मुंबई: पायधोनी इलाके में यहां बिरयानी और तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई. मरने वालों में पति-पत्नी और उनकी दो मासूम बेटियां शामिल हैं. इस खबर को देखने के बाद एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एम सी मिश्रा काफी बेचैन हैं. उन्होंने साफ कहा है कि यह मामला सिर्फ फूड पॉइजनिंग का नहीं लगता है. डॉ. मिश्रा के अनुसार, हम सभी अक्सर खाना खाने के बाद फल या तरबूज खाते हैं. ऐसे में सिर्फ इन दो चीजों के कॉम्बिनेशन से मौत होना समझ से परे है. उन्होंने इस पूरी घटना की गहराई से जांच करने की मांग की है. डॉ. मिश्रा ने कई ऐसे सवाल उठाए हैं जो इस हादसे को एक संदिग्ध साजिश की तरफ मोड़ रहे हैं.
क्या बिरयानी और तरबूज का मेल सच में जानलेवा हो सकता है?
डॉ. एम सी मिश्रा ने इस घटना पर अपनी राय रखते हुए कहा कि यह सीधा-सीधा जांच का विषय है. उनका मानना है कि सामान्य हालात में बिरयानी और तरबूज खाने से किसी की जान नहीं जा सकती.
क्या वह तरबूज पहले से कटा हुआ था? उसे किस जगह और किस हालत में रखा गया था?
डॉ. मिश्रा को शक है कि कहीं तरबूज में पहले से ही कोई खराबी तो नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि क्या इसके पीछे कोई साजिश हो सकती है? क्योंकि एक साथ चार लोगों का मर जाना किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है. पुलिस को हर एंगल से इस केस की पड़ताल करनी चाहिए.
क्या तरबूज के अंदर जहर या केमिकल का इंजेक्शन दिया गया था?
बाजार में मिलने वाले फलों की शुद्धता पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. डॉ. मिश्रा ने जिक्र किया कि कई बार तरबूज को गहरा लाल दिखाने के लिए उसमें इंजेक्शन लगाया जाता है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि बिना ठोस सबूत के ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी. लेकिन यह एक संभावना जरूर है कि फल में मौजूद किसी जहरीले तत्व ने असर दिखाया हो.
अगर तरबूज में किसी तरह का केमिकल या जहर मिला था, तो यह फूड पॉइजनिंग का सबसे खतरनाक रूप हो सकता है. डॉक्टर भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि आखिर कुछ ही घंटों में पूरा परिवार कैसे खत्म हो गया.
पोस्टमार्टम और हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट से कैसे खुलेगा मौत का राज?
- अब इस पूरे रहस्य से पर्दा सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही उठा सकती है. डॉ. मिश्रा के मुताबिक, सारी उम्मीदें अब विसरा रिपोर्ट और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच पर टिकी हैं.
- पेट के अंदर मौजूद खाने के अवशेषों की जांच से पता चलेगा कि असल में क्या खाया गया था. क्या उस खाने में पहले से कोई जहर मिला हुआ था?
- जेजे अस्पताल के डॉक्टर्स और पुलिस अब इसी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. डॉ. मिश्रा ने जोर देकर कहा कि जब तक साइंटिफिक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना मुश्किल है.
लेकिन इस हादसे ने हर किसी के मन में खाने-पीने की चीजों को लेकर डर पैदा कर दिया है.
क्या लापरवाही या दूषित भोजन ने ली मासूमों की जान?
मुंबई की इस घटना के साथ ही झारखंड के गिरिडीह से भी एक डरावनी खबर आई है. वहां भी गोलगप्पे और चाट खाने से एक बच्चे की मौत हो गई और कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में खाना बहुत जल्दी खराब होता है.
दूषित भोजन या पानी के सेवन से बैक्टीरिया शरीर में फैल जाते हैं. इससे उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी गंभीर समस्याएं शुरू हो जाती हैं. डॉ. मिश्रा का कहना है कि लोगों को बाहर के खाने और कटे हुए फलों से परहेज करना चाहिए. एक हंसता-खेलता परिवार खत्म होना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है.













































