Saturday, 12 Sep 2026 | 09:48 PM

Trending :

EXCLUSIVE

50 लाख आबादी वाला न्यूजीलैंड क्रिकेट में इतना बेहतर कैसे:वहां हर 50वां व्यक्ति क्रिकेटर; टैलेंट सर्च, कोचिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी

50 लाख आबादी वाला न्यूजीलैंड क्रिकेट में इतना बेहतर कैसे:वहां हर 50वां व्यक्ति क्रिकेटर; टैलेंट सर्च, कोचिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी

2021 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन…2024 में इंडिया को पहली बार उसी के घर में क्लीन स्वीप किया। फिर विमेंस टीम ने टी-20 वर्ल्ड कप भी जीत लिया। ये न्यूजीलैंड के हालिया अचीवमेंट्स हैं। इसके अलावा कीवी टीम ने ओवरऑल 18 ICC टूर्नामेंट्स के सेमीफाइनल भी खेले हैं। न्यूजीलैंड को क्रिकेट की सबसे अनुशासित टीमों में भी गिना जाता है। यही वजह है कि टीम को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। लेकिन 50 लाख की आबादी वाला यह छोटा-सा देश क्रिकेट में इतना बेहतर कैसे बन गया? इस स्टोरी में हम इसी सवाल का जवाब देंगे। स्टोरी 3 पार्ट में पढ़िए… 1864 में इंटरनेशनल क्रिकेट न्यूजीलैंड पहुंचा 1832 में एंग्लिकन मिशनरी हेनरी विलियम्स ने नॉर्थलैंड में एक मैच आयोजित किया था। यह कीवियों के इतिहास का पहला मैच है। इसके 10 साल बाद दिसंबर 1842 में वेलिंगटन में एक मैच खेला गया, जिसका स्कोर दर्ज किया गया। यह क्रिकेट इतिहास का पहला ऐसा मैच, जिसमें स्कोर दर्ज किया गया था। 1864 में इंटरनेशनल क्रिकेट न्यूजीलैंड पहुंचा, जब जॉर्ज पार की पेशेवर ऑल-इंग्लैंड इलेवन टीम यहां खेलने आई। इस अंग्रेजी टीम ने ओटागो और कैंटरबरी की 22 खिलाड़ियों वाली टीमों के खिलाफ चार मैच जीते। 1906 में गवर्नर लॉर्ड प्लंकेट ने प्लंकेट शील्ड ट्रॉफी शुरू की। पहली जीत के लिए 26 साल का इंतजार न्यूजीलैंड 1930 में टेस्ट खेलने वाला देश बना। टीम को अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करने के लिए 26 साल इंतजार करना पड़ा। कीवियों को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के खिलाफ जीत हासिल करने में दो दशक और लग गए। जब उसने ऑकलैंड के ईडन पार्क में वेस्टइंडीज को हराया। न्यूजीलैंड ने अपना पहला वनडे मैच 11 फरवरी 1973 को खेला और पाकिस्तान को 22 रन से हराया। न्यूजीलैंड की महिला टीम ने अपना पहला टेस्ट मैच 1935 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला। पिछले 6 साल में 3 फाइनल खेले, एक जीता न्यूजीलैंड की टीम ने 2020 के बाद 3 बार ICC टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई, इसमें से उसे एक में जीत, जबकि 2 में हार का सामना करना पड़ा। साउथैम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में कीवियों ने जून 2021 में भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में 8 विकेट से हराया। उसी साल 14 नवंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में न्यूजीलैंड को टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट से हराया। कीवियों को पिछले साल 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी में भारत से फाइनल मैच खेला था। इसमें उसे 4 विकेट की पराजय झेलनी पड़ी थी। 2000 में पहला ICC टाइटल जीता न्यूजीलैंड की मेंस टीम 2000 में पहली बार किसी ICC टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची। टीम ने पहले ही मौके में टीम इंडिया को 4 विकेट से हराया था। उसके बाद कीवियों ने अगले 20 साल में 3 फाइनल खेले, लेकिन एक भी नहीं जीत सकी। कीवियों को 2009 में चैंपियंस ट्रॉफी और 2015 में वनडे वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल हराया। 2019 में न्यूजीलैंड फिर फाइनल में पहुंचा, लेकिन इस बार इंग्लैंड के खिलाफ ICC के बाउंड्री के नियम की वजह से हार गया। 61% सेमीफाइनल मैच गंवाए, 39% जीते न्यूजीलैंड, ऐसी टीम है, जो ज्यादा बयानबाजी नहीं करती है और न ही उसके खिलाड़ी अनुशासनहीनता करते हैं। प्लेयर्स का हाव-भाव जीत और हार में एक समान रहता है। न्यूजीलैंड की टीम शांतिपूर्ण तरीके से अपना गेम खेलती है और सेमीफाइनल में जगह बना लेगी। NZ की टीम ने 18 मौकों में ICC टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसमें से 7 जीते, जबकि 11 मौकों पर कीवियों के हाथ निराशा हाथ लगी है। टीम ने 61% सेमीफाइनल मैच गंवाए हैं और 39% मैच जीते हैं। न्यूजीलैंड को इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली जीत 26 साल बाद मिली। टीम पहले वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गई। उसने 1979 और 1992 में भी टॉप-4 में जगह बनाई। लेकिन, टीम टाइटल नहीं जीत पा रही थी। इस कारण 1990 के दशक में न्यूजीलैंड क्रिकेट को मजबूत करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया गया। नया गवर्नेंस स्ट्रक्चर बना। स्टेट के प्रतिनिधियों की जगह योग्यता के आधार पर नियुक्तियां होने लगीं। इसका असर भी हुआ और टीम ने 2000 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती। न्यूजीलैंड के सक्सेस मॉडल को 4 फैक्टर्स में समझिए… फैक्टर-1. कम आबादी, लिमिटेड टैलेंट; ज्यादा फोकस न्यूजीलैंड के इतिहासकार डॉन नीली ने कहा था- ‘हम छोटे हैं, इसलिए पूरे देश को एक टारगेट के लिए साथ लाना आसान है। कई लोग इसे कमजोरी मानते हैं, वहीं हम इसे अपनी ताकत मानते हैं।’ यही बात क्रिकेट पर लागू होती है, वहां एक लाख रजिस्टर्ड क्रिकेटर्स हैं। प्लेयर्स को कम उम्र में स्कूल और क्लब लेवल से स्काउट किया जाता है। फिर उनके स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाता है। संख्या कम होने के कारण कोचिंग और अन्य सुविधाओं के लिहाज से हर प्लेयर्स पर कोचेस और एडमिनिस्ट्रेटर का फोकस ज्यादा होता है। फैक्टर-2. मजबूत ग्रासरूट सिस्टम न्यूजीलैंड की असली ताकत उसका मजबूत ग्रासरूट सिस्टम है। उसके शहर छोटे जरूर हैं, लेकिन खेल सुविधाओं से भरपूर हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि टौरंगा के माउंट माउंगानुई में एक छोटा लेकिन शानदार क्रिकेट स्टेडियम, दो रग्बी मैदान, वाइकाटो हाई-परफॉर्मेंस सेंटर, हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ और एथलेटिक्स ट्रैक मौजूद है। पास में यॉटिंग और सेलिंग क्लब भी है। इससे वहां के रहवासियों की जीवनशैली में स्पोर्ट्स कल्चर बिल्ट होता है। न्यूजीलैंड की सफलता में आउटडोर जीवनशैली का बड़ा योगदान है। स्कूलों में दौड़ने, कूदने और थ्रो करने जैसी शारीरिक गतिविधियों पर खास जोर दिया जाता है। हर साल आधे से ज्यादा बच्चे कम से कम एक प्रतिस्पर्धी खेल में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हैं। स्कूल और क्लब से प्लेयर्स को स्काउट करने के बाद उन्हें वहां के डोमेस्टिक और नेशनल टूर्नामेंट में मौका दिया गया है। इन टूर्नामेंट में स्टेज की 6 टीमें हिस्सा लेती हैं। विमेंस कैटेगरी में भी 6 टीमें खेलती हैं। टी-20 में सुपर स्मैश और मल्टी-डे क्रिकेटर्स के लिए प्लुनकेट शील्ड का आयोजन होता है। फैक्टर-3. हॉकस बे कैंप क्रिकेट की नर्सरी न्यूजीलैंड क्रिकेट के टैलेंट को तैयार करने में नॉर्थ आइलैंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित हॉकस बे के क्रिकेट कैंपों की अहम भूमिका है। इसे कीवी क्रिकेट की नर्सरी कहा जाता है। पिछले 30 साल में शायद ही कोई न्यूजीलैंड क्रिकेटर हो, जिसने इन कैंपों में हिस्सा न लिया हो। करीब 45 साल पहले यह कैंप 12 टीमों के साथ शुरू हुआ था। अब इसमें लगभग 150 टीमें और 2000 खिलाड़ी अलग-अलग आयु वर्ग में हिस्सा लेते हैं। नेपियर से हेस्टिंग्स तक 20 मैदानों पर लगभग 450 मैच खेले जाते हैं। रॉस टेलर, केन विलियम्सन, टिम साउदी और टॉम लैथम जैसे लगभग सभी बड़े खिलाड़ी इस कैंप में हिस्सा ले चुके हैं। यहां तक कि इंग्लैंड टेस्ट टीम के कप्तान बेन स्टोक्स भी इस कैंप का हिस्सा रहे हैं। फैक्टर-4. मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर न्यूजीलैंड की आबादी करीब 50 लाख है, जोकि फाइनल मैच की मेजबानी कर रहे अहमदाबाद की आबादी का आधा है। इसका क्षेत्रफल लगभग उत्तर प्रदेश के बराबर है। वहां 16 इंटरनेशनल स्टेडियम हैं। इनमें से 10 स्टेडियम ऐसे हैं। जो रेग्युलर इंटरनेशनल मैचों की मेजबानी करते हैं। वहीं, 6 स्टेडियम ऐसे हैं, जहां पहले इंटरनेशनल मैच की मेजबानी कर चुके हैं। ————————————————————– क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Randeep Hooda Assam Flood Visit

August 2, 2026/
12:30 pm

27 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने शनिवार को असम के शिवसागर में ग्लोबल सिख्स द्वारा आयोजित...

Salman Khan Emotional Post For Sanjay Dutt

August 1, 2026/
8:57 am

15 मिनट पहले कॉपी लिंक सलमान खान ने शुक्रवार देर रात अपने सबसे करीबी दोस्त संजय दत्त के साथ 2...

google-color.svg

May 3, 2026/
7:55 pm

Last Updated:May 03, 2026, 19:55 IST छतरपुर जिले के जीतेंद्र कुमार जो शिलाजीत के पेड़े बनाकर कमजोर लोगों को जवान...

Himachal Chief Minister Sukhvinder Sukhu Get sick | AIIMS Delhi

February 21, 2026/
4:03 pm

हिमाचल सीएम सुखविंदर सुक्खू इलाज को एम्स दिल्ली पहुंचे। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज दिल्ली में बीमार...

26/11 हमले से जुड़े लश्कर आतंकी अब्दुल-अजीज की मौत:इस्लामाबाद में मस्जिद के बाहर अचानक गिरा; मौत की वजह साफ नहीं

August 10, 2026/
11:47 am

26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी कारी सईद अब्दुल-अजीज की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मौत हो...

इजराइल बोला- ईरान को घुटनों पर लाकर ही रुकेंगे:ईरान बोला- धमकियों का जवाब मैदान में देंगे, परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ तो होर्मुज बंद

March 23, 2026/
6:58 am

अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का आज 24वां दिन हैं। अमेरिका में इजराइल के राजदूत येचिएल लीटर ने कहा है कि...

प्रभास की फिल्म ‘फौजी’ के सेट से फोटो लीक:मेकर्स ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी, बोले- शेयर करने वालों पर होगा लीगल एक्शन

April 5, 2026/
5:04 pm

प्रभास की आने वाली तेलुगू फिल्म ‘फौजी’ के सेट से कुछ तस्वीरें लीक हो गई हैं, जो सोशल मीडिया पर...

'सिर्फ बिहारी बाबू ही नहीं, मैं बैलर बाबू भी हूं', आसनसोल में पहली बार मतदान के बाद बोले शत्रुघ्न सिन्हा

April 23, 2026/
5:08 pm

अप्रैल में कांग्रेस के न्यूक्लीयर शत्रुघ्न सिन्हा ने गुरुवार (23, 2026) को पश्चिम बंगाल विधानसभा के पहले चरण में अपना...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

50 लाख आबादी वाला न्यूजीलैंड क्रिकेट में इतना बेहतर कैसे:वहां हर 50वां व्यक्ति क्रिकेटर; टैलेंट सर्च, कोचिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी

50 लाख आबादी वाला न्यूजीलैंड क्रिकेट में इतना बेहतर कैसे:वहां हर 50वां व्यक्ति क्रिकेटर; टैलेंट सर्च, कोचिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी

2021 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन…2024 में इंडिया को पहली बार उसी के घर में क्लीन स्वीप किया। फिर विमेंस टीम ने टी-20 वर्ल्ड कप भी जीत लिया। ये न्यूजीलैंड के हालिया अचीवमेंट्स हैं। इसके अलावा कीवी टीम ने ओवरऑल 18 ICC टूर्नामेंट्स के सेमीफाइनल भी खेले हैं। न्यूजीलैंड को क्रिकेट की सबसे अनुशासित टीमों में भी गिना जाता है। यही वजह है कि टीम को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। लेकिन 50 लाख की आबादी वाला यह छोटा-सा देश क्रिकेट में इतना बेहतर कैसे बन गया? इस स्टोरी में हम इसी सवाल का जवाब देंगे। स्टोरी 3 पार्ट में पढ़िए… 1864 में इंटरनेशनल क्रिकेट न्यूजीलैंड पहुंचा 1832 में एंग्लिकन मिशनरी हेनरी विलियम्स ने नॉर्थलैंड में एक मैच आयोजित किया था। यह कीवियों के इतिहास का पहला मैच है। इसके 10 साल बाद दिसंबर 1842 में वेलिंगटन में एक मैच खेला गया, जिसका स्कोर दर्ज किया गया। यह क्रिकेट इतिहास का पहला ऐसा मैच, जिसमें स्कोर दर्ज किया गया था। 1864 में इंटरनेशनल क्रिकेट न्यूजीलैंड पहुंचा, जब जॉर्ज पार की पेशेवर ऑल-इंग्लैंड इलेवन टीम यहां खेलने आई। इस अंग्रेजी टीम ने ओटागो और कैंटरबरी की 22 खिलाड़ियों वाली टीमों के खिलाफ चार मैच जीते। 1906 में गवर्नर लॉर्ड प्लंकेट ने प्लंकेट शील्ड ट्रॉफी शुरू की। पहली जीत के लिए 26 साल का इंतजार न्यूजीलैंड 1930 में टेस्ट खेलने वाला देश बना। टीम को अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज करने के लिए 26 साल इंतजार करना पड़ा। कीवियों को इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के खिलाफ जीत हासिल करने में दो दशक और लग गए। जब उसने ऑकलैंड के ईडन पार्क में वेस्टइंडीज को हराया। न्यूजीलैंड ने अपना पहला वनडे मैच 11 फरवरी 1973 को खेला और पाकिस्तान को 22 रन से हराया। न्यूजीलैंड की महिला टीम ने अपना पहला टेस्ट मैच 1935 में इंग्लैंड के खिलाफ खेला। पिछले 6 साल में 3 फाइनल खेले, एक जीता न्यूजीलैंड की टीम ने 2020 के बाद 3 बार ICC टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई, इसमें से उसे एक में जीत, जबकि 2 में हार का सामना करना पड़ा। साउथैम्प्टन के द रोज बाउल स्टेडियम में कीवियों ने जून 2021 में भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में 8 विकेट से हराया। उसी साल 14 नवंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में न्यूजीलैंड को टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट से हराया। कीवियों को पिछले साल 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी में भारत से फाइनल मैच खेला था। इसमें उसे 4 विकेट की पराजय झेलनी पड़ी थी। 2000 में पहला ICC टाइटल जीता न्यूजीलैंड की मेंस टीम 2000 में पहली बार किसी ICC टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची। टीम ने पहले ही मौके में टीम इंडिया को 4 विकेट से हराया था। उसके बाद कीवियों ने अगले 20 साल में 3 फाइनल खेले, लेकिन एक भी नहीं जीत सकी। कीवियों को 2009 में चैंपियंस ट्रॉफी और 2015 में वनडे वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल हराया। 2019 में न्यूजीलैंड फिर फाइनल में पहुंचा, लेकिन इस बार इंग्लैंड के खिलाफ ICC के बाउंड्री के नियम की वजह से हार गया। 61% सेमीफाइनल मैच गंवाए, 39% जीते न्यूजीलैंड, ऐसी टीम है, जो ज्यादा बयानबाजी नहीं करती है और न ही उसके खिलाड़ी अनुशासनहीनता करते हैं। प्लेयर्स का हाव-भाव जीत और हार में एक समान रहता है। न्यूजीलैंड की टीम शांतिपूर्ण तरीके से अपना गेम खेलती है और सेमीफाइनल में जगह बना लेगी। NZ की टीम ने 18 मौकों में ICC टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसमें से 7 जीते, जबकि 11 मौकों पर कीवियों के हाथ निराशा हाथ लगी है। टीम ने 61% सेमीफाइनल मैच गंवाए हैं और 39% मैच जीते हैं। न्यूजीलैंड को इंटरनेशनल क्रिकेट में पहली जीत 26 साल बाद मिली। टीम पहले वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गई। उसने 1979 और 1992 में भी टॉप-4 में जगह बनाई। लेकिन, टीम टाइटल नहीं जीत पा रही थी। इस कारण 1990 के दशक में न्यूजीलैंड क्रिकेट को मजबूत करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया गया। नया गवर्नेंस स्ट्रक्चर बना। स्टेट के प्रतिनिधियों की जगह योग्यता के आधार पर नियुक्तियां होने लगीं। इसका असर भी हुआ और टीम ने 2000 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती। न्यूजीलैंड के सक्सेस मॉडल को 4 फैक्टर्स में समझिए… फैक्टर-1. कम आबादी, लिमिटेड टैलेंट; ज्यादा फोकस न्यूजीलैंड के इतिहासकार डॉन नीली ने कहा था- ‘हम छोटे हैं, इसलिए पूरे देश को एक टारगेट के लिए साथ लाना आसान है। कई लोग इसे कमजोरी मानते हैं, वहीं हम इसे अपनी ताकत मानते हैं।’ यही बात क्रिकेट पर लागू होती है, वहां एक लाख रजिस्टर्ड क्रिकेटर्स हैं। प्लेयर्स को कम उम्र में स्कूल और क्लब लेवल से स्काउट किया जाता है। फिर उनके स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाता है। संख्या कम होने के कारण कोचिंग और अन्य सुविधाओं के लिहाज से हर प्लेयर्स पर कोचेस और एडमिनिस्ट्रेटर का फोकस ज्यादा होता है। फैक्टर-2. मजबूत ग्रासरूट सिस्टम न्यूजीलैंड की असली ताकत उसका मजबूत ग्रासरूट सिस्टम है। उसके शहर छोटे जरूर हैं, लेकिन खेल सुविधाओं से भरपूर हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि टौरंगा के माउंट माउंगानुई में एक छोटा लेकिन शानदार क्रिकेट स्टेडियम, दो रग्बी मैदान, वाइकाटो हाई-परफॉर्मेंस सेंटर, हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ और एथलेटिक्स ट्रैक मौजूद है। पास में यॉटिंग और सेलिंग क्लब भी है। इससे वहां के रहवासियों की जीवनशैली में स्पोर्ट्स कल्चर बिल्ट होता है। न्यूजीलैंड की सफलता में आउटडोर जीवनशैली का बड़ा योगदान है। स्कूलों में दौड़ने, कूदने और थ्रो करने जैसी शारीरिक गतिविधियों पर खास जोर दिया जाता है। हर साल आधे से ज्यादा बच्चे कम से कम एक प्रतिस्पर्धी खेल में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हैं। स्कूल और क्लब से प्लेयर्स को स्काउट करने के बाद उन्हें वहां के डोमेस्टिक और नेशनल टूर्नामेंट में मौका दिया गया है। इन टूर्नामेंट में स्टेज की 6 टीमें हिस्सा लेती हैं। विमेंस कैटेगरी में भी 6 टीमें खेलती हैं। टी-20 में सुपर स्मैश और मल्टी-डे क्रिकेटर्स के लिए प्लुनकेट शील्ड का आयोजन होता है। फैक्टर-3. हॉकस बे कैंप क्रिकेट की नर्सरी न्यूजीलैंड क्रिकेट के टैलेंट को तैयार करने में नॉर्थ आइलैंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित हॉकस बे के क्रिकेट कैंपों की अहम भूमिका है। इसे कीवी क्रिकेट की नर्सरी कहा जाता है। पिछले 30 साल में शायद ही कोई न्यूजीलैंड क्रिकेटर हो, जिसने इन कैंपों में हिस्सा न लिया हो। करीब 45 साल पहले यह कैंप 12 टीमों के साथ शुरू हुआ था। अब इसमें लगभग 150 टीमें और 2000 खिलाड़ी अलग-अलग आयु वर्ग में हिस्सा लेते हैं। नेपियर से हेस्टिंग्स तक 20 मैदानों पर लगभग 450 मैच खेले जाते हैं। रॉस टेलर, केन विलियम्सन, टिम साउदी और टॉम लैथम जैसे लगभग सभी बड़े खिलाड़ी इस कैंप में हिस्सा ले चुके हैं। यहां तक कि इंग्लैंड टेस्ट टीम के कप्तान बेन स्टोक्स भी इस कैंप का हिस्सा रहे हैं। फैक्टर-4. मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर न्यूजीलैंड की आबादी करीब 50 लाख है, जोकि फाइनल मैच की मेजबानी कर रहे अहमदाबाद की आबादी का आधा है। इसका क्षेत्रफल लगभग उत्तर प्रदेश के बराबर है। वहां 16 इंटरनेशनल स्टेडियम हैं। इनमें से 10 स्टेडियम ऐसे हैं। जो रेग्युलर इंटरनेशनल मैचों की मेजबानी करते हैं। वहीं, 6 स्टेडियम ऐसे हैं, जहां पहले इंटरनेशनल मैच की मेजबानी कर चुके हैं। ————————————————————– क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.