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Sadhana Shivdasani Biography | Bollywood Actress Career & Life Struggle

Sadhana Shivdasani Biography | Bollywood Actress Career & Life Struggle

14 मिनट पहले

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साधना ने फिल्मी करियर में करीब 30 फिल्मों में काम किया था, हालांकि उन्हें एक्टिंग के लिए कोई अवाॅर्ड नहीं मिला।

हिंदी सिनेमा के 60 और 70 के दशक में एक ऐसी अभिनेत्री आईं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। नाम था साधना शिवदासानी। कभी उनकी फिल्में हिट होती थीं और उनका हेयरस्टाइल पूरे देश में ट्रेंड करता था, लेकिन जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें बीमारी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा।

साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को ब्रिटिश इंडिया के कराची में एक सिंधी परिवार में हुआ था। 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आकर मुंबई में बस गया। बचपन से ही साधना अभिनेत्री बनना चाहती थीं। करीब 14 साल की उम्र में उन्हें राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में काम करने का मौका मिला, जहां वह गाने ‘मुड़ मुड़ के’ में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर नजर आई थीं।

साधना के पिता बंगाली अभिनेत्री और नर्तकी साधना बोस के बहुत बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम साधना रख दिया।

साधना के पिता बंगाली अभिनेत्री और नर्तकी साधना बोस के बहुत बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम साधना रख दिया।

1 रुपए की फीस से फिल्मी सफर शुरू हुआ

साधना का एक्टिंग करियर फिल्म ‘अबाना’ से शुरू हुआ। जो भारत की पहली सिंधी फिल्म थी। यह फिल्म 1958 में रिलीज हुई थी।

बताया जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 1 रुपए की फीस मिली थी। यही छोटी सी फीस आगे चलकर उनके बड़े फिल्मी सफर की शुरुआत बनी।

‘लव इन शिमला’ ने बदली किस्मत

साधना को खास पहचान 1960 में आई फिल्म ‘लव इन शिमला’ से मिली थी। आर.के. नय्यर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वह जॉय मुखर्जी के साथ लीड रोल में थीं। फिल्म सफल रही और साधना रातोंरात स्टार बन गईं।

फिल्म में उनका फ्रिंज हेयरस्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि आगे चलकर इसे ‘साधना कट’ के नाम से जाना गया। ऑड्री हेपबर्न से प्रेरित इस लुक को आम महिलाओं ने भी खूब अपनाया। चूड़ीदार सलवार सूट के चलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी साधना को दिया जाता है।

प्रसिद्ध अभिनेता हरि शिवदासानी (अभिनेत्री बबीता के पिता) साधना के सगे चाचा (पिता के भाई) थे। इस रिश्ते से साधना करिश्मा और करीना कपूर की बुआ की तरह थीं।

प्रसिद्ध अभिनेता हरि शिवदासानी (अभिनेत्री बबीता के पिता) साधना के सगे चाचा (पिता के भाई) थे। इस रिश्ते से साधना करिश्मा और करीना कपूर की बुआ की तरह थीं।

इसके बाद साधना ने ‘परख’, ‘हम दोनों’, ‘मन-मौजी’, ‘एक मुसाफिर एक हसीना’, ‘मेरे महबूब’ और ‘इंतकाम’ जैसी फिल्मों में काम किया। 1960 के दशक में उनकी 19 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें 11 फिल्में हिट थीं और इस तरह वह हिंदी सिनेमा की बड़ी स्टार बन गईं।

निर्देशक से हुआ प्यार, 1966 में शादी

‘लव इन शिमला’ के सेट पर साधना को डायरेक्टर आर.के. नय्यर से प्यार हो गया। दोनों ने 1966 में शादी कर ली। शादी के बाद भी साधना ने फिल्मों में काम जारी रखा। हालांकि बाद के वर्षों में उनकी जिंदगी मुश्किलों से घिरने लगी।

1960 के दशक के आखिर में साधना हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या से जूझने लगीं। इलाज के कारण उन्हें फिल्मों से दूरी बनानी पड़ी और कई बड़े प्रोजेक्ट उनके हाथ से निकल गए। बाद में उन्होंने ‘इंतकाम’ और ‘एक फूल दो माली’ जैसी फिल्मों से वापसी की, लेकिन 1970 के दशक में उनके फिल्मी ऑफर कम होते गए।

उन्होंने 1974 में ‘गीता मेरा नाम’ से निर्देशन में भी हाथ आजमाया। धीरे-धीरे वह फिल्मों और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं।

साधना के पति आर.के. नय्यर ने 'लव इन शिमला' (1960), 'ये रास्ते हैं प्यार के' (1963), 'आओ प्यार करें' (1964) जैसी कई फिल्में डायरेक्ट की थीं।

साधना के पति आर.के. नय्यर ने ‘लव इन शिमला’ (1960), ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ (1963), ‘आओ प्यार करें’ (1964) जैसी कई फिल्में डायरेक्ट की थीं।

पति की मौत के बाद बढ़ा अकेलापन

1995 में आर.के. नय्यर का निधन हो गया। दोनों की कोई संतान नहीं थी। पति के जाने के बाद साधना काफी अकेली पड़ गईं। उनकी सेहत भी लगातार खराब होती रही। आंखों की समस्या और थायरॉयड जैसी परेशानियों के कारण उनका घर से बाहर निकलना कम हो गया।

हालांकि, उनके आखिरी साल कानूनी विवादों से भी घिरे रहे। साधना से जुड़े तीन मामले सामने आए। इनमें एक मामला उनके सांता क्रूज स्थित बिल्डिंग के मकान मालिक यूसुफ लकड़ावाला ने किया था। एक मामला साधना ने उन्हीं के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दर्ज कराया था। इसके बाद विवाद से जुड़ा मानहानि का मामला भी सामने आया।

उस समय साधना आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझ रही थीं। उनके लिए इलाज और कानूनी खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने मदद की अपील भी की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहारा नहीं मिला।

वहीदा रहमान, हेलन और साधना की पुरानी तस्वीर।

वहीदा रहमान, हेलन और साधना की पुरानी तस्वीर।

बाद के समय में वहीदा रहमान, नंदा, आशा पारेख और हेलन जैसी उनकी समकालीन अभिनेत्रियां उनके करीब रहीं और उन्हें इमोशनली सहारा देती थीं। इसके बावजूद साधना का आखिरी दौर काफी अकेलेपन में बीता। 25 दिसंबर 2015 को मुंबई के एक अस्पताल में बीमारी के बाद साधना का निधन हो गया।

…………..

यह खबर भी पढ़ें…

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साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एसएस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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साधना ने फिल्मी करियर में करीब 30 फिल्मों में काम किया था, हालांकि उन्हें एक्टिंग के लिए कोई अवाॅर्ड नहीं मिला।

हिंदी सिनेमा के 60 और 70 के दशक में एक ऐसी अभिनेत्री आईं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। नाम था साधना शिवदासानी। कभी उनकी फिल्में हिट होती थीं और उनका हेयरस्टाइल पूरे देश में ट्रेंड करता था, लेकिन जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें बीमारी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा।

साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को ब्रिटिश इंडिया के कराची में एक सिंधी परिवार में हुआ था। 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आकर मुंबई में बस गया। बचपन से ही साधना अभिनेत्री बनना चाहती थीं। करीब 14 साल की उम्र में उन्हें राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में काम करने का मौका मिला, जहां वह गाने ‘मुड़ मुड़ के’ में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर नजर आई थीं।

साधना के पिता बंगाली अभिनेत्री और नर्तकी साधना बोस के बहुत बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम साधना रख दिया।

साधना के पिता बंगाली अभिनेत्री और नर्तकी साधना बोस के बहुत बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम साधना रख दिया।

1 रुपए की फीस से फिल्मी सफर शुरू हुआ

साधना का एक्टिंग करियर फिल्म ‘अबाना’ से शुरू हुआ। जो भारत की पहली सिंधी फिल्म थी। यह फिल्म 1958 में रिलीज हुई थी।

बताया जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 1 रुपए की फीस मिली थी। यही छोटी सी फीस आगे चलकर उनके बड़े फिल्मी सफर की शुरुआत बनी।

‘लव इन शिमला’ ने बदली किस्मत

साधना को खास पहचान 1960 में आई फिल्म ‘लव इन शिमला’ से मिली थी। आर.के. नय्यर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वह जॉय मुखर्जी के साथ लीड रोल में थीं। फिल्म सफल रही और साधना रातोंरात स्टार बन गईं।

फिल्म में उनका फ्रिंज हेयरस्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि आगे चलकर इसे ‘साधना कट’ के नाम से जाना गया। ऑड्री हेपबर्न से प्रेरित इस लुक को आम महिलाओं ने भी खूब अपनाया। चूड़ीदार सलवार सूट के चलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी साधना को दिया जाता है।

प्रसिद्ध अभिनेता हरि शिवदासानी (अभिनेत्री बबीता के पिता) साधना के सगे चाचा (पिता के भाई) थे। इस रिश्ते से साधना करिश्मा और करीना कपूर की बुआ की तरह थीं।

प्रसिद्ध अभिनेता हरि शिवदासानी (अभिनेत्री बबीता के पिता) साधना के सगे चाचा (पिता के भाई) थे। इस रिश्ते से साधना करिश्मा और करीना कपूर की बुआ की तरह थीं।

इसके बाद साधना ने ‘परख’, ‘हम दोनों’, ‘मन-मौजी’, ‘एक मुसाफिर एक हसीना’, ‘मेरे महबूब’ और ‘इंतकाम’ जैसी फिल्मों में काम किया। 1960 के दशक में उनकी 19 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें 11 फिल्में हिट थीं और इस तरह वह हिंदी सिनेमा की बड़ी स्टार बन गईं।

निर्देशक से हुआ प्यार, 1966 में शादी

‘लव इन शिमला’ के सेट पर साधना को डायरेक्टर आर.के. नय्यर से प्यार हो गया। दोनों ने 1966 में शादी कर ली। शादी के बाद भी साधना ने फिल्मों में काम जारी रखा। हालांकि बाद के वर्षों में उनकी जिंदगी मुश्किलों से घिरने लगी।

1960 के दशक के आखिर में साधना हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या से जूझने लगीं। इलाज के कारण उन्हें फिल्मों से दूरी बनानी पड़ी और कई बड़े प्रोजेक्ट उनके हाथ से निकल गए। बाद में उन्होंने ‘इंतकाम’ और ‘एक फूल दो माली’ जैसी फिल्मों से वापसी की, लेकिन 1970 के दशक में उनके फिल्मी ऑफर कम होते गए।

उन्होंने 1974 में ‘गीता मेरा नाम’ से निर्देशन में भी हाथ आजमाया। धीरे-धीरे वह फिल्मों और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं।

साधना के पति आर.के. नय्यर ने 'लव इन शिमला' (1960), 'ये रास्ते हैं प्यार के' (1963), 'आओ प्यार करें' (1964) जैसी कई फिल्में डायरेक्ट की थीं।

साधना के पति आर.के. नय्यर ने ‘लव इन शिमला’ (1960), ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ (1963), ‘आओ प्यार करें’ (1964) जैसी कई फिल्में डायरेक्ट की थीं।

पति की मौत के बाद बढ़ा अकेलापन

1995 में आर.के. नय्यर का निधन हो गया। दोनों की कोई संतान नहीं थी। पति के जाने के बाद साधना काफी अकेली पड़ गईं। उनकी सेहत भी लगातार खराब होती रही। आंखों की समस्या और थायरॉयड जैसी परेशानियों के कारण उनका घर से बाहर निकलना कम हो गया।

हालांकि, उनके आखिरी साल कानूनी विवादों से भी घिरे रहे। साधना से जुड़े तीन मामले सामने आए। इनमें एक मामला उनके सांता क्रूज स्थित बिल्डिंग के मकान मालिक यूसुफ लकड़ावाला ने किया था। एक मामला साधना ने उन्हीं के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दर्ज कराया था। इसके बाद विवाद से जुड़ा मानहानि का मामला भी सामने आया।

उस समय साधना आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझ रही थीं। उनके लिए इलाज और कानूनी खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने मदद की अपील भी की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहारा नहीं मिला।

वहीदा रहमान, हेलन और साधना की पुरानी तस्वीर।

वहीदा रहमान, हेलन और साधना की पुरानी तस्वीर।

बाद के समय में वहीदा रहमान, नंदा, आशा पारेख और हेलन जैसी उनकी समकालीन अभिनेत्रियां उनके करीब रहीं और उन्हें इमोशनली सहारा देती थीं। इसके बावजूद साधना का आखिरी दौर काफी अकेलेपन में बीता। 25 दिसंबर 2015 को मुंबई के एक अस्पताल में बीमारी के बाद साधना का निधन हो गया।

…………..

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सायरा बानो@82; शम्मी कपूर ने डांटा तो रोने लगीं:अखबार में पढ़ी पति दिलीप कुमार की दूसरी शादी की खबर, शाहरुख को बेटा माना

साल 1955 तमिलनाडु के कोयंबटूर में फिल्म ‘आजाद’ की शूटिंग चल रही थी। इसी दौरान फिल्म प्रोड्यूसर एसएस. वासन ने दिलीप कुमार की मुलाकात एक मशहूर ज्योतिषी से कराई। ज्योतिषी ने दिलीप कुमार का चेहरा देखा, हाथ की रेखाएं पढ़ीं और फिर उनकी कुंडली बनाई। इसके बाद उन्होंने ऐसी भविष्यवाणी की, जिसे सुनकर खुद दिलीप कुमार भी हैरान रह गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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