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एक ऐसा पौधा, जो बलिया में लगभग हर जगह देखने मिल जाता है. आयुर्वेद की दुनिया में अकरकरा बेहद उपयोगी है, जो सदियों से घरेलू इलाज का हिस्सा रहा है. यह औषधि पुरुष स्वास्थ्य, दांत दर्द और पाचन समस्याओं में बेहद प्रभावी है. यह जीभ के कई रोगों में रामबाण है. आगे जानिए…

अकरकरा, जो दादी नानी के घरेलू उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था. पहले जब जीभ में छाले या मुंह पक जाता था, तब लोग अकरकरा के फूल को मसलकर जीभ पर रखते थे. इसको आम बोलचाल में पुनपुनवा कहा जाता था. इससे लार तेजी से बनता था और कुछ ही मिनटों में जलन और दर्द कम हो जाता था. लेकिन, इसे निगलना नहीं चाहिए, बल्कि 10 मिनट बाद मुंह से बाहर निकाल दे.

पुरुषों के लिए लाभकारी

अकरकरा पुरुषों के यौन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद शक्तिशाली औषधि मानी जाती है. यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को संतुलित करने, स्पर्म काउंट बढ़ाने और उनकी गतिशीलता सुधारने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, यह स्तंभन दोष जैसी समस्याओं में भी सहायक प्रदान करता है, इसी के कारण आत्मविश्वास और ऊर्जा दोनों में बढ़ोतरी हो सकती हैं.

नस, थकान और जोड़ों के दर्द

यह रामबाण औषधि नसों की कमजोरी, थकान और जोड़ों के दर्द में भी बहुत असरदार साबित होती हैं. यह शरीर में वात दोष को संतुलित कर ऊर्जा बढ़ाती है और सुस्ती को दूर करती है. इतिहासकार डॉ शिव कुमार सिंह कौशिकेय के अनुसार, बुजुर्ग तो इसे शरीर को जगाने वाली औषधि के नाम से जानते थे.

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सर्दी, जुकाम और गले की खराश

अकारकरा का काढ़ा सर्दी, जुकाम और गले की खराश में बेहद लाभकारी और गुणकारी माना गया है. यह गले को गर्माहट देने के साथ ही खांसी व हिचकी जैसी समस्याओं में भी राहत पहुंचाता है. ठंड के मौसम में इसका सीमित उपयोग शरीर को अंदर से मजबूती प्रदान करता है. लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है.

पाचन तंत्र

अकरकरा पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी बहुत उपयोगी है. यह पाचन एंजाइमों को सक्रिय करके गैस, अपच और पेट भारी रहने की समस्या को कम करने में मदद करता है. इसके रोजाना और सही सीमित मात्रा में उपयोग करने से पेट हल्का और दुरुस्त रहता है. यह साधारण पौधा नहीं है, बल्कि गुणों का भंडार है.

दांतों और मसूड़ों के लिए लाभ

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, अकरकरा दांतों और मसूड़ों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. इसकी जड़ को हल्का चबाने से दांत दर्द, पायरिया, मसूड़ों की सूजन और मुंह की दुर्गंध से बहुत राहत मिलती है. यह भी सच्चाई है कि, पुराने जमाने में लोग घरेलू नुस्खे पर ज्यादा भरोसा करते थे.

सावधानी भी जरूरी

बेशक अकरकरा बहुत लाभकारी औषधि है, लेकिन इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए अधिक सेवन से उल्टी, दस्त, बेचैनी, दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इसका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. हां कभी भी इसका उपयोग बगैर चिकित्सक से परामर्श लिए न करें. क्योंकि कही परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकता हैं.

अकरकरा का सेवन

साधारण तौर पर इसका सेवन चूर्ण के रूप में शहद या काढ़े के रूप में किया जा सकता हैं. इसकी मात्रा 0.5 से 1 ग्राम तक ही सुरक्षित है. गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ही जरूरी है. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह जड़ी-बूटी सच में चमत्कारी कई रोगों से निजात दिला सकती है.

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एक ऐसा पौधा, जो बलिया में लगभग हर जगह देखने मिल जाता है. आयुर्वेद की दुनिया में अकरकरा बेहद उपयोगी है, जो सदियों से घरेलू इलाज का हिस्सा रहा है. यह औषधि पुरुष स्वास्थ्य, दांत दर्द और पाचन समस्याओं में बेहद प्रभावी है. यह जीभ के कई रोगों में रामबाण है. आगे जानिए…

अकरकरा, जो दादी नानी के घरेलू उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करता था. पहले जब जीभ में छाले या मुंह पक जाता था, तब लोग अकरकरा के फूल को मसलकर जीभ पर रखते थे. इसको आम बोलचाल में पुनपुनवा कहा जाता था. इससे लार तेजी से बनता था और कुछ ही मिनटों में जलन और दर्द कम हो जाता था. लेकिन, इसे निगलना नहीं चाहिए, बल्कि 10 मिनट बाद मुंह से बाहर निकाल दे.

पुरुषों के लिए लाभकारी

अकरकरा पुरुषों के यौन स्वास्थ्य के लिए भी बेहद शक्तिशाली औषधि मानी जाती है. यह टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को संतुलित करने, स्पर्म काउंट बढ़ाने और उनकी गतिशीलता सुधारने में मदद कर सकता है. इसके अलावा, यह स्तंभन दोष जैसी समस्याओं में भी सहायक प्रदान करता है, इसी के कारण आत्मविश्वास और ऊर्जा दोनों में बढ़ोतरी हो सकती हैं.

नस, थकान और जोड़ों के दर्द

यह रामबाण औषधि नसों की कमजोरी, थकान और जोड़ों के दर्द में भी बहुत असरदार साबित होती हैं. यह शरीर में वात दोष को संतुलित कर ऊर्जा बढ़ाती है और सुस्ती को दूर करती है. इतिहासकार डॉ शिव कुमार सिंह कौशिकेय के अनुसार, बुजुर्ग तो इसे शरीर को जगाने वाली औषधि के नाम से जानते थे.

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सर्दी, जुकाम और गले की खराश

अकारकरा का काढ़ा सर्दी, जुकाम और गले की खराश में बेहद लाभकारी और गुणकारी माना गया है. यह गले को गर्माहट देने के साथ ही खांसी व हिचकी जैसी समस्याओं में भी राहत पहुंचाता है. ठंड के मौसम में इसका सीमित उपयोग शरीर को अंदर से मजबूती प्रदान करता है. लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है.

पाचन तंत्र

अकरकरा पाचन तंत्र को मजबूत करने में भी बहुत उपयोगी है. यह पाचन एंजाइमों को सक्रिय करके गैस, अपच और पेट भारी रहने की समस्या को कम करने में मदद करता है. इसके रोजाना और सही सीमित मात्रा में उपयोग करने से पेट हल्का और दुरुस्त रहता है. यह साधारण पौधा नहीं है, बल्कि गुणों का भंडार है.

दांतों और मसूड़ों के लिए लाभ

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, अकरकरा दांतों और मसूड़ों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. इसकी जड़ को हल्का चबाने से दांत दर्द, पायरिया, मसूड़ों की सूजन और मुंह की दुर्गंध से बहुत राहत मिलती है. यह भी सच्चाई है कि, पुराने जमाने में लोग घरेलू नुस्खे पर ज्यादा भरोसा करते थे.

सावधानी भी जरूरी

बेशक अकरकरा बहुत लाभकारी औषधि है, लेकिन इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए अधिक सेवन से उल्टी, दस्त, बेचैनी, दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इसका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. हां कभी भी इसका उपयोग बगैर चिकित्सक से परामर्श लिए न करें. क्योंकि कही परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकता हैं.

अकरकरा का सेवन

साधारण तौर पर इसका सेवन चूर्ण के रूप में शहद या काढ़े के रूप में किया जा सकता हैं. इसकी मात्रा 0.5 से 1 ग्राम तक ही सुरक्षित है. गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बहुत ही जरूरी है. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह जड़ी-बूटी सच में चमत्कारी कई रोगों से निजात दिला सकती है.

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