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क्लॉड मिथोस मॉडल; साइबर पैमाने पर 100% स्कोर:एंथ्रोपिक ने ताकतवर एआई बनाया पर लॉन्च रोका; वजह-गलत हाथों में आने से साइबर तबाही का डर

क्लॉड मिथोस मॉडल; साइबर पैमाने पर 100% स्कोर:एंथ्रोपिक ने ताकतवर एआई बनाया पर लॉन्च रोका; वजह-गलत हाथों में आने से साइबर तबाही का डर

एआई दिग्गज कंपनी एंथ्रोपिक ने बुधवार को दुनिया का सबसे ताकतवर मॉडल ‘क्लॉड मिथोस’ पेश किया, लेकिन इसे आम यूजर के लिए लॉन्च नहीं किया गया। कंपनी का कहना है कि यह मॉडल खुद जिम्मेदारी से काम करता है, लेकिन इसकी ताकत गलत हाथों में बेहद खतरनाक हो सकती है। बैंक, अस्पताल, बिजली ग्रिड और सरकारी सिस्टम सब इसके निशाने पर आ सकते हैं। एंथ्रोपिक ने इसे फिलहाल प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत अमेजन, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी 12 बड़ी कंपनियों और 40 से अधिक संस्थाओं को दिया है, ताकि वे पहले अपने सिस्टम की सुरक्षा दुरुस्त कर सकें। प्रोजेक्ट ग्लासविंग नाम एक पारदर्शी पंखों वाली तितली से लिया गया है। यह खुले में होने पर भी नजर नहीं आती। ठीक वैसे ही जैसे सॉफ्टवेयर की खामियां छुपी रहती हैं। एंथ्रोपिक ने 850 करोड़ रु. के क्रेडिट व ओपन सोर्स संस्थाओं को 34 करोड़ रु. की मदद का वादा किया है। 90 दिनों बाद कंपनी बताएगी कि मॉडल ने कितनी खामियां पकड़ी। ऐतिहासिक – 50 लाख टेस्ट में नहीं पकड़ी खामी, इसने पहली बार में ढूंढ़ी पायलट में मॉडल ने कई ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में हजारों गंभीर साइबर खामियां खोजीं। सबसे सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम ओपनबीएसडी में 27 साल पुरानी खामी ढूंढी। वीडियो सॉफ्टवेयर एफएफएमपेग में 16 साल पुरानी खामी जो 50 लाख बार स्कैन में भी नहीं मिली। इसने पहली बार में पकड़ा। लिनक्स कर्नेल में कई खामियां जोड़कर पूरे सिस्टम का नियंत्रण हासिल करने का रास्ता भी इसी मॉडल ने दिखाया। बेंचमार्क – साइबर परीक्षण में 100%, कोडिंग में 93.9% स्कोर साइबर सुरक्षा के सबसे कठिन परीक्षणों में इस मॉडल ने शत-प्रतिशत सफलता हासिल की। कोडिंग बेंचमार्क में 93.9% जबकि पिछले मॉडल का स्कोर 80.8% था। साइबरजिम परीक्षण में 83.1%, पिछले मॉडल का 66.6% स्कोर था। बता दें कि इस मॉडल के लॉन्च के साथ एंथ्रोपिक की सालाना आय भी तीन गुना से अधिक बढ़कर करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है। सीईओ अमोडेई बोले- मिथोस मॉडल से खतरा बहुत हमने मिथोस को साइबर सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि कोडिंग के लिए बनाया था। लेकिन कोडिंग की ताकत का साइड इफेक्ट यह निकला कि यह साइबर हमलों में भी उतना ही माहिर हो गया। यदि यह सही हाथों में रहा तो यह तकनीक पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित इंटरनेट और दुनिया बना सकती है। लेकिन अगर गलत हुआ तो खतरा बहुत है।’

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