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सुकून बेच रहा ट्रैवल सेक्टर, वेलनेस बना प्रीमियम बिजनेस मॉडल:वेलनेस टूरिज्म मार्केट सालाना 7% बढ़ रहा; 5 साल में करीब दोगुना हो जाएगा

सुकून बेच रहा ट्रैवल सेक्टर, वेलनेस बना प्रीमियम बिजनेस मॉडल:वेलनेस टूरिज्म मार्केट सालाना 7% बढ़ रहा; 5 साल में करीब दोगुना हो जाएगा

देश में वेलनेस अब सिर्फ लग्जरी या छुट्टियों का हिस्सा नहीं रह गया। लोग इसे सेहत और मानसिक संतुलन में निवेश की तरह देखने लगे हैं। यही वजह है कि वेलनेस रिट्रीट्स और माइंडफुल ट्रैवल की मांग तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि होलिस्टिक वेलनेस अनुभव पारंपरिक स्पा कल्चर की जगह ले रहे हैं। इसमें योग, मेडिटेशन, हेल्दी न्यूट्रिशन और माइंडफुल हॉस्पिटैलिटी जैसी सुविधाएं हैं। यात्री अब दिखावे वाली लग्जरी के बजाय मानसिक सुकून वाले अनुभवों को तरजीह दे रहे हैं। वेलनेस का असर अब केवल बड़े होटलों तक सीमित नहीं है। लोग अब भीड़भाड़ से दूर रेंटल विला और शांत होमस्टे को तरजीह दे रहे हैं। स्लीप रिचुअल्स, डिजिटल डिटॉक्स और स्थानीय शुद्ध भोजन ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक, करीब 60% यात्री ट्रिप में कम से कम एक ऐसी गतिविधि जरूर शामिल करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक सुकून मिले। यात्री डिजिटल डिटॉक्स, क्लीन ईटिंग, स्लीप-फोकस्ड स्टे को तवज्जो दे रहे खर्च – घरेलू पर्यटन पर 15.5 लाख करोड़ रुपए खर्च कम्युनिकेट इंडिया के मुताबिक, 2024 में भारतीयों ने यात्रा पर 15.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि विदेशी पर्यटकों का खर्च महज 3.1 लाख करोड़ रहा। द लीला पैलेस नई दिल्ली के मुताबिक, अब लोग ऊर्जा बढ़ाने वाली पारंपरिक पद्धतियों को तरजीह दे रहे हैं। इसी कारण से व्यक्तिगत थैरेपी को अब दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा रहा है। ट्रेंड – होटल वेलनेस और डाइट चार्ट जैसे ऑफर दे रहे होटलों में अब कस्टमाइज्ड वेलनेस चार्ट बनाए जा रहे हैं। इसमें होटल पहुंचने से पहले विशेषज्ञों से परामर्श और चेक-इन के बाद व्यक्तिगत डाइट प्लान जैसे फीचर्स हैं। लोग इस पर होने वाले खर्च को स्वास्थ्य के लिए जरूरी निवेश मानते हैं। यात्री डिजिटल डिटॉक्स (मोबाइल-गैजेट्स से दूरी) और स्लीप-फोकस्ड स्टे को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। स्वीकार्यता – भारत अब दुनिया का टॉप डेस्टिनेशन ग्लोबल वेलनेस इंस्टीट्यूट (जीडब्ल्यूआई) के अनुसार, भारत अब दुनिया के टॉप डेस्टिनेशंस में शामिल हो चुका है। इस साल वैश्विक स्तर पर इस सेक्टर का मूल्य करीब 641 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। भारत अपनी आयुर्वेद और योग जैसी पद्धतियों के कारण बड़े पैमाने पर विदेशियों को आकर्षित कर रहा है। आउटलुक – 2030 तक एशिया में सबसे तेज ग्रोथ विशेषज्ञों के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत इस सेक्टर का इंजन बनकर उभरेगा। जीडब्ल्यूआई का अंदाजा है कि साल 2030 तक इस क्षेत्र की कुल बढ़त का एक बड़ा हिस्सा भारत और चीन से आएगा। इसका कारण मध्यम वर्ग की बढ़ती आय है। भारत का वेलनेस टूरिज्म बाजार अभी 2.9 लाख करोड़ का है। 2031 तक 4.1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

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सुकून बेच रहा ट्रैवल सेक्टर, वेलनेस बना प्रीमियम बिजनेस मॉडल:वेलनेस टूरिज्म मार्केट सालाना 7% बढ़ रहा; 5 साल में करीब दोगुना हो जाएगा

देश में वेलनेस अब सिर्फ लग्जरी या छुट्टियों का हिस्सा नहीं रह गया। लोग इसे सेहत और मानसिक संतुलन में निवेश की तरह देखने लगे हैं। यही वजह है कि वेलनेस रिट्रीट्स और माइंडफुल ट्रैवल की मांग तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि होलिस्टिक वेलनेस अनुभव पारंपरिक स्पा कल्चर की जगह ले रहे हैं। इसमें योग, मेडिटेशन, हेल्दी न्यूट्रिशन और माइंडफुल हॉस्पिटैलिटी जैसी सुविधाएं हैं। यात्री अब दिखावे वाली लग्जरी के बजाय मानसिक सुकून वाले अनुभवों को तरजीह दे रहे हैं। वेलनेस का असर अब केवल बड़े होटलों तक सीमित नहीं है। लोग अब भीड़भाड़ से दूर रेंटल विला और शांत होमस्टे को तरजीह दे रहे हैं। स्लीप रिचुअल्स, डिजिटल डिटॉक्स और स्थानीय शुद्ध भोजन ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक, करीब 60% यात्री ट्रिप में कम से कम एक ऐसी गतिविधि जरूर शामिल करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक सुकून मिले। यात्री डिजिटल डिटॉक्स, क्लीन ईटिंग, स्लीप-फोकस्ड स्टे को तवज्जो दे रहे खर्च – घरेलू पर्यटन पर 15.5 लाख करोड़ रुपए खर्च कम्युनिकेट इंडिया के मुताबिक, 2024 में भारतीयों ने यात्रा पर 15.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि विदेशी पर्यटकों का खर्च महज 3.1 लाख करोड़ रहा। द लीला पैलेस नई दिल्ली के मुताबिक, अब लोग ऊर्जा बढ़ाने वाली पारंपरिक पद्धतियों को तरजीह दे रहे हैं। इसी कारण से व्यक्तिगत थैरेपी को अब दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा रहा है। ट्रेंड – होटल वेलनेस और डाइट चार्ट जैसे ऑफर दे रहे होटलों में अब कस्टमाइज्ड वेलनेस चार्ट बनाए जा रहे हैं। इसमें होटल पहुंचने से पहले विशेषज्ञों से परामर्श और चेक-इन के बाद व्यक्तिगत डाइट प्लान जैसे फीचर्स हैं। लोग इस पर होने वाले खर्च को स्वास्थ्य के लिए जरूरी निवेश मानते हैं। यात्री डिजिटल डिटॉक्स (मोबाइल-गैजेट्स से दूरी) और स्लीप-फोकस्ड स्टे को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। स्वीकार्यता – भारत अब दुनिया का टॉप डेस्टिनेशन ग्लोबल वेलनेस इंस्टीट्यूट (जीडब्ल्यूआई) के अनुसार, भारत अब दुनिया के टॉप डेस्टिनेशंस में शामिल हो चुका है। इस साल वैश्विक स्तर पर इस सेक्टर का मूल्य करीब 641 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। भारत अपनी आयुर्वेद और योग जैसी पद्धतियों के कारण बड़े पैमाने पर विदेशियों को आकर्षित कर रहा है। आउटलुक – 2030 तक एशिया में सबसे तेज ग्रोथ विशेषज्ञों के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत इस सेक्टर का इंजन बनकर उभरेगा। जीडब्ल्यूआई का अंदाजा है कि साल 2030 तक इस क्षेत्र की कुल बढ़त का एक बड़ा हिस्सा भारत और चीन से आएगा। इसका कारण मध्यम वर्ग की बढ़ती आय है। भारत का वेलनेस टूरिज्म बाजार अभी 2.9 लाख करोड़ का है। 2031 तक 4.1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

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