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सीएम केयर योजना को कैबिनेट की मंजूरी:कैंसर- हार्ट के गरीब मरीजों का सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में होगा मुफ्त इलाज, जानिए कैसे उठा सकेंगे फायदा

सीएम केयर योजना को कैबिनेट की मंजूरी:कैंसर- हार्ट के गरीब मरीजों का सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में होगा मुफ्त इलाज, जानिए कैसे उठा सकेंगे फायदा

मप्र की मोहन सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में सीएम केयर योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को हार्ट और कैंसर से जुड़ी बीमारियों के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। पहले चरण में सरकार छह बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशिएलिटी यूनिट्स स्थापित करेगी। नए अस्पतालों के लिए संस्थाओं और ट्रस्ट को न्यूनतम दर पर जमीन मिलेगी। योजना पर 5 साल में 3628 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कौन होंगे पात्र, कैसे मिलेगा फायदा?
मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी और कैंसर या हार्ट बीमारी से पीड़ित मरीज इस योजना के पात्र होंगे। गरीबी रेखा (बीपीएल) से नीचे के परिवार चिह्नित किए गए हैं। योजना का फायदा लेने के लिए सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के आठ घंटे के भीतर इलाज की मंजूरी मिलेगी। योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके पास आयुष्मान कार्ड है। योजना के क्रियान्वयन के लिए विभाग एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा। कमेटी के सुझावों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। योजना की विशेषताएं दो चरणों में पूरी होगी योजना अगले दो साल में अस्पतालों में परिजन आवास कैबिनेट ने प्रदेश के 19 मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में परिजन आवास बनाने की मंजूरी दी। योजना के तहत अस्पताल परिसर में सर्वसुविधा युक्त आवास बनाए जाएंगे। इसका जिम्मा गैर लाभकारी संस्थाओं को दिया जाएगा। सरकार की योजना अगले दो साल में इनका निर्माण करने की है। संस्था के साथ सरकार करेगी एमओयू योजना के लिए गैर लाभकारी संस्थाओं को प्रस्ताव देना होगा। प्रस्तावों के परीक्षण के लिए कमेटी बनेगी। स्वास्थ्य विभाग के सचिव इसके अध्यक्ष होंगे। स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त, पीडब्ल्यूडी और वित्त विभाग के सचिव व मेडिकल कॉलेज के डीन सदस्य होंगे। कमेटी की सिफारिशें साधिकार समिति को भेजी जाएंगी, जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। अस्पताल परिसर की जमीन पर मरीजों के लिए आवास बनाए जाएंगे। इसकी न्यूनतम क्षमता 100 बिस्तर होगी। जिस संस्था को जमीन दी जाएगी, उसे निर्माण और रखरखाव करना होगा, जबकि जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास रहेगा। निर्धारित दर पर शुल्क लिया जाएगा परिजन आवास के संचालन, रखरखाव, आवास, भोजन और अन्य पहलुओं की जिम्मेदारी संस्था की होगी। इसे 30 साल की लीज पर दिया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है। यहां ठहरने वाले मरीजों के परिजन से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। इसका निर्धारण निगरानी समिति करेगी। दरें इस तरह तय होंगी कि संस्था को न लाभ हो न हानि।

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मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी और कैंसर या हार्ट बीमारी से पीड़ित मरीज इस योजना के पात्र होंगे। गरीबी रेखा (बीपीएल) से नीचे के परिवार चिह्नित किए गए हैं। योजना का फायदा लेने के लिए सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के आठ घंटे के भीतर इलाज की मंजूरी मिलेगी। योजना का लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके पास आयुष्मान कार्ड है। योजना के क्रियान्वयन के लिए विभाग एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा। कमेटी के सुझावों के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। योजना की विशेषताएं दो चरणों में पूरी होगी योजना अगले दो साल में अस्पतालों में परिजन आवास कैबिनेट ने प्रदेश के 19 मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में परिजन आवास बनाने की मंजूरी दी। योजना के तहत अस्पताल परिसर में सर्वसुविधा युक्त आवास बनाए जाएंगे। इसका जिम्मा गैर लाभकारी संस्थाओं को दिया जाएगा। सरकार की योजना अगले दो साल में इनका निर्माण करने की है। संस्था के साथ सरकार करेगी एमओयू योजना के लिए गैर लाभकारी संस्थाओं को प्रस्ताव देना होगा। प्रस्तावों के परीक्षण के लिए कमेटी बनेगी। स्वास्थ्य विभाग के सचिव इसके अध्यक्ष होंगे। स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त, पीडब्ल्यूडी और वित्त विभाग के सचिव व मेडिकल कॉलेज के डीन सदस्य होंगे। कमेटी की सिफारिशें साधिकार समिति को भेजी जाएंगी, जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। अस्पताल परिसर की जमीन पर मरीजों के लिए आवास बनाए जाएंगे। इसकी न्यूनतम क्षमता 100 बिस्तर होगी। जिस संस्था को जमीन दी जाएगी, उसे निर्माण और रखरखाव करना होगा, जबकि जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास रहेगा। निर्धारित दर पर शुल्क लिया जाएगा परिजन आवास के संचालन, रखरखाव, आवास, भोजन और अन्य पहलुओं की जिम्मेदारी संस्था की होगी। इसे 30 साल की लीज पर दिया जाएगा, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है। यहां ठहरने वाले मरीजों के परिजन से निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। इसका निर्धारण निगरानी समिति करेगी। दरें इस तरह तय होंगी कि संस्था को न लाभ हो न हानि।

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