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हर घंटे पानी पीना पड़ सकता है भारी! डॉक्टर ने बताया वजन के हिसाब से आपके लिए कितना पानी जरूरी

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पटना: गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए ज्यादा पानी पीने की सलाह आम बात है, लेकिन हर समय पानी पीते रहना भी सेहत के लिए सही नहीं माना जाता. कई लोग बिना प्यास लगे भी बार-बार पानी पीते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को लगातार पानी पीने की तीव्र इच्छा होती है, तो यह केवल आदत नहीं बल्कि एक मानसिक समस्या भी हो सकती है.

जिसे साइकोजेनिक पॉलीडिप्सिया कहा जाता है. कई मामलों में यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज की तबीयत बिगड़ने लगती है. इस विषय को आसान भाषा में समझने के लिए लोकल 18 ने पटना के जय प्रभा मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नीरज भारती से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि शरीर को वास्तव में कितने पानी की जरूरत होती है और जरूरत से ज्यादा पानी पीने के क्या नुकसान हो सकते हैं.

जीवन में पानी बेहद जरूरी 
पटना के जय प्रभा मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नीरज भारती बताते हैं कि पानी को जीवन कहा जाता है और यह बात पूरी तरह सही भी है. शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है. भोजन पचाने, शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में पानी अहम भूमिका निभाता है.

उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत अलग हो सकती है. मौसम, शारीरिक गतिविधि और किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी की मात्रा तय की जाती है. सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना अपने वजन के हिसाब से करीब 30 से 35 एमएल प्रति किलो पानी लेना चाहिए. औसतन यह मात्रा 7 से 8 गिलास या करीब 1.5 से 2 लीटर तक हो सकती है. इसमें सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि जूस, छाछ, दूध, चाय, लस्सी जैसे दूसरे पेय पदार्थ भी शामिल होते हैं.

इन मामलों में अधिक पानी पीना चाहिए 
डॉक्टर के मुताबिक कुछ परिस्थितियों में सामान्य से अधिक पानी पीना जरूरी भी हो जाता है. खासतौर पर किडनी स्टोन, डिहाइड्रेशन और कब्ज जैसी समस्याओं में मरीजों को ज्यादा पानी लेने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं या स्पोर्ट्स और दूसरी शारीरिक गतिविधियों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, उनके शरीर से पसीने के जरिए पानी तेजी से निकलता है. ऐसे में शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए जरूरत के अनुसार पानी की मात्रा बढ़ानी चाहिए.

ज्यादा पाने भी सेहत के लिए नुकसानदायक 
डॉक्टरों के अनुसार कई लोग यह मान लेते हैं कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर को उतना ही फायदा होगा. इसी सोच में कुछ लोग जरूरत से कहीं अधिक पानी पीने लगते हैं. मेडिकल भाषा में इस स्थिति को
साइकोजेनिक पॉलीडिप्सिया कहा जाता है. कई बार लोग दिनभर में 8 से 10 लीटर तक पानी पी लेते हैं. यह शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

डॉ. भारती का कहना है कि एक सीमा के बाद किडनी अतिरिक्त पानी को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती. इससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ने लगता है और सोडियम का स्तर तेजी से कम हो सकता है. इस स्थिति में पैरों समेत शरीर के कई हिस्सों में सूजन आने लगती है. गंभीर मामलों में मरीज की हालत बेहद खराब हो सकती है और समय पर इलाज न मिले तो जान का खतरा भी पैदा हो सकता है.

अक्सर अस्पताल पहुंचते हैं ऐसे मरीज 
डॉ. नीरज भारती ने बताया कि मेदांता पटना में भी ऐसे कई मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनके शरीर में सोडियम का स्तर काफी कम हो जाता है. जांच और बातचीत के दौरान पता चलता है कि कई लोग दिनभर में 6 से 7 लीटर तक पानी पी रहे होते हैं. डॉक्टरों के अनुसार कई मामलों में सिर्फ पानी की मात्रा नियंत्रित करने से ही सोडियम का स्तर सामान्य होने लगता है. उन्होंने कहा कि शरीर के लिए पानी बेहद जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए सही मात्रा में पानी लेना ही सबसे बेहतर तरीका है.

इन मामलों में कम पानी लें
हर व्यक्ति के लिए ज्यादा पानी पीना सही नहीं होता. कुछ बीमारियों में डॉक्टर मरीजों को पानी की मात्रा सीमित करने की सलाह भी देते हैं. खासतौर पर हार्ट डिजीज, लीवर की बीमारी और एडवांस स्टेज की किडनी बीमारी से जूझ रहे मरीजों को नियंत्रित मात्रा में ही पानी लेने को कहा जाता है. कई बार मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर रोजाना सिर्फ 800 एमएल से 1 लीटर तक ही तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी है, तो उसे अपनी मर्जी से पानी की मात्रा तय नहीं करनी चाहिए. डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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जिसे साइकोजेनिक पॉलीडिप्सिया कहा जाता है. कई मामलों में यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि मरीज की तबीयत बिगड़ने लगती है. इस विषय को आसान भाषा में समझने के लिए लोकल 18 ने पटना के जय प्रभा मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नीरज भारती से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि शरीर को वास्तव में कितने पानी की जरूरत होती है और जरूरत से ज्यादा पानी पीने के क्या नुकसान हो सकते हैं.

जीवन में पानी बेहद जरूरी 
पटना के जय प्रभा मेदांता अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. नीरज भारती बताते हैं कि पानी को जीवन कहा जाता है और यह बात पूरी तरह सही भी है. शरीर को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है. भोजन पचाने, शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में पानी अहम भूमिका निभाता है.

उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत अलग हो सकती है. मौसम, शारीरिक गतिविधि और किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी की मात्रा तय की जाती है. सामान्य तौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति को रोजाना अपने वजन के हिसाब से करीब 30 से 35 एमएल प्रति किलो पानी लेना चाहिए. औसतन यह मात्रा 7 से 8 गिलास या करीब 1.5 से 2 लीटर तक हो सकती है. इसमें सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि जूस, छाछ, दूध, चाय, लस्सी जैसे दूसरे पेय पदार्थ भी शामिल होते हैं.

इन मामलों में अधिक पानी पीना चाहिए 
डॉक्टर के मुताबिक कुछ परिस्थितियों में सामान्य से अधिक पानी पीना जरूरी भी हो जाता है. खासतौर पर किडनी स्टोन, डिहाइड्रेशन और कब्ज जैसी समस्याओं में मरीजों को ज्यादा पानी लेने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं या स्पोर्ट्स और दूसरी शारीरिक गतिविधियों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं, उनके शरीर से पसीने के जरिए पानी तेजी से निकलता है. ऐसे में शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए जरूरत के अनुसार पानी की मात्रा बढ़ानी चाहिए.

ज्यादा पाने भी सेहत के लिए नुकसानदायक 
डॉक्टरों के अनुसार कई लोग यह मान लेते हैं कि जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर को उतना ही फायदा होगा. इसी सोच में कुछ लोग जरूरत से कहीं अधिक पानी पीने लगते हैं. मेडिकल भाषा में इस स्थिति को
साइकोजेनिक पॉलीडिप्सिया कहा जाता है. कई बार लोग दिनभर में 8 से 10 लीटर तक पानी पी लेते हैं. यह शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

डॉ. भारती का कहना है कि एक सीमा के बाद किडनी अतिरिक्त पानी को सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती. इससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ने लगता है और सोडियम का स्तर तेजी से कम हो सकता है. इस स्थिति में पैरों समेत शरीर के कई हिस्सों में सूजन आने लगती है. गंभीर मामलों में मरीज की हालत बेहद खराब हो सकती है और समय पर इलाज न मिले तो जान का खतरा भी पैदा हो सकता है.

अक्सर अस्पताल पहुंचते हैं ऐसे मरीज 
डॉ. नीरज भारती ने बताया कि मेदांता पटना में भी ऐसे कई मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनके शरीर में सोडियम का स्तर काफी कम हो जाता है. जांच और बातचीत के दौरान पता चलता है कि कई लोग दिनभर में 6 से 7 लीटर तक पानी पी रहे होते हैं. डॉक्टरों के अनुसार कई मामलों में सिर्फ पानी की मात्रा नियंत्रित करने से ही सोडियम का स्तर सामान्य होने लगता है. उन्होंने कहा कि शरीर के लिए पानी बेहद जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए सही मात्रा में पानी लेना ही सबसे बेहतर तरीका है.

इन मामलों में कम पानी लें
हर व्यक्ति के लिए ज्यादा पानी पीना सही नहीं होता. कुछ बीमारियों में डॉक्टर मरीजों को पानी की मात्रा सीमित करने की सलाह भी देते हैं. खासतौर पर हार्ट डिजीज, लीवर की बीमारी और एडवांस स्टेज की किडनी बीमारी से जूझ रहे मरीजों को नियंत्रित मात्रा में ही पानी लेने को कहा जाता है. कई बार मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर रोजाना सिर्फ 800 एमएल से 1 लीटर तक ही तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी है, तो उसे अपनी मर्जी से पानी की मात्रा तय नहीं करनी चाहिए. डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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