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भारतीय मूल के श्रेयस मोव्वा कनाडा टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज:जहां टर्फ विकेट तक नहीं, उस बर्फ की धरती पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस ने जिंदा रखा सपना

भारतीय मूल के श्रेयस मोव्वा कनाडा टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज:जहां टर्फ विकेट तक नहीं, उस बर्फ की धरती पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस ने जिंदा रखा सपना


जहां ‘आइस हॉकी’ सबसे लोकप्रिय खेल है और साल के छह महीने बर्फ की चादर बिछी रहती है, वहां एक भारतीय मूल का खिलाड़ी अपने क्रिकेट के सपनों को सींच रहा है। यह कहानी है श्रेयस मोव्वा की, जो कनाडा की टीम के भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और टी-20 वर्ल्ड कप में अपना जलवा बिखेर रहे हैं। कनार्टक से अंडर-23 भी खेले कर्नाटक में जन्मे श्रेयस का सपना कर्नाटक राज्य की टीम के लिए खेलना था। उन्होंने 2015 में अंडर-23 क्रिकेट खेला, जहां उनके साथ अभिनव मनोहर और प्रवीण दुबे जैसे खिलाड़ी थे, जो बाद में IPL के सितारे बने। हालांकि, कर्नाटक की मुख्य टीम में जगह न मिल पाने के कारण श्रेयस ने मां का सपना पूरा करने की ठानी। साल 2016 में वे पढ़ाई के लिए कनाडा चले गए और मॉन्ट्रियल की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 2021 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया
कनाडा के क्यूबेक प्रांत में क्रिकेट खेलना किसी संघर्ष से कम नहीं है। श्रेयस बताते हैं, ‘वहां गर्मी का मौसम मई से सितंबर-अक्टूबर तक ही रहता है। उसके बाद कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के कारण हमें इंडोर नेट्स में अभ्यास करना पड़ता है, जहां मैच जैसी परिस्थितियां बनाना मुश्किल होता है। वहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के टर्फ विकेट नहीं हैं। अब भी टर्फ विकेट की जरूरत है, क्योंकि अधिकतर मुकाबले मैटिंग विकेट पर खेले जाते हैं।’ इन बाधाओं के बावजूद, 2021 में श्रेयस 2009 के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले क्यूबेक के पहले खिलाड़ी बने थे। 32 साल के श्रेयस सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं। दिन में क्रिकेट खेलते हैं और रात में करते हैं काम
वे बताते हैं, ‘जब मैं टीम से बाहर था, तब मेरी नौकरी ने मुझे मानसिक रूप से टूटने से बचाया। मेरी कंपनी मुझे खेलने की अनुमति देती है और मैं अक्सर रात में काम करके इसकी भरपाई करता हूं। क्रिकेट मेरा जुनून है और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मेरा पेशा; मैं दोनों को जारी रखना चाहता हूं।’ कनाडा के लिए 24 वनडे और 26 टी-20 खेल चुके श्रेयस वर्ल्ड कप में खुद को साबित कर रहे हैं। अब उनकी टीम का आखिरी मैच अफगानिस्तान के खिलाफ है। चेन्नई की स्पिन पिचों पर श्रेयस के पास ‘क्लास’ दिखाने का अंतिम मौका है। उनके लिए यह वर्ल्ड कप केवल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उस जिद की जीत है जो कर्नाटक से शुरू होकर क्यूबेक की बर्फ को चीरते हुए वैश्विक मंच पर चमक रही है। —————————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज
क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें

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भारतीय मूल के श्रेयस मोव्वा कनाडा टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज:जहां टर्फ विकेट तक नहीं, उस बर्फ की धरती पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस ने जिंदा रखा सपना

भारतीय मूल के श्रेयस मोव्वा कनाडा टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज:जहां टर्फ विकेट तक नहीं, उस बर्फ की धरती पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रेयस ने जिंदा रखा सपना


जहां ‘आइस हॉकी’ सबसे लोकप्रिय खेल है और साल के छह महीने बर्फ की चादर बिछी रहती है, वहां एक भारतीय मूल का खिलाड़ी अपने क्रिकेट के सपनों को सींच रहा है। यह कहानी है श्रेयस मोव्वा की, जो कनाडा की टीम के भरोसेमंद विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और टी-20 वर्ल्ड कप में अपना जलवा बिखेर रहे हैं। कनार्टक से अंडर-23 भी खेले कर्नाटक में जन्मे श्रेयस का सपना कर्नाटक राज्य की टीम के लिए खेलना था। उन्होंने 2015 में अंडर-23 क्रिकेट खेला, जहां उनके साथ अभिनव मनोहर और प्रवीण दुबे जैसे खिलाड़ी थे, जो बाद में IPL के सितारे बने। हालांकि, कर्नाटक की मुख्य टीम में जगह न मिल पाने के कारण श्रेयस ने मां का सपना पूरा करने की ठानी। साल 2016 में वे पढ़ाई के लिए कनाडा चले गए और मॉन्ट्रियल की कॉनकॉर्डिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। 2021 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया
कनाडा के क्यूबेक प्रांत में क्रिकेट खेलना किसी संघर्ष से कम नहीं है। श्रेयस बताते हैं, ‘वहां गर्मी का मौसम मई से सितंबर-अक्टूबर तक ही रहता है। उसके बाद कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के कारण हमें इंडोर नेट्स में अभ्यास करना पड़ता है, जहां मैच जैसी परिस्थितियां बनाना मुश्किल होता है। वहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के टर्फ विकेट नहीं हैं। अब भी टर्फ विकेट की जरूरत है, क्योंकि अधिकतर मुकाबले मैटिंग विकेट पर खेले जाते हैं।’ इन बाधाओं के बावजूद, 2021 में श्रेयस 2009 के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले क्यूबेक के पहले खिलाड़ी बने थे। 32 साल के श्रेयस सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं। दिन में क्रिकेट खेलते हैं और रात में करते हैं काम
वे बताते हैं, ‘जब मैं टीम से बाहर था, तब मेरी नौकरी ने मुझे मानसिक रूप से टूटने से बचाया। मेरी कंपनी मुझे खेलने की अनुमति देती है और मैं अक्सर रात में काम करके इसकी भरपाई करता हूं। क्रिकेट मेरा जुनून है और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मेरा पेशा; मैं दोनों को जारी रखना चाहता हूं।’ कनाडा के लिए 24 वनडे और 26 टी-20 खेल चुके श्रेयस वर्ल्ड कप में खुद को साबित कर रहे हैं। अब उनकी टीम का आखिरी मैच अफगानिस्तान के खिलाफ है। चेन्नई की स्पिन पिचों पर श्रेयस के पास ‘क्लास’ दिखाने का अंतिम मौका है। उनके लिए यह वर्ल्ड कप केवल टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उस जिद की जीत है जो कर्नाटक से शुरू होकर क्यूबेक की बर्फ को चीरते हुए वैश्विक मंच पर चमक रही है। —————————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज
क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें

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