Saturday, 11 Apr 2026 | 04:16 AM

Trending :

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos and More From Dainik Bhaskar 1 करोड़ बरामदगी पर 20 लाख हड़पने का आरोप:गुना पुलिस से हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट; पूछा-फरियादी का बयान दर्ज हुआ या नहीं 1 करोड़ बरामदगी पर 20 लाख हड़पने का आरोप:गुना पुलिस से हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट; पूछा-फरियादी का बयान दर्ज हुआ या नहीं मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा भोपाल में मेट्रो काम के चलते बदला ट्रैफिक प्लान:जवाहर चौक–डिपो मार्ग पर वन-वे व्यवस्था लागू; पुलिस बोली- परिवर्तित मार्गों का ही उपयोग करें
EXCLUSIVE

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की दहलीज को छूकर धरती पर वापस लौट रहे हैैं। आज 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे (IST) उनका ओरियन कैप्सूल सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। ये मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था। 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक यात्रा करके किसी भी इंसानी अंतरिक्ष मिशन का रिकॉर्ड 6 अप्रैल को तोड़ा था। उन्होंने चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी भी की थी।
3000 डिग्री तापमान और 6 मिनट का ब्लैकआउट पानी से निकलकर जहाज और फिर नासा सेंटर चारो अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी पर लौटने के बाद नासा और अमेरिकी सेना की टीमें उन्हें ओरियन से बाहर निकालेंगी। हेलिकॉप्टर के जरिए उन्हें ‘यूएसएस जॉन पी. मुर्था’ जहाज पर ले जाएंगी। जहाज पर पहुंचने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच होगी। इसके बाद उन्हें किनारे पर लाया जाएगा, जहां से विमान उन्हें ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ले जाएंगे। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता था नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना था। नासा देखना चाहता था कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नॉलेज पार्ट: इस मिशन से पहले केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे। नासा के ‘अपोलो प्रोग्राम’ में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Ramesh on Modi Govt: Max Optics Damaging India

February 20, 2026/
1:24 pm

नई दिल्ली13 घंटे पहले कॉपी लिंक AI इम्पेक्ट समिट के चौथे दिन पीएम मोदी और ग्लोबल टेक लीडर्स ग्रुप फोटो...

हल्का बदलने से किसान को कम मिला मुआवजा:बैतूल उपभोक्ता आयोग ने ब्याज और क्षतिपूर्ति सहित राशि लौटाने के निर्देश दिया

April 9, 2026/
8:53 pm

बैतूल उपभोक्ता आयोग ने गुरुवार को किसानों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने बैंकों को फसल...

Bihar, Jharkhand, Bengal Rain Alert

March 11, 2026/
5:30 am

Hindi News National Bihar, Jharkhand, Bengal Rain Alert | Rajasthan, MP, Chhattisgarh 40 Degrees नई दिल्ली/श्रीनगर/देहरादून/पटना/जयपुर/भोपाल17 घंटे पहले कॉपी लिंक...

बालाघाट में श्रीराम जन्मोत्सव, हनुमान चालीसा पाठ किया:सुंदरकांड पाठ होगा, 26 मार्च को शोभायात्रा निकलेगी

March 24, 2026/
10:22 am

बालाघाट में चैत्र नवरात्र से श्रीराम जन्मोत्सव के छह दिवसीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पुराना श्रीराम मंदिर...

यात्री सुविधा सर्वे में इंदौर एयरपोर्ट की बड़ी छलांग:10वें से तीसरे स्थान पर पहुंचा; पुणे पहले और गोवा दूसरे स्थान पर रहा

April 1, 2026/
10:43 pm

इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट ने वर्ष 2025 में शानदार उड़ान भरते यात्री सुविधाओं के मामले में देश...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

चंद्रमा का चक्कर लगाकर लौट रहे 4 अंतरिक्ष यात्री:सुबह 5:37 बजे लैंडिंग होगी; 3000 डिग्री फारेनहाइट पहुंचेगा तापमान, 6 मिनट का ब्लैकआउट रहेगा

नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की दहलीज को छूकर धरती पर वापस लौट रहे हैैं। आज 11 अप्रैल को सुबह 5:37 बजे (IST) उनका ओरियन कैप्सूल सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। ये मिशन 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था। 1972 के बाद यह पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक यात्रा करके किसी भी इंसानी अंतरिक्ष मिशन का रिकॉर्ड 6 अप्रैल को तोड़ा था। उन्होंने चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी भी की थी।
3000 डिग्री तापमान और 6 मिनट का ब्लैकआउट पानी से निकलकर जहाज और फिर नासा सेंटर चारो अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी पर लौटने के बाद नासा और अमेरिकी सेना की टीमें उन्हें ओरियन से बाहर निकालेंगी। हेलिकॉप्टर के जरिए उन्हें ‘यूएसएस जॉन पी. मुर्था’ जहाज पर ले जाएंगी। जहाज पर पहुंचने के बाद, अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच होगी। इसके बाद उन्हें किनारे पर लाया जाएगा, जहां से विमान उन्हें ह्यूस्टन स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ले जाएंगे। मकसद: ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच चाहता था नासा मिशन का मकसद स्पेसक्राफ्ट के ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना था। नासा देखना चाहता था कि अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए यह कितना सुरक्षित है। यान अभी चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बनाएगा। चांद के अंधेरे हिस्से की फोटोग्राफी अपोलो और आर्टेमिस प्रोग्राम में बड़ा अंतर 70 के दशक में हुए अपोलो मिशन का मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ के साथ चल रही ‘स्पेस रेस’ में खुद को बेहतर साबित करना था। आर्टेमिस प्रोग्राम पूरी तरह से भविष्य की तैयारी है। नासा इस बार चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहता है, ताकि इंसान वहां रहकर काम करना सीख सके। यह अनुभव भविष्य में मंगल पर जाने के सपने को पूरा करने में मदद करेगा। नॉलेज पार्ट: इस मिशन से पहले केवल 24 लोग ही चांद के पास या उसकी सतह तक पहुंच पाए हैं। वे सभी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स थे। सभी 1968 से 1972 के बीच चले अपोलो मिशन का हिस्सा थे। नासा के ‘अपोलो प्रोग्राम’ में क्रू और बिना क्रू वाले मिलाकर कुल 17 मिशन हुए। अगर सिर्फ उन मुख्य मिशनों की बात करें जिनमें अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, तो ये 11 थे।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.