नई दिल्ली. रोहिणी सेक्टर-32 की उस सुनसान सड़क पर सोमवार की रात मौत बिछी हुई थी, लेकिन बिरजू को इसका अंदाजा नहीं था. हाथ में हाथ डाले दो दोस्त नशे की खुमारी में अपनी झुग्गी की ओर बढ़ रहे थे, तभी अचानक एक चीख गूंजी और बिरजू काली अंधेरी सुरंग जैसे खुले मैनहोल में समा गया. हैरानी और सिहरन पैदा करने वाली बात यह है कि उसका दोस्त इतना नशे में था कि उसे अपने साथ चल रहे साथी के गायब होने का अहसास तक नहीं हुआ. बिरजू अंदर दम घुटने और गंदे पानी के बीच जिंदगी की आखिरी जंग लड़ रहा था.
जब अगले दिन सूरज की तपिश के साथ साथी का नशा उतरा, तब उसे याद आया कि बिरजू तो कल रात उसके साथ था. दोपहर के ढाई बज चुके थे यानी पूरे 19 घंटे बीत चुके थे. जब प्रशासन तक खबर पहुंची और रेस्क्यू शुरू हुआ, तो बाहर सिर्फ बिरजू की लाश निकली. समस्तीपुर का वह मजदूर जो अपनों का पेट पालने दिल्ली आया था, एक दोस्त की बेहोशी और प्रशासन की लापरवाही के बीच तड़प-तड़पकर खामोश हो गया. पीछे छूट गए तीन मासूम बच्चे और एक बूढ़ी मां, जिनके लिए दिल्ली अब सिर्फ एक ‘डेथ ट्रैप’ बनकर रह गई है.
देश की राजधानी में प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर एक गरीब मजदूर के लिए काल बन गई. रोहिणी सेक्टर-32 स्थित महाशक्ति काली मंदिर के पास डीडीए (DDA) की खाली जमीन पर बिना ढक्कन के खुले पड़े एक गहरे मैनहोल ने 32 वर्षीय बिरजू कुमार राय की जान ले ली. सोमवार रात करीब 7:30 बजे बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला बिरजू अपने दोस्त के साथ झुग्गी लौट रहा था, तभी अंधेरे में संतुलन बिगड़ने के कारण वह सीधे मौत के इस जाल में समा गया. हैरानी की बात यह है कि बिरजू का साथी नशे में होने के कारण रात भर चुप रहा और अगले दिन दोपहर में होश आने पर पुलिस को सूचना दी गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी देरी हुई.
इस हादसे ने दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम और संबंधित विभागों की गंभीर अनदेखी को उजागर कर दिया है. स्थानीय लोगों और चश्मदीदों का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी प्रशासन घंटों सुस्त बना रहा और सक्रियता तभी आई जब 112 पर दोबारा कॉल की गई. मृतक बिरजू अपने पीछे बूढ़ी मां और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं, इस घटना पर सियासत भी गरमा गई है.
चश्मदीद बोला- खुला था ढक्कन
एक युवक ने बताया, ‘मैंने काल की थी, मुझे पता चला यहां कोई गिर गया है, पुलिस ने किसी डिपार्टमेंट को इंटीमेशन नहीं दिया था, ना फायर को किया था, मैने आकर 112 पर काल करी, मैने यहां जो अधिकारी थे उनके वीडियो बना रखी है, जो यहां पर चल रहा था, ये आदमी कल से इस गडडे मे गिरा हुआ था, 4 बजे इसके साथियो ने बताया पुलिस को, 4 बजे से 7 बजे तक कुछ नही हुआ, मेरे काल के बाद सारा प्रशासन यहां आता है और कार्रवाई होती है, वो 30-32 साल का है, बाडी रिकवर हुई है. उसका नाम है ब्रिजु कुमार है, उम्र 32 साल है, बिहार समस्तीपुर के है, लंच मे पता लगा है, ढक्कन खुला था वो बंदा रात मे गिर गया, लंच के समय मे मुझे पता चला, प्रशासन को इंफोर्म किया, परिवार मे उसकी मां है, तीन बच्चे है. वो ढक्कन खुला था, रात मे गिर गया, यही पता लगा, लंच के समय मे पता चला, हम सब आये प्रसासन को इंफोर्म किये, परिवार मे उसकी मां है, तीन बच्चे है.’
एडवोकेट तेजपाल यादव ने बताया कि मैने काल की थी, मुझे पता चला यहां कोई गिर गया है, पुलिस ने किसी डिपार्टमेंट को इंटीमेशन नहीं दिया था, ना फायर को किया था, मैने आकर 112 पर काल करी, मैने यहां जो अधिकारी थे उनके वीडियो बना रखी है, जो यहां पर चल रहा था, ये आदमी कल से इस गडडे मे गिरा हुआ था, 4 बजे इसके साथियो ने बताया पुलिस को, 4 बजे से 7 बजे तक कुछ नही हुआ, मेरे काल के बाद सारा प्रशासन यहां आता है, और कार्रवाई होती है, वो 30-32 साल का है, बाडी रिकवर हुई है.
सुनील कुमार- उसका नाम है बिरजू कुमार है, उम्र 32 साल है, बिहार समस्तीपुर के है, लंच मे पता लगा है, ढक्कन खुला था वो बंदा रात मे गिर गया, लंच के समय मे मुझे पता चला, हम सब आये प्रशासन को इंफोर्म किया, परिवार मे उसकी मां है, तीन बच्चे है.
सौरभ भारद्वाज ने रेखा सरकार पर उठाए सवाल
विपक्ष के नेता सौरभ भारद्वाज ने इसे सरकार का ‘सर्कस’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि दो आदमी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 32 में सड़क पर जा रहे थे, चलते चलते उनके से एक गड्ढे में गिरा. जहां गिरा वो गड्ढ़ा एक गेहरा नाला था. लाश भी नहीं मिली. रेखा गुप्ता की सरकार सिर्फ़ फोटोबाज़ी और भाषणबाज़ी की नकारा सरकार है. इनको सरकार नहीं चलानी सिर्फ़ सर्कस चलाना है. फिलहाल बेगमपुर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है कि इस खुले मैनहोल की जिम्मेदारी किस विभाग की थी.
सवालों के घेरे में व्यवस्था: कैसे हुई बिरजू की मौत?
रोहिणी सेक्टर-32 में यह हादसा कब और किन परिस्थितियों में हुआ?
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा सोमवार (9 फरवरी) रात करीब 7:30 बजे हुआ. बिरजू कुमार राय (32) और उसका दोस्त बुधन दास काम खत्म कर अपनी झुग्गी की ओर लौट रहे थे. रास्ते में डीडीए की जमीन पर एक गहरा मैनहोल बिना ढक्कन के खुला पड़ा था. अंधेरे के कारण बिरजू का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे उस गहरे सीवर में जा गिरा.
हादसे की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने में इतनी देरी क्यों हुई?
बिरजू का साथी बुधन दास उस समय नशे की हालत में था. बिरजू के गिरने के बाद उसने रात में किसी को सूचना नहीं दी. अगले दिन 10 फरवरी को दोपहर में जब उसे होश आया, तब उसने अपने मित्र आमिर हुसैन को इसकी जानकारी दी. आमिर ने दोपहर 2:36 बजे पुलिस को कॉल कर घटना की आशंका जताई.
क्या पुलिस और बचाव दल की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन में लापरवाही बरती गई?
मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी प्रशासन घंटों सुस्त रहा. चश्मदीदों का दावा है कि शाम 4 बजे से 7 बजे तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. जब स्थानीय स्तर पर फिर से 112 पर कॉल की गई और वीडियो बनाए गए, तब जाकर फायर ब्रिगेड और अन्य एजेंसियां सक्रिय हुईं और शव को बाहर निकाला गया.
मृतक बिरजू कुमार के परिवार की स्थिति क्या है और वह कहां का रहने वाला था?
बिरजू कुमार राय बिहार के समस्तीपुर (सादीपुर) का रहने वाला था. वह दिल्ली में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था. उसके पीछे बूढ़ी मां और तीन छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है. परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस मौत के लिए सीधे तौर पर प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
इस घटना में अब तक क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?
बेगमपुर पुलिस ने पीड़ित को अस्पताल भेजा जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया. पुलिस ने घटना स्थल की जांच की है और डीडीए (DDA) के संबंधित विभाग से जवाब मांगा जा रहा है. मामले की जांच इस एंगल से भी की जा रही है कि खुले मैनहोल को ढकने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी.














































