Thursday, 07 May 2026 | 06:07 PM

Trending :

China Ex-Defense Ministers Wei Fenghe & Li Shangfu Death Sentence फ्लोर टेस्ट या राज्यपाल का बुलावा? गोवा से लेकर कर्नाटक तक के पिछले मामले तमिलनाडु में कैसे गतिरोध पैदा करते हैं | भारत समाचार एकनाथ शिंदे का हेलिकॉप्टर आंधी में फंसा:शादी समारोह में जा रहे थे, पायलट रास्ते से लौटा; जुहू हेलीपैड पर सेफ लैंडिंग चावल के पानी का उपयोग करके कोरियाई ग्लास त्वचा: चेहरे पर चावल के पानी के साथ ये चीजें, गर्मी में कोरियाई की तरह का ग्लास सा चमकेगा चेहरा किडनी डिटॉक्स के नाम पर कहीं आप ‘काला जहर’ तो नहीं पी रहे? FSSAI की रेड में हुआ खौफनाक खुलासा म्यांमार सीमा से आए उग्रवादियों ने मणिपुर में घर जलाए:सुबह 4 बजे हमला, लोग जान बचाकर जंगलों में भागे, महिला समेत दो लापता
EXCLUSIVE

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact
  • Hindi News
  • National
  • SC On Religious Practices: Hundreds Of Cases, Societal Impact | Sabarimala

नई दिल्ली23 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को संवैधानिक अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और सभ्यता पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे।

यह टिप्पणी नौ जजों की संविधान पीठ ने की, जो अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे और महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इसमें केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय का केस भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 साल पुरानी जनहित याचिका (PIL) की वैधता पर सवाल उठाए थे।

7 सवाल, जिन पर बहस हो रही…

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर हर व्यक्ति धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाएगा, तो भारतीय समाज पर असर पड़ेगा, क्योंकि यहां धर्म समाज से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा, हर अधिकार पर सवाल उठेंगे-मंदिर खुलने या बंद होने तक के मामले कोर्ट में आएंगे।

जस्टिस एम एम सुन्द्रेश ने कहा कि अगर ऐसे विवादों को लगातार अनुमति दी गई, तो हर व्यक्ति हर चीज पर सवाल उठाएगा। उन्होंने कहा कि इससे धर्म टूट सकते हैं और संवैधानिक अदालतों पर भी असर पड़ेगा।

मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा

यह मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा है। समुदाय के केंद्रीय बोर्ड ने 1986 में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें 1962 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 रद्द कर दिया गया था। इस कानून के तहत किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना गैरकानूनी था।

1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना, समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(बी) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है।

धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं

सुधारवादी दाऊदी बोहरा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट में दलील दी कि अगर कोई प्रथा सामाजिक या निजी कारणों से जुड़ी है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोई भी प्रथा अगर मौलिक अधिकारों पर नकारात्मक असर डालती है, तो उसे सीमित किया जा सकता है।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं-क्या यह समुदाय के भीतर होना चाहिए या राज्य या कोर्ट को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और सभ्यता से है, और धर्म इसमें एक स्थायी तत्व है। इसे तोड़ना सही नहीं होगा।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं

28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते

29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे

5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें

6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते

——————————————————————-

ये खबर भी पढ़ें:

सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
प्रफुल IPL डेब्यू ओवर में 3 विकेट वाले पहले बॉलर:वैभव शून्य पर आउट; संदीप-जुरेल टकराए, फ्लडलाइट्स बंद हुईं; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

April 14, 2026/
4:30 am

सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL के 21वें मैच में राजस्थान रॉयल्स को 57 रन से हराया। राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में...

"जल सरंचना के फोटो वास्तविक हो, एआई फोटो ना लगाएं":खंडवा कलेक्टर के पंचायत सचिवों को निर्देश, पहले फर्जीवाड़ा आया था सामने

April 6, 2026/
7:51 pm

खंडवा जिले में जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे जल संचय, जन भागीदारी अभियान-2.0...

हिमाचल में अगले 4 दिन गर्मी का प्रकोप:तापमान 4°C तक बढ़ेगा, रातें भी गर्म होंगी; 12 शहरों में पारा 30°C के पार

April 21, 2026/
5:05 am

हिमाचल प्रदेश में अगले चार दिनों के दौरान गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 21 से 24...

श्मशान की राशि से सरपंचों लगवाई स्ट्रीट लाइट:19 पंचायतों के कामों की होगी जांच, इंजीनियर उतरेंगे मैदान में

April 5, 2026/
9:06 am

उमरिया जिले की 19 ग्राम पंचायतों में कुल 543 एलईडी स्ट्रीट लाइटों के नियम विरुद्ध लगाए जाने की शिकायतों के...

केरल चुनाव 2026: 'केरल में त्रिकोणीय हो सकता है मुकाबला', सीपीआई नेता का विश्वासनामा, बीजेपी को लेकर कर दी ये भविष्यवाणी

March 22, 2026/
4:45 pm

इस बार केरल में विधानसभा चुनाव के दौरान त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। सी. सर्वेक्षण नेता हन्नान मोल्लाह...

Hours after the press conference, Chadha, Pathak and Mittal went to the BJP headquarters in New Delhi and joined the ruling party.

April 25, 2026/
10:12 am

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 10:12 IST अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती विधायकों को पाला बदलने...

Swiggy Co-founder Resigns | Lakshmi Nandan Reddy Steps Down

April 10, 2026/
10:05 pm

नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक फूड और ग्रोसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी के को-फाउंडर लक्ष्मी नंदन रेड्डी ओबुल ने कंपनी...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact
  • Hindi News
  • National
  • SC On Religious Practices: Hundreds Of Cases, Societal Impact | Sabarimala

नई दिल्ली23 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को संवैधानिक अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और सभ्यता पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे।

यह टिप्पणी नौ जजों की संविधान पीठ ने की, जो अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे और महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इसमें केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय का केस भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 साल पुरानी जनहित याचिका (PIL) की वैधता पर सवाल उठाए थे।

7 सवाल, जिन पर बहस हो रही…

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर हर व्यक्ति धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाएगा, तो भारतीय समाज पर असर पड़ेगा, क्योंकि यहां धर्म समाज से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा, हर अधिकार पर सवाल उठेंगे-मंदिर खुलने या बंद होने तक के मामले कोर्ट में आएंगे।

जस्टिस एम एम सुन्द्रेश ने कहा कि अगर ऐसे विवादों को लगातार अनुमति दी गई, तो हर व्यक्ति हर चीज पर सवाल उठाएगा। उन्होंने कहा कि इससे धर्म टूट सकते हैं और संवैधानिक अदालतों पर भी असर पड़ेगा।

मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा

यह मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा है। समुदाय के केंद्रीय बोर्ड ने 1986 में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें 1962 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 रद्द कर दिया गया था। इस कानून के तहत किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना गैरकानूनी था।

1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना, समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(बी) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है।

धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं

सुधारवादी दाऊदी बोहरा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट में दलील दी कि अगर कोई प्रथा सामाजिक या निजी कारणों से जुड़ी है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोई भी प्रथा अगर मौलिक अधिकारों पर नकारात्मक असर डालती है, तो उसे सीमित किया जा सकता है।

इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं-क्या यह समुदाय के भीतर होना चाहिए या राज्य या कोर्ट को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और सभ्यता से है, और धर्म इसमें एक स्थायी तत्व है। इसे तोड़ना सही नहीं होगा।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं

28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते

29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे

5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें

6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते

——————————————————————-

ये खबर भी पढ़ें:

सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.