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Putin to visit India for BRICS Summit from September 12 to 13

Putin to visit India for BRICS Summit from September 12 to 13

नई दिल्ली4 मिनट पहले

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। पीएम मोदी ने उनका आधिकारिक आवास पर स्वागत किया था।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर में भारत दौरे पर आएंगे। रूसी सरकार ने मंगलवार को कहा कि पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में हिस्सा लेंगे।

PM मोदी ने पुतिन को दिसंबर 2025 में उनके भारत दौरे के दौरान आधिकारिक तौर पर समिट में शामिल होने का न्योता दिया था।

एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

2025 का दौरा इसलिए भी खास माना गया था क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा था। इससे पहले वह आखिरी बार 2021 में नई दिल्ली आए थे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। उसी दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पालम हवाई अड्डे से एक ही टोयोटा एसयूवी में पीएम आवास के लिए रवाना हुए थे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। उसी दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पालम हवाई अड्डे से एक ही टोयोटा एसयूवी में पीएम आवास के लिए रवाना हुए थे।

BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत

इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान पूरे साल देश के अलग-अलग शहरों में कई बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कार्यकारी समूहों की चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।

भारत ने अपनी अध्यक्षता का फोकस ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर रखा है। भारत यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि BRICS सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से जुड़ा बड़ा आर्थिक समूह भी बन सकता है।

इस महीने की शुरुआत में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी भारत आए थे। उन्होंने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव, वैश्विक सुरक्षा, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने बैठक के दौरान यह भी कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में ग्लोबल साउथ देशों के बीच सहयोग और ज्यादा जरूरी हो गया है।

भारत की अध्यक्षता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इस समय दुनिया कई बड़े संकटों से गुजर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच BRICS खुद को पश्चिमी देशों के प्रभाव के मुकाबले एक वैकल्पिक मंच के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

PM मोदी भी इसी साल रूस जाएंगे

इससे पहले भारत दौरे पर आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 15 मई को कहा था कि वे PM मोदी की रूस यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोदी ने रूस आने की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कई अन्य क्षेत्रों में मजबूत सहयोग जारी है और रूस चाहता है कि यह साझेदारी आगे भी तेजी से मजबूत होती रहे।

उनके बयान से माना जा रहा है कि मोदी इस साल भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस जा सकते हैं। हालांकि अभी तक यात्रा की आधिकारिक तारीख या कार्यक्रम का औपचारिक एलान नहीं हुआ है।

भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन ज्यादातर अक्टूबर, नवंबर या दिसंबर में आयोजित होता है। पिछले कई सालों में यह अधिकतर साल के आखिरी महीनों में हुआ है। इसलिए इस बार भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा और शिखर सम्मेलन साल के आखिरी महीनों में हो सकता है।

भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आमतौर पर हर साल आयोजित होता है। इसकी शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इसके बाद से दोनों देशों के नेता लगभग हर साल बारी-बारी से भारत और रूस में इस समिट में हिस्सा लेते रहे हैं।

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन आमने-सामने बातचीत करते हैं। इसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है।

पिछले साल दिसंबर में भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन को PM मोदी भगवत गीता भेंट की थी।

पिछले साल दिसंबर में भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन को PM मोदी भगवत गीता भेंट की थी।

भारत-रूस के बीच दिसंबर 2025 में हुए अहम समझौते

ऊर्जा सहयोग:रूस ने भरोसा दिलाया कि वह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लगातार और बिना रुकावट ईंधन की सप्लाई करता रहेगा।

उद्योगिक साझेदारी:भारतीय कंपनियों ने रूस की URALCHEM के साथ एक यूरिया प्लांट रूस में ही स्थापित करने का समझौता किया।

फूड सेफ्टी:भारत की FSSAI और रूस की उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसी के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों को मजबूत करने के लिए औपचारिक समझौते हुए।

हेल्थकेयर सहयोग:मेडिकल रिसर्च और हेल्थ सर्विस में सहयोग बढ़ाने के लिए कई MoU साइन किए गए।

समुद्री लॉजिस्टिक्स:बंदरगाह और शिपिंग ऑपरेशन में भारत-रूस के सहयोग को बढ़ाने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर हुए।

माइग्रेशन और मोबिलिटी:दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और माइग्रेशन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए समझौते किए।

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यह खबर भी पढ़ें…

PM मोदी डेनमार्क, आइसलैंड, फिनलैंड के प्रधानमंत्रियों से मिले:कुछ देर में इंडिया-नॉर्डिक समिट, ग्रीन एनर्जी और स्पेस सेक्टर पर बातचीत होगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट से पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा मानी जा रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। पीएम मोदी ने उनका आधिकारिक आवास पर स्वागत किया था।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर में भारत दौरे पर आएंगे। रूसी सरकार ने मंगलवार को कहा कि पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में हिस्सा लेंगे।

PM मोदी ने पुतिन को दिसंबर 2025 में उनके भारत दौरे के दौरान आधिकारिक तौर पर समिट में शामिल होने का न्योता दिया था।

एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

2025 का दौरा इसलिए भी खास माना गया था क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा था। इससे पहले वह आखिरी बार 2021 में नई दिल्ली आए थे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। उसी दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पालम हवाई अड्डे से एक ही टोयोटा एसयूवी में पीएम आवास के लिए रवाना हुए थे।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। उसी दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पालम हवाई अड्डे से एक ही टोयोटा एसयूवी में पीएम आवास के लिए रवाना हुए थे।

BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत

इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान पूरे साल देश के अलग-अलग शहरों में कई बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कार्यकारी समूहों की चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।

भारत ने अपनी अध्यक्षता का फोकस ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर रखा है। भारत यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि BRICS सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से जुड़ा बड़ा आर्थिक समूह भी बन सकता है।

इस महीने की शुरुआत में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी भारत आए थे। उन्होंने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव, वैश्विक सुरक्षा, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने बैठक के दौरान यह भी कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में ग्लोबल साउथ देशों के बीच सहयोग और ज्यादा जरूरी हो गया है।

भारत की अध्यक्षता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इस समय दुनिया कई बड़े संकटों से गुजर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच BRICS खुद को पश्चिमी देशों के प्रभाव के मुकाबले एक वैकल्पिक मंच के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

PM मोदी भी इसी साल रूस जाएंगे

इससे पहले भारत दौरे पर आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 15 मई को कहा था कि वे PM मोदी की रूस यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोदी ने रूस आने की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कई अन्य क्षेत्रों में मजबूत सहयोग जारी है और रूस चाहता है कि यह साझेदारी आगे भी तेजी से मजबूत होती रहे।

उनके बयान से माना जा रहा है कि मोदी इस साल भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस जा सकते हैं। हालांकि अभी तक यात्रा की आधिकारिक तारीख या कार्यक्रम का औपचारिक एलान नहीं हुआ है।

भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन ज्यादातर अक्टूबर, नवंबर या दिसंबर में आयोजित होता है। पिछले कई सालों में यह अधिकतर साल के आखिरी महीनों में हुआ है। इसलिए इस बार भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा और शिखर सम्मेलन साल के आखिरी महीनों में हो सकता है।

भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आमतौर पर हर साल आयोजित होता है। इसकी शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इसके बाद से दोनों देशों के नेता लगभग हर साल बारी-बारी से भारत और रूस में इस समिट में हिस्सा लेते रहे हैं।

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन आमने-सामने बातचीत करते हैं। इसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है।

पिछले साल दिसंबर में भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन को PM मोदी भगवत गीता भेंट की थी।

पिछले साल दिसंबर में भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन को PM मोदी भगवत गीता भेंट की थी।

भारत-रूस के बीच दिसंबर 2025 में हुए अहम समझौते

ऊर्जा सहयोग:रूस ने भरोसा दिलाया कि वह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लगातार और बिना रुकावट ईंधन की सप्लाई करता रहेगा।

उद्योगिक साझेदारी:भारतीय कंपनियों ने रूस की URALCHEM के साथ एक यूरिया प्लांट रूस में ही स्थापित करने का समझौता किया।

फूड सेफ्टी:भारत की FSSAI और रूस की उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसी के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों को मजबूत करने के लिए औपचारिक समझौते हुए।

हेल्थकेयर सहयोग:मेडिकल रिसर्च और हेल्थ सर्विस में सहयोग बढ़ाने के लिए कई MoU साइन किए गए।

समुद्री लॉजिस्टिक्स:बंदरगाह और शिपिंग ऑपरेशन में भारत-रूस के सहयोग को बढ़ाने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर हुए।

माइग्रेशन और मोबिलिटी:दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और माइग्रेशन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए समझौते किए।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट से पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा मानी जा रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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