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चीफ इंजीनियर के रिटायरमेंट के अगले दिन री-अपॉइंटमेंट पर रोक:हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, कहा- प्रक्रिया पहली नजर में संदिग्ध

चीफ इंजीनियर के रिटायरमेंट के अगले दिन री-अपॉइंटमेंट पर रोक:हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, कहा- प्रक्रिया पहली नजर में संदिग्ध

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर की संविदा नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में ही पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए नियुक्ति पर स्टे दे दिया। उज्जैन रीजन के चीफ इंजीनियर बाबूलाल चौहान 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए थे। तय योजना के अनुसार उन्हें 1 मई से उसी पद पर संविदा नियुक्ति दी जानी थी, लेकिन मामला कोर्ट पहुंचने के बाद प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। जानकारी के मुताबिक, इतने बड़े पद पर संविदा नियुक्ति के लिए पहले कोई स्पष्ट नियम नहीं थे। हाल ही में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने नई नीति बनाई और सप्ताहभर में आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
जांच समिति ने प्रक्रिया में कमियां भी बताईं, लेकिन इसके बावजूद फाइल आगे बढ़ा दी गई। 21 इंजीनियर पहुंचे कोर्ट, पेश किए दस्तावेज इस मामले में कंपनी के 21 वरिष्ठ इंजीनियरों ने याचिका दायर कर प्रक्रिया को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं में पूर्व चीफ इंजीनियर कामेश श्रीवास्तव, राजेंद्र नेगी, सुधीर आचार्य और अचल जैन शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर ने दस्तावेज पेश करते हुए तर्क दिया कि अन्य बिजली कंपनियों में ऐसी संविदा नीति लागू नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि जिस पद पर संविदा नियुक्ति की जा रही है, वह पद संविदा श्रेणी में सृजित ही नहीं है और न ही सार्वजनिक रूप से आवेदन बुलाए गए। इन तर्कों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। बिजली कंपनी में चीफ इंजीनियर जैसे पद पर नियुक्ति सामान्यतः वर्षों के अनुभव और प्रमोशन के आधार पर होती है। इस संविदा नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने विभागीय पारदर्शिता और प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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चीफ इंजीनियर के रिटायरमेंट के अगले दिन री-अपॉइंटमेंट पर रोक:हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल, कहा- प्रक्रिया पहली नजर में संदिग्ध

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने मप्र पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर की संविदा नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में ही पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध मानते हुए नियुक्ति पर स्टे दे दिया। उज्जैन रीजन के चीफ इंजीनियर बाबूलाल चौहान 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए थे। तय योजना के अनुसार उन्हें 1 मई से उसी पद पर संविदा नियुक्ति दी जानी थी, लेकिन मामला कोर्ट पहुंचने के बाद प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। जानकारी के मुताबिक, इतने बड़े पद पर संविदा नियुक्ति के लिए पहले कोई स्पष्ट नियम नहीं थे। हाल ही में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने नई नीति बनाई और सप्ताहभर में आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
जांच समिति ने प्रक्रिया में कमियां भी बताईं, लेकिन इसके बावजूद फाइल आगे बढ़ा दी गई। 21 इंजीनियर पहुंचे कोर्ट, पेश किए दस्तावेज इस मामले में कंपनी के 21 वरिष्ठ इंजीनियरों ने याचिका दायर कर प्रक्रिया को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं में पूर्व चीफ इंजीनियर कामेश श्रीवास्तव, राजेंद्र नेगी, सुधीर आचार्य और अचल जैन शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर ने दस्तावेज पेश करते हुए तर्क दिया कि अन्य बिजली कंपनियों में ऐसी संविदा नीति लागू नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि जिस पद पर संविदा नियुक्ति की जा रही है, वह पद संविदा श्रेणी में सृजित ही नहीं है और न ही सार्वजनिक रूप से आवेदन बुलाए गए। इन तर्कों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। बिजली कंपनी में चीफ इंजीनियर जैसे पद पर नियुक्ति सामान्यतः वर्षों के अनुभव और प्रमोशन के आधार पर होती है। इस संविदा नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने विभागीय पारदर्शिता और प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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