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कभी खाया है गेहूं का होला? फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर, वेट लॉस में भी करता जबरदस्त काम

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Gehu Hola ke Fayde: छतरपुर में गेहूं का होला खाने की परंपरा हिंदू नववर्ष से जुड़ी हुई है और इसे खास महत्व दिया जाता है. गेहूं की हरी बालियों को भूनकर तैयार किया गया होला स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पाचन को बेहतर बनाते हैं. गांवों में इसे गुड़, मिर्च और आंवले के साथ खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. जानिए इस देसी सुपरफूड के फायदे और क्यों आज भी यह परंपरा लोगों के दिलों में जिंदा है.

Gehu Hola Health Benefits: छतरपुर जिले में गेहूं का होला सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक परंपरा और सेहत का अनोखा संगम है. जैसे ही चैत्र मास में हिंदू नववर्ष शुरू होता है, गांवों में खेतों से ताजा गेहूं लाकर उसकी बालियों को भूनकर खाने की परंपरा निभाई जाती है. यह सालों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही उत्साह के साथ निभाई जाती है.

क्या होता है गेहूं का होला?
गेहूं की हरी बालियों को आग में हल्का भूनकर जो दाने निकाले जाते हैं, उन्हें ही “होला” कहा जाता है. खास बात यह है कि बाली पूरी तरह पकी नहीं होती, अंदर का दाना हल्का हरा और नरम रहता है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट लगता है.

स्वाद में देसी ट्विस्ट
गांवों में इसे आंवला, मिर्च या खासतौर पर गुड़ के साथ खाया जाता है. गुड़ के साथ इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है मीठा, हल्का कुरकुरा और देसी फ्लेवर से भरपूर. यही वजह है कि लोग हर साल इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं.

सेहत के लिए क्यों फायदेमंद?
गेहूं का होला पोषण से भरपूर होता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यह पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को ऊर्जा देता है और वजन कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है. यानी स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल.

इससे बनते हैं कई देसी व्यंजन
सिर्फ होला ही नहीं, बल्कि गेहूं की बालियों से हलवा, पुआ और लपसी जैसे कई पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि बचपन की यादों और खुशी का हिस्सा है.

पुराने दिनों की यादें
पहले जब मशीनें नहीं थीं, तब गेहूं को खेत से घर लाने में महीनों लग जाते थे. कटाई, मड़ाई और सफाई की लंबी प्रक्रिया के कारण लोग पहले ही बालियां तोड़कर ले आते थे और उनसे होला बनाकर खाते थे. यही परंपरा आज भी जारी है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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Gehu Hola Health Benefits: छतरपुर जिले में गेहूं का होला सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक परंपरा और सेहत का अनोखा संगम है. जैसे ही चैत्र मास में हिंदू नववर्ष शुरू होता है, गांवों में खेतों से ताजा गेहूं लाकर उसकी बालियों को भूनकर खाने की परंपरा निभाई जाती है. यह सालों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही उत्साह के साथ निभाई जाती है.

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