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BPSC AEDO Exam Cancelled | Bihar Cheating Scandal; Bluetooth Use

BPSC AEDO Exam Cancelled | Bihar Cheating Scandal; Bluetooth Use

BPSC ने शुक्रवार को सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा रद्द कर दी है। एग्जाम में गड़बड़ी और कदाचार को लेकर 6 जिलों में 8 FIR दर्ज हुई थी। जिसके बाद आयोग ने इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया।

.

इसके साथ ही आयोग ने 32 अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित भी कर दिया गया है, जो अब आयोग की किसी भी आगामी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इस परीक्षा के लिए 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरा था।

सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई केंद्रों पर ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करने की कोशिशों को नाकाम किया।

जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों और अभ्यर्थियों ने मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने का षड्यंत्र रचा था। प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोरी अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

नालंदा पुलिस ने एग्जाम के दौरान कैंडिडेट को गिरफ्तार किया। इनको आंसर लिखवाया जा रहा था।

कौन-कौन सी परीक्षाएं हुईं रद्द

सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 87/2025): 14 अप्रैल से 21 अप्रैल तक आयोजित सभी 9 पालियों की परीक्षा रद्द।

सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 108/2025): 23 अप्रैल को आयोजित लिखित परीक्षा रद्द।

आयोग जल्द ही इन परीक्षाओं के आयोजन की नई तिथियों की घोषणा करेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

3 चरणों में हुई थी परीक्षा

शिक्षा विभाग के तहत आने वाले AEDO की वेकैंसी बिहार में पहली बार आई। परीक्षा कंडक्ट कराने की जिम्मेवारी BPSC को दी गई। फॉर्म भरने के लिए 100 रुपए की फी थी। कुल 935 पदों के लिए करीब 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भर दिया।

इस कारण BPSC ने तीन चरणों में परीक्षा ली। पहले चरण की परीक्षा 14-15 अप्रैल को हुई। दूसरे चरण की परीक्षा 17-18 अप्रैल को हुई। तीसरे चरण की परीक्षा 20-21 अप्रैल को हुई। इसके लिए सभी 38 जिलों में 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

पेपर लीक से समझौता नहीं

बता दें 3 चरणों में हुई इस परीक्षा की शुरुआत के ठीक एक दिन पहले मुंगेर DM को मिली एक सूचना ने मास्टर साहब के सारे मास्टर प्लान पर पानी फेर दिया। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में 6 जिलों में 8 FIR दर्ज की गई।

मामले में 36 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। सबसे अधिक 22 गिरफ्तारी मुंगेर से हुई है। 12 दिन बाद भी EOU को ‘मास्टर’ नहीं मिल पाया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान प्रश्न-पत्र लीक होने या सोशल मीडिया पर वायरल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। न ही किसी प्रश्न-पत्र की कोई सीरीज बाहर मिली है।

इसके बावजूद, सोशल मीडिया और समाचारों में आई खबरों और कुछ केंद्रों पर हुई गड़बड़ी की कोशिशों को देखते हुए आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है। आयोग का मानना है कि परीक्षा की गरिमा और ईमानदारी से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

सवालों का जवाब देने के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप

पुलिस ने 20 साल के सुजल के मोबाइल फोन को खंगाला और उससे पूछताछ की। तब पहली बार उसने ‘मास्टर’ का नाम लिया। सुजल ने पुलिस को बताया- ‘मास्टर’ ने ‘एम मुंगेर’ नाम से एक वॉट्सएप ग्रुप में उसके मोबाइल नंबर को जोड़ा था।

इसी ग्रुप में उन 20 कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड को भेजा गया था, जिसकी कॉपी पुलिस ने उसके जब्त बैग से बरामद की थी। इन सभी कैंडिडेट्स का परीक्षा केंद्र मुंगेर ही था।

सेटिंग के तहत परीक्षा के दौरान सभी कैंडिडेट्स को सारे सवालों का सही जवाब बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर उपलब्ध कराने वाले थे। ये पहला वॉट्एप ग्रुप था। ‘मास्टर’ ने ‘मुंगेर सॉल्यूशन’ नाम से दूसरा व्हाट्सएप ग्रुप भी बना रखा था।

इस ग्रुप में ‘मास्टर’ खुद सवालों का सही जवाब भेजने वाला था। जवाब मिलने के बाद हमारे लोग उसे कैंडिडेट तक पहुंचाते। इसके एवज में सुजल और उसके मददगार साथियों को पैसा मिलने वाला था।

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इसके साथ ही आयोग ने 32 अभ्यर्थियों को प्रतिबंधित भी कर दिया गया है, जो अब आयोग की किसी भी आगामी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इस परीक्षा के लिए 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरा था।

सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा के दौरान जिला प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई केंद्रों पर ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करने की कोशिशों को नाकाम किया।

जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ असामाजिक तत्वों और अभ्यर्थियों ने मिलकर परीक्षा में गड़बड़ी फैलाने का षड्यंत्र रचा था। प्रशासन ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोरी अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

नालंदा पुलिस ने एग्जाम के दौरान कैंडिडेट को गिरफ्तार किया। इनको आंसर लिखवाया जा रहा था।

कौन-कौन सी परीक्षाएं हुईं रद्द

सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 87/2025): 14 अप्रैल से 21 अप्रैल तक आयोजित सभी 9 पालियों की परीक्षा रद्द।

सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी (विज्ञापन संख्या 108/2025): 23 अप्रैल को आयोजित लिखित परीक्षा रद्द।

आयोग जल्द ही इन परीक्षाओं के आयोजन की नई तिथियों की घोषणा करेगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

3 चरणों में हुई थी परीक्षा

शिक्षा विभाग के तहत आने वाले AEDO की वेकैंसी बिहार में पहली बार आई। परीक्षा कंडक्ट कराने की जिम्मेवारी BPSC को दी गई। फॉर्म भरने के लिए 100 रुपए की फी थी। कुल 935 पदों के लिए करीब 11 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भर दिया।

इस कारण BPSC ने तीन चरणों में परीक्षा ली। पहले चरण की परीक्षा 14-15 अप्रैल को हुई। दूसरे चरण की परीक्षा 17-18 अप्रैल को हुई। तीसरे चरण की परीक्षा 20-21 अप्रैल को हुई। इसके लिए सभी 38 जिलों में 746 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

पेपर लीक से समझौता नहीं

बता दें 3 चरणों में हुई इस परीक्षा की शुरुआत के ठीक एक दिन पहले मुंगेर DM को मिली एक सूचना ने मास्टर साहब के सारे मास्टर प्लान पर पानी फेर दिया। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में 6 जिलों में 8 FIR दर्ज की गई।

मामले में 36 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। सबसे अधिक 22 गिरफ्तारी मुंगेर से हुई है। 12 दिन बाद भी EOU को ‘मास्टर’ नहीं मिल पाया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान प्रश्न-पत्र लीक होने या सोशल मीडिया पर वायरल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। न ही किसी प्रश्न-पत्र की कोई सीरीज बाहर मिली है।

इसके बावजूद, सोशल मीडिया और समाचारों में आई खबरों और कुछ केंद्रों पर हुई गड़बड़ी की कोशिशों को देखते हुए आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है। आयोग का मानना है कि परीक्षा की गरिमा और ईमानदारी से बढ़कर कुछ भी नहीं है।

सवालों का जवाब देने के लिए बनाया व्हाट्सएप ग्रुप

पुलिस ने 20 साल के सुजल के मोबाइल फोन को खंगाला और उससे पूछताछ की। तब पहली बार उसने ‘मास्टर’ का नाम लिया। सुजल ने पुलिस को बताया- ‘मास्टर’ ने ‘एम मुंगेर’ नाम से एक वॉट्सएप ग्रुप में उसके मोबाइल नंबर को जोड़ा था।

इसी ग्रुप में उन 20 कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड को भेजा गया था, जिसकी कॉपी पुलिस ने उसके जब्त बैग से बरामद की थी। इन सभी कैंडिडेट्स का परीक्षा केंद्र मुंगेर ही था।

सेटिंग के तहत परीक्षा के दौरान सभी कैंडिडेट्स को सारे सवालों का सही जवाब बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर उपलब्ध कराने वाले थे। ये पहला वॉट्एप ग्रुप था। ‘मास्टर’ ने ‘मुंगेर सॉल्यूशन’ नाम से दूसरा व्हाट्सएप ग्रुप भी बना रखा था।

इस ग्रुप में ‘मास्टर’ खुद सवालों का सही जवाब भेजने वाला था। जवाब मिलने के बाद हमारे लोग उसे कैंडिडेट तक पहुंचाते। इसके एवज में सुजल और उसके मददगार साथियों को पैसा मिलने वाला था।

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