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चारधाम यात्रा में 25 दिनों में 40 श्रद्धालुओं की मौत:केदारनाथ में सबसे ज्यादा 22 की जान गई; बद्रीनाथ में 7, गंगोत्री-यमुनोत्री में भी बढ़ा आंकड़ा

चारधाम यात्रा में 25 दिनों में 40 श्रद्धालुओं की मौत:केदारनाथ में सबसे ज्यादा 22 की जान गई; बद्रीनाथ में 7, गंगोत्री-यमुनोत्री में भी बढ़ा आंकड़ा

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार रिकॉर्ड बना रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में 13 मई तक 12 लाख 64 हजार 217 श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन दूसरी ओर यात्रा के दौरान मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की 14 मई सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार अब तक चारधाम यात्रा में 40 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 22 मौतें केदारनाथ धाम में दर्ज की गई हैं। वहीं बद्रीनाथ में 7, यमुनोत्री में 6 और गंगोत्री में 5 श्रद्धालुओं की जान गई है। सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल तैयारियों का दावा कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ते मौत के आंकड़े यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य चुनौतियों और हाई एल्टीट्यूड से जुड़ी परेशानियों की गंभीरता भी दिखा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और अन्य स्वास्थ्य कारणों से हुई हैं। मौतों के पीछे हाई एल्टीट्यूड, हार्ट अटैक और पुरानी बीमारियां स्वास्थ्य विभाग के अनुसार चारधाम यात्रा में अब तक हुई अधिकांश मौतें स्वास्थ्य खराब होने, हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं के कारण हुई हैं। यात्रा मार्ग ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होने और लगातार चढ़ाई की वजह से बुजुर्गों और पहले से बीमार यात्रियों की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। यात्रा से पहले जारी की गई थी एडवाइजरी चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सरकार ने कई समीक्षा बैठकें की थीं। सभी विभागों को यात्रा शुरू होने से पहले तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार का दावा है कि यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यात्रियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई थी, जिसमें बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी गई थी। स्वास्थ्य मंत्री ने भी यात्रियों से सावधानी बरतने और शरीर में परेशानी होने पर तुरंत रुकने की अपील की है। स्वास्थ्य मंत्री बोले- अति उत्साह भारी पड़ रहा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई यात्री शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। इससे हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड की समस्या बढ़ जाती है। 47 अस्पताल और 400 डॉक्टर तैनात स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार यात्रा मार्ग पर 47 अस्पताल बनाए गए हैं। इसके अलावा करीब 2820 स्वास्थ्य कर्मियों और 400 डॉक्टरों को अलग-अलग पड़ावों पर तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि पहली बार दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 180 डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और शुगर मरीजों के उपचार की ट्रेनिंग दी गई है। बद्रीनाथ और केदारनाथ में अस्पताल शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है। ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी सरकार अब यात्रा मार्ग पर डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर बनाने की तैयारी में भी जुट गई है। दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा कौड़ियाला समेत यात्रा मार्ग के अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना है ताकि दुर्घटना या स्वास्थ्य आपात स्थिति में “गोल्डन ऑवर” के भीतर इलाज मिल सके और जान बचाई जा सके।

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