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राजस्थान की रिफाइनरी से देश बनेगा एनर्जी सुपरपावर:एक्सपर्ट बोले- जामनगर और भटिंडा की तरह बनेगा नया पेट्रोकेमिकल हब, इकोनॉमिक मैप में आएगा नजर

राजस्थान की रिफाइनरी से देश बनेगा एनर्जी सुपरपावर:एक्सपर्ट बोले- जामनगर और भटिंडा की तरह बनेगा नया पेट्रोकेमिकल हब, इकोनॉमिक मैप में आएगा नजर

राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में बन रही देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना अब अंतिम चरण में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को इसका उद्घाटन करने वाले हैं। दैनिक भास्कर ने रिफाइनरी की स्टेट्स रिपोर्ट को खंगाला। साथ ही, एनर्जी मामलों के ग्लोबल एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र तनेजा से बातचीत कर जाना कि देश की सबसे हाईटेक रिफाइनरी से क्या बदलेगा? इससे राजस्थान और देश को क्या फायदा होने वाला है? प्रदेश के स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिलने वाला है? क्या इस प्रोजेक्ट से पेट्रोल-डीजल की कीमतों या इसकी सप्लाई पर कोई असर पड़ेगा? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब …… सवाल : क्या पचपदरा रिफाइनरी तय समय सीमा में पूरी तरह चालू हो पाएगी या अभी वक्त लगेगा? जवाब : पचपदरा रिफाइनरी अब अपने अंतिम फेज में पहुंच चुकी है। कई प्रोसेस यूनिट्स का ट्रायल रन शुरू हो चुका है। इतनी बड़ी और इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड रिफाइनरी को लगातार ऑपरेशन में लाना एक स्टेप टू स्टेप प्रक्रिया होती है। तकनीकी रूप से देखें तो सेफ्टी, प्रोसेस स्टेबिलिटी और यूनिट इंटीग्रेशन टेस्ट के बाद ही फुल कॉमर्शियल रन संभव होता है। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने आ रहे हैं तो जल्द ही ये पूरी क्षमता के साथ काम करने लग जाएगी। सवाल : रिफाइनरी कितनी जल्द पूरी क्षमता से काम शुरू करेगी? जवाब : इतने बड़े रिफाइनरी प्रोजेक्ट, जहां अरबों-खरबों रुपए का निवेश हुआ है, इसे एक मैराथन दौड़ की तरह से देखा जाना चाहिए। ट्रायल के दौरान यूनिट्स का धीरे-धीरे लोड बढ़ाकर टेस्ट किया जाता है ताकि कोई तकनीकी गड़बड़ी हो तो पहले ही पकड़ा जा सके। आमतौर पर इस तरह की मेगा रिफाइनरी में ट्रायल रन के बाद निरंतरता में कुछ समय लगता है। इसके बाद ही सभी यूनिट्स को 100% क्षमता के साथ और सुरक्षित तरीके से चलाया जाता है। सवाल : इस मेगा प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिल रहा है और आगे कितनी संभावनाएं हैं? जवाब : आप ये मानिए कि पहले आप भारत के आर्थिक नक्शे में कहीं नहीं थे। अब राजस्थान का नाम भारत के आर्थिक नक्शे पर बड़ी मजबूती से आ गया है। इस परियोजना में रोजगार की बात करें तो दो स्तर पर अवसर बने हैं। पहला- निर्माण चरण में हजारों लोगों को सीधा काम मिला है। दूसरा- ऑपरेशन स्टेज में में हाई-स्किल्ड जॉब्स तैयार होंगे। इसके साथ ट्रांसपोर्ट, सर्विस, कैटरिंग और मेंटेनेंस जैसे सेक्टर में भी बड़ा मल्टीप्लायर इफेक्ट देखने को मिल रहा है। लंबे समय में यह पूरा क्षेत्र एक इंडस्ट्रियल एम्प्लॉयमेंट हब बन सकता है। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार का एक बड़ा इफेक्ट देखने को मिलेगा। रिफाइनरी के आसपास बिल्डर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर, एजुकेशन, फूड सर्विसेज, सप्लाई चेन और छोटे-बड़े सर्विस सेक्टर में नई आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। इससे केवल अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा होंगे। सवाल : क्या रिफाइनरी के आसपास नए उद्योग और MSME क्लस्टर विकसित हो रहे हैं…भविष्य में इससे कितना बदलाव आने की संभावनाएं हैं ? जवाब : पचपदरा रिफाइनरी सिर्फ एक एनर्जी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि कई बड़े इकोनॉमिक सेक्टरों के लिए एक कैटलिस्ट (उत्प्रेरक) का काम करेगी। पेट्रोकेमिकल, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, प्लास्टिक, केमिकल और MSME जैसे सेक्टरों में इसका चौतरफा असर देखने को मिलेगा, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान की इंडस्ट्रियल ग्रोथ को नई रफ्तार मिलेगी। इससे एक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनेगा जो आने वाले वर्षों में पूरे पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था बदल सकती है। सवाल : राजस्थान के कच्चे तेल का कितना यहां उपयोग होगा और इससे प्रदेश को कितना फायदा मिलेगा? जवाब : देखिए, इस रिफाइनरी में पूरे देश के हर हिस्से का और हर टैक्सपेयर का पैसा लगा है तो इसे महज राजस्थान से जोड़ देना तो छोटी सोच होगी। हालांकि ये बात सही भी है कि राजस्थान में उत्पादित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इस रिफाइनरी में प्रोसेस होगा। इससे राज्य को रॉयल्टी, टैक्स और स्थानीय वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा पेट्रोलियम इंडस्ट्री में राजस्थान की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। हालांकि इसे देश के नजरिये से ही देखा जाना चाहिए। सवाल : क्या इस प्रोजेक्ट से देश और राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों या सप्लाई पर कोई असर पड़ेगा? जवाब : सप्लाई चेन निश्चित रूप से और मजबूत होगी और यह अपने आप में एक बड़ी सकारात्मक बात है। पचपदरा रिफाइनरी जैसी मेगा परियोजना भारत की रिफाइनिंग क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगी। दिलचस्प यह है कि दुनिया के कई खाड़ी देशों के पास भी इस स्तर की एडवांस रिफाइनिंग टेक्नोलॉजी और इंटीग्रेशन क्षमता नहीं है, जबकि भारत आज न सिर्फ कच्चा तेल आयात करता है बल्कि उसे वैल्यू-एडेड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में बदलकर बड़े पैमाने पर निर्यात भी करता है। आप देखिए कि पाकिस्तान से लगते आधे बॉर्डर पर हमारी आर्म फोर्सेज को तो यहीं से सप्लाई हो जाएगी। मौजूदा स्थिति में भारत लगभग 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और 100 से ज्यादा देशों को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। यह भारत को एक ‘रिफाइनिंग सुपर पावर’ के रूप में स्थापित करता है। पचपदरा रिफाइनरी इस क्षमता को और मजबूत करेगी। इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी भारत की स्थिति मजबूत होगी। खासकर हमारी आर्म्ड फोर्सेज के लिए सप्लाई ज्यादा सुरक्षित, तेज और कम लागत वाली हो जाएगी। सवाल : क्या यह प्रोजेक्ट राजस्थान को पेट्रोकेमिकल हब बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित होगा? जवाब : बिल्कुल, यह प्रोजेक्ट राजस्थान को केवल क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग स्टेट से आगे पेट्रोकेमिकल हब की ओर ले जाएगा। आपने पंजाब का भटिंडा देखा होगा। वहां पहले रिफाइनरी और उसके बाद जो बदलाव आया वो तो सबके सामने है। क्या जामनगर को पहले कोई जानता था? ऐसे में ये तय मानिए कि इस रिफाइनरी का भविष्य सिर्फ तेल शोधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका विस्तार एक बड़े पेट्रोकेमिकल हब में होगा। ठीक वैसे ही जैसे भटिंडा रिफाइनरी के आसपास इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित हुआ है। आने वाले समय में यहां पेट्रोकेमिकल आधारित इंडस्ट्रीज लगेंगी, जिनमें प्लास्टिक, सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला डामर, दवाइयां, पेंट, पैकेजिंग मटेरियल और कई पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स शामिल होंगे। इससे हमारे निवेश और एक्सपोर्ट क्षमता दोनों में बड़ा संरचनात्मक बदलाव आने वाला है। सवाल : इस रिफाइनरी प्रोजेक्ट में पर्यावरण के लिहाज से क्या कदम उठाए गए हैं? जवाब : ये तो होना ही है। जामनगर में जब रिफाइनरी लगी थी तो वहां पॉल्यूशन का काफी इश्यू हुआ था और ये सही भी है कि रिफाइनरी से पर्यावरण प्रभावित होता है। इसी के चलते बाद में जामनगर में इतने आम के पेड़ लगा दिए गए थे और दूसरे तरीके अपनाए गए कि आज वहां पॉल्यूशन का स्तर पहले से बहुत कम है। ऐसे में यहां भी पर्यावरण के लिहाज कई कदम उठाए जाने होंगे और वो उठाए जाएंगे। पर्यावरण के लिए यहां जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। यानी एक बूंद पानी बर्बाद नहीं होगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिमाग काम कर रहे हैं। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड इसकी कमान संभाल रही है। लमस टेक्नोलॉजी, यूओपी, यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल, क्रैकर यूनिट्स की तकनीक दी है। सवाल : प्रोजेक्ट से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे- सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स में कितना सुधार हुआ है? और क्या यह रिफाइनरी भविष्य में एक्सपोर्ट हब बन सकती है? जवाब : इस परियोजना ने पूरे पश्चिमी राजस्थान के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को एक नई दिशा और रफ्तार दी है। खासकर सड़क नेटवर्क, रेल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जिससे भारी औद्योगिक मूवमेंट को सपोर्ट मिल रहा है। लॉन्ग टर्म में देखें तो जब पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन पूरी क्षमता पर पहुंचेगा, तो यहां से तैयार उत्पादों के लिए निर्यात की बड़ी संभावनाएं खुलेंगी। भौगोलिक स्थिति और पोर्ट कनेक्टिविटी को देखते हुए यह क्षेत्र भविष्य में वैश्विक मार्केट के लिए एक मजबूत एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकता है। इससे भारत की ग्लोबल एनर्जी और पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन में स्थिति और अधिक मजबूत होगी। देश की पहली सबसे हाईटेक रिफाइनरी है पचपदरा
पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है। यह लगभग 17 हैं। तकनीकी भाषा में इसका मतलब है कि यह देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यह दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले भारी, कम गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी बेशकीमती पेट्रोल, डीजल, पेट्रोकेमिकल में बदलने की क्षमता रखती है। खास बात यह भी है कि रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान, यूरोप की तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसकी फिनिशिंग, वेल्डिंग में नीदरलैंड के विशेषज्ञ तकनीशियनों की मदद ली गई है। कच्चे तेल की प्रकृति वैक्सी (मोम जैसी) होती है। इसे पाइपलाइन में जमने से रोकने के लिए मुंद्रा पोर्ट से पचपदरा तक एक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। इसमें जगह-जगह हीटिंग स्टेशन, थर्मल इंसुलेशन लगाया गया है। इससे तेल का तापमान बना रहेगा। रिफाइनरी शुरू होते ही राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालने वाला राज्य नहीं रहेगा। वह उसे प्रोसेस कर वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट (जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीमर) बनाने वाला हब बन जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्लास्टिक, केमिकल उद्योगों की बाढ़ आएगी। हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

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राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में बन रही देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड तेल रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना अब अंतिम चरण में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को इसका उद्घाटन करने वाले हैं। दैनिक भास्कर ने रिफाइनरी की स्टेट्स रिपोर्ट को खंगाला। साथ ही, एनर्जी मामलों के ग्लोबल एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र तनेजा से बातचीत कर जाना कि देश की सबसे हाईटेक रिफाइनरी से क्या बदलेगा? इससे राजस्थान और देश को क्या फायदा होने वाला है? प्रदेश के स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिलने वाला है? क्या इस प्रोजेक्ट से पेट्रोल-डीजल की कीमतों या इसकी सप्लाई पर कोई असर पड़ेगा? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब …… सवाल : क्या पचपदरा रिफाइनरी तय समय सीमा में पूरी तरह चालू हो पाएगी या अभी वक्त लगेगा? जवाब : पचपदरा रिफाइनरी अब अपने अंतिम फेज में पहुंच चुकी है। कई प्रोसेस यूनिट्स का ट्रायल रन शुरू हो चुका है। इतनी बड़ी और इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड रिफाइनरी को लगातार ऑपरेशन में लाना एक स्टेप टू स्टेप प्रक्रिया होती है। तकनीकी रूप से देखें तो सेफ्टी, प्रोसेस स्टेबिलिटी और यूनिट इंटीग्रेशन टेस्ट के बाद ही फुल कॉमर्शियल रन संभव होता है। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करने आ रहे हैं तो जल्द ही ये पूरी क्षमता के साथ काम करने लग जाएगी। सवाल : रिफाइनरी कितनी जल्द पूरी क्षमता से काम शुरू करेगी? जवाब : इतने बड़े रिफाइनरी प्रोजेक्ट, जहां अरबों-खरबों रुपए का निवेश हुआ है, इसे एक मैराथन दौड़ की तरह से देखा जाना चाहिए। ट्रायल के दौरान यूनिट्स का धीरे-धीरे लोड बढ़ाकर टेस्ट किया जाता है ताकि कोई तकनीकी गड़बड़ी हो तो पहले ही पकड़ा जा सके। आमतौर पर इस तरह की मेगा रिफाइनरी में ट्रायल रन के बाद निरंतरता में कुछ समय लगता है। इसके बाद ही सभी यूनिट्स को 100% क्षमता के साथ और सुरक्षित तरीके से चलाया जाता है। सवाल : इस मेगा प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिल रहा है और आगे कितनी संभावनाएं हैं? जवाब : आप ये मानिए कि पहले आप भारत के आर्थिक नक्शे में कहीं नहीं थे। अब राजस्थान का नाम भारत के आर्थिक नक्शे पर बड़ी मजबूती से आ गया है। इस परियोजना में रोजगार की बात करें तो दो स्तर पर अवसर बने हैं। पहला- निर्माण चरण में हजारों लोगों को सीधा काम मिला है। दूसरा- ऑपरेशन स्टेज में में हाई-स्किल्ड जॉब्स तैयार होंगे। इसके साथ ट्रांसपोर्ट, सर्विस, कैटरिंग और मेंटेनेंस जैसे सेक्टर में भी बड़ा मल्टीप्लायर इफेक्ट देखने को मिल रहा है। लंबे समय में यह पूरा क्षेत्र एक इंडस्ट्रियल एम्प्लॉयमेंट हब बन सकता है। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार का एक बड़ा इफेक्ट देखने को मिलेगा। रिफाइनरी के आसपास बिल्डर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर, एजुकेशन, फूड सर्विसेज, सप्लाई चेन और छोटे-बड़े सर्विस सेक्टर में नई आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। इससे केवल अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर भी पैदा होंगे। सवाल : क्या रिफाइनरी के आसपास नए उद्योग और MSME क्लस्टर विकसित हो रहे हैं…भविष्य में इससे कितना बदलाव आने की संभावनाएं हैं ? जवाब : पचपदरा रिफाइनरी सिर्फ एक एनर्जी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि कई बड़े इकोनॉमिक सेक्टरों के लिए एक कैटलिस्ट (उत्प्रेरक) का काम करेगी। पेट्रोकेमिकल, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, प्लास्टिक, केमिकल और MSME जैसे सेक्टरों में इसका चौतरफा असर देखने को मिलेगा, जिससे पूरे पश्चिमी राजस्थान की इंडस्ट्रियल ग्रोथ को नई रफ्तार मिलेगी। इससे एक इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनेगा जो आने वाले वर्षों में पूरे पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था बदल सकती है। सवाल : राजस्थान के कच्चे तेल का कितना यहां उपयोग होगा और इससे प्रदेश को कितना फायदा मिलेगा? जवाब : देखिए, इस रिफाइनरी में पूरे देश के हर हिस्से का और हर टैक्सपेयर का पैसा लगा है तो इसे महज राजस्थान से जोड़ देना तो छोटी सोच होगी। हालांकि ये बात सही भी है कि राजस्थान में उत्पादित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इस रिफाइनरी में प्रोसेस होगा। इससे राज्य को रॉयल्टी, टैक्स और स्थानीय वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा पेट्रोलियम इंडस्ट्री में राजस्थान की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। हालांकि इसे देश के नजरिये से ही देखा जाना चाहिए। सवाल : क्या इस प्रोजेक्ट से देश और राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों या सप्लाई पर कोई असर पड़ेगा? जवाब : सप्लाई चेन निश्चित रूप से और मजबूत होगी और यह अपने आप में एक बड़ी सकारात्मक बात है। पचपदरा रिफाइनरी जैसी मेगा परियोजना भारत की रिफाइनिंग क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगी। दिलचस्प यह है कि दुनिया के कई खाड़ी देशों के पास भी इस स्तर की एडवांस रिफाइनिंग टेक्नोलॉजी और इंटीग्रेशन क्षमता नहीं है, जबकि भारत आज न सिर्फ कच्चा तेल आयात करता है बल्कि उसे वैल्यू-एडेड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में बदलकर बड़े पैमाने पर निर्यात भी करता है। आप देखिए कि पाकिस्तान से लगते आधे बॉर्डर पर हमारी आर्म फोर्सेज को तो यहीं से सप्लाई हो जाएगी। मौजूदा स्थिति में भारत लगभग 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और 100 से ज्यादा देशों को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। यह भारत को एक ‘रिफाइनिंग सुपर पावर’ के रूप में स्थापित करता है। पचपदरा रिफाइनरी इस क्षमता को और मजबूत करेगी। इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी भारत की स्थिति मजबूत होगी। खासकर हमारी आर्म्ड फोर्सेज के लिए सप्लाई ज्यादा सुरक्षित, तेज और कम लागत वाली हो जाएगी। सवाल : क्या यह प्रोजेक्ट राजस्थान को पेट्रोकेमिकल हब बनाने की दिशा में गेमचेंजर साबित होगा? जवाब : बिल्कुल, यह प्रोजेक्ट राजस्थान को केवल क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग स्टेट से आगे पेट्रोकेमिकल हब की ओर ले जाएगा। आपने पंजाब का भटिंडा देखा होगा। वहां पहले रिफाइनरी और उसके बाद जो बदलाव आया वो तो सबके सामने है। क्या जामनगर को पहले कोई जानता था? ऐसे में ये तय मानिए कि इस रिफाइनरी का भविष्य सिर्फ तेल शोधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका विस्तार एक बड़े पेट्रोकेमिकल हब में होगा। ठीक वैसे ही जैसे भटिंडा रिफाइनरी के आसपास इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित हुआ है। आने वाले समय में यहां पेट्रोकेमिकल आधारित इंडस्ट्रीज लगेंगी, जिनमें प्लास्टिक, सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला डामर, दवाइयां, पेंट, पैकेजिंग मटेरियल और कई पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स शामिल होंगे। इससे हमारे निवेश और एक्सपोर्ट क्षमता दोनों में बड़ा संरचनात्मक बदलाव आने वाला है। सवाल : इस रिफाइनरी प्रोजेक्ट में पर्यावरण के लिहाज से क्या कदम उठाए गए हैं? जवाब : ये तो होना ही है। जामनगर में जब रिफाइनरी लगी थी तो वहां पॉल्यूशन का काफी इश्यू हुआ था और ये सही भी है कि रिफाइनरी से पर्यावरण प्रभावित होता है। इसी के चलते बाद में जामनगर में इतने आम के पेड़ लगा दिए गए थे और दूसरे तरीके अपनाए गए कि आज वहां पॉल्यूशन का स्तर पहले से बहुत कम है। ऐसे में यहां भी पर्यावरण के लिहाज कई कदम उठाए जाने होंगे और वो उठाए जाएंगे। पर्यावरण के लिए यहां जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। यानी एक बूंद पानी बर्बाद नहीं होगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के पीछे दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी दिमाग काम कर रहे हैं। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड इसकी कमान संभाल रही है। लमस टेक्नोलॉजी, यूओपी, यूनिवेशन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों ने अपनी पेट्रोकेमिकल, क्रैकर यूनिट्स की तकनीक दी है। सवाल : प्रोजेक्ट से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे- सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स में कितना सुधार हुआ है? और क्या यह रिफाइनरी भविष्य में एक्सपोर्ट हब बन सकती है? जवाब : इस परियोजना ने पूरे पश्चिमी राजस्थान के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को एक नई दिशा और रफ्तार दी है। खासकर सड़क नेटवर्क, रेल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जिससे भारी औद्योगिक मूवमेंट को सपोर्ट मिल रहा है। लॉन्ग टर्म में देखें तो जब पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन पूरी क्षमता पर पहुंचेगा, तो यहां से तैयार उत्पादों के लिए निर्यात की बड़ी संभावनाएं खुलेंगी। भौगोलिक स्थिति और पोर्ट कनेक्टिविटी को देखते हुए यह क्षेत्र भविष्य में वैश्विक मार्केट के लिए एक मजबूत एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकता है। इससे भारत की ग्लोबल एनर्जी और पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन में स्थिति और अधिक मजबूत होगी। देश की पहली सबसे हाईटेक रिफाइनरी है पचपदरा
पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी खासियत इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (NCI) है। यह लगभग 17 हैं। तकनीकी भाषा में इसका मतलब है कि यह देश की सबसे उन्नत, हाई-कन्वर्जन रिफाइनरी है। यह दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले भारी, कम गुणवत्ता वाले कच्चे तेल को भी बेशकीमती पेट्रोल, डीजल, पेट्रोकेमिकल में बदलने की क्षमता रखती है। खास बात यह भी है कि रिफाइनरी के अधिकांश रिएक्टर, कॉलम, भारी टैंक भारत में ही बने हैं। कंट्रोल सिस्टम, हाई-प्रेशर कंप्रेसर के लिए अमेरिका, जापान, यूरोप की तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसकी फिनिशिंग, वेल्डिंग में नीदरलैंड के विशेषज्ञ तकनीशियनों की मदद ली गई है। कच्चे तेल की प्रकृति वैक्सी (मोम जैसी) होती है। इसे पाइपलाइन में जमने से रोकने के लिए मुंद्रा पोर्ट से पचपदरा तक एक विशेष हीटिंग पाइपलाइन बिछाई गई है। इसमें जगह-जगह हीटिंग स्टेशन, थर्मल इंसुलेशन लगाया गया है। इससे तेल का तापमान बना रहेगा। रिफाइनरी शुरू होते ही राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालने वाला राज्य नहीं रहेगा। वह उसे प्रोसेस कर वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट (जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीमर) बनाने वाला हब बन जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर प्लास्टिक, केमिकल उद्योगों की बाढ़ आएगी। हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

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