. दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के दांतों और मुंह में बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. दिल्ली ओरल हेल्थ प्रोग्राम नई दिल्ली के अंतर्गत चल रहे प्रोजेक्ट नीव के तहत मोबाइल डेंटल क्लिनिकों द्वारा की गई 72,334 छात्रों और स्कूल स्टाफ की जांच में कई ऐसी डेंटल प्रॉब्लम देखने को मिली हैं जो अगर समय रहते पहचान ली जाती तो उन्हें रोका जा सकता था.

सितंबर 2014 में दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग और स्कूल हेल्थ स्कीम के सहयोग से यह कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसमें जनवरी 2026 तक के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. स्कूली बच्चों और स्टाफ की जांच के नतीजों से पता चला है कि बड़ी संख्या में बच्चे ऐसे दांतों के रोगों से पीड़ित हैं जिन्हें समय पर इलाज देकर रोका जा सकता था लेकिन जागरूकता की कमी, इलाज तक सीमित पहुंच और समय पर हस्तक्षेप न होने के कारण ये मामले बढ़ गए. आइए जानते हैं बच्चों के दांतों में कौन सी बीमारियां बढ़ रही हैं.

बच्चों के दांतों में हो रहीं ये बीमारियां

  • . दांतों में कीड़ा लगना
  • . मसूड़ों की बीमारी
  • . मुंह की सही सफाई की कमी
  • . दांतों पर प्लाक और कैल्कुलस जमना
  • . कई बच्चों के दांतों के बीच खाना फंसा हुआ पाया गया
  • . कुछ बच्चे गलत तरीके से ब्रश करते पाए गए (आड़े तरीके से जोर-जोर से ब्रश करना) जिससे दांतों की ऊपरी परत घिस गई.
  • . कई बच्चों के मसूड़ों से हल्की छेड़छाड़ पर खून आने और दांतों पर सफेद धब्बे भी देखे गए, जो दांतों के कमजोर होने का संकेत हैं
  • . कई बच्चों ने दांतों में दर्द, खाना चबाने में परेशानी, मुंह से बदबू और दांतों की संवेदनशीलता की शिकायत भी की.

दांतों में बीमारियों का क्या होता है असर
बच्चों के दांतों में हो रही ये समस्याएं उनकी स्कूल उपस्थिति, पढ़ाई में ध्यान, पोषण और पूरे प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं. कुछ मामलों में बच्चों को आगे के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास भेजने की भी जरूरत पड़ी है. हालांकि बच्चों में कुछ खराब आदतें भी देखी गई हैं, जिनकी वजह से बीमारियां पनप रही हैं.

पिछले दो साल में कितने बच्चों की हुई जांच
2024–25 में: 14,381 बच्चों की जांच
2025–26 में (नवंबर 2025 तक): 9,998 लाभार्थियों की जांच

इन खराब आदतों ने पैदा की बीमारियां

  1. . स्कूल के समय पैकेट वाले मीठे स्नैक्स और सॉफ्ट ड्रिंक का ज्यादा सेवन
  2. . टूथब्रश समय पर न बदलना
  3. . भाई-बहनों के साथ टूथब्रश साझा करना
  4. . रात में ब्रश न करना
  5. . छोटे बच्चों के दांत साफ करने पर माता-पिता की निगरानी का अभाव
  6. . कई बच्चों ने पहली बार देखा डेंटिस्ट

क्या है इन बीमारियों का बचाव
इस पहल का नेतृत्व कर रहे मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक डेंटिस्ट्री के एचओडी विक्रांत मोहंती कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट तहत छह मोबाइल डेंटल क्लिनिक हर सप्ताह तय कार्यक्रम के अनुसार स्कूलों में जाते हैं. वहां बच्चों के दांतों की जांच की जाती है, जरूरत पड़ने पर फ्लोराइड वार्निश लगाया जाता है और अधिक जोखिम वाले बच्चों के लिए पिट-एंड-फिशर सीलेंट भी लगाए जाते हैं. माता-पिता की अनुमति मिलने पर स्कूल परिसर में ही बुनियादी दंत उपचार भी किया जाता है.

डॉ. मोहंती ने कहा कि बीमारियों की जल्दी पहचान और रोकथाम ही लंबे समय में स्वास्थ्य बोझ कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है.कार्यक्रम की योजना और क्रियान्वयन को सीनियर एडवाइजर स्वाति जैन ने सफल बनाने में सहयोग दिया है. बच्चों की स्क्रीनिंग के अलावा इस प्रोजेक्ट के तहत 44 सरकारी स्कूलों में 53 शिक्षक प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए ताकि शिक्षक छात्रों को रोजाना दांतों की सफाई की आदतें सिखा सकें.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

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सितंबर 2014 में दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग और स्कूल हेल्थ स्कीम के सहयोग से यह कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसमें जनवरी 2026 तक के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. स्कूली बच्चों और स्टाफ की जांच के नतीजों से पता चला है कि बड़ी संख्या में बच्चे ऐसे दांतों के रोगों से पीड़ित हैं जिन्हें समय पर इलाज देकर रोका जा सकता था लेकिन जागरूकता की कमी, इलाज तक सीमित पहुंच और समय पर हस्तक्षेप न होने के कारण ये मामले बढ़ गए. आइए जानते हैं बच्चों के दांतों में कौन सी बीमारियां बढ़ रही हैं.

बच्चों के दांतों में हो रहीं ये बीमारियां

  • . दांतों में कीड़ा लगना
  • . मसूड़ों की बीमारी
  • . मुंह की सही सफाई की कमी
  • . दांतों पर प्लाक और कैल्कुलस जमना
  • . कई बच्चों के दांतों के बीच खाना फंसा हुआ पाया गया
  • . कुछ बच्चे गलत तरीके से ब्रश करते पाए गए (आड़े तरीके से जोर-जोर से ब्रश करना) जिससे दांतों की ऊपरी परत घिस गई.
  • . कई बच्चों के मसूड़ों से हल्की छेड़छाड़ पर खून आने और दांतों पर सफेद धब्बे भी देखे गए, जो दांतों के कमजोर होने का संकेत हैं
  • . कई बच्चों ने दांतों में दर्द, खाना चबाने में परेशानी, मुंह से बदबू और दांतों की संवेदनशीलता की शिकायत भी की.

दांतों में बीमारियों का क्या होता है असर
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पिछले दो साल में कितने बच्चों की हुई जांच
2024–25 में: 14,381 बच्चों की जांच
2025–26 में (नवंबर 2025 तक): 9,998 लाभार्थियों की जांच

इन खराब आदतों ने पैदा की बीमारियां

  1. . स्कूल के समय पैकेट वाले मीठे स्नैक्स और सॉफ्ट ड्रिंक का ज्यादा सेवन
  2. . टूथब्रश समय पर न बदलना
  3. . भाई-बहनों के साथ टूथब्रश साझा करना
  4. . रात में ब्रश न करना
  5. . छोटे बच्चों के दांत साफ करने पर माता-पिता की निगरानी का अभाव
  6. . कई बच्चों ने पहली बार देखा डेंटिस्ट

क्या है इन बीमारियों का बचाव
इस पहल का नेतृत्व कर रहे मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक डेंटिस्ट्री के एचओडी विक्रांत मोहंती कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट तहत छह मोबाइल डेंटल क्लिनिक हर सप्ताह तय कार्यक्रम के अनुसार स्कूलों में जाते हैं. वहां बच्चों के दांतों की जांच की जाती है, जरूरत पड़ने पर फ्लोराइड वार्निश लगाया जाता है और अधिक जोखिम वाले बच्चों के लिए पिट-एंड-फिशर सीलेंट भी लगाए जाते हैं. माता-पिता की अनुमति मिलने पर स्कूल परिसर में ही बुनियादी दंत उपचार भी किया जाता है.

डॉ. मोहंती ने कहा कि बीमारियों की जल्दी पहचान और रोकथाम ही लंबे समय में स्वास्थ्य बोझ कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है.कार्यक्रम की योजना और क्रियान्वयन को सीनियर एडवाइजर स्वाति जैन ने सफल बनाने में सहयोग दिया है. बच्चों की स्क्रीनिंग के अलावा इस प्रोजेक्ट के तहत 44 सरकारी स्कूलों में 53 शिक्षक प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए ताकि शिक्षक छात्रों को रोजाना दांतों की सफाई की आदतें सिखा सकें.

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