Saturday, 18 Apr 2026 | 02:48 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence

Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence
  • Hindi News
  • Career
  • Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence | Minimum Wage Act 2026

16 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन 8वें दिन भी जारी है। 8 दिन पहले, 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर लगभग 42 हजार कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर कर्मचारी सड़कों पर उतर आए।

13 अप्रैल को सैलरी बढ़ाने और बेहतर वर्किंग कंडीशन की मांग को लेकर हो रहा ये प्रदर्शन उग्र हो गया था। नोएडा सेक्टर 60, 62, 84 और फेज-2 सहित कई इलाकों में भड़की भीड़ ने फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प हुई।

पुलिस के मुताबिक, हिंसा सबसे पहले नोएडा का फेज-2 से भड़की थी। यहां मदरसन, ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव कंपनियां हैं। इन कंपनियों के 1000 से ज्यादा वर्कर्स सैलरी बढ़ाने को लेकर पिछले 6 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। करीब 500 कर्मचारी मदरसन कंपनी के बाहर जुटे थे।

16 अप्रैल को भी प्रदर्शन की तैयारी

हरियाणा में हालिया सैलरी रिवीजन के बावजूद वर्कर नाखुश हैं। उनका कहना है कि बढ़ी हुई सैलरी महंगाई के मुकाबले बहुत कम है।

गुरुग्राम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इंप्लॉयज यूनियन के लीडर वसंत कुमार ने कहा कि इतनी सैलरी में गुरुग्राम जैसी सिटी में कोई कैसे जी सकता है? उन्होंने कहा, ‘नए लेबर कोड, LPG संकट और खराब वर्किंग कंडिशंस वर्कर्स के हित में नहीं है। इसलिए हम इन सबके खिलाफ प्रोटेस्ट जारी रखेंगे।’

यहां के वर्कर्स केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ये कोड्स बिना ओवरटाइम मुआवजे के 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति देते हैं। इससे फैक्ट्री मालिकों को वर्कर्स के शोषण का मौका मिलेगा।

नए नियमों में ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशंस (OSH) कोड-2020 के मुताबिक, एंप्लॉयर्स और वर्कर्स को फ्लेसिबल शिफ्ट पैटर्न का मौका देती है। इसके तहत वर्कर्स से 12 घंटे तक काम करवाया जा सकता है, बशर्ते हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी भी मिलनी चाहिए। यानी हफ्ते में सिर्फ 48 घंटे ही काम करेंगे। अगर ओवरटाइम करते हैं तो उसका कम से कम डबल वेज मिलना चाहिए। लेकिन यूनियन और वर्कर्स को डर है कि फैक्ट्री मालिक 8 घंटे के पैसे में ही 12 घंटे काम करवाएंगे।

ऐसे में म्युनिसिपल और स्टेट वर्कर्स ने 16 अप्रैल को तीन घंटे तक सारा काम बंद कर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है।

नोएडा में प्रोटेस्टर्स ने कहा- ‘200 रुपए बढ़े, इसमें क्या होगा?’

प्रोटेस्टर्स में से रागिनी बताती हैं, ‘हम अपनी मांगों को लेकर लगभग महीने भर से प्रोटेस्ट कर रहे हैं। 200 रुपए बढ़े हैं, इसमें क्या होगा? सरकार 20 हजार सैलरी करे, वो भी तुरंत। जब तक ये नहीं होगा, हम लोग प्रोटेस्ट जारी रखेंगे!’

कई लोगों की शिकायत थी कि 8 घंटे से ज्यादा काम करवाते हैं। ओवरटाइम के हिसाब से पैसे नहीं मिलते। सैलरी कभी टाइम पर नहीं आती। सैलरी स्लिप में 20 हजार लिखते हैं पर देते 11 हजार हैं। कंपनी में सारे कर्मचारियों के लिए एक ही टॉयलेट है। कोई बीमार पड़े तो भी उसे जल्दी छुट्टी नहीं मिलती।

प्रोटेस्टर्स का कहना है कि अभी के हालात तो और खराब हैं। किराया और खाना तो महंगा है ही, सिलेंडर ही 4-5 हजार का आ रहा है। इतनी सैलरी में खाएं, बच्चे पालें या बच्चों को पढ़ाएं?

एक दूसरे प्रोटेस्टर ने कहा कि, ‘किस हिसाब से 341 रुपए बढ़े हैं? हम ज्यादा नहीं मांग रहें। हमें बस सरकारी आदेश के हिसाब से बढ़ी हुई सैलरी चाहिए।’

एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में आखिरी बार साल 2012 में मिनिमम वेज रिवाइज हुए थे।

मिनिमम वेजेस एक्ट के मुताबिक, हर सेक्टर के हिसाब से मिनिमम वेजेस तय किए गए हैं। इनमें भी रीजन के हिसाब से, यानी टियर 1, 2 और 3 सिटीज के हिसाब से अलग वेजेस तय किया गया है।

यहां गौर करने वाली बात ये है कि यूपी गवर्नमेंट के बढ़ाए रुपयों में तो रीजन और केटेगरी वाइज वैरिएशंस दिखते हैं। पर इससे पहले वाली सैलरी में ये वैरिएशंस नहीं है।

हरियाणा में प्रोटेस्ट के बाद सरकार ने 35% सैलरी बढ़ाई

नोएडा के वर्कर्स जैसी ही मांगों को लेकर अप्रैल के पहले हफ्ते में हरियाणा के फैक्ट्री वर्कर्स ने भी प्रोटेस्ट किया था।

पिछले हफ्ते ही मानेसर के इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) में भी झड़पें हुई थीं। तब भी हजारों कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स सड़कों पर उतर आए थे।

इसके पहले फरवरी में पानीपत में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के लगभग 30 हजार कर्मचारी कंपनी के बाहर धरने पर बैठे थे।

इसके बाद हरियाणा सरकार ने 35 फीसदी सैलरी बढ़ाने का फैसला लिया। जिसके बाद मजदूरों को रोजाना की बेगारी 580-750 मिलेगी।

जबकि, नोएडा में अभी यही 350 से 400 के बीच है। वर्कर्स के मुताबिक, उनकी मंथली सैलरी 11000 है, जिसमें से 1000 कॉन्ट्रैक्टर काम देने के लेता है। इसमें से उनके पास सिर्फ 10 हजार बचते हैं जो इस महंगाई के दौर में गुजारे के लिए नाकाफी है।

अगर हरियाणा की बात करें, तो आखिरी बार मिनिमम वेज अक्टूबर 2015 में रिवाइज हुए थे।

मिनिमम वेज एक्ट क्या कहता है?

मिनिमम वेज (Minimum Wage) एक्ट के तहत केंद्र सरकार एक फ्लोर वेज (floor wage) तय करती है, जिसके तहत राज्य सरकारों और उद्योगों को उतना या उससे ज्यादा सैलरी तय करने का प्रावधान है।

राज्य सरकारें इससे कम वेतन तय नहीं कर सकतीं। वेतन को अब हर 3 साल में रिवाइज करना जरूरी है। पहले ये सीमा 5 साल तक थी।

पहले इसके लिए Minimum Wages Act-1948 था, जिसे अब Code on Wages-2019 में शामिल कर दिया गया है। इसमें 4 लेबर लॉ को मिला दिया गया है, जिनमें

  • Minimum Wages Act, 1948
  • Payment of Wages Act, 1936
  • Payment of Bonus Act, 1965
  • Equal Remuneration Act, 1976

मिनिमम वेज तय कैसे होता है?

मिनिमम वेज व्यक्ति की स्किल और उसकी लोकेशन से तय होती है। स्किल के लिए सरकार ने 4 केटेगरीज तैयार की है-

1. अकुशल (अनस्किल्ड)

2. अर्ध-कुशल या अकुशल पर्यवेक्षक (सेमी-स्किल्ड/ अनस्किल्ड सुपरवाइजर)

3. कुशल या /लिपिकीय (स्किल्ड/ क्लेरिकल)

4. अत्यधिक कुशल (हाइली स्किल्ड)

वहीं लोकेशन के हिसाब से जीने की लागत अलग-अलग होती है। बिहार के गांव या दिल्ली के लिए खर्च समान नहीं होगा। इसलिए लोकेशन के हिसाब से भी वेज तय होता है। इसके लिए टियर 1, 2 और 3 के लिए अलग-अलग सैलरी तय होती है। इन्हें सरकार ने A, B, और C जोन्स में बांटा है।

इन फैक्टर्स के अलावा, मिनिमम वेज दो तरीकों से तय होता है।

  • पहले में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (VDA- वेरिएबल डियरनेस अलाउंस) को मिलाकर दिन के हिसाब से सैलरी तय होती है। ये जगह और वर्किंग सेक्टर के मुताबिक तय होनी चाहिए।
  • दूसरे तरीके में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (VDA) के साथ कुछ सुविधाओं की कीमत शामिल होती है। अगर कीमत नहीं तो सुविधाएं मिलती हैं।

VDA यानी वर्कर्स को मिलने वाला वो भत्ता जो महंगाई के मुताबिक बढ़ता या घटता रहता है। VDA CPI-IW (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स- इंडस्ट्रियल वर्कर) से जुड़ा है, जो आमतौर पर साल में दो बार बदला जाना चाहिए। पहली बार 1 अप्रैल को और दूसरी बार 1 अक्तूबर को। पुराने नियमों में इस पर इतना जोर नहीं था, लेकिन नए नियमों में इसे सख्ती से लागू करने की बात कही गई है।

ये मिनिमम वेजेस एक्ट सभी शेड्यूल्ड एंप्लॉयमेंट्स पर लागू होता है, जैसे निर्माण (कंस्ट्रक्शन), खनन (माइनिंग), सफाई, लोडिंग-अनलोडिंग, खेती और बाकी इंडस्ट्रियल वर्क।

मिनिमम वेज के लेटेस्ट अपडेट के बाद CPI-IW 11.28 अंक तक बढ़ा है, जिसके आधार पर 1 अप्रैल 2026 से कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और सफाई जैसे सेंट्रल सेक्टरों में मजदूरी की लागत बढ़ी है। इसके बाद राज्यों को अपनी दरों के हिसाब से महंगाई भत्ता बढ़ानी थी। जब राज्यों सरकारों ने नहीं बढ़ाई तो प्रोटेस्ट हुए।

हिंसक प्रोटेस्ट के बाद मंगलवार, 14 अप्रैल को यूपी सरकार ने मौजूदा वेतन में 3 हजार बढ़ाए हैं। लेकिन इसके बाद भी वर्कर्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं। वे 20,000 मंथली सैलरी की मांग पर टिके हैं।

बिहार, गुजरात में भी हुए प्रदर्शन

सोमवार नोएडा में प्रोटेस्ट से पहले बिहार के बरौनी, गुजरात के सूरत, हरियाणा के मानेसर और पानीपत में भी वायलेंट प्रोटेस्ट हुए। राज्य सरकारों ने या तो सैलरी नहीं बढ़ाई थी या फिर जितनी बढ़ाई वो वर्कर्स नाकाफी थी।

2 फरवरी को बरौनी में वेतन बढ़ाने, काम के घंटे फिक्स करने और PF, ESIC जैसे सोशल सिक्यॉरिटी प्रोविजन की मांग को लेकर प्रोटेस्ट किया था।

27 फरवरी को सूरत में L&T के 5000 कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स ने हजीरा में प्रोटेस्ट किया जो हिंसक हो गया था।

स्टोरी – सोनाली राय

——————–

ये खबर भी पढ़ें…

लता दीदी के सेक्रेटरी से भागकर शादी की, तलाक लिया:खुद अंग्रेजी गानों, फिल्‍मों की शौकीन थीं आशा भोसले; जानें प्रोफाइल

बॉलिवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। 1960-70 के दशक की इंडियन पॉप और कैबरे आर्टिस्ट कही जाने वाली आशा ने 8 दशक के करियर में 12,000 से भी ज्यादा गाने गाए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
GE Aerospace & HAL Deal Complete; Tejas Fleet Strength Boost

April 14, 2026/
9:34 pm

नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी डिफेंस कंपनी GE एयरोस्पेस और भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)...

राज्यसभा सीट पर कांग्रेस में कास्ट प्रेशर बढ़ा:दलित और ब्राह्मणों के बाद अब सिंधी समाज ने ठोकी दावेदारी

April 14, 2026/
6:05 am

मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस...

भिंड में पत्थर खदान में कर्मचारी की मौत:गोहद के डिरमन पाली स्थित अंजनी क्रेशर की खदान में मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच

February 22, 2026/
7:44 pm

भिंड जिले के गोहद थाना क्षेत्र में स्थित अंजनी क्रेशर की पत्थर खदान में कार्यरत एक कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों...

उत्तराखंड के 5 जिलों में बर्फबारी, केदारनाथ में तापमान -12°C:एमपी के 3 जिलो में बूंदाबांदी, कई शहरों में कोहरा; राजस्थान में टेंपरेचर 30°C से ऊपर

February 23, 2026/
5:30 am

देश में फरवरी के आखिरी हफ्ते में 3 तरह का मौसम चल रहा है। उत्तरभारत में बर्फबारी और कोहरे का...

सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत:अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी; ईरान ने क्रूड ऑयल 200 डॉलर पहुंचने की चेतावनी दी थी

March 13, 2026/
8:43 am

अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के...

'करिश्माई शब्द': कांग्रेस नेता द्वारा विजयन की सराहना के बाद केरल के मुख्यमंत्री ने मणिशंकर अय्यर से कहा | राजनीति समाचार

February 15, 2026/
11:20 pm

आखरी अपडेट:15 फरवरी, 2026, 23:20 IST मणिशंकर अय्यर ने कहा कि भारत का एकमात्र राज्य जहां “गांधीजी के निर्देशन” में...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence

Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence
  • Hindi News
  • Career
  • Noida Factory Workers Protest Minimum Wage & Violence | Minimum Wage Act 2026

16 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स का प्रदर्शन 8वें दिन भी जारी है। 8 दिन पहले, 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर लगभग 42 हजार कर्मचारी आंदोलन कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर कर्मचारी सड़कों पर उतर आए।

13 अप्रैल को सैलरी बढ़ाने और बेहतर वर्किंग कंडीशन की मांग को लेकर हो रहा ये प्रदर्शन उग्र हो गया था। नोएडा सेक्टर 60, 62, 84 और फेज-2 सहित कई इलाकों में भड़की भीड़ ने फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस के साथ झड़प हुई।

पुलिस के मुताबिक, हिंसा सबसे पहले नोएडा का फेज-2 से भड़की थी। यहां मदरसन, ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव कंपनियां हैं। इन कंपनियों के 1000 से ज्यादा वर्कर्स सैलरी बढ़ाने को लेकर पिछले 6 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। करीब 500 कर्मचारी मदरसन कंपनी के बाहर जुटे थे।

16 अप्रैल को भी प्रदर्शन की तैयारी

हरियाणा में हालिया सैलरी रिवीजन के बावजूद वर्कर नाखुश हैं। उनका कहना है कि बढ़ी हुई सैलरी महंगाई के मुकाबले बहुत कम है।

गुरुग्राम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इंप्लॉयज यूनियन के लीडर वसंत कुमार ने कहा कि इतनी सैलरी में गुरुग्राम जैसी सिटी में कोई कैसे जी सकता है? उन्होंने कहा, ‘नए लेबर कोड, LPG संकट और खराब वर्किंग कंडिशंस वर्कर्स के हित में नहीं है। इसलिए हम इन सबके खिलाफ प्रोटेस्ट जारी रखेंगे।’

यहां के वर्कर्स केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स के खिलाफ भी प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, ये कोड्स बिना ओवरटाइम मुआवजे के 12 घंटे की शिफ्ट की अनुमति देते हैं। इससे फैक्ट्री मालिकों को वर्कर्स के शोषण का मौका मिलेगा।

नए नियमों में ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडिशंस (OSH) कोड-2020 के मुताबिक, एंप्लॉयर्स और वर्कर्स को फ्लेसिबल शिफ्ट पैटर्न का मौका देती है। इसके तहत वर्कर्स से 12 घंटे तक काम करवाया जा सकता है, बशर्ते हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी भी मिलनी चाहिए। यानी हफ्ते में सिर्फ 48 घंटे ही काम करेंगे। अगर ओवरटाइम करते हैं तो उसका कम से कम डबल वेज मिलना चाहिए। लेकिन यूनियन और वर्कर्स को डर है कि फैक्ट्री मालिक 8 घंटे के पैसे में ही 12 घंटे काम करवाएंगे।

ऐसे में म्युनिसिपल और स्टेट वर्कर्स ने 16 अप्रैल को तीन घंटे तक सारा काम बंद कर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है।

नोएडा में प्रोटेस्टर्स ने कहा- ‘200 रुपए बढ़े, इसमें क्या होगा?’

प्रोटेस्टर्स में से रागिनी बताती हैं, ‘हम अपनी मांगों को लेकर लगभग महीने भर से प्रोटेस्ट कर रहे हैं। 200 रुपए बढ़े हैं, इसमें क्या होगा? सरकार 20 हजार सैलरी करे, वो भी तुरंत। जब तक ये नहीं होगा, हम लोग प्रोटेस्ट जारी रखेंगे!’

कई लोगों की शिकायत थी कि 8 घंटे से ज्यादा काम करवाते हैं। ओवरटाइम के हिसाब से पैसे नहीं मिलते। सैलरी कभी टाइम पर नहीं आती। सैलरी स्लिप में 20 हजार लिखते हैं पर देते 11 हजार हैं। कंपनी में सारे कर्मचारियों के लिए एक ही टॉयलेट है। कोई बीमार पड़े तो भी उसे जल्दी छुट्टी नहीं मिलती।

प्रोटेस्टर्स का कहना है कि अभी के हालात तो और खराब हैं। किराया और खाना तो महंगा है ही, सिलेंडर ही 4-5 हजार का आ रहा है। इतनी सैलरी में खाएं, बच्चे पालें या बच्चों को पढ़ाएं?

एक दूसरे प्रोटेस्टर ने कहा कि, ‘किस हिसाब से 341 रुपए बढ़े हैं? हम ज्यादा नहीं मांग रहें। हमें बस सरकारी आदेश के हिसाब से बढ़ी हुई सैलरी चाहिए।’

एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में आखिरी बार साल 2012 में मिनिमम वेज रिवाइज हुए थे।

मिनिमम वेजेस एक्ट के मुताबिक, हर सेक्टर के हिसाब से मिनिमम वेजेस तय किए गए हैं। इनमें भी रीजन के हिसाब से, यानी टियर 1, 2 और 3 सिटीज के हिसाब से अलग वेजेस तय किया गया है।

यहां गौर करने वाली बात ये है कि यूपी गवर्नमेंट के बढ़ाए रुपयों में तो रीजन और केटेगरी वाइज वैरिएशंस दिखते हैं। पर इससे पहले वाली सैलरी में ये वैरिएशंस नहीं है।

हरियाणा में प्रोटेस्ट के बाद सरकार ने 35% सैलरी बढ़ाई

नोएडा के वर्कर्स जैसी ही मांगों को लेकर अप्रैल के पहले हफ्ते में हरियाणा के फैक्ट्री वर्कर्स ने भी प्रोटेस्ट किया था।

पिछले हफ्ते ही मानेसर के इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) में भी झड़पें हुई थीं। तब भी हजारों कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स सड़कों पर उतर आए थे।

इसके पहले फरवरी में पानीपत में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के लगभग 30 हजार कर्मचारी कंपनी के बाहर धरने पर बैठे थे।

इसके बाद हरियाणा सरकार ने 35 फीसदी सैलरी बढ़ाने का फैसला लिया। जिसके बाद मजदूरों को रोजाना की बेगारी 580-750 मिलेगी।

जबकि, नोएडा में अभी यही 350 से 400 के बीच है। वर्कर्स के मुताबिक, उनकी मंथली सैलरी 11000 है, जिसमें से 1000 कॉन्ट्रैक्टर काम देने के लेता है। इसमें से उनके पास सिर्फ 10 हजार बचते हैं जो इस महंगाई के दौर में गुजारे के लिए नाकाफी है।

अगर हरियाणा की बात करें, तो आखिरी बार मिनिमम वेज अक्टूबर 2015 में रिवाइज हुए थे।

मिनिमम वेज एक्ट क्या कहता है?

मिनिमम वेज (Minimum Wage) एक्ट के तहत केंद्र सरकार एक फ्लोर वेज (floor wage) तय करती है, जिसके तहत राज्य सरकारों और उद्योगों को उतना या उससे ज्यादा सैलरी तय करने का प्रावधान है।

राज्य सरकारें इससे कम वेतन तय नहीं कर सकतीं। वेतन को अब हर 3 साल में रिवाइज करना जरूरी है। पहले ये सीमा 5 साल तक थी।

पहले इसके लिए Minimum Wages Act-1948 था, जिसे अब Code on Wages-2019 में शामिल कर दिया गया है। इसमें 4 लेबर लॉ को मिला दिया गया है, जिनमें

  • Minimum Wages Act, 1948
  • Payment of Wages Act, 1936
  • Payment of Bonus Act, 1965
  • Equal Remuneration Act, 1976

मिनिमम वेज तय कैसे होता है?

मिनिमम वेज व्यक्ति की स्किल और उसकी लोकेशन से तय होती है। स्किल के लिए सरकार ने 4 केटेगरीज तैयार की है-

1. अकुशल (अनस्किल्ड)

2. अर्ध-कुशल या अकुशल पर्यवेक्षक (सेमी-स्किल्ड/ अनस्किल्ड सुपरवाइजर)

3. कुशल या /लिपिकीय (स्किल्ड/ क्लेरिकल)

4. अत्यधिक कुशल (हाइली स्किल्ड)

वहीं लोकेशन के हिसाब से जीने की लागत अलग-अलग होती है। बिहार के गांव या दिल्ली के लिए खर्च समान नहीं होगा। इसलिए लोकेशन के हिसाब से भी वेज तय होता है। इसके लिए टियर 1, 2 और 3 के लिए अलग-अलग सैलरी तय होती है। इन्हें सरकार ने A, B, और C जोन्स में बांटा है।

इन फैक्टर्स के अलावा, मिनिमम वेज दो तरीकों से तय होता है।

  • पहले में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (VDA- वेरिएबल डियरनेस अलाउंस) को मिलाकर दिन के हिसाब से सैलरी तय होती है। ये जगह और वर्किंग सेक्टर के मुताबिक तय होनी चाहिए।
  • दूसरे तरीके में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (VDA) के साथ कुछ सुविधाओं की कीमत शामिल होती है। अगर कीमत नहीं तो सुविधाएं मिलती हैं।

VDA यानी वर्कर्स को मिलने वाला वो भत्ता जो महंगाई के मुताबिक बढ़ता या घटता रहता है। VDA CPI-IW (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स- इंडस्ट्रियल वर्कर) से जुड़ा है, जो आमतौर पर साल में दो बार बदला जाना चाहिए। पहली बार 1 अप्रैल को और दूसरी बार 1 अक्तूबर को। पुराने नियमों में इस पर इतना जोर नहीं था, लेकिन नए नियमों में इसे सख्ती से लागू करने की बात कही गई है।

ये मिनिमम वेजेस एक्ट सभी शेड्यूल्ड एंप्लॉयमेंट्स पर लागू होता है, जैसे निर्माण (कंस्ट्रक्शन), खनन (माइनिंग), सफाई, लोडिंग-अनलोडिंग, खेती और बाकी इंडस्ट्रियल वर्क।

मिनिमम वेज के लेटेस्ट अपडेट के बाद CPI-IW 11.28 अंक तक बढ़ा है, जिसके आधार पर 1 अप्रैल 2026 से कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और सफाई जैसे सेंट्रल सेक्टरों में मजदूरी की लागत बढ़ी है। इसके बाद राज्यों को अपनी दरों के हिसाब से महंगाई भत्ता बढ़ानी थी। जब राज्यों सरकारों ने नहीं बढ़ाई तो प्रोटेस्ट हुए।

हिंसक प्रोटेस्ट के बाद मंगलवार, 14 अप्रैल को यूपी सरकार ने मौजूदा वेतन में 3 हजार बढ़ाए हैं। लेकिन इसके बाद भी वर्कर्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं। वे 20,000 मंथली सैलरी की मांग पर टिके हैं।

बिहार, गुजरात में भी हुए प्रदर्शन

सोमवार नोएडा में प्रोटेस्ट से पहले बिहार के बरौनी, गुजरात के सूरत, हरियाणा के मानेसर और पानीपत में भी वायलेंट प्रोटेस्ट हुए। राज्य सरकारों ने या तो सैलरी नहीं बढ़ाई थी या फिर जितनी बढ़ाई वो वर्कर्स नाकाफी थी।

2 फरवरी को बरौनी में वेतन बढ़ाने, काम के घंटे फिक्स करने और PF, ESIC जैसे सोशल सिक्यॉरिटी प्रोविजन की मांग को लेकर प्रोटेस्ट किया था।

27 फरवरी को सूरत में L&T के 5000 कॉन्ट्रैक्चुअल वर्कर्स ने हजीरा में प्रोटेस्ट किया जो हिंसक हो गया था।

स्टोरी – सोनाली राय

——————–

ये खबर भी पढ़ें…

लता दीदी के सेक्रेटरी से भागकर शादी की, तलाक लिया:खुद अंग्रेजी गानों, फिल्‍मों की शौकीन थीं आशा भोसले; जानें प्रोफाइल

बॉलिवुड की दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया। 1960-70 के दशक की इंडियन पॉप और कैबरे आर्टिस्ट कही जाने वाली आशा ने 8 दशक के करियर में 12,000 से भी ज्यादा गाने गाए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.