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इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

वर्षों से लोगों के मन में यह डर था कि एआई और रोबोट उनकी नौकरियां छीन लेंगे। पर हाल में यह सोच बदल गई। अब एआई इंसानों को काम पर रख रहे हैं। एक नए ऑनलाइन मार्केटप्लेस रेंट-ए-ह्यूमन पर 5 लाख से भी ज्यादा लोग सेवाएं देने के लिए जुड़ चुके हैं। यहां मालिक एआई प्रोग्राम हैं। ये एआई बॉट्स उन कामों के लिए इंसानों को पैसे दे रहे हैं जो वे खुद नहीं कर सकते, जैसे- बाजार से सामान लाना, फोटो खींचना या किसी इवेंट में शामिल होना। यह इनोवेशन 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेक्जेंडर लिटेप्लो के दिमाग की उपज है। लिप्टेलो ने देखा कि दुनिया में करोड़ों ‘एआई एजेंट’ (जैसे क्लाउड) मौजूद हैं, जिनके पास दिमाग तो है, लेकिन हाथ-पैर नहीं थे। वे कोडिंग कर सकते हैं, शेयर बाजार संभाल सकते हैं, पर भौतिक दुनिया में जाकर काम नहीं कर सकते। इसी कमी को भरने के लिए रेंट-ए-ह्यूमन का जन्म हुआ। इसकी टैगलाइन भी आकर्षक है… ‘एआई कान्ट टच ग्रास, यू कैन’। ऐसा बाजार जहां एआई बॉट्स इंसानों को किराए पर लेते हैं। लिप्टेलो ने प्लेटफॉर्म बनाने के लिए खुद कोडिंग नहीं की। उन्होंने एआई एजेंटों को काम सौंपा और पोलो खेलने अर्जेंटीना निकल गए। जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उनके डिजिटल एजेंट प्लेटफॉर्म बना रहे थे। रजिस्ट्रेशन को लेकर उत्साह देखकर पता चलता है कि लिप्टेलो का निशाना सही बैठा है। प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले काम भी बेहद दिलचस्प हैं। वॉशिंगटन में एक एआई ने 2700 रु. प्रति घंटे पर इंसान को कबूतर गिनने के लिए रखा। वहीं, खेल रणनीति सीख रहे एआई ने 9 हजार रु. प्रति घंटे पर बैडमिंटन पार्टनर किराए पर लिया। टोरंटो के मिन्जे कांग दुनिया के पहले व्यक्ति बने जिन्हें एआई ने काम दिया। उन्हें एक बोर्ड पकड़कर खड़े होना था। जिस पर लिखा था- ‘एआई ने मुझे बोर्ड पकड़ने के पैसे दिए हैं।’ कैसे काम करता है सिस्टम प्लेटफॉर्म पर इंसानी मैनेजर नहीं है। एआई बॉट विज्ञापन डालता है, इंटरव्यू लेता है और काम सौंपता है। इंसान काम पूरा करने के बाद फोटो या वीडियो से सबूत देता है। पुष्टि होते ही क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन वॉलेट से पेमेंट होता है। पैसा सुरक्षित एस्क्रो फंड में रखा जाता है ताकि रोबोट पैसा न मार सके। भुगतान और हादसों जैसे मुद्दों पर विवाद को लेकर स्पष्टता नहीं रिसर्चर एडम डॉर कहते हैं- एआई के जरिए इंसानों से काम करवाने में नियम और कानून बहुत पीछे हैं। अगर किसी एआई का इरादा गलत हो तो वह बड़े खतरनाक काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इंसानों से करवा सकता है। यानी लोग बिना समझे किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं जो नुकसान पहुंचाए। डॉर मानते हैं कि हमें जल्द कड़े नियम और सुरक्षा उपाय बनाने होंगे, ताकि एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो। गुड टेक एडवायजरी की सीईओ केफिर्थ बटरफील्ड कहती हैं कि कई देशों में एआई से इंसानों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं, इसलिए पेमेंट कौन देगा और हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह तय करना जरूरी है।

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वर्षों से लोगों के मन में यह डर था कि एआई और रोबोट उनकी नौकरियां छीन लेंगे। पर हाल में यह सोच बदल गई। अब एआई इंसानों को काम पर रख रहे हैं। एक नए ऑनलाइन मार्केटप्लेस रेंट-ए-ह्यूमन पर 5 लाख से भी ज्यादा लोग सेवाएं देने के लिए जुड़ चुके हैं। यहां मालिक एआई प्रोग्राम हैं। ये एआई बॉट्स उन कामों के लिए इंसानों को पैसे दे रहे हैं जो वे खुद नहीं कर सकते, जैसे- बाजार से सामान लाना, फोटो खींचना या किसी इवेंट में शामिल होना। यह इनोवेशन 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेक्जेंडर लिटेप्लो के दिमाग की उपज है। लिप्टेलो ने देखा कि दुनिया में करोड़ों ‘एआई एजेंट’ (जैसे क्लाउड) मौजूद हैं, जिनके पास दिमाग तो है, लेकिन हाथ-पैर नहीं थे। वे कोडिंग कर सकते हैं, शेयर बाजार संभाल सकते हैं, पर भौतिक दुनिया में जाकर काम नहीं कर सकते। इसी कमी को भरने के लिए रेंट-ए-ह्यूमन का जन्म हुआ। इसकी टैगलाइन भी आकर्षक है… ‘एआई कान्ट टच ग्रास, यू कैन’। ऐसा बाजार जहां एआई बॉट्स इंसानों को किराए पर लेते हैं। लिप्टेलो ने प्लेटफॉर्म बनाने के लिए खुद कोडिंग नहीं की। उन्होंने एआई एजेंटों को काम सौंपा और पोलो खेलने अर्जेंटीना निकल गए। जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उनके डिजिटल एजेंट प्लेटफॉर्म बना रहे थे। रजिस्ट्रेशन को लेकर उत्साह देखकर पता चलता है कि लिप्टेलो का निशाना सही बैठा है। प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले काम भी बेहद दिलचस्प हैं। वॉशिंगटन में एक एआई ने 2700 रु. प्रति घंटे पर इंसान को कबूतर गिनने के लिए रखा। वहीं, खेल रणनीति सीख रहे एआई ने 9 हजार रु. प्रति घंटे पर बैडमिंटन पार्टनर किराए पर लिया। टोरंटो के मिन्जे कांग दुनिया के पहले व्यक्ति बने जिन्हें एआई ने काम दिया। उन्हें एक बोर्ड पकड़कर खड़े होना था। जिस पर लिखा था- ‘एआई ने मुझे बोर्ड पकड़ने के पैसे दिए हैं।’ कैसे काम करता है सिस्टम प्लेटफॉर्म पर इंसानी मैनेजर नहीं है। एआई बॉट विज्ञापन डालता है, इंटरव्यू लेता है और काम सौंपता है। इंसान काम पूरा करने के बाद फोटो या वीडियो से सबूत देता है। पुष्टि होते ही क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन वॉलेट से पेमेंट होता है। पैसा सुरक्षित एस्क्रो फंड में रखा जाता है ताकि रोबोट पैसा न मार सके। भुगतान और हादसों जैसे मुद्दों पर विवाद को लेकर स्पष्टता नहीं रिसर्चर एडम डॉर कहते हैं- एआई के जरिए इंसानों से काम करवाने में नियम और कानून बहुत पीछे हैं। अगर किसी एआई का इरादा गलत हो तो वह बड़े खतरनाक काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इंसानों से करवा सकता है। यानी लोग बिना समझे किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं जो नुकसान पहुंचाए। डॉर मानते हैं कि हमें जल्द कड़े नियम और सुरक्षा उपाय बनाने होंगे, ताकि एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो। गुड टेक एडवायजरी की सीईओ केफिर्थ बटरफील्ड कहती हैं कि कई देशों में एआई से इंसानों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं, इसलिए पेमेंट कौन देगा और हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह तय करना जरूरी है।

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