Saturday, 02 May 2026 | 08:00 AM

Trending :

लू और गर्मी का रामबाण इलाज है शिकंजी, यहां जानिए इसके जबरदस्त फायदे और बनाने का आसान तरीका ट्रम्प ने जंग रोकने का ईरानी ऑफर फिर ठुकराया:परमाणु मुद्दे का जिक्र न होने से नाखुश; जर्मनी से 5000 सैनिक हटाने का ऐलान द्रविड़ एकाधिकार से परे: क्या तमिलनाडु में मतगणना के दिन छोटे दल ‘किंगमेकर’ के रूप में सामने आ सकते हैं? | चुनाव समाचार बाघों के लिए क्यों छोटा पड़ने लगा रणथंभौर टाइगर रिजर्व:9 साल में 9 की जान गई; एक-दूसरे के खून के प्यासे हुए बाघ-बाघिन GST Collection Hits ₹2.42 Lakh Crore; E-Prapti Portal for PF Accounts ‘तन्वी द ग्रेट’ से चमकी शुभांगी, ऑडिशन में खूब रोईं:60 से ज्यादा रिजेक्शन झेलीं, कई बार बिना ऑडिशन लौटाया गया, अब लगातार मिल रहे अवॉर्ड्स
EXCLUSIVE

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

वर्षों से लोगों के मन में यह डर था कि एआई और रोबोट उनकी नौकरियां छीन लेंगे। पर हाल में यह सोच बदल गई। अब एआई इंसानों को काम पर रख रहे हैं। एक नए ऑनलाइन मार्केटप्लेस रेंट-ए-ह्यूमन पर 5 लाख से भी ज्यादा लोग सेवाएं देने के लिए जुड़ चुके हैं। यहां मालिक एआई प्रोग्राम हैं। ये एआई बॉट्स उन कामों के लिए इंसानों को पैसे दे रहे हैं जो वे खुद नहीं कर सकते, जैसे- बाजार से सामान लाना, फोटो खींचना या किसी इवेंट में शामिल होना। यह इनोवेशन 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेक्जेंडर लिटेप्लो के दिमाग की उपज है। लिप्टेलो ने देखा कि दुनिया में करोड़ों ‘एआई एजेंट’ (जैसे क्लाउड) मौजूद हैं, जिनके पास दिमाग तो है, लेकिन हाथ-पैर नहीं थे। वे कोडिंग कर सकते हैं, शेयर बाजार संभाल सकते हैं, पर भौतिक दुनिया में जाकर काम नहीं कर सकते। इसी कमी को भरने के लिए रेंट-ए-ह्यूमन का जन्म हुआ। इसकी टैगलाइन भी आकर्षक है… ‘एआई कान्ट टच ग्रास, यू कैन’। ऐसा बाजार जहां एआई बॉट्स इंसानों को किराए पर लेते हैं। लिप्टेलो ने प्लेटफॉर्म बनाने के लिए खुद कोडिंग नहीं की। उन्होंने एआई एजेंटों को काम सौंपा और पोलो खेलने अर्जेंटीना निकल गए। जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उनके डिजिटल एजेंट प्लेटफॉर्म बना रहे थे। रजिस्ट्रेशन को लेकर उत्साह देखकर पता चलता है कि लिप्टेलो का निशाना सही बैठा है। प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले काम भी बेहद दिलचस्प हैं। वॉशिंगटन में एक एआई ने 2700 रु. प्रति घंटे पर इंसान को कबूतर गिनने के लिए रखा। वहीं, खेल रणनीति सीख रहे एआई ने 9 हजार रु. प्रति घंटे पर बैडमिंटन पार्टनर किराए पर लिया। टोरंटो के मिन्जे कांग दुनिया के पहले व्यक्ति बने जिन्हें एआई ने काम दिया। उन्हें एक बोर्ड पकड़कर खड़े होना था। जिस पर लिखा था- ‘एआई ने मुझे बोर्ड पकड़ने के पैसे दिए हैं।’ कैसे काम करता है सिस्टम प्लेटफॉर्म पर इंसानी मैनेजर नहीं है। एआई बॉट विज्ञापन डालता है, इंटरव्यू लेता है और काम सौंपता है। इंसान काम पूरा करने के बाद फोटो या वीडियो से सबूत देता है। पुष्टि होते ही क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन वॉलेट से पेमेंट होता है। पैसा सुरक्षित एस्क्रो फंड में रखा जाता है ताकि रोबोट पैसा न मार सके। भुगतान और हादसों जैसे मुद्दों पर विवाद को लेकर स्पष्टता नहीं रिसर्चर एडम डॉर कहते हैं- एआई के जरिए इंसानों से काम करवाने में नियम और कानून बहुत पीछे हैं। अगर किसी एआई का इरादा गलत हो तो वह बड़े खतरनाक काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इंसानों से करवा सकता है। यानी लोग बिना समझे किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं जो नुकसान पहुंचाए। डॉर मानते हैं कि हमें जल्द कड़े नियम और सुरक्षा उपाय बनाने होंगे, ताकि एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो। गुड टेक एडवायजरी की सीईओ केफिर्थ बटरफील्ड कहती हैं कि कई देशों में एआई से इंसानों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं, इसलिए पेमेंट कौन देगा और हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह तय करना जरूरी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
कोलकाता में EC ऑफिस के बाहर भाजपा-TMC कार्यकर्ताओं में झड़प:ममता का आरोप- भाजपा ने बंगाल में अवैध वोटरों के नाम जोड़ने की कोशिश की

March 31, 2026/
5:09 am

कोलकाता में चुनाव आयोग ऑफिस (ECO) के बाहर मंगलवार को भाजपा और TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। पुलिस के...

सिंगरौली के सुदागांव में मिला युवक का शव:खेत में संदिग्ध हालत में मिला; चेहरे-सिर पर चोट के निशान, हत्या की आशंका

April 24, 2026/
3:13 pm

सिंगरौली जिले के सुदा गांव में शुक्रवार को 35 वर्षीय भुवनेश्वर कोल का शव मिला। युवक का शव उसके घर...

नीमच शहर में भारी वाहनों की 'नो एंट्री':सुबह 9 से रात 10 बजे तक प्रतिबंधित रहेंगे ट्रक; उल्लंघन पर होगी FIR

April 30, 2026/
10:14 pm

नीमच शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने कलेक्टर हिमांशु चन्द्रा ने सख्त कदम उठाया...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

वर्षों से लोगों के मन में यह डर था कि एआई और रोबोट उनकी नौकरियां छीन लेंगे। पर हाल में यह सोच बदल गई। अब एआई इंसानों को काम पर रख रहे हैं। एक नए ऑनलाइन मार्केटप्लेस रेंट-ए-ह्यूमन पर 5 लाख से भी ज्यादा लोग सेवाएं देने के लिए जुड़ चुके हैं। यहां मालिक एआई प्रोग्राम हैं। ये एआई बॉट्स उन कामों के लिए इंसानों को पैसे दे रहे हैं जो वे खुद नहीं कर सकते, जैसे- बाजार से सामान लाना, फोटो खींचना या किसी इवेंट में शामिल होना। यह इनोवेशन 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेक्जेंडर लिटेप्लो के दिमाग की उपज है। लिप्टेलो ने देखा कि दुनिया में करोड़ों ‘एआई एजेंट’ (जैसे क्लाउड) मौजूद हैं, जिनके पास दिमाग तो है, लेकिन हाथ-पैर नहीं थे। वे कोडिंग कर सकते हैं, शेयर बाजार संभाल सकते हैं, पर भौतिक दुनिया में जाकर काम नहीं कर सकते। इसी कमी को भरने के लिए रेंट-ए-ह्यूमन का जन्म हुआ। इसकी टैगलाइन भी आकर्षक है… ‘एआई कान्ट टच ग्रास, यू कैन’। ऐसा बाजार जहां एआई बॉट्स इंसानों को किराए पर लेते हैं। लिप्टेलो ने प्लेटफॉर्म बनाने के लिए खुद कोडिंग नहीं की। उन्होंने एआई एजेंटों को काम सौंपा और पोलो खेलने अर्जेंटीना निकल गए। जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उनके डिजिटल एजेंट प्लेटफॉर्म बना रहे थे। रजिस्ट्रेशन को लेकर उत्साह देखकर पता चलता है कि लिप्टेलो का निशाना सही बैठा है। प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले काम भी बेहद दिलचस्प हैं। वॉशिंगटन में एक एआई ने 2700 रु. प्रति घंटे पर इंसान को कबूतर गिनने के लिए रखा। वहीं, खेल रणनीति सीख रहे एआई ने 9 हजार रु. प्रति घंटे पर बैडमिंटन पार्टनर किराए पर लिया। टोरंटो के मिन्जे कांग दुनिया के पहले व्यक्ति बने जिन्हें एआई ने काम दिया। उन्हें एक बोर्ड पकड़कर खड़े होना था। जिस पर लिखा था- ‘एआई ने मुझे बोर्ड पकड़ने के पैसे दिए हैं।’ कैसे काम करता है सिस्टम प्लेटफॉर्म पर इंसानी मैनेजर नहीं है। एआई बॉट विज्ञापन डालता है, इंटरव्यू लेता है और काम सौंपता है। इंसान काम पूरा करने के बाद फोटो या वीडियो से सबूत देता है। पुष्टि होते ही क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन वॉलेट से पेमेंट होता है। पैसा सुरक्षित एस्क्रो फंड में रखा जाता है ताकि रोबोट पैसा न मार सके। भुगतान और हादसों जैसे मुद्दों पर विवाद को लेकर स्पष्टता नहीं रिसर्चर एडम डॉर कहते हैं- एआई के जरिए इंसानों से काम करवाने में नियम और कानून बहुत पीछे हैं। अगर किसी एआई का इरादा गलत हो तो वह बड़े खतरनाक काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इंसानों से करवा सकता है। यानी लोग बिना समझे किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं जो नुकसान पहुंचाए। डॉर मानते हैं कि हमें जल्द कड़े नियम और सुरक्षा उपाय बनाने होंगे, ताकि एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो। गुड टेक एडवायजरी की सीईओ केफिर्थ बटरफील्ड कहती हैं कि कई देशों में एआई से इंसानों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं, इसलिए पेमेंट कौन देगा और हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह तय करना जरूरी है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.