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Ram Gopal Varma Supports Ranveer Singh, Slams FWICE

Ram Gopal Varma Supports Ranveer Singh, Slams FWICE

18 मिनट पहले

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‘डॉन 3’ विवाद के बीच फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा रणवीर सिंह के सपोर्ट में सामने आए हैं। साथ ही उन्होंने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा रणवीर के खिलाफ जारी ‘नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव’ (असहयोग निर्देश) पर भी सवाल उठाए।

राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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FWICE को बैन करो, रणवीर सिंह को नहीं। गांधीजी के अंदाज वाला यह तथाकथित बैन या असहयोग आखिरकार FWICE के लिए ही एक बड़ा मजाक बन जाएगा।FWICE जिस तरह इसे इंडस्ट्री या कर्मचारियों की सुरक्षा बता रहा है, असल में मामला वैसा नहीं है। यह एक पुरानी और बेकार यूनियन सिस्टम की ताकत दिखाने की कोशिश भर है, जो किसी तरह अपना प्रभाव बनाए रखना चाहती है।चाहे FWICE यह दावा करे कि वह 5 लाख या 50 लाख कर्मचारियों की आवाज है, लेकिन सच्चाई यह है कि उन लाखों लोगों में से ज्यादातर को दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद की असली जानकारी तक नहीं है।

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FWICE को बताया ‘कंगारू कोर्ट’

FWICE को ‘कंगारू कोर्ट’ बताते हुए राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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FWICE न तो कोई लीगल कोर्ट है और न ही सरकार से ऑथराइज्ड रेगुलेटरी बॉडी। ज्यादा से ज्यादा इसे एक ‘कंगारू कोर्ट’ कहा जा सकता है, यानी ऐसी व्यवस्था जो न्याय देने का दावा तो करती है, लेकिन वास्तव में कानूनी नियमों, फेयर प्रोसेस और न्यूट्रैलिटी को नजरअंदाज करती है।ऐसा इसलिए क्योंकि इसके फैसले अक्सर पहले से ही कुछ खास एजेंडा रखने वाले लोगों के एक प्राइवेट ग्रुप द्वारा तय कर लिए जाते हैं। इनमें ऐसे एक्टर भी शामिल हैं, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता से घबराए हुए हैं।उन्होंने आगे कहा कि यह FWICE के लिए एक बड़ा पीआर डिजास्टर साबित होगा, क्योंकि संगठन एक तरफ अपनी हताशा जाहिर कर रहा है और दूसरी तरफ अपनी पुरानी और अप्रासंगिक सोच भी दुनिया के सामने दिखा रहा है।

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राम गोपाल वर्मा की पोस्ट।

राम गोपाल वर्मा की पोस्ट।

वर्मा ने आगे लिखा,

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सबसे पहले, यह साबित करने के लिए कि यह दावा झूठा है, मैं कहना चाहता हूं कि फिल्म इंडस्ट्री में लाखों कर्मचारियों की रोजी-रोटी कभी भी किसी एक एक्टर या एक प्रोजेक्ट पर निर्भर नहीं होती। इसलिए सोशल मीडिया पर यह कहना कि किसी एक व्यक्ति की वजह से लाखों लोगों का नुकसान हो रहा है, लोगों को भड़काने और माहौल बनाने की कोशिश है।इस पूरे विवाद की जड़ में एक प्रोड्यूसर का यह दावा है कि उसे प्री-प्रोडक्शन में भारी नुकसान हुआ, लेकिन यह सिर्फ दो पक्षों के बीच का प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट विवाद है। ऐसे विवाद भारत में हर दिन और हर तरह के कारोबार में लाखों बार होते हैं। तब FWICE जैसी संस्थाएं कहां होती हैं?इसके अलावा, इस मामले में वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी सिर्फ विवाद में शामिल पक्षों को ही हो सकती है। इसलिए यह मामला भी किसी अन्य सिविल विवाद की तरह उन्हीं के बीच रहना चाहिए। अगर कोई पक्ष अदालत जाता है, तो फैसला जज को करना चाहिए।

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राम गोपाल वर्मा ने सत्या (1998), रंगीला (1995), कंपनी (2002), सरकार (2005) जैसी कल्ट फिल्में बनाई हैं।

राम गोपाल वर्मा ने सत्या (1998), रंगीला (1995), कंपनी (2002), सरकार (2005) जैसी कल्ट फिल्में बनाई हैं।

‘रणवीर के लिए प्रोड्यूसर्स की लाइन लग जाएगी’

FWICE को चैलेंज देते हुए राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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और अगर FWICE का दावा है कि कुछ प्रमुख टेक्नीशियन का समय और मेहनत बर्बाद हुई है, तो मैं उन्हें चैलेंज देता हूं कि वे व्यक्तिगत रूप से सामने आएं, सबूत पेश करें, सार्वजनिक रूप से रणवीर सिंह को जिम्मेदार ठहराएं और यह ऐलान करें कि वे भविष्य में उनकी किसी फिल्म में काम नहीं करेंगेऔर अगर उस प्रोड्यूसर के साथ वास्तव में इतना बड़ा अन्याय हुआ है, तो FWICE के लाखों कर्मचारियों को नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे प्रोड्यूसर्स को रणवीर सिंह के साथ काम करने से बचना चाहिए।

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फिल्ममेकर ने यह भी लिखा,

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यहीं पर हम इस पूरे मामले के सबसे अहम बिंदु पर पहुंचते हैं, जिसे हर कोई अपने दिल में जानता है, चाहे वह विवाद में शामिल कंपनी हो या फिर FWICE सच्चाई यह है कि अगर रणवीर सिंह सिर्फ एक बार हां कह दें, तो कल सुबह उनके घर के बाहर चेक लेकर प्रोड्यूसर्स की एक किलोमीटर लंबी कतार लग जाएगी। यह तब भी होगा, जब वे FWICE और संबंधित प्रोडक्शन कंपनी की सभी चेतावनियां सुन चुके होंगे

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पोस्ट में अंत में राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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क्योंकि कड़वी सच्चाई यह है कि थिएटरों में टिकट FWICE नहीं, बल्कि रणवीर सिंह जैसे स्टार बिकवाते हैं। FWICE नहीं, बल्कि रणवीर सिंह जैसे सितारे ही उन लाखों कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व करने का दावा FWICE करता है। असलियत यह है कि रणवीर सिंह जैसे स्टार हैं, तभी फिल्म इंडस्ट्री है, और उसी वजह से FWICE जैसी संस्थाएं भी मौजूद हैं।इसलिए अंत में मेरी बिना मांगी सलाह सभी संबंधित पक्षों के लिए यही है कि दो पक्षों के बीच चल रहे एक निजी सिविल विवाद में बेवजह दखल देने से बचना चाहिए।

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पद्मिनी कोल्हापुरे भी रणवीर के समर्थन में उतरीं

डॉन 3 विवाद के बीच, एक्ट्रेस और CINTAA की वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे रणवीर के सपोर्ट में आईं और भरोसा दिलाया है कि एसोसिएशन पूरी तरह से उनके साथ है।

IANS से बात करते हुए पद्मिनी कोल्हापुरे ने कहा, ‘CINTAA को गर्व है कि रणवीर सिंह हमारे मेंबर हैं। जब भी उन्हें हमारी जरूरत होती है, हम उनके साथ और उनके लिए खड़े रहते हैं। यह पहले से ही पब्लिक डोमेन में है, इसलिए मैं इस पर और कमेंट नहीं करना चाहती। हम उनके लिए, उनके साथ हैं। अगर उन्हें कभी हमारी जरूरत होगी, तो हम रणवीर सिंह के साथ हैं।’

इससे पहले, CINTAA की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों ने कहा था कि रणवीर सिंह के CINTAA मेंबर होने के बावजूद, CINTAA को इस मामले के बारे में बताया नहीं गया था। पूनम के मुताबिक, एसोसिएशन दोनों पार्टियों के बीच बीच-बचाव करने की कोशिश कर सकती थी।

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‘डॉन 3’ विवाद के बीच फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा रणवीर सिंह के सपोर्ट में सामने आए हैं। साथ ही उन्होंने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा रणवीर के खिलाफ जारी ‘नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव’ (असहयोग निर्देश) पर भी सवाल उठाए।

राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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FWICE को बैन करो, रणवीर सिंह को नहीं। गांधीजी के अंदाज वाला यह तथाकथित बैन या असहयोग आखिरकार FWICE के लिए ही एक बड़ा मजाक बन जाएगा।FWICE जिस तरह इसे इंडस्ट्री या कर्मचारियों की सुरक्षा बता रहा है, असल में मामला वैसा नहीं है। यह एक पुरानी और बेकार यूनियन सिस्टम की ताकत दिखाने की कोशिश भर है, जो किसी तरह अपना प्रभाव बनाए रखना चाहती है।चाहे FWICE यह दावा करे कि वह 5 लाख या 50 लाख कर्मचारियों की आवाज है, लेकिन सच्चाई यह है कि उन लाखों लोगों में से ज्यादातर को दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद की असली जानकारी तक नहीं है।

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FWICE को बताया ‘कंगारू कोर्ट’

FWICE को ‘कंगारू कोर्ट’ बताते हुए राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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FWICE न तो कोई लीगल कोर्ट है और न ही सरकार से ऑथराइज्ड रेगुलेटरी बॉडी। ज्यादा से ज्यादा इसे एक ‘कंगारू कोर्ट’ कहा जा सकता है, यानी ऐसी व्यवस्था जो न्याय देने का दावा तो करती है, लेकिन वास्तव में कानूनी नियमों, फेयर प्रोसेस और न्यूट्रैलिटी को नजरअंदाज करती है।ऐसा इसलिए क्योंकि इसके फैसले अक्सर पहले से ही कुछ खास एजेंडा रखने वाले लोगों के एक प्राइवेट ग्रुप द्वारा तय कर लिए जाते हैं। इनमें ऐसे एक्टर भी शामिल हैं, जो रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर की जबरदस्त सफलता से घबराए हुए हैं।उन्होंने आगे कहा कि यह FWICE के लिए एक बड़ा पीआर डिजास्टर साबित होगा, क्योंकि संगठन एक तरफ अपनी हताशा जाहिर कर रहा है और दूसरी तरफ अपनी पुरानी और अप्रासंगिक सोच भी दुनिया के सामने दिखा रहा है।

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राम गोपाल वर्मा की पोस्ट।

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वर्मा ने आगे लिखा,

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सबसे पहले, यह साबित करने के लिए कि यह दावा झूठा है, मैं कहना चाहता हूं कि फिल्म इंडस्ट्री में लाखों कर्मचारियों की रोजी-रोटी कभी भी किसी एक एक्टर या एक प्रोजेक्ट पर निर्भर नहीं होती। इसलिए सोशल मीडिया पर यह कहना कि किसी एक व्यक्ति की वजह से लाखों लोगों का नुकसान हो रहा है, लोगों को भड़काने और माहौल बनाने की कोशिश है।इस पूरे विवाद की जड़ में एक प्रोड्यूसर का यह दावा है कि उसे प्री-प्रोडक्शन में भारी नुकसान हुआ, लेकिन यह सिर्फ दो पक्षों के बीच का प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट विवाद है। ऐसे विवाद भारत में हर दिन और हर तरह के कारोबार में लाखों बार होते हैं। तब FWICE जैसी संस्थाएं कहां होती हैं?इसके अलावा, इस मामले में वास्तव में क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी सिर्फ विवाद में शामिल पक्षों को ही हो सकती है। इसलिए यह मामला भी किसी अन्य सिविल विवाद की तरह उन्हीं के बीच रहना चाहिए। अगर कोई पक्ष अदालत जाता है, तो फैसला जज को करना चाहिए।

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राम गोपाल वर्मा ने सत्या (1998), रंगीला (1995), कंपनी (2002), सरकार (2005) जैसी कल्ट फिल्में बनाई हैं।

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‘रणवीर के लिए प्रोड्यूसर्स की लाइन लग जाएगी’

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और अगर FWICE का दावा है कि कुछ प्रमुख टेक्नीशियन का समय और मेहनत बर्बाद हुई है, तो मैं उन्हें चैलेंज देता हूं कि वे व्यक्तिगत रूप से सामने आएं, सबूत पेश करें, सार्वजनिक रूप से रणवीर सिंह को जिम्मेदार ठहराएं और यह ऐलान करें कि वे भविष्य में उनकी किसी फिल्म में काम नहीं करेंगेऔर अगर उस प्रोड्यूसर के साथ वास्तव में इतना बड़ा अन्याय हुआ है, तो FWICE के लाखों कर्मचारियों को नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के दूसरे प्रोड्यूसर्स को रणवीर सिंह के साथ काम करने से बचना चाहिए।

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फिल्ममेकर ने यह भी लिखा,

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यहीं पर हम इस पूरे मामले के सबसे अहम बिंदु पर पहुंचते हैं, जिसे हर कोई अपने दिल में जानता है, चाहे वह विवाद में शामिल कंपनी हो या फिर FWICE सच्चाई यह है कि अगर रणवीर सिंह सिर्फ एक बार हां कह दें, तो कल सुबह उनके घर के बाहर चेक लेकर प्रोड्यूसर्स की एक किलोमीटर लंबी कतार लग जाएगी। यह तब भी होगा, जब वे FWICE और संबंधित प्रोडक्शन कंपनी की सभी चेतावनियां सुन चुके होंगे

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पोस्ट में अंत में राम गोपाल वर्मा ने लिखा,

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क्योंकि कड़वी सच्चाई यह है कि थिएटरों में टिकट FWICE नहीं, बल्कि रणवीर सिंह जैसे स्टार बिकवाते हैं। FWICE नहीं, बल्कि रणवीर सिंह जैसे सितारे ही उन लाखों कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व करने का दावा FWICE करता है। असलियत यह है कि रणवीर सिंह जैसे स्टार हैं, तभी फिल्म इंडस्ट्री है, और उसी वजह से FWICE जैसी संस्थाएं भी मौजूद हैं।इसलिए अंत में मेरी बिना मांगी सलाह सभी संबंधित पक्षों के लिए यही है कि दो पक्षों के बीच चल रहे एक निजी सिविल विवाद में बेवजह दखल देने से बचना चाहिए।

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पद्मिनी कोल्हापुरे भी रणवीर के समर्थन में उतरीं

डॉन 3 विवाद के बीच, एक्ट्रेस और CINTAA की वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे रणवीर के सपोर्ट में आईं और भरोसा दिलाया है कि एसोसिएशन पूरी तरह से उनके साथ है।

IANS से बात करते हुए पद्मिनी कोल्हापुरे ने कहा, ‘CINTAA को गर्व है कि रणवीर सिंह हमारे मेंबर हैं। जब भी उन्हें हमारी जरूरत होती है, हम उनके साथ और उनके लिए खड़े रहते हैं। यह पहले से ही पब्लिक डोमेन में है, इसलिए मैं इस पर और कमेंट नहीं करना चाहती। हम उनके लिए, उनके साथ हैं। अगर उन्हें कभी हमारी जरूरत होगी, तो हम रणवीर सिंह के साथ हैं।’

इससे पहले, CINTAA की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों ने कहा था कि रणवीर सिंह के CINTAA मेंबर होने के बावजूद, CINTAA को इस मामले के बारे में बताया नहीं गया था। पूनम के मुताबिक, एसोसिएशन दोनों पार्टियों के बीच बीच-बचाव करने की कोशिश कर सकती थी।

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