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चीनी रोबोट्स का इंसानों जैसा डांस वायरल:बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स भी किया, एक्सपर्ट्स बोले-चीन ने रोबोटिक्स में अमेरिका को पछाड़ा

चीनी रोबोट्स का इंसानों जैसा डांस वायरल:बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स भी किया, एक्सपर्ट्स बोले-चीन ने रोबोटिक्स में अमेरिका को पछाड़ा

चीन ने सोमवार को दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई। एक कार्यक्रम में इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मार्शल आर्ट्स और डांस किया। करीब 25 रोबोट्स बच्चों के साथ तलवार भांजते, बैकलिफ्ट करते और डंडे घुमाते हुए डांस करते दिखाई दिए। खास बात यह रही कि एक भी रोबोट गिरा नहीं। यह प्रदर्शन देख दुनिया हैरान रह गई। कई लोगों के मन में सवाल उठा कि अगर रोबोट अब नाच सकते हैं और कुंग फू कर सकते हैं, तो वे और क्या कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले बिल्कुल अलग था। पिछले साल रोबोट्स सिर्फ रुमाल घुमाते और साधारण हरकतें करते नजर आए थे। लेकिन एक साल में सबकुछ बदल चुका है। चीन दुनिया को खासकर अमेरिका को दिखाना चाहता है कि वह तकनीक में बहुत आगे निकल चुका है। टेक्नोलॉजी का शोकेस है गाला, रोबोट कंपनियों को फायदा एशिया में टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी कंपनी के प्रमुख जॉर्ज स्टीलर ने कहा कि जिस गाला में इन रोबोट्स ने प्रदर्शन किया, वह कई सालों से चीन की तकनीकी ताकत दिखाने का बड़ा मंच रहा है। इसी मंच पर चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम, ड्रोन और रोबोट जैसी नई तकनीकों को दुनिया के सामने पेश करता रहा है। उन्होंने कहा कि इस गाला की सबसे खास बात यह है कि यहां सरकार की औद्योगिक नीति और टीवी के बड़े शो के बीच सीधा संबंध दिखाई देता है। यानी जिन कंपनियों को इस मंच पर अपने प्रोडक्ट दिखाने का मौका मिलता है, उन्हें बाद में सरकारी ऑर्डर, निवेशकों की दिलचस्पी और बाजार में आसानी से एंट्री जैसे फायदे मिलते हैं। स्टीलर के मुताबिक सिर्फ एक साल में रोबोट्स की क्षमता में बड़ा बदलाव आया है। अब उनकी चाल-ढाल और मूवमेंट पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो गई है। इससे साफ है कि यूनिट्री जैसी कंपनियां रोबोट के ‘दिमाग’ यानी एआई सॉफ्टवेयर को मजबूत बनाने पर काम कर रही हैं, ताकि ये रोबोट भविष्य में फैक्ट्रियों में बारीक और असली काम भी कर सकें। दुनियाभर में 90% रोबोट्स चीन के रिसर्च फर्म ओम्डिया के अनुसार, पिछले साल दुनियाभर में भेजे गए लगभग 13 हजार ह्यूमनॉइड रोबोट्स में से 90 प्रतिशत चीन से थे। यह अमेरिकी कंपनियों से काफी आगे है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि इस साल चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट की बिक्री दोगुने से ज्यादा बढ़कर 28 हजार यूनिट तक पहुंच सकती है। दुनिया के सबसे रईस शख्स इलॉन मस्क का कहना है कि उन्हें अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में चीनी कंपनियां नजर आती हैं, क्योंकि वह टेस्ला को एआई आधारित रोबोटिक्स की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा, “चीन को बाहर के लोग कम आंकते हैं, लेकिन चीन अगले स्तर का दमदार खिलाड़ी है।” बीजिंग के टेक विश्लेषक पो झाओ का कहना है कि रोबोट्स का मैराथन दौड़ना, कुंग-फू किक लगाना या बैकफ्लिप करना सिर्फ दिखावा नहीं है। इसके पीछे बड़ी रणनीति है। चीन ने रोबोटिक्स और एआई को अपनी अगली पीढ़ी की “AI+ मैन्युफैक्चरिंग” योजना के केंद्र में रखा है। सरकार को उम्मीद है कि मशीनों के ज्यादा इस्तेमाल से फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा और देश की बूढ़ी होती आबादी से पड़ने वाला दबाव कम होगा। रोबोट के विकास से लोगों की चिंता बढ़ी AI पॉलिसी एक्सपर्ट रमेश श्रीनिवासन ने अल जजीरा से कहा कि यह प्रदर्शन दिखाता है कि चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय में इन रोबोट्स का इस्तेमाल उद्योग और खेती जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन की आबादी लगातार घट रही है। इन घटनाओं ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट के रूप में हमारे बीच आएगा, तो इसका असर आम कामगार लोगों की नौकरी और कमाई पर क्या होगा? अगर ऐसे रोबोट युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने लगे तो क्या स्थिति बनेगी? श्रीनिवासन का कहना है कि यह तकनीक हमारे भविष्य को आर्थिक, सैन्य और निजी जीवन के स्तर पर बदल देगी। लोग रोबोट और एआई को थेरेपिस्ट, साथी और यहां तक कि संभावित जीवनसाथी के रूप में भी अपनाने लग सकते हैं। उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि क्या हम सच में ऐसा भविष्य चाहते हैं? और ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में सही है और किन क्षेत्रों में नहीं होना चाहिए? उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ ऐसा संतुलन बनाना होगा जिससे भविष्य बेहतर हो। सबसे जरूरी है कि लोग खुद को सुरक्षित महसूस करें, क्योंकि खासकर अमेरिका में AI लोगों को एक-दूसरे से दूर कर रहा है और इस बारे में साफ रिसर्च भी सामने आ रहे हैं।

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चीनी रोबोट्स का इंसानों जैसा डांस वायरल:बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स भी किया, एक्सपर्ट्स बोले-चीन ने रोबोटिक्स में अमेरिका को पछाड़ा

चीनी रोबोट्स का इंसानों जैसा डांस वायरल:बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स भी किया, एक्सपर्ट्स बोले-चीन ने रोबोटिक्स में अमेरिका को पछाड़ा

चीन ने सोमवार को दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई। एक कार्यक्रम में इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मार्शल आर्ट्स और डांस किया। करीब 25 रोबोट्स बच्चों के साथ तलवार भांजते, बैकलिफ्ट करते और डंडे घुमाते हुए डांस करते दिखाई दिए। खास बात यह रही कि एक भी रोबोट गिरा नहीं। यह प्रदर्शन देख दुनिया हैरान रह गई। कई लोगों के मन में सवाल उठा कि अगर रोबोट अब नाच सकते हैं और कुंग फू कर सकते हैं, तो वे और क्या कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले बिल्कुल अलग था। पिछले साल रोबोट्स सिर्फ रुमाल घुमाते और साधारण हरकतें करते नजर आए थे। लेकिन एक साल में सबकुछ बदल चुका है। चीन दुनिया को खासकर अमेरिका को दिखाना चाहता है कि वह तकनीक में बहुत आगे निकल चुका है। टेक्नोलॉजी का शोकेस है गाला, रोबोट कंपनियों को फायदा एशिया में टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी कंपनी के प्रमुख जॉर्ज स्टीलर ने कहा कि जिस गाला में इन रोबोट्स ने प्रदर्शन किया, वह कई सालों से चीन की तकनीकी ताकत दिखाने का बड़ा मंच रहा है। इसी मंच पर चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम, ड्रोन और रोबोट जैसी नई तकनीकों को दुनिया के सामने पेश करता रहा है। उन्होंने कहा कि इस गाला की सबसे खास बात यह है कि यहां सरकार की औद्योगिक नीति और टीवी के बड़े शो के बीच सीधा संबंध दिखाई देता है। यानी जिन कंपनियों को इस मंच पर अपने प्रोडक्ट दिखाने का मौका मिलता है, उन्हें बाद में सरकारी ऑर्डर, निवेशकों की दिलचस्पी और बाजार में आसानी से एंट्री जैसे फायदे मिलते हैं। स्टीलर के मुताबिक सिर्फ एक साल में रोबोट्स की क्षमता में बड़ा बदलाव आया है। अब उनकी चाल-ढाल और मूवमेंट पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो गई है। इससे साफ है कि यूनिट्री जैसी कंपनियां रोबोट के ‘दिमाग’ यानी एआई सॉफ्टवेयर को मजबूत बनाने पर काम कर रही हैं, ताकि ये रोबोट भविष्य में फैक्ट्रियों में बारीक और असली काम भी कर सकें। दुनियाभर में 90% रोबोट्स चीन के रिसर्च फर्म ओम्डिया के अनुसार, पिछले साल दुनियाभर में भेजे गए लगभग 13 हजार ह्यूमनॉइड रोबोट्स में से 90 प्रतिशत चीन से थे। यह अमेरिकी कंपनियों से काफी आगे है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि इस साल चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट की बिक्री दोगुने से ज्यादा बढ़कर 28 हजार यूनिट तक पहुंच सकती है। दुनिया के सबसे रईस शख्स इलॉन मस्क का कहना है कि उन्हें अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में चीनी कंपनियां नजर आती हैं, क्योंकि वह टेस्ला को एआई आधारित रोबोटिक्स की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा, “चीन को बाहर के लोग कम आंकते हैं, लेकिन चीन अगले स्तर का दमदार खिलाड़ी है।” बीजिंग के टेक विश्लेषक पो झाओ का कहना है कि रोबोट्स का मैराथन दौड़ना, कुंग-फू किक लगाना या बैकफ्लिप करना सिर्फ दिखावा नहीं है। इसके पीछे बड़ी रणनीति है। चीन ने रोबोटिक्स और एआई को अपनी अगली पीढ़ी की “AI+ मैन्युफैक्चरिंग” योजना के केंद्र में रखा है। सरकार को उम्मीद है कि मशीनों के ज्यादा इस्तेमाल से फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा और देश की बूढ़ी होती आबादी से पड़ने वाला दबाव कम होगा। रोबोट के विकास से लोगों की चिंता बढ़ी AI पॉलिसी एक्सपर्ट रमेश श्रीनिवासन ने अल जजीरा से कहा कि यह प्रदर्शन दिखाता है कि चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय में इन रोबोट्स का इस्तेमाल उद्योग और खेती जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन की आबादी लगातार घट रही है। इन घटनाओं ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट के रूप में हमारे बीच आएगा, तो इसका असर आम कामगार लोगों की नौकरी और कमाई पर क्या होगा? अगर ऐसे रोबोट युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने लगे तो क्या स्थिति बनेगी? श्रीनिवासन का कहना है कि यह तकनीक हमारे भविष्य को आर्थिक, सैन्य और निजी जीवन के स्तर पर बदल देगी। लोग रोबोट और एआई को थेरेपिस्ट, साथी और यहां तक कि संभावित जीवनसाथी के रूप में भी अपनाने लग सकते हैं। उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि क्या हम सच में ऐसा भविष्य चाहते हैं? और ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में सही है और किन क्षेत्रों में नहीं होना चाहिए? उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ ऐसा संतुलन बनाना होगा जिससे भविष्य बेहतर हो। सबसे जरूरी है कि लोग खुद को सुरक्षित महसूस करें, क्योंकि खासकर अमेरिका में AI लोगों को एक-दूसरे से दूर कर रहा है और इस बारे में साफ रिसर्च भी सामने आ रहे हैं।

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